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रंडी से प्यार (Completed)

Story Hindi 130 pages 7 months ago

अध्याय 1
शहर जितना बड़ा होता है वहां के लोगो का दिल उतना ही छोटा,ये जुमला मैंने शायद किसी फ़िल्म से सुना था,लेकिन जब मुझे सचमे शहर आना पड़ा तो ये बिल्कुल सत्य लगने लगा,मैं यहां पढ़ने के लिए आया था,मेरा एडमिशन एक इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ था,मैं अपने गांव का एकमात्र इंजीनियर बनने जा रहा था ,और इस उपलब्धि को पाने के लिए मैंने बहुत संघर्ष किया था,एडमिशन तो मुझे मिल गया लेकिन रहने की जगह नही मिल पाई ,होस्टल फूल हो चुके थे,और कई धर्मशाला से निकाला जा चुका था,मैं 6 महीने से यहां वहां भटक रहा था,मेरा कॉलेज एक सरकारी कॉलेज था,और यहां जो भी मेरे दोस्त बने वो मेरे ही तरह गांव से आये हुए लड़के थे,शहर के लड़के तो हमे भाव भी नही देते थे,और लडकिया….
हमारे जैसे लोगो को वो अपने मुह नही लगना चाहती थी,यही बात एक लड़की ने मुझसे कही थी जब मैंने उसके बाजू में बैठने की हिमाकत कर दी ,
खैर मेरे दोस्तो के पास तो खुद का कोई जुगाड़ नही था ,जैसे तैसे सरकारी होस्टल में रह रहे थे,वहां उनकी वो रैकिंग हुआ करती थी जिसे सोचकर रूह कांप जाय लेकिन इसके अलावा उन बेचारों के पास कोई चारा भी नही था,
ऐसे मैंने भी वहां रहने की कोसीसे की लेकिन वार्डन ने मुझे वहां से भी भगा दिया,जैसे तैसे 6 महीने तो गुजर गए लेकिन अब समय था मेरे पहले सेमेस्टर के एग्जाम का और मेरे पास तो रहने को भी जगह नही थी,मा बाप के पास इतना पैसा भी नही था की वो मुझे वो सुविधा दे सके की मैं किसी रूम किराए से लेकर रह सकू,स्कॉलरशिप भी अभी मिली नही थी ,और इतनी मिलने वाली भी नही थी की कुछ जुगाड़ हो सके,पार्ट टाइम एक जॉब कर रखा था,उससे ही मेरे कपड़े और खाने पीने का जुगाड़ हो जाता था,मेरे पास कुछ ज्यादा समान थे नही,पुस्तके लाइब्रेरी से ही ले आता कुछ कापियां जिनमे मेरे नोट्स थे और 2 जोड़े कपड़े जिसे बदल बदल कर पहनता था,उस दिन जब धर्मशाला से निकाला गया तो मैं लगभग टूट गया,वहां के सभी धर्मशाला वाले मुझे पहचानने लगे थे,कही कोई जगह नही बची थी ,साला हमारा गांव ही अच्छा था वहां आप कही भी रहो कोई टोकने वाला नही होता था,और एक ये शहर था जंहा बस स्टेसन में भी पुलिश वाले बैठने नही देते,मैं अंदर से टूटा हुआ अपना बेग लेकर कॉलेज पहुचा पता चला की एक दिन पहले ही फ्रेशर पार्टी की गई थी ,मुझे इन सबसे क्या मतलब था,मेरे एक दोस्त ने मेरी कैंडिशिन देखी और हाथ में मेरा बेग देखा वो समझ गया की इसे फिर से निकल दिया गया है,एक दो दिन की बात हो तो मैं होस्टल में उसके साथ ही शिफ्ट हो जाता था लेकिन कुछ ही दिनों में एग्जाम थे और मुझे कोई अच्छा सा बसेरा चाहिए था जिसमे कम से कम कुछ दिन मैं टिक सकू…
वो मुझे चाय पिलाने ले गया उसका नाम प्यारे था,
“यार राहुल कल पार्टी में क्यो नही आया ,साले सीनियरों ने जमकर शराब पिलाई पता है…”
मैं चाय की एक सिप पीता हुआ उसे

देखने लगा,और वो मेरी हालात समझ चुका था,
“फिर से बेघर ???”
“हा यार ,पता नही एग्जाम कैसे जाएंगे,कॉलेज के कारण कोई नॉकरी भी नही कर पता ,पढ़ाई करू या नॉकरी समझ नही आता,कोई जुगाड़ भी नही हो पा रहा है ,साला मेरा सेठ भी कुछ देने को तैयार नही कहता है की कहता है महीने के आखिर में पैसे लेना,जो बचे पैसे है उससे कोई कमरा ले लू तो खाऊंगा क्या समझ नही आ रहा ….”
मैं जानता था की प्यारे भी इसमें कुछ नही कर सकता पर उसके अलावा मैं बताता भी किसे ,तभी सीनियर का एक ग्रुप वहाँ आया ,और मुझे देखकर वो गुस्से में आ गए ,
“साले कल क्यो नही आया ,हमेशा सीनियरो से भागता है बहुत होशियार समझता है अपने को ….”
एक तेज झापड़ ने मेरा गाल लाल कर दिया था,और मेरे सहनशीलता की सिमा टूट गई,मैं जोरो से रोने लगा इतने जोरो से की सीनियर्स की भी हालत खराब हो गई,मैं ऐसे रो रहा था जैसे की मेरा दुनिया में कोई हो ही ना ,और अभी के परिपेक्ष में ये बात सही भी थी,तभी उनमे से एक सीनियर आगे आया उन्हें हम बहुत मानते थे,असल में वो भी हमारी तरह गाँव से और एक अत्यंत गरीब घर से आये थे ,और कॉलेज में टॉप करने के कारण उन्हें थोड़ा सम्मान मिल जाय करता था,उनका नाम संजय था
“तुम लोग जाओ यहां से मैं इसे समझता हु ,”
वो मेरे कंधे में हाथ रखकर मुझे सांत्वना देने के भाव से बोले
“क्या हुआ राहुल ,लगता है की तू बहुत बड़ी परेशानी में है,”
वो मेरे हालात समझते और जानते थे मैंने उन्हें अपने कंडीशन के बारे में बताया ,इसका इलाज तो उनके पास भी नही था,लेकिन उसी चाय की टापरी में खड़े एक अंकल जो की हमारी बात ध्यान से सुन रहे थे अचानक हमारे पास आ गए ,
“रूम चाहिए “
“जी अंकल लेकिन पैसों की समस्या है थोड़ी “
“एक काम हो सकता है,मैं रूम दिलवा दूंगा बिना पैसों के खाने का पैसा देना होगा,और साथ में कुछ काम करने होंगे चलेगा “
मुझे लगा की ये आदमी जैसे मेरे लिए भगवान बन कर आया हो ,
“बिल्कुल अंकल चलेगा चलेगा “
“लेकिन एक और समस्या है,जिस जगह तुझे ले जा रहा हु वो सही जगह नही है “मेरे दोनो शुभचिंतकों ने अंकल की ओर प्रश्नवाचक नजर से देखा लेकिन मैं अभी भी उन्हें अभिभूत दृष्टि से देख रहा था,
“अंकल जहन्नुम में भी रहने बोलोगे रह जाऊंगा “
अंकल के चहरे में एक मुस्कान खिल गई जैसे उन्हें कोई बड़े काम की चीज मिल गई हो ,ठीक है चल मेरे साथ ,
“ऐसे कौन सी जगह है अंकल “
मेरे सीनियर ने स्वाभाविक जिज्ञासा से पूछ लिया
“****मार्किट का रंडीखाना “
हम सभी स्तब्ध थे लेकिन कोई कुछ नही बोल पा पाया मजबूरी ऐसी थी की हम कुछ बोलने के लायक भी नही थे…..

अध्याय 2
चहल पहल भरे बाजार से किसी सकरी गली के अंदर जाना मुझे ऐसे लग रहा था जैसे की मैं किसी पाताल में जा रहा हु ,थोड़ी ही दूर में एक 3 मंजिला चाल थी जंहा आकर वो सकरी गली खत्म होती थी,उस चाल की रंगत भी उस मार्किट की तरह ही थी,जगमगाते हुए रंगीन लाइट उस शाम की सोभा बड़ा रहे थे, हाथो में हरीभरी चूड़ियां पहने महिलाएं जो सज धज कर खड़ी थी उनके मुह से निकलने वाली गालिया और प्यार भरे शब्द आपस में ऐसे मिल रहे थे की पता ही नही चलते की वो प्यार से बुला रहे है या की धुत्कार रहे है,मैं अपना छोटा सा बेग उठाये अजीब निगाहों से उनको देखता हुआ बस अंकल के पीछे चल रहा था,अंकल आखिरकार एक कमरे के पास पहुचे जो की बड़े से बरामदे के आखरी छोर पर था,
“अरे चम्पा बाई ,कहा हो “
कमरे के अंदर जाने पर मेरी आंखे खुली रह गई,ये गरीबो की सी बस्ती में ऐसा वैभव होगा मैंने सोचा नही था दुसरो के लिए तो नही पता मेरे लिए तो ये वैभव ही था,बड़ा सा सोफा कमरे में रखा था पास ही कोई 4-5 गुंडे किस्म के लोग खड़े थे जिनकी भुजाए मेरे जांघो जितनी होगी बड़ा सा कमरा था और कमरे के बीच में सोफे में एक औरत बैठी थी जिसका मुह पान से लाल हो रखा था,बड़े डीलडौल वाली ये महिला देखने में ही बड़ी खतरनाक लग रही थी मेरे माथे पर आया पसीना मेरे डर को साफ तौर से जाहिर कर रहा था,
“अरे आओ आओ बैठो बनवारी “
अंकल का नाम बनवारी था ,जो भी हो मुझे एक कमरा चाहिए बस ,
“देखिए आपके लिए क्या लाया हु,पढ़ा लिखा लवंडा है,कमरा चाहिए इसे “
चम्पा मुझे ऊपर से नीचे तक देखने लगी
“क्यो रे लवंडे कितना पढ़ा है”
“जी बी ई कर रहा हु “
“वो क्या होता है”
“जी इंजीनियरिंग कर रहा हु “
“इंजीनियर हो “
“जी पढ़ाई कर रहा हु ,जिसे पढ़कर इंजीनियर बनूंगा “
वो मुझे अजीब निगाहों से देखती है ,मेरे दिल की धड़कने बढ़ रही थी,वो बनवारी की तरफ देखती है ,
“ये हमारे लिए काम करेगा “
“बिल्कुल करेगा “
“अरे तुम्हे कम्प्यूटर चलना आता है क्या “
“जी आता है “
मेरे स्कूल में हमे कम्प्यूर का ज्ञान सरकार के द्वारा मिला था ,मेरा इंटरेस्ट उसमे इतना हुआ की मैं कंप्यूटर साइंस में ही इंजीनियरिंग करने की सोच ली …
“कितना आता है ,हिसाब कर लोगे “
“जी मैं तो उसी में इंजीनियरिंग कर रहा हु “
“अरे हमे उससे कोई मतलब नही है की तुम किसमे क्या कर रहे हो हिसाब कर लोगे की नही ये बताओ ,साला एक झंझट दे दिया है शकील भाई ने हमे अब ससुरी रंडीखाने में भी कंप्यूटर लाना पड़ेगा “
मैंने दिल से शकील भाई को दुवा दी मुझे नही पता था की वो कौन है पर जो भी है मैं बहुत खुस हुआ ,कोई फालतू का काम नही करना पड़ेगा और रहने को कमरा भी मिल जाएगा,
“जी बिल्कुल आता है ,सब कर लूंगा आप बताइये क्या करना है ,”मेरे चहरे पर खुसी और आत्मविस्वास आ गया था,जिन्हें कुछ नही पता हो उनके आगे तो मैं शेर बन ही सकता था,
“ह्म्म्म ठीक है ,यहां

