मेरी सुहागरात में पहला लौड़ा मेरे ससुर का था
मेरे प्यारे दोस्तो, यह बात आपको सही नहीं लग रही होगी कि मेरी सुहागरात में सबसे पहले लौड़ा मेरी चूत में मेरे ससुर ने ही पेला था।
मगर है यह बिलकुल सही बात।
ये सब कैसे हुआ और कब हुआ?
यही तो सच्ची माय फर्स्ट नाईट सेक्स स्टोरी है जिसे मैं आपको सुनाने जा रही हूँ।
मेरा नाम मुस्कान है।
मैं 24 साल की एक मद मस्त महिला हूँ।
मेरी शादी अभी 2 साल पहले हुई थी।
आप यह बात जानते हैं कि हम लोगों के यहाँ शादियां बड़े नजदीकी रिश्तों में हो जाती हैं।
ऐसा होने से हम लोगों के बीच दोहरे रिश्ते हो जातें हैं।
ऐसे में हंसी मजाक और चुदाई के भी कई रिश्ते अपने आप निकल आतें हैं।
मेरा निकाह मेरे चचेरे भाई जान रफीक से हो गया।
कल तक वो मेरा चचेरा भाई जान था आज मेरा शौहर बन गया।
उसकी बहनें मेरी ननद बन गईं।
उसके भाई मेरे देवर और जेठ बन गये।
मेरी चची जान मेरी सास बन गई और मैं उनकी बहू।
इन दोहरे रिश्तों में हंसी मजाक भी बहुत होने लगीं और आपसी प्यार मोहब्बत भी बहुत बढ़ने लगा।
फिर क्या?
मेरी ननद मेरे देवर सब मुझसे गन्दी गन्दी बातें करने लगे और हंसी मजाक भी करने लगे।
मैं भी एन्जॉय करने लगी।
मुझे भी मज़ा आने लगा।
अब मैं आपको अपनी सुहागरात की बात बता रही हूँ।
यह तो सबको पता ही है कि सुहागरात वह रात होती है जब शौहर शादी के बाद पहली बार अपनी बीवी को चोदने उसके कमरे में जाता है जहाँ उसकी बीवी पहले से ही सजी धजी बैठी हुई उसका इंतज़ार करती है।
अब माय फर्स्ट नाईट सेक्स स्टोरी का मजा लें.
मैं भी उस रात दुल्हन बनी हुई बैठी थी और अपने शौहर के आने का इंतज़ार कर रही थी।
मेरे मन में बस एक ही बात चल रही थी कि मेरे शौहर का लण्ड कैसा होगा?
लण्ड कितना बड़ा और कितना मोटा होगा?
लण्ड खड़ा होने पर कैसा दिखता होगा, और लण्ड कितनी देर तक चोदता होगा?
मेरे मन में बस यही सब चल रहा था।
वैसे मैं एक बात आपको बता दूँ कि मैं शादी के पहले कुनबे के ही कुछ लोगों से चुद चुकी थी।
मेरी अम्मी जान को सब पता था और किसी को नहीं।
लेकिन मैं न कभी अपनी चचा जान से चुदी थी और न कभी उसके बेटे रफीक से जो आज मेरा शौहर हो गया है और जिसका मैं इंतज़ार कर रही थी।
इतने में किसी ने दरवाजा खोला।
मैं समझी कि मेरा शौहर आ गया पर थी वह मेरी ननद ज़ोया।
वह बोली, “भाभी जान लगता है कि रफीक भाई थोड़ा लेट आयेगें!”
मैं बोली, “कोई बात नहीं, मैं इंतज़ार कर लूंगी!”
तब तक दूसरी ननद आ गयी।
वह बोली, “अरे भाभी जान मुझे पता चला है कि रफीक भाई जान तो अभी अपनी बड़ी भाभी को चोद रहे हैं। लगता है थोड़ा और टाइम लगेगा!”
मुझे यह सुनकर बड़ी हैरानी हुई कि जिसकी बीवी सुहागरात में अपने शौहर का इंतज़ार कर रही है वह किसी और को चोद रहा है?
चोदना ही था तो एक दिन आगे पीछे चोद लेता।
आज तो उसे अपनी बीवी ही चोदना चाहिए और किसी और को नहीं?
मैं मन मसोस कर रह गई क्योंकि मेरे पास सबर के अलावा कुछ और न था।
बस 10/15 मिनट ही हुआ होगा कि दरवाजा फिर खुला तो मैं थोड़ा सहम गई समझी कि मेरा शौहर आ गया।
मैंने आँख उठा कर देखा तो कोई और ही था।
वह नंगे बदन था और केवल लुंगी पहने हुए था।
रात का एक बज चुका था।
वह जैसे ही बोला, “मुस्कान बहू, रफीक को आने में बहुत टाइम लगेगा। हो सकता है कि उसे आने में सवेरा भी हो जाए। इधर तेरी सुहागरात बेकार न जाने पाए इसलिए मैं आ गया हूँ!”
तब मुझे पता चला कि ये तो मेरा ससुर शब्बीर है जो पहले मेरा चचा जान था।
वह बड़े प्यार से मेरे बगल में बैठ गया, बोला, “मुस्कान तुम सच में बड़ी खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो। आज की तारीख़ में दुल्हन तो बिलकुल तुम्हारी जैसी ही होनी चाहिए!”