से क्या क्या पैसा आता है और जाता है उसका हिसाब रखना पड़ेगा ,इसके लिए तुझे 2 हजार दूंगी,और रहने को मकान चलेगा ,और मकान नही चाहिए तो 2.5 हजार मिलेगा ,”
मेरे दिमाग में आया की साला ये मकान सिर्फ 500 में दे रही है ,पूरे शहर में सबसे सस्ता …
“असल में क्या है ना की तू यहां रहेगा तो मैं जब चाहू तुझे बुला सकती हु ना इसलिए ज्यादा पैसा दूंगी बाहर रहेगा तो टाइम से आएगा टाइम से जाएगा तो मेरे से नही बनेगा “
“जी चलेगा ,यही रह लूंगा “
मेरी तो बांछे ही खिल गई ,खाने में मेरे ज्यादा खर्च नही थे ,मैं फिर भी 1000 रुपये बचा सकता मेरे दिमाग में मा के लिए नई साड़ी घूम गई,बापू के लिए भी कुछ ले पाऊंगा अरे वाह …
मैं खुस हो रहा था,
‘ठीक है इसे काजल का कमरा दिखा दे ,वही रहेगा ये “
अब मेरी संट हुई ,मैं काजल के साथ रहूंगा,मतलब ...लेकिन मैं कुछ बोला नही ,
“सुन कल सुबेरे आ जाना क्या लगता है कप्यूटर के लिए बता देना मंगवा लूंगी “
“आपको काम क्या क्या करना है “
“अरे बताई तो ना “
मैं सोच में पड़ गया ,फिर मेरे दिमाग में एक शैतानी आयी
“कितने लोग चलाएंगे “
“अब इस काम के लिए क्या मैं ऑफिस खोलू तू ही चलाएगा तुझे क्यो रखा है “
“ओहह ,तो एक काम क्यो नही करती डेक्सटॉप की जगह पर लैपटॉप ले लेते है ,बजट कितना है “
“मतलब “
“मतलब की कितना खर्च कर सकते है”
“30-40 हजार इससे ज्यादा नही “मेरे मन में लड्डू फूटे साला जिसे मैं सपने में देखता था शायद वो सच हो जाएगा ,खुद का लेपटॉप
“हा हो जायेगा ,आराम से हो जाएगा ,एक लेपटॉप ले लेंगे और एक प्रिंटर आपके पैसे भी बच जायेगे,आप बोलो तो यहाँ वाईफाई का रावटर भी लगा लेते है,कोई सस्ते वाला काम चल जाएगा “
वो मुझे ऐसे सुन रही थी जैसे कोई दूसरी भाषा में कुछ कह दिया हो ,
“कितने में हो जाएगा “
“आपके बजट में हो जायेगा पैसे भी बच जायँगे हा वाईफाई के लिए महीने में बिल देना होगा”
“कितना “
“यही कोई 500 “
“ह्म्म्म रुक शकील भाई से बात करती हु “वो फोन घुमाई और लगभग 5 मिनट तक बात करते रही उन्हेंने मेरे बारे में भी सब कुछ बताया और फोन मुझे दिया ,शकील चम्पा से कही ज्यादा जानकर निकला उसने मुझे हर चीज के बारे में पूछा और मुझसे खुस भी हो गया,अंत में वो बस इतना बोला की तू मेरे बहुत काम आएगा और चम्पा से बात करने लगा ,चम्पा ने मेरी हर बात मान ली थी ,मैं बहुत खुस था मुझे हमेशा से ये सब चाहिए था लेकिन मैं इनके बस सपने ही देख सकता था लेकिन अब मरे पास ये सब होगा,मैं अब अपने प्रोजेक्ट अपने लेपटॉप में बना पाऊंगा और प्रिंट करा पाऊंगा ………..

अब बात थी मेरे नई रूममेट काजल की ,चलो उसे भी देखते है…..

मैं एक बॉडी बिल्डर के पीछे चलने लगा …

अध्याय 3
“ये कौन है,”
एक खूबसूरत बला मेरे सामने खड़ी थी ,अगर ये मुझे कही और मिल जाती तो मैं मान ही नही सकता था की ये कोई जिस्म का धंधा करने वाली लड़की होगी,ये तो असल में मेरे कालेज के उन लड़कियों से भी ज्यादा खूबसूरत थी जो की मेरे साथ पढ़ती थी और मुझे बिल्कुल भी भाव नही देती थी,
“ये तेरे साथ ही रहेगा अब से इसी खोली में “
वो अजीब निगाहों से मुझे देखने लगी
“अरे इतनी छोटी सी तो खोली है मेरी इसमें अब इसे कहा रखु “
वो लगभग रुआँसी सी हो गई
“कुछ दिन काम नही किया तो मौसी मेरे साथ अब ऐसा करेगी “
वो सच में रुआँसी हो गई थी,ऐसा लगा की अब रोने ही वाली है
“वो मुझे नही पता मौसी ने कहा की ये लड़का अब तेरे साथ ही रहेगा,ये शकील भाई के लिए काम करने आया है यहां पर “
वो फिर से मुझे खा जाने वाली निगाहों से देखती है,
“मेरी तबीयत थोड़े दिन में ठीक हो जाएगी फिर तो मैं धंधे में आ जाऊंगी ना फिर से ,,,”
“2 महीने से तूने किराया नही दिया है ,और ये तेरी मुसिबित है ,अगर कुछ कहना है तो मौसी से बोल ना मुझे तंग मत कर अब “
वो बॉडी बिल्डर वँहा से चला गया ,काजल मेरे तरफ मुड़ी,वो लगभग मेरी ही उम्र की थी,तीखे नयन नक्श की मलिका,मासूमियत उसके आंखों में छलक रही थी और नाजुक सी देह,लेकिन मुह खोलती तो बिल्कुल तीखी मिर्च जैसे,कसा हुआ बदन था जो अभी अभी जवान हो रहा था,मैं उसके चहरे में थोड़ी देर के लिए खो गया था,
“ये क्या देख रहा है ,”
मैं हड़बड़ाया …
“कु कुछ नही बस ….”
“चल अंदर आ जा “
वो अपने उसी रूखे स्वर में बोली ,मैं अंदर दाखिल हुआ वो मेरे पीछे कमरे का दरवाजा बंद कर दी ,मैं थोड़ा घबराया जिसे रानी ने भी महसूस किया ,और वो हँसने लगी
“क्या हुआ कभी किसी लड़की के साथ कमरे में अकेले नही रहा है क्या ??”
वो हँस ही रही थी ,मैंने ना में सर हिलाया
“तो यहां क्या करने आ गया बहनचोद ,ऐसे भी मेरा बुरा समय चल रहा था और अब ये मुसीबत ,मौसी से तो बात ही करना बेकार है ,अब तुझे भी अपने साथ रखना पड़ेगा “
वो भुंभुनायी ,और फिर से मुझे देखने लगी
“देख मैं रंडी हु जानता है ना “
मैंने हा में अपना सर हिलाया
“तो ये सोच कर की ये तो रंडी है इसके साथ कुछ भी कर लूंगा मुझसे बत्तमीजी से पेश मत आना वरना तेरा वो हाल करूँगी साले की …..रंडी हु और तुझे अगर कुछ करने का मन हुआ तो 200 रुपये एक बार के ,1000 पूरी रात का समझा ,और मुह में नही लुंगी .पिछवाड़े में नही लुंगी,होठो में चुम्मा नही करना है समझा उसके अलग पैसे लगते है ,समझा …”
वो ताव में आकर बोली .
“लेकिन मुझे कुछ भी नही करना है ,मैं आपको पैसे क्यो दु ,आप ये बता दीजिये की मैं सोऊंगा कहा पर …”
मेरे चहरे पर आये मासूमियत के भाव से शायद…...

वो थोड़ी शांत हुई ,उसने एक कोने में इशारा किया ,मेरे पास तो बिस्तरा भी नही था ,मैं वही जमीन पर अपना बेग रखा और एक पुस्तक जोकि मैंने लाइब्रेरी से लायी थी और एक कॉपी निकल कर वहां रख दिया ,
“अरे तेरा बिस्तर कहा है ?”
“मेरे पास नही है “
वो थोड़ी मुस्कुराई
“रुक मैं ला देती हु “
वो कमरे से बाहर चली गई .मैंने पूरे कमरे को ध्यान से निहारा ,वो एक छोटा सा कमरा था जिसमे एक बेड लगा हुआ था ,एक सिंगल बेड था,लेकिन थोड़ा चौड़ा था,वो एक लकड़ी का तख्त था जिसपर मोटा गद्दा बिछा हुआ था,,कमरे की एक दिवाल पर जॉन अब्राहिम की एक बड़ी सी तस्वीर टंगी थी ,जिसमे उसके डोले शोले दिख रहे थे ,उसके 6 एब्स को देखकर कोई भी दीवाना हो जाय ,एक तरफ एक बड़े से दर्पण वाली अलमारी थी ,जिसमे एक ड्रेसिंग बना हुआ था और वो लड़कियों के श्रृंगार समान से भरा हुआ था ,उस बेड के बाद थोड़ी दी और जगह बच रही थी जिसमे की एक आदमी आराम से सो सके और एक कोने में कुछ बर्तन और राशन के समान और एक गैस चूल्हा रखा था,कमरे से सटा हुआ ही टॉयलेट भी था जिसमे मुश्किल से एक आदमी खड़ा हो पता ,मेरे लिए इतना ही काफी था ,असल में मैं इससे भी बुरे हालात में रह चुका था और मुझे यहां सिर्फ सोने ही तो आना था,पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी थी या कही गार्डन में बैठकर भी पढ़ सकता था ,और बाकी समय तो मेरा काम और कालेज में निकल जाएगा ,यही तो मैं पिछले 6 महीने से कर रहा था ,अब कम से कम मेरे पास एक स्थायी पता तो होगा ,
तभी कमरा फिर से खुला और रानी अंदर आयी साथ में वही पहलवान था जो मुझे छोड़ने आया था ,उसके हाथो में एक गद्दा था उसे लाकर वो मेरे पास पटक दिया ,और बिना कुछ कहे ही वँहा से चला गया ,मैंने उसे बिछ्या और उसने ही बैठ गया ,रानी अब अपने बिस्तर में बैठी थी और मेरे उस पुस्तक को ध्यान से देख रही थी ,वो c++ की बुक थी जो की लगभग 2 से 3 हजार पन्नो की रही होगी ,
“तुम इतना पढ़ लोगे “उसने हैरत से कहा
“हा ये पूरा थोड़ी ना पढ़ना रहता है ,बस जितना काम का हो उतना ही “
“अच्छा मौसी बता रही थी की तुम इंजीनियर हो,क्या सच में “
“नही मैं अभी पढ़ रहा हु ,ये पढ़ाई करके मैं इंजीनियर बनूंगा “
“तो अगर अब कमरे का पंखा बिगड़ गया तो तुम उसे बना दोगे”
मैं उसे एक बारकी ध्यान से देखा इसने मुझे मेरे गांव के लोगो की याद दिला दी ,साले इंजीनियर को वो या तो मेकेनिक समझते है या फिर इलेक्ट्रिशियन ,अगर किसी को कुछ ज्यादा पता हो तो ठेकेदार..

“नही असल में मैं कंप्यूटर इंजीनियर हु “
“वो क्या होता है ?”
“कल आ जाएगा फिर बताऊंगा “
“क्या आ जाएगा “
“कंप्यूटर “
“देखो मैं तुमसे कह रही हु मौसी के कारण तुम्हे यंहा रहने दिया है मैंने अब और यंहा कुछ कचरा नही चाहिए ,ऐसे भी धंधे की हालत खराब है और तुम यंहा और समान लाने की बात कर रहे हो “
वो फिर से गुस्से में आ गई लेकिन इस बार मुझे उसपर गुस्सा नही बल्कि हँसी आयी और मैं हँस पड़ा
“क्या हुआ यू क्या दांत दिखा रहे हो “
“कुछ नही अरे वो इतना बड़ा थोड़ी होता है ,वो तो मेरे कॉपी जितना होगा ,कल आएगा तो देख लेना “
वो अपना मुह बनाने लगी जैसें मैंने उसे चिढ़ा दिया हो
“हा हा जानती हु सब ,फिल्मों में देखा है मैंने सब ,”
“तो तुम फिल्में देखती हो .”
“ह्म्म्म लेकिन बस सलमान और जॉन के “
वो इठलाते हुए बोली ,लगता है जॉन की दीवानी थी इसे पटा कर रखना मेरे लिए आसान होगा ,
“अच्छा सुनो अब मेरी बात ,खाने का पैसा लगेगा ,तुम्हे खाना बनाना आता है ?”
मैंने हा में सर हिलाया
“बढ़िया तो समान ले आना और एक समय का तुम बनाना,मैं बर्तन मांज दूंगी , एक समय का मैं बना दूंगी ,और तुम बर्तन धोना ,और अपना झूठ खुद ही धोना मैं उसे हाथ नही लगाउंगी ,बर्तन है की नही थाली भी तो नही दिख रही है तुम्हारी “
उसने मेरे समान की ओर देखते हुए कहा जिसमे महज एक बेग भर था ,
“ठीक है खरीद के ले आना कल ,और राशन का समान भी मैं लिख के दे दूंगी “
“वो ….

वो मेरे पास अभी पैसे नही है ,अगर कल चम्पा मौसी कुछ दी दे तो ले आऊंगा ,वरना महीने के आखिर में तनख्वाह मिलेगी तो …”
मैं डरते हुए कहा ,वो फिर से मुझे घूर कर देखने लगी ,
“ठीक है ठीक है ,अभी के लिए तो हो जाएगा,चलो अभी रात का खाना बनाओ ,कल से कौन से समय का खाना बनाओगे “
“जी सुबह का बना दिया करूँगा “
“हम्म ठीक है ,चलो अभी तो बनाओ देखते है कितना अच्छा बना लेते हो ,नही तो साला कचरा ही खाना पड़ेगा “
मैं उठा और खाना बनाने की तैयारी करने लगा ,भगवान का शुक्र था की मेरे हालात ने मुझे खाना बनाना सीखा दिया था,मेरी माँ अक्सर बीमार रहा करती थी ,इसलिए मुझे सीखना ही पड़ा ,घर का इकलौता बेटा था ,ना कोई बहन ना भाई ,मैं सब्जियां देखने लगा ,फिर रानी की तरफ देखा जो मुझे ध्यान से देख रही थी ,
“क्या बनाऊ ??”
“जो बनाना है बना दे ,चल ऐसा कर भिंडी ही बना दे रोटी के साथ “
मैं भीड़ गया और रानी बाहर जाकर ना जाने किनसे बात करने लगी ,कई औरते कमरे में झांकती और मुझे देखकर हँसती हुई वँहा से निकल जाती और फिर रानी से बात करने लगती उसकी कुछ बाते मेरे कानो में भी पड़ रही थी ,
“अरे रानी ये तो अच्छा नॉकर मिल गया है तुझे “
“अरे मत पूछो मौसी ने गले बांध दिया है साले को ,ऐसे लड़का अच्छा है ,सीधा साधा “
“अरे लड़के कभी अच्छे होते है क्या बच कर रहना साला हुक्म ना चलाने लग जाय,मुफ्त में कुछ करने लगे तो बताना इसकी अच्छी खबर लेंगे “दूसरी औरत ने कहा और सभी हँसने लगे
“अरे ये बेचारा भी हमारे तरह ही तकदीर का मारा होगा,वरना यंहा रहने कौन आता है ,यंहा तो लोग अपनी हवस मिटाने ही आते है …”एक तीसरी महिला की आवाज मेरे कानो में पड़ी जिसकी आवाज से लग रहा था की उसकी उम्र कुछ ज्यादा रही होगी ,उसकी इतना बोलने से ही मुझे अपने यंहा होने का अहसास हुआ की मैं कंहा हु ,मैं इस जगह के बारे में ना अपने किसी दोस्त को बता सकता था ना ही अपने घरवालों को ,इतनी मजबूरी थी की मुझे रंडीखाने में रहना पड़ रहा है ,इसका अहसास होते ही मेरे आंखों में आंसू आ गए और मैं बस उस भिंडी को देखता रह गया जिसे मैंने अभी अभी काटा था………...

अध्याय 4
“वाह रे तेरे हाथो में तो जादू है साले …”
काजल ने जैसे ही रोटी का टुकड़ा अपने मुह में डाला वो चहक उठी ,और मैं शर्माने लगा ..
“तू बात बात में ऐसा क्यो शर्मा जाता है ,इतना तो लडकिया भी नही शर्माती ..”वो फिर से खिलखिलाने लगी ,उसकी हँसी में एक गजब की स्कछन्दता थी ,बिल्कुल ही निर्दोष सी खिलखिलाहट थी,मैं उसके चहरे को देखता ही रह गया था ,क्या आकर्षण था उसके अंदर ,दांतो की पंक्ति मोतियों के जैसे चमक रहे थे,गाल बिल्कुल ही लाल हो गए थे,अचानक से वो मुझे अपने ओर देखता हुआ पाकर रुक गई ..
“फिर से घूर रहा है साले ...रेट बताया ना पैसा होगा तो बोलना ..

”मैं बुरी तरह से झेंपा और वो मुह दबा कर हँसने लगी
वाह आज तो मजा आ गया ,ना जाने कितने दिनों के बाद ऐसा अच्छा खाना खाया है ...उसने अपना आखिरी निवाला भी निगल लिया था …
“अच्छा तो यंहा क्यो रहने आ गया ..”
मैंने उसे पूरी कहानी सुना दी ..उसके चहरे में मेरे लिए दुख और दया का भाव आ गया ..
“यानी तू भी तकदीर का मारा है ..”
“तकदीर से मैं गरीब जरूर पैदा हुआ हु लेकिन अब मैं यंहा अपनी तकदीर बनाने आया हु ,मुझे अपनी किस्मत खुद लिखनी है ,वरना अभी भी वही गांव में पड़ा रहता वही करता जो पिता जी करते है …”
मैं अचानक ही अपने उस उम्मीद में भर गया जिसके सहारे में हर मुश्किल को हंसते हुए सहता था,मुझे जीवन से बहुत उम्मीद थी और मैं हमेशा स्वामी विवेकानंद की उस बात को याद कर लेता था जिसमे उन्होंने कहा था की तुम ही अपने किस्मत के लेखक हो …
काजल के होठो में एक अजीब सी मुस्कान आई ..
“चलो अच्छा है किसी को तो अपने जीवन से कोई उम्मीद है …”वो बस इतना कहकर उठी और बिस्तर में लेट गई ,लेकिन उसकी बात में जो दर्द था वो दर्द मेरे दिल के किसी कोने को छू गया था ...इतनी नाउम्मीदी मैंने अपने जीवन में कभी महसूस नही की थी जो उसके उस अकेले वाक्य में थी ..
“सोने से पहले लाइट बंद कर देना “
काजल एक करवट लेकर लेट गई थी ..मैं भी लाइट बंद कर लेटा हुआ दूसरे दिन की प्लानिंग करने लगा……..

अध्याय 5

“साले बहुत खुस लग रहा है क्या बात है रंडीखाने में जाकर तो और भी चमक रहा है ..”
प्यारे ने मुझे धीरे से कहा ,संजय सर और प्यारे ही वो दो व्यक्ति थी जिन्हें ये पता था की मैं कहा रहता हु ..
“तू पहले ये देख ..”
मैंने अपना बेग खोला जिसमे 40 हजार रुपये थे,प्यारे का मुह खुला का खुला ही रह गया था ..
“भाई इतने पैसे ..”
“अबे धीरे बोल ..चल तझे समझता हु ..”
मैंने उसे सारी बात बताई ..
“वाह यार ये सही जगह है तेरे लिए ..लेकिन बस …”
“क्या हुआ ..”
“अरे कुछ नही सोच रहा था की तू एक जवान लड़का है और वो एक खूबसूरत लड़की अगर तू कही बहक गया तो ..”
मैंने प्यारे को घूरा…और एक गहरी सांस ली ..
“भाई मैं उस जगह में रहता हु जंहा बहकने के लिए भी पैसे लगते है ,और हमारी जेब खाली है समझे,वो लोग बहुत ही प्रोफेसनल होते है फोकट में अगर छू भी दिया ना तो काट देंगे ...अबे मुझे नही मेरा वाला”
हम दोनो हो खिलखिला उठे,मुझे याद नही की हम ऐसे कब हंसे थे लेकिन जेब में पैसा हो तो एक अलग ही खुसी मिलती है ,ये मैंने उस दिन जाना था,पता नही एक अजीब से पावर की अनुभूति हो रही थी मुझे जैसे दुनिया मेरी मुठ्ठी में हो ...

तभी याद आया की ये पैसा मेरा नही है …
“यार प्यारे लेपि कहा मिलेगा ,सेकंड हैंड चाहिए और वो आकाश (हमारे क्लास का एक अमीर लड़का जो सरकारी कालेज में भी डोनेसन दे कर आया था ,शायद उसका बाप कोई बहुत बड़ा तोप था) के पास है ना ,अरे वो एक राउटर है ना जैसा कुछ वो भी मिल जाए तो …”
“अच्छा पॉकेट वाईफाई ...ह्म्म्म अबे वो आकाश ही बेचने वाला है सुना था,साले के बाप के बहुत पैसा है ,बाजार में कोई नया मॉडल आये तो तुरंत पुराना बेच देता है ,तू बोले तो बात करे क्या उससे ..”
मैं थोड़ा डर गया ,क्योकि वो इतना हाई फाई आदमी था की हमारी उससे बात करने की भी हिम्मत नही होती थी ,हम जैसे लड़को के लिए उसका वर्ताव कीड़े मकोड़ो की तरह रहता था ..
मेरे चहरे में आये हुए भाव देखकर प्यारे कहानी समझ चुका था …
“एक काम करते है संजय सर से बोलते है ,वो कुछ जुगाड़ कर देंगे ..”मेरे चहरे में चमक आ गई
*****
हम उसी टापरी में थे जंहा कल चाय पी रहे थे,संजय सर किन्ही लोगो के सामने हाथ बंधे खड़े थे,मैं उन्हें देखकर तुरंत पहचान गया था वो अविनाश था कालेज का ही नही बल्कि यूनिवर्सिटी का नेता था ..हमने जाकर उसे विश किया और हाथ बंधे संजय सर के साथ ही खड़े हो गए …
अविनाश की नजर हमपर पड़ी ..
“क्या रे छोटे लोग कैसे हो ..”
“बढ़िया है सर ..’
“क्यो बे ..क्या नाम है तेरा ..’उन्होंने मेरे तरफ उंगली की थी
“सर राहुल ..”
“ह्म्म्म फ्रेशर पार्टी में क्यो नही गया था ..तेरे सीनियर तेरी कंप्लेन कर रहे थे ,और एक हाथ क्या मारा किसी ने रोने लगा,मादरचोद तू इंजीनियर बनने आया की झाटु ..”
“सर...वो ..”मैं कुछ बोलने ही वाला था की संजय सर बोल उठे ..
“सर गरीब लड़का है ,रहने के लिए घर भी नही है इसके पास .उसी दिन इसे धर्मशाला वाले भी धक्के मार के भगा दिए थे,पेपर सर पर है और ऐसे में कोई इसे मारे तो बेचारा रोयेगा ही ना..”
अविनाश ने एक बार मुझे घूरा..
“अरे सालो तो मुझे क्यो नही बताया तुम लोगो ने ,तू भी मादरचोद संजय मुझको बड़ा भाई बोलता है और अपने लौंडो की प्रॉब्लम भी नही बताता ,नेता क्या झांट उखड़ने के लिए बना हु मैं..क्यो बे हॉस्टल के लिए अप्लाई नही किया था क्या..”
“किया था सर लेकिन सीट फूल हो गई थी …”
“ह्म्म्म तो अभी कोई जुगड हुआ है की नही ..”
मैं सोच में पड़ गया था की अब क्या बोलूं ..
“हो गया है सर एक जगह नॉकरी कर रहा हु वही रहने को भी जगह मिल गई है ..’
“चल ठीक है तेरा अगले साथ हॉस्टल में जुगड करवा देंगे ...ठीक,मेरे सम्पर्क में रहना ,यंहा साले सब रहीस के चोदे भरे पड़े है,गरीब लोग अगर साथ ना रहे ना तो ये हमे अपनी जूती की धूल भी नही समझेंगे ..क्यो शंभु काका सही कहा ना ..”उसने चाय वाले को कहा
“सही कहात हो भैया आपे तो एक हो जो इन चुतिया मन के गांड फाड़ के रखे हो ..”शंभु अपने पान से रचे दांत दिखाते हुए बोला ..
“और संजय जो बोला उसपर ध्यान दे ,इस बार चुनाव में खड़ा हो जा ..

”
अविनाश ने फिर से संजय सर पर ध्यान लगाया ..
“सर मैं यंहा पड़ने आया हु …”अविनाश सर ने उन्हें बड़े प्यार से देखा
‘भोसड़ी के मैं भी यंहा पड़ने ही आया हु ,जानता है ना यूनिवर्सिटी टॉपर हु ,लेकिन फिर भी पॉलिटिक्स में हु जानता है क्यो???क्योकि असली पवार इसी में है बेटा ,इन रहीस के चनों को उनकी औकात में रखने का यही तरीका है और साथ ही अपने भाई बंधुओ की बात रखने का भी ..वरना साला हम जैसे फटे जेब वालो की यंहा पर सुनता कौन है बे...सरकारी कालेज में भी साले पैसा और पवार के बल पर आ गए है भोसड़ी वाले …”
अविनाश दिल का बहुत अच्छा आदमी था,पढ़ने में तेज था.,जात का ब्राम्हण था,गरीब घर का था लेकिन बोलने में तेज था और गली से ही बात करता था ,जब वो किसी बड़े व्यक्ति से बात करता तो उसकी भाषा ही बदल जाती थी ...तेज तर्रार इतना था की यूनिवर्सिटी पॉलिटिक्स में छा गया था और कई बड़े नेताओ से मिलना जुलाना भी था...वो चाहता था की संजय सर भी पॉलिटिक्स में आये लेकिन संजय सर ठहरे गांव के सीधे साधे आदमी जिसे पड़कर अपने घर को सम्हालना था ..
“चल सोचना मेरी बात को ..चलो बे लवडो इलेक्सन आने वाला है और भी तैयारी करनी है …”
वो अपने बुलेट में बैठा और चल दिया साथ ही उसके कुछ दोस्त भी थे …
उसके जाने के बाद संजय सर भी मुस्कुराने लगे …
“क्या हुआ सर क्यो मुस्कुरा रहे हो ..”प्यारे बोल उठा
“कुछ नही यार वक्त भी कैसा बेरहम है साला इतने अच्छे सीधे साधे आदमी को क्या से क्या बना दिया “
“सर मैंने सुना ही जो भी होता है अच्छे के लिए होता है क्या पता नेता बनना भी इनके काम आ जाए “
“हा ये भी है ...तू सुना कैसे बीती कल की रात ..”
संजय सर मुस्कुराए वही प्यारे हँस पड़ा ,मैंने सर को सभी बात बताई ,उन्होंने ध्यान से सुना और एक सेकंड हैंड लेपटॉप का भी जुगड कर दिया …
*************
मैं दरवाजा पीट रहा था ,थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला ..काजल की हालत देखकर मैं दंग रह गया था,बाल बिखरे हुए थे और पसीने से लथपत थी ...चहरा लाल पड़ा हुआ था ..
“क्या हुआ तुम्हे ..”
“कुछ नही ऐसे क्यो दरवाजा पीट रहा था चल अंदर आ जा “
वो दरवाजे से हटी और दौड़ाते हुए बाथरूम में घुस गई ,जो जोर जोर से खाँसे जा रही थी ..मैं अपना समान अपने बिस्तर पर रख चुका था ,वो बाहर आयी ..
“तुम्हारी तबियत ठीक नही लगती ..”मैं उसकी हालत देखकर थोड़ा परेशान हो गया था ,
‘अरे कुछ नही हुआ है मुझे ,अरे वाह तू ले आया ये ...क्या कहते है उसे ...चल फ़िल्म चलती है क्या इसमें …”वो लेपटॉप को उल्टा पुलटा के देख रही थी ..
“हा चलती है लेकिन अभी नही ,अभी काम करना है मुझे ,देख इतना सारा पोथी है सब को इसमें टाइप करना होगा ..”
वो मुह बना कर वँहा से चल दी और खाना बनाने लगी ,मैं बाथरूम में गया तो मुझे एक रुमाल दिखा जिसमे खून के छीटे थे ..
“क्या हुआ है तुम्हे ,खांसी से खून निकल रहा है ??”
वो मुझे घुरी ..

“मादरचोद धीरे बोल किसी को पता चल गया ना तो ….यंहा से भगा देंगे मुझे …”
मैं घबरा गया था मैं चुप ही हो गया ..फिर थोड़े देर बाद धीरे से बोला
“लेकिन हुआ क्या है तुम्हे ..?”
“मुझे क्या पता ?? खांसती हु तो खून निकलता है और कभी कभी तेज बुखार भी हो जाता है ,इसीलिए तो धंधा नही कर रही हु ..”
वो फुसफुसाई ..
“ओह...तो किसी डॉ को दिखाया क्या ??”
“हा यही पास में एक डॉ को दिखाया था उस साले से बहुत पैसा चूस लिया लेकिन ,..कुछ हुआ नही ..अब अगर कोई बड़ी बीमारी हुई तो साला कोई आएगा भी नही मेरे पास ,इसलिए आसपास के किसी डॉ से इलाज भी नही करवा सकती ,जो पैसे थे वो भी खत्म होने वाले है ,अगर धंधा शुरू नही किया तो …”उसके आंखों में पानी आ गया था ,
‘मौसी से क्यो नही मांग लेती कुछ पैसे ..”
वो मुझे घुरी
“दो महीने का किराया अभी भी बकाया है,और वो मुफ्त में थोड़े ना पैसे देगी साली ना जाने कहा भेज दे मुझे ,मैं एक साथ कई लोगो का नही ले पाती अभी...वो ऐसी जगह में भेज देती है जंहा शराब पीकर कई लोग साथ चढ़ने जाते है,साले ये भी नही देखते की लड़की को बुखार भी है ,ना बाबा उनसे पैसे के लिए नही कहूंगी,2-4 ग्राहक आ जाए तो किसी डॉ के पास चली जाऊंगी …”वो इतने भोलेपन से ये बोल रही थी की उसकी बात सुनकर मेरे आंखों में आंसू आ गए थे लेकिन वो अपने ही ख्यालों में खोई रही जैसे गिनती लगा रही हो ...फिर उसकी नजर मुझपर पड़ी वो थोड़ी चौकी ..
“तुझे क्या हो गया”मुझे भी आभास हो गया था की मेरे आंखों में आंसू है .
“कुछ नही,फिक्र मत कर मैं पता करता हु कोई अच्छा और सस्ता डॉ ..अभी मौसी का कुछ पैसा है मेरे पास उसी में मैनेज कर लेंगे ..”
“मौसी का पैसा खायेगा तो वो तुझे खा जाएगी ..’
मैं थोड़ा मुस्कुराया
“फिक्र मत कर तू बस किसी को मत बोलना बाकी मैं देख लूंगा ..”
वो खुस हो गई लेकिन फिर मुझे एक शक की निगाह से देखी..
‘तू मेरी लेने के फिराक में तो नही है ना “
मैं हड़बड़ाया गया था और वो फिर से खिलखिला कर हँस पड़ी
“अरे ले लेना जो पैसे देगा उसके बलदे ,काजल किसी का अहसान नही रखती ..”वो हंसते हुए बोली
‘मुझे कुछ लेना वेना नही है ,खाना बन गया हो तो दो भूख लग रही है ..”
काजल फिर से खिलखिला उठी ..
“साला फट्टू है तू भी ,चल आज मेरे हाथ का खाना खिलाती हु तुझे “

अध्याय 6
“हम्म्म्म इतने दिन तक कहा थे तुम लोग ,इन्फेक्शन फैलने लगा है ,चलो कोई बात नही सही समय में आये हो मेरे पास ..”
डॉ ने x-ray की रिपोर्ट देखकर कहा ..
“वो सर हम किसी दूसरे के पास इलाज करवा रहे थे लेकिन ..”
“ठीक है कोई बात नही ,ठीक तो तुम हो जाओगी लेकिन दवाइया सही समय में लेना और थोड़ा आराम भी जरूरी है ,तुम्हारे फेफड़े में इन्फ़ेक्सन है सही समय में मेरे पास आ गए वरना और भी बढ़ सकता था ..”
डॉ ने एक बार फिर से हमे देखा,काजल बड़े ही प्रेम भाव से मुझे देख रही थी ..

“ऐसे क्या लगती है ये तुम्हारी “डॉ का ये सवाल हम दोनो को ही चौका दिया ..
“बहन”
“दोस्त “
हम दोनो ने एक साथ कहा,मैंने बहन कहा था वही काजल ने दोस्त ...डॉ हँस पड़ा
“अच्छा पहले ये डिसाइड कर लो फिर बताना …”मैंने पहली बार काजल को यू शर्माते हुए देखा था ,
“कोई भी हो अच्छा किया की तुम इसे यंहा लेकर आ गए “

*************
“कितने पैसे लिए डॉ ने और दवाइयों के कितने पैसे हुए …”
काजल वँहा से निकलने के बाद काजल ने बहुत ही बेसब्री के साथ कहा ,
“अरे तुम्हे क्या करना है ,अभी मेरे पास है कुछ पैसे ,और दवाइयां भी एक महीने चल जाएगी “
वो थोड़े गंभीर होकर मुझे देखने लगी ..
“क्या हुआ ..”
“जानते हो ना की मैं किसी का अहसान नही रखती ..तुम्हारे पैसे मैं चुका दूंगी ”
‘तुम्हे किसने कहा की मैं अहसान कर रहा हु ,इसके बदले मैं कुछ तो लूंगा …”
काजल की नजर मुझपर जम गई थी ,उसे शायद यकीन नही हो रहा था की मैं ऐसा कुछ कह रहा हु ..
“हा भई मेरा एग्जाम आने वाला है तो मैं तुम्हारी चुप्पी लूंगा ताकि मैं अच्छे से पढ़ सकू ..”
वो खिलखिलाई ,उसका चहरा अजीब तरह से खिल गया था ,लगा जैसे कुछ मुराद पूरी हो गई हो ..
“वो तो नही हो पायेगा रे मेरे से ,चल मुझे अपने उस डिब्बे में फ़िल्म लगा के दे देना तब मैं चुप रहूंगी ..”
वो फिर से खिलखिलाई ,साथ ही मैं भी मुस्कुरा उठा,
जीवन में मैं किसी भी लड़की के इतने करीब कभी नही रहा,अब हु तो एक ऐसे लड़की के करीब जो दूसरी लड़कियों से बहुत ही अजीब है ,लेकिन काजल जैसी भी थी मुझे पसंद आ रही थी,
5 दिन बीत चुके थे,काजल ने 1 महीने रेस्ट करने की सोची थी ,उसके 5 दिन बीत चुके थे,उसकी हालत भी थोड़ी सम्हाली थी,उसे खांसी के दौरे आते तो उसकी हालत ही खराब हो जाती लेकिन बाकी समय वो ठीक ही रहती थी ,उसने मेरा लेपटॉप चालू करना और फ़िल्म लगाना भी सिख लिया था ,जब मैं कभी अपना लेपटॉप छोड़कर लाइब्रेरी जाता तो वो उसमे फ़िल्म देखती और अपने सहेलियों को भी दिखाती ,अब वो जगह मुझे उतनी अजीब नही लगती थी ,कभी कभी चंपा मौसी बुला लेती थी और पोथा पकड़ा देती थी ,मैं तो धीरे धीरे काजल को भी टाइपिंग सीखने की कोशिस कर रहा था,हम दोनो में अच्छी दोस्ती हो गई थी ,और साथ ही आसपास की औरतो के साथ भी ..
बस मुझे उनकी ये हरकत पसंद नही आती की वो मुझे छेड़ते रहते थे,लेकिन अब मैं भी उनकी बातो का आदि होने लगा था ,
15 दिन बाद ही मेरा एग्जाम शुरू था,मैं अधिकतर समय अपने लाइब्रेरी में ही बिताता था …
मैं रात में कमरे में आया ,आते ही काजल ने मुझे पकड़ लिया ..
“कहा था रे तू इतने देर तक साले शकील भाई के लड़के तुझे ढूंढ रहे थे,जाकर मौसी से मिल ले “
“वो मुझे क्यो ढूंढ रहा है ??”
“मुझे क्या पता बस बोले के चिकने को भेज देना “
मैं सर खुजाते हुए मुड़ा ही था की काजल ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खिंचा और दरवाजा बंद कर दिया ..
“क्या हो गया पागल हो गई है क्या ..

”
“सुन मेरी बात ..”
वो मेरे आंखों में देख रही थी ,उसकी बड़ी बड़ी भोली आंखे जैसे मेरी आंखों में कुछ ढूंढ रही हो ..
“कही तूने कोई लोचा तो नही किया ना ..”उसकी आवाज में एक स्वाभाविक डर था ,
“नही क्यो ??”
“कुछ नही शकील भाई बुला रहा है ना तेरे को ,इसलिए “
उसका यू मेरे लिए चिंता करना मुझे ना जाने क्यो लेकिन बहुत ही भा गया ,मेरे होठो में एक मुस्कुराहट सी आ गई ..
“क्या हुआ अब हँस क्यो रहा है चल जा ..”
“बस तुझे अपने लिए चिंता करते देख अच्छा लगा ..”
वो भी मुस्कुराई और मेरे बाजू को अपने हाथ से मारा ..
“चूतिये ..तेरा उधार बचा है ना इसलिए कही कुछ हो गया तो किसे लौटाऊंगी ..”
“अच्छा ये बात है ..”
हम दोनो की आंखे जो मिली ना जाने दिल के किसी कोने में जैसे कोई तार ही झनझना उठा था,मैं एक अजीब सी खामोशी का अहसास करने लगा,लगा मानो उन आंखों के सिवा दुनिया में कोई और शय ही नही बचा हो,आंखे उसकी आंखों में गुम सी हो गई थी ,उसकी सांसे तेज हो गई थी ,ना मालूम क्यो मैं भी अपनी सांसों पर को काबू नही पा सक रहा था ,ऐसा लगा की मैं उसके पास खिंचा जा रहा हु,हमारी सांसे एक दूसरे से टकरा रही थी ,उसने मुझे धक्का दिया और मुड़कर खड़ी हो गई ,ना जाने वो मुझसे अपना चहरा क्यो छिपा रही थी ..
“चल जा तू मौसी देख रही होगी ..”
“हा हा ..”मैं बुरी तरह से हड़बड़ाया हुआ सा भागा,मुझे क्या हुआ था क्यो ये समय रुक सा गया था मैं समझ ही नही पा रहा था लेकिन एक अजीब सी उमंग मेरे अंदर दौड़ गई थी ,और इन्ही सब अहसास की वजह से मैं डर सा गया था …

इधर .काजल मेरे जाने के बाद मुस्कुराई थी लेकिन उसकी आंखों में कुछ आंसू भी आ गए थे,उसने अपना सर हिलाया मानो खुद से ही नही कह रही हो ...

“कहा था रे तू ..”
“वो मौसी कालेज गया था “
“हम्म्म्म जा शकील भाई को तुझसे कुछ काम है बुलाया है ..”
मैं उन्हें देखता ही रहा
“कहा ..??”
वो मुस्कुराई और एक लड़के की तरफ इशारा किया,उसने मुझे अपने साथ आने का इशारा किया,उसने मुझे एक जीप में बिठाया और हम वँहा से चल दिए …
**************

अध्याय 7
वो बड़े पुराने हवेली जैसी जगह थी बाहर से जितनी भी बेकार थी लेकिन अंदर आलीशान घर था ,एक मोटा चौड़ा आदमी 6-6.30 फुट का आदमी कमरे के बीचों बीच लगे बड़े सिंहासन नुमा कुर्सी में बैठा हुआ था ..
“राहुल यही नाम है ना तेरा “एक भारी आवाज मेरे कानो में आयी
“जी सर..”
“सर नही भाई ..शकील भाई कहते है लोग मुझे “
“जी भाई ..”
“तो कैसे चल रहा है रंडिखाने में ,काजल के साथ रहता है ना तू “
“जी ..”
“तो लिया की नही उसकी “
मैं घबराया वही ,शकील के बाजू में खड़ा हुआ एक 50-55 की उम्र का पतला दुबला शख्स हँस पड़ा लेकिन मुह दबा कर ..
शकील भी जोरो से हँस पड़ा ..
“अबे वो हमारे सभी रंडीखाने में सबसे तीखी माल है उसे नही खाया तो क्या खाया,क्यो भोला ..”
उसने बाजू में खड़े हुए शख्स से कहा ..

“जी मालिक “उस आदमी ने अपनी सड़ी हुई दांतो की पंक्ति दिखा दी ..
“अबे बोल ना ,लिया की नही उसकी ..”
मैंने ना में सिर हिलाया ,शकील के चहरे में एक मुस्कान आ गई
“खड़ा होता है की नही बे चूतिये तेरा “
मैंने अपना सर झुका लिया मुझे ऐसे प्रश्नों के जवाब पहले भी पता नही थे जब सीनियर मुझसे पूछा करते थे ना ही आज समझ आ रहे थे ,मैं बस सर झुकाए खड़ा रहा,लगा जैसे यही तो मेरी जिंदगी हो गई है ,कोई भी आकर जलील कर जाता है ,आगर इस नॉकरी और कमरे की मुझे जरूरत नही होती तो शायद मैं एक पल भी यंहा नही रुकता …
“चल सुन काम की बात,शेयर मार्किट का कुछ पता है तुझे ..”
मैंने नही में सर हिलाया ..
“ये ले ..”
भोला ने एक मोटी सी किताब मेरे हाथो में धर दी ..
“इसे पढ़ ले ,पढ़ा लिखा है तो हमारे भी कुछ काम आ ,इसे पढ़ समझ और सिख ,हमे एक भरोसेमंद आदमी की जरूरत है जो हमारे पैसे को मैनेज कर सके ,अब जो आदमी रंडीखाने में रहकर भी इतनी अच्छी माल पर नियत खराब नही किया उससे अच्छा भरोसे का आदमी मुझे कहा मिलेगा ,तू गरीब है लेकिन मौसी को पूरा हिसाब सही देता है एक ही पैसा इधर उधर नही हुआ है तेरे आने के बाद से ,तो ये काम भी तू ही सम्हालना,सोच रहा हूं की अपनी कमाई को कैसे सफेद किया जाए...चल ये भी आजमा के देख लेते है ..”
मैं थोड़ा चौका जरूर लेकिन कुछ कहा नही ,इतने दिनों से मैं कालेज में था और सीनियरों से मैं इसके बारे में सुनता आ रहा था,ना जाने क्यो मेरे दिल से एक आवाज आयी की ये अच्छा मौका हाथ लगा है कुछ सीखने का जिससे पैसे बने,
“और कुछ चाहिए क्या ..”
“जी नही ..”
“हम्म हमारे काम आया तो पैसे से नहला दूंगा,मार्किट में बहुत दुश्मन हो गए है ,पुलिस से नेता तक गांड में उंगली किये रहते है साला अब कुछ अलग करने की सोच रहा हु ,तेरे जैसे लड़को की जरूरत है मुझे ,मेरा वफादार बन कर रह जीवन भर कोई और काम करने की जरूरत नही होगी “
मैं सर हिलाया ..
“और ये ले,दे दे बे उसे “
भोला ने एक मोबाइल मेरे हाथो में थमा दिया ..
“जब फोन करू तो आ जाना समझा …”
“जी “मैंने फिर से सर हिलाया ,
“चल जा अब “
मैं वापस चला आया ,मैं खुस था की मेरे पास मोबाइल था,एक अच्छी और कमाई वाली नॉकरी करने का चांस था लेकिन …
लेकिन मैं अनजाने में ही एक कीचड़ में घुस रहा था जंहा जाना तो आसान था लेकिन वापस आना ,बहुत ही मुश्किल ….
अभी के समय में मेरे लिए पैसा बहुत ही मायने रखता था ,जंहा पैसे की बात आयी मेरे आंखों के सामने एक और तस्वीर घूम गई थी ,..
वो थी काजल की तस्वीर ……
मुझे डॉ की वो बात याद आयी जो उसने काजल को बाहर भेज कर मुझसे कही थी ..
“ये कुछ टेस्ट जितनी जल्दी हो सके मुझे करवा कर दिखाओ ..”
“जी सर ..”
“देखो मुझे पता है की शायद तुम लोगो को पैसे की थोड़ी तंगी है लेकिन ये टेस्ट करवाना भी बहुत ही जरूरी है ..15-20 दिन के अंदर ही करवा लो तो बढ़िया होगा ..

”
“सर मैं आज ही करवा लूंगा …”
“तब तो और भी बढ़िया है लेकिन तुम्हे बता दु की ये एक टेस्ट 14 हजार का होता है …”
मैं बुरी तरह से चौक गया था …
“14 हजार ..”
“हम्म इसीलिए कह रहा हु की हो सके तो 15 -20 के अंदर करवा लेना …”
“जी सर लेकिन आप काजल को कुछ मत बताइएगा ..”
“इसलिए तो उसे बाहर भेजा हु ..”
***************
डॉ की बात याद करके मैं फिर से थोड़ा चिंतित हो गया था,मेरे जैसे आदमी के लिए 14 हजार बहुत ही बड़ी रकम थी,मेरी समझ में ऐसे तो कुछ भी नही आ रहा था ,लेकिन 5 दिन से मैं इन्ही उधेड़बुन में रहता था,एक तरफ काजल थी जिसका मुझसे कोई खास संबंध नही था जिसके लिए मैं इतना फिक्रमंद हो रहा था,वही दूसरी ओर मेरी पढ़ाई भी इन्ही सोचो के कारण खराब हो रही थी ,मेरे माँ बाप का और मेरा भविष्य सिर्फ इस पढ़ाई पर ही टिका था,अपनी स्तिथि सुधारने के लिए मेरे पास अभी तक तो यही एक रास्ता था,मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं क्या करू और भगवान ने मेरी सुन ली थी ,मुझे एक और काम करने की ऑपर्चुनिटी मिल गई थी ..लेकिन साथ ही एक बड़ी तकलीफ ये थी की 15 दिनों में ही परीक्षा भी शुरू होने वाली थी वही अगर मैं इस शेयर मार्किट की किताब को पडूंगा तो अपने कोर्स का अब पडूंगा ...और अगर इसे पढ़ भी लू तो क्या गारेंटी है की मैं फायदे में रहूंगा ,और 15 -20 दिन में काजल का वो टेस्ट करवा पाऊंगा …
बस इसी उधेड़बुन में मैं कमरे में पहुच गया था …

अध्याय 7
वो बड़े पुराने हवेली जैसी जगह थी बाहर से जितनी भी बेकार थी लेकिन अंदर आलीशान घर था ,एक मोटा चौड़ा आदमी 6-6.30 फुट का आदमी कमरे के बीचों बीच लगे बड़े सिंहासन नुमा कुर्सी में बैठा हुआ था ..
“राहुल यही नाम है ना तेरा “एक भारी आवाज मेरे कानो में आयी
“जी सर..”
“सर नही भाई ..शकील भाई कहते है लोग मुझे “
“जी भाई ..”
“तो कैसे चल रहा है रंडिखाने में ,काजल के साथ रहता है ना तू “
“जी ..”
“तो लिया की नही उसकी “
मैं घबराया वही ,शकील के बाजू में खड़ा हुआ एक 50-55 की उम्र का पतला दुबला शख्स हँस पड़ा लेकिन मुह दबा कर ..
शकील भी जोरो से हँस पड़ा ..
“अबे वो हमारे सभी रंडीखाने में सबसे तीखी माल है उसे नही खाया तो क्या खाया,क्यो भोला ..”
उसने बाजू में खड़े हुए शख्स से कहा ..
“जी मालिक “उस आदमी ने अपनी सड़ी हुई दांतो की पंक्ति दिखा दी ..
“अबे बोल ना ,लिया की नही उसकी ..”
मैंने ना में सिर हिलाया ,शकील के चहरे में एक मुस्कान आ गई
“खड़ा होता है की नही बे चूतिये तेरा “
मैंने अपना सर झुका लिया मुझे ऐसे प्रश्नों के जवाब पहले भी पता नही थे जब सीनियर मुझसे पूछा करते थे ना ही आज समझ आ रहे थे ,मैं बस सर झुकाए खड़ा रहा,लगा जैसे यही तो मेरी जिंदगी हो गई है ,कोई भी आकर जलील कर जाता है ,आगर इस नॉकरी और कमरे की मुझे जरूरत नही होती तो शायद मैं एक पल भी यंहा नही रुकता …
“चल सुन काम की बात,शेयर मार्किट का कुछ पता है तुझे ..”
मैंने नही में सर हिलाया ..

“ये ले ..”
भोला ने एक मोटी सी किताब मेरे हाथो में धर दी ..
“इसे पढ़ ले ,पढ़ा लिखा है तो हमारे भी कुछ काम आ ,इसे पढ़ समझ और सिख ,हमे एक भरोसेमंद आदमी की जरूरत है जो हमारे पैसे को मैनेज कर सके ,अब जो आदमी रंडीखाने में रहकर भी इतनी अच्छी माल पर नियत खराब नही किया उससे अच्छा भरोसे का आदमी मुझे कहा मिलेगा ,तू गरीब है लेकिन मौसी को पूरा हिसाब सही देता है एक ही पैसा इधर उधर नही हुआ है तेरे आने के बाद से ,तो ये काम भी तू ही सम्हालना,सोच रहा हूं की अपनी कमाई को कैसे सफेद किया जाए...चल ये भी आजमा के देख लेते है ..”
मैं थोड़ा चौका जरूर लेकिन कुछ कहा नही ,इतने दिनों से मैं कालेज में था और सीनियरों से मैं इसके बारे में सुनता आ रहा था,ना जाने क्यो मेरे दिल से एक आवाज आयी की ये अच्छा मौका हाथ लगा है कुछ सीखने का जिससे पैसे बने,
“और कुछ चाहिए क्या ..”
“जी नही ..”
“हम्म हमारे काम आया तो पैसे से नहला दूंगा,मार्किट में बहुत दुश्मन हो गए है ,पुलिस से नेता तक गांड में उंगली किये रहते है साला अब कुछ अलग करने की सोच रहा हु ,तेरे जैसे लड़को की जरूरत है मुझे ,मेरा वफादार बन कर रह जीवन भर कोई और काम करने की जरूरत नही होगी “
मैं सर हिलाया ..
“और ये ले,दे दे बे उसे “
भोला ने एक मोबाइल मेरे हाथो में थमा दिया ..
“जब फोन करू तो आ जाना समझा …”
“जी “मैंने फिर से सर हिलाया ,
“चल जा अब “
मैं वापस चला आया ,मैं खुस था की मेरे पास मोबाइल था,एक अच्छी और कमाई वाली नॉकरी करने का चांस था लेकिन …
लेकिन मैं अनजाने में ही एक कीचड़ में घुस रहा था जंहा जाना तो आसान था लेकिन वापस आना ,बहुत ही मुश्किल ….
अभी के समय में मेरे लिए पैसा बहुत ही मायने रखता था ,जंहा पैसे की बात आयी मेरे आंखों के सामने एक और तस्वीर घूम गई थी ,..
वो थी काजल की तस्वीर ……
मुझे डॉ की वो बात याद आयी जो उसने काजल को बाहर भेज कर मुझसे कही थी ..
“ये कुछ टेस्ट जितनी जल्दी हो सके मुझे करवा कर दिखाओ ..”
“जी सर ..”
“देखो मुझे पता है की शायद तुम लोगो को पैसे की थोड़ी तंगी है लेकिन ये टेस्ट करवाना भी बहुत ही जरूरी है ..15-20 दिन के अंदर ही करवा लो तो बढ़िया होगा ..”
“सर मैं आज ही करवा लूंगा …”
“तब तो और भी बढ़िया है लेकिन तुम्हे बता दु की ये एक टेस्ट 14 हजार का होता है …”
मैं बुरी तरह से चौक गया था …
“14 हजार ..”
“हम्म इसीलिए कह रहा हु की हो सके तो 15 -20 के अंदर करवा लेना …”
“जी सर लेकिन आप काजल को कुछ मत बताइएगा ..”
“इसलिए तो उसे बाहर भेजा हु ..

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डॉ की बात याद करके मैं फिर से थोड़ा चिंतित हो गया था,मेरे जैसे आदमी के लिए 14 हजार बहुत ही बड़ी रकम थी,मेरी समझ में ऐसे तो कुछ भी नही आ रहा था ,लेकिन 5 दिन से मैं इन्ही उधेड़बुन में रहता था,एक तरफ काजल थी जिसका मुझसे कोई खास संबंध नही था जिसके लिए मैं इतना फिक्रमंद हो रहा था,वही दूसरी ओर मेरी पढ़ाई भी इन्ही सोचो के कारण खराब हो रही थी ,मेरे माँ बाप का और मेरा भविष्य सिर्फ इस पढ़ाई पर ही टिका था,अपनी स्तिथि सुधारने के लिए मेरे पास अभी तक तो यही एक रास्ता था,मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं क्या करू और भगवान ने मेरी सुन ली थी ,मुझे एक और काम करने की ऑपर्चुनिटी मिल गई थी ..लेकिन साथ ही एक बड़ी तकलीफ ये थी की 15 दिनों में ही परीक्षा भी शुरू होने वाली थी वही अगर मैं इस शेयर मार्किट की किताब को पडूंगा तो अपने कोर्स का अब पडूंगा ...और अगर इसे पढ़ भी लू तो क्या गारेंटी है की मैं फायदे में रहूंगा ,और 15 -20 दिन में काजल का वो टेस्ट करवा पाऊंगा …
बस इसी उधेड़बुन में मैं कमरे में पहुच गया था …

अध्याय 8
“क्या हुआ कैसे बुलाया था शकील भाई ने ..”
मेरे आते ही काजल ने मुझे पकड़ लिया था उसके चहरे से अब भी चिंता टपक रही थी …
“कुछ नही ये काम दिया है ..”
वो उस मोटे पुस्तक को देखने लगी ,
“बाप से इतना सारा लिखना होगा तुम्हे ..”
“लिखना नही पढ़ना है मुझे ,एक काम दिया है करने के लिए उसी से सम्बंधित है ..”
उसने मुझे घूरा..
“पागल हो गया है क्या अभी तो तेरी परीक्षा है ना तो ये कब पड़ लेगा..”
मैंने गहरी सांस ली
“हो जाएगा ..ऐसे भी इसमें अच्छे पैसे मिलेंगे “
“अरे पैसे का क्या है जब तू पढ़ लेगा तो कमा लेना ,बहुत बड़ा साहब बनेगा तू ,इतना तो पढ़ता रहता है ..”
उसके भोलेपन पर मुझे थोड़ी हँसी आई ..
“अच्छा और अभी का क्या ,नही कमाऊंगा तो कैसे चलेगा ..”
“मैं..”
वो कुछ बोलने वाली थी की रुक गई ..
“क्या हो गया ??”
“कुछ नही ,मौसी का काम तो है ना उससे तो चल जाएगा तेरा ,,और नही चलेगा तो एक बार मैं ठीक हो जाऊ धंधे चालू हो जाए तो बाकी का मैं चला दूंगी ..”
उसकी बात से मैं मुस्कुराया ,मैंने इस गरीब लड़की के दिल में छुपी सच्चाई और हिम्मत पर प्रेम से भर गया था,ये अपना जिस्म बेच कर मेरे खर्च चलाने की बात कर रही थी ,जो शायद उसके जीवन की एक मात्रा कमाई हो वो मुझपर खर्च करने को तैयार थी …
“और बदले में मुझसे क्या लेगी ..”मैंने मुस्कुराते हुए कहा
“हम्म्म्म”वो सोचने की एक्टिंग कर रही थी
“तू मुझे ऐसे ही फ़िल्म दिखाना और हा खाना बनाकर खिला दिया करना “वो खिलखिलाते हुए मेरे बाजू में आकर बैठ गई थी …
मैं उसकी इस निर्दोष खूबसूरती को देख रहा था,
“और ..बस इतना ही “
“ह्म्म्म तू बड़ा इंजीनियर बन जा सूत समेत सब वसूल लुंगी ..

”
उसने प्यार से मेरे बालो को सहलाया लेकिन उसकी बात में एक शरारत थी ,मैं उसके चहरे को घूरने लगा,फिर से वो मुझे बेहद ही तीव्रता से आकर्षित कर रही थी ,उसकी आंखे भी मेरे चहरे पर टिकी थी ,माहौल में फिर से एक अजीब सी शांति फैल गई थी की उसने मेरे गालो पर हल्की सी चपत लगा दी ,
“चल खाना बन गया है ,और साहब बनने की लिए खाना और पढ़ना दोनो ही पड़ता है ..”वो मुस्कुराते हुए उठी ,मैं भी मुस्कराने लगा ,लेकिन फिर मेरे दिमाग में डॉ की बात आयी ,15-20 दिन 14 हजार …

अध्याय 09
मैं शकील भाई दी हुई बुक को खोला भी नही था लेकिन मैं यूट्यूब में शेयर मार्किट से संबंधित वीडियो जरूर देख रहा था,एक सीनियर को इसमें बहुत ही इंटरेस्ट था मैंने उनके मुह से कई बार इसकी बात सुनी थी मैं उससे मिलने चले गया था,उसने मुझे बहुत कुछ बताया ,सबसे पहली बात ये की उसके लिए एक एकाउंट होना जरूरी है ,दूसरा की उस अकाउंट के जरिये डि-मेट अकाउंट खुलवाना होगा,उसका अपना प्रोसेस होता है और काम से कम 6 सप्ताह पुराना अकाउंट होना चाहिए,एक चेक बुक लगेगा,कम से कम 10 हजार से शुरू करना सही रहेगा,पहले 1 साल बस बैठ के वाच करना सही रहता है या फिर थोड़े थोड़े पैसे इन्वेस्ट करना,दुनिया और देश में होने वाली सभी चीजों का प्रभाव किसी ना किसी रूप में मार्किट पर पड़ता है ,सबसे ज्यादा प्रभाव राजनीतिक फैसलों,आर्थिक नीतियों ,और मौसम का पड़ता है उसके अलावा कंपनियों की अलग अलग नीतियों का भी उसपर प्रभाव पड़ता है …
अलग अलग लोग ,अलग अलग तरीके से मार्किट में सक्रिय रहते है,कोई इंट्राडे ट्रेडिंग करते है तो कोई शर्ट टर्म तो कोई लांग टर्म की ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट करते है ,ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट देखने में एक जैसे है लेकिन फिर भी सैद्धान्तिक रूप से अलग अलग है,वही मार्किट सिर्फ एक टाइप का नही है ,शेयर मार्किट में ही कई चीजों पर ट्रेडिंग होती है ,जैसे शेयर ,ऑप्शन,फ्यूचर,मिचुअल फंड आदि इसके अलावा,कमोडिटी और फॉरेक्स भी अपनी तरह के मार्किट है ,भारत में दो सबसे बड़े और सरकारी मार्किट है NSE और BSE …
अब ये सब हमे ही डिसाइड करना होता है की आखिर किस तरह का ट्रेडिंग करना पसंद करेंगे या इन्वेस्टमेंट करना ,ट्रेडर या इंवेरस्टार के अलावा यंहा ब्रोकर भी होते है जिनके माध्यम से क्यो बंदा अपना ट्रेड करता है ,इसके अलावा ब्रोकरेज हाउस भी होते है ,और कई तरह के कोर्स भी प्राइवेट और सरकारी संस्थानों के द्वारा करवाये जाते है ...तो ये चूस करना सबसे जरूरी होता है की आपको किस मार्किट में और कैसा ट्रेड करना है ….

मैं जानकारियां लेकर तो आ गया था लेकिन अब मेरे दिमाग का कीड़ा मुझे बुरी तरह से काँटेने लगा था ,आखिर मुझे क्या करना है ,लेकिन सबसे पहले जरूरी था की मुझे एक अकाउंट चाहिए था जो की कम से कम 6 सप्ताह पुराना हो और जिसमे 10 हजार हो साथ ही साथ उसका एक चेक बुक मेरे पास हो …
मुझे एक ब्रोकरेज फार्म भी डिसाइड करना था जो कम ब्रोकरेज में अच्छी फैसिलिटी देता हो ,उन सबके लिए मेरे पास समय था ,समय नही था तो दो चीजों के लिए एक था काजल का इलाज दूसरा मेरा एग्जाम …
मुझे रूटीन चेकअप के लिए काजल को ले जाना था ,मैं घर पहुच गया .काजल पहले से ही रेडी थी ,हम साथ चल दिए थे …
काजल बाहर बैठी थी ,डॉ ने पूरी चेकअप करने के बाद उसे बाहर बैठा दिया था ..
“पैसे का इंतजाम हुआ की नही ..??”
“हो रहा है सर 14 हजार मेरे जैसे के लिए बड़ी रकम होती है ,”
“हम्म 10 -15 दिन का ही समय है हमारे पास ,जल्दी टेस्ट नही हुआ तो प्रॉब्लम हो सकती है मुझे कुछ संभावना है उसे दूर करना जरूरी है,वरना बिना जाने अगर कोई दवाई चला दु तो साइड इफेक्ट भी हो सकता है जैसा पहले डॉ ने गलती किया था ,”
“जी सर मैं कोशिस कर रहा हु ,अभी उसकी तबियत कैसी है …”
“दवाइयों के भरोसे चल रही है ,दवाइयां बंद हुई तो फिर से खांसने लगेगी और खाँसना उसके लिए घातक है ,मुझे रिपोर्ट चाहिए उसके बिना कोई बड़ा डिसीजन नही कर सकता …”
मैं गंभीर हो गया था ..
“मैं कुछ करता हु सर “
मैं वँहा से निकल आया था…
************
मैने काजल को घर में छोड़ दिया था ,
“कहा जा रहा है”
“आ रहा हु काम से “
मैं निकल गया ,शाम होने को थी और दिमाग में बस पैसा ही पैसा चल रहा था,मैं शकील भाई के पास चला गया था …
“क्या हुआ बे छोटे कैसे मिलने आ गया ..”
“भाई मैंने आपकी दी हुई पुरस्तक पड़ी और मुझे कुछ चीजे समझ आयी है वो ही बतलाने आया हु “
उसने मुझे पहले तो एक बार घूरा ..
“इतनी जल्दी पूरी पढ़ ली ..”
“समझ ली समझने में समय नही लगता मुझे ,मैं तो ऐसी एक पुरस्तक एक रात में भी पढ़ लेता हु,इंजीनियर हु ना “
उसने और उसके साथ खड़े भोला ने बड़े ही आश्चर्य से मुझे घूरा..
“अच्छा तो अब क्या ??”
“कुछ नही एक अकाउंट खुलवाना होगा मेरे नाम से ताकि मैं अब जो सीखा हु और जो सिख रहा हु उसका प्रेक्टिकल कर सकू,”
“कितने पैसे लगेगेंगे ??”
“वही कोई 30 हजार ,आप चाहे तो और भी दे सकते है लेकिन मैं चाहता हु की अगर घाटा भी तो अभी इतने का ही हो जैसे जैसे मुझे समझ बढ़ती जाएगी आप पैसा भी बढहा देना ,और साथ ही और लोगो का अकाउंट भी खुलवा देना ,वो मैं कर लूंगा ,एक कोर्स भी कर सकता हु आने वाले समय में जिससे मैं और भी लोगो को सीखा कर इस धंधे में ला सकते है …”
“ह्म्म्म पैसा तेरे अकाउंट में होगा तो मुझे क्या फायदा होगा ..

”
मैं हल्के से हँस पड़ा
“क्योकि पैसा आपका होगा,और मेरे पास उसका पूरा हिसाब किताब होगा,अब दूसरा अभी कोई बड़ा इन्वेस्टमेंट नही करेंगे थोड़े थोड़े से ही शुरू करेंगे तो कम से कम एक साल तो लगेगा अच्छे से समझने के लिए की कोई बड़ा रिस्क लिया जा सके …”
वो मेरे अंदर ना जाने क्यो ढूंढने की कोशिस कर रहा था..फिर उसने अपना फोन उठाया और मेरे द्वारा बताई गई जाकारी एक दूसरे आदमी को बताई ...साथ ही साथ दूसरा आदमी कुछ बोल रहा था शकील बस सर हिला रहा था ..उसने फोन रखा ..
वो फिर से मुझे घुरा मेरी फट तो रही थी लेकिन फिर भी मैं शांत ही बना हुआ था..
“ह्म्म्म शर्मा जी तो कह रहे थे की अकाउंट खोले कुछ दिन होना जरूरी है तभी ट्रेडिंग शुरू की जा सकती है …”
यानी शर्मा इसका कोई फाइनेंसियल एडवाइजर था ,साले ने फिर मुझे क्यो धकेला था यंहा ..
“जी भाई ..इसलिए तो आपसे पैसे मांग रहा हु पैसे ही नही होंगे तो फिर कैसे अकाउंट खुलवाऊंगा ..”
“अबे तो वो तो हजार रुपये में भी खुल सकता है बिना पैसे के भी खुल सकता है ….”
मैं सोच में पड़ गया था लेकिन फिर दिमाग लगाया
“जी बिल्कुल खुल सकता है ,मेरे खुद का अकाउंट जीरो बेलेंस वाला है ,लेकिन भाई वो स्टूडेंट वाला अकाउंट था,और सरकारी बैंक में था,हमे अभी एक प्राइवेट बैंक का अकाउंट खुलवाना सही रहेगा क्या है ना वँहा से काम जल्दी होता है ,तो कम से कम कुछ पैसे तो उसमे होने चाहिए ...और जब मैं किसी ब्रोकरेज वाले से संपर्क करू तो मेरे अकाउंट में भी पैसे होने चाहिए ना …”
उसने भोला को देखा,भोला के चहरे से साफ पता लग रहा था की उसे कुछ भी घंटा समझ नही आ रहा है ..
“देखा बे भोला ,पढ़े लिखे आदमी के साथ काम करने का यही फायदा होता है साले ने 2 दिन में ही सब पता कर लिए,वो पुस्तक देख के मुझे