फिर उसने एकदम से अपनी लुंगी खोल के फेंक दिया तो उसका खड़ा लण्ड मेरी आँखों के सामने टनटनाने लगा।
लण्ड देख कर मेरी चूत की आग एकदम से भड़क उठी।
मेरी जबान लौड़ा चूसने के लिए लपलपाने लगी, मेरे मन में आया कि अब मेरा शौहर भोसड़ी का नहीं आता तो मैं क्या करूँ?
इसी के लौड़े के काम चला लूँ तो अच्छा है।
शौहर का लण्ड नहीं तो शौहर के बाप का लण्ड ही सही।
जब शौहर ही सुहागरात में दूसरे की बीवी चोद रहा है तो फिर बीवी भी क्यों न किसी दूसरे मरद से चुदवाये?
यही सोच कर मैंने ससुर के लण्ड का पूरा मज़ा लेने के लिए मन बना लिया।
मुझे ये तो पता था कि ये बहनचोद मेरा ससुर अभी नहीं चोदेगा तो बाद में चोदेगा जरूर।
इसलिए अभी चोद ले तो ठीक है।
फिर मैंने भी मन में ठान लिया और लौड़ा बड़े प्यार से पकड़ कर हिलाने लगी।
लण्ड का टोपा चाटने लगी और वह भी मुझे प्यार करने लगा और उसने भी मेरे कपड़े उतारना शुरू कर दिया।
वो तो पहले से ही नंगा था।
उसने मुझे भी नंगी कर दिया और फिर मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
फिर उसने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया।
मेरे मम्मे मसलते हुए बोला, “मुस्कान तुम बहुत खूबसूरत हो लाजबाब हो और मेरी ही तरह बहुत बोल्ड हो। मैं चाहता हूँ कि हमारे कुनबे की सभी बहू बेटियां बिलकुल तुम्हारी ही जैसीं हों तो मज़ा आ जाये!”
मैं बहनचोद थोड़ी देर में उसकी गोद से उतरी तो फ़ौरन लौड़ा मुंह में लेकर चूसने लगी।
मैं तो उसका लौड़ा अपने शौहर का लौड़ा समझ कर चूसने लगी।
वह भी मेरे पूरे बदन को सहलाने लगा, मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा, मेरी जांघें और मेरी चूत पर अपना हाथ फिराने लगा।
वह बोला, “मुस्कान तेरी चूत एकदम नई ताज़ी है इसे चोदने में बड़ा मज़ा आएगा!”
मैंने कहा, “तो फिर चोद लो न भोसड़ी के ससुर। मैं चुदने के लिए ही तेरे घर में आयी हूँ। जितना चाहो उतना चोदो। मेरी चूत तेरे सामने खुली पड़ी हुई है!”
यह सुन कर उसने लौड़ा गच्च से पेल दिया अंदर तो मैं चिल्ला पड़ी, “उई माँ तूने तो फाड़ डाला मेरी चूत। बड़ा मोटा लण्ड है तेरा मादर चोद। हाय रे बड़ा दर्द हो रहा है। धीरे धीरे पेलो न यार। मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ क्या?”
उसने 12/14 धक्के और लगाए.
तो मैं बोली, “तू भोसड़ी का धीरे धीरे क्यों चोद रहा है? पूरा लौड़ा घुसा घुसा के ज़रा जल्दी जल्दी चोदो, मज़ा आ रहा है। घपाघप पेलो लण्ड मेरी चूत में। जब मैं नहीं शर्मा रही हूँ तो तू क्यों शर्मा रहा है? तेरे घर की ही चूत है, किसी और की नहीं। ये चूत तो ऐसी चूत है जो तुझे आगे भी मिलती रहेगी!”
तब तक मैं सच में बड़ी बेशरम हो चुकी थी।
मैं मर्दों की फितरत जानती हूँ इसलिए उसे ललकार रही थी।
उस साले ने इसी बात पर फाड़ना शुरू कर दिया मेरी चूत।
बोला, “आज मैं तेरी चूत का भोसड़ा बड़ा डालूंगा, मुस्कान। साली हरामजादी रंडी तू मेरी सबसे ज्यादा प्यारी चुदक्कड़ बहू है!”
मैं बोली, “जो चाहो बना दो यार पर मुझे चोदे जाओ। तेरा लौड़ा बड़ा मज़ा दे रहा है, बहन चोद। अअअ अअहह ह हहऊ ऊऊऊ आज मुझे ज़न्नत का मज़ा आ रहा है!”
उसने मेरे चूतड़ पकड़ कर अपनी तरफ घसीटा और लौड़ा अंदर तक घुसाने लगा।
मैं इतना तो समझ गई थी कि इस भोसड़ी वाले को चूत चोदने का बड़ा तज़ुर्बा है।
मुझे लगता है कि कुनबे में सबकी चूत चोदता होगा साला क्योंकि बड़ा बेशरम हरामजादा है।
मैं भी इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहती थी।
मैं भी बड़ी मस्ती से नीचे से जोर लगा लगा कर चुदवाने लगी थी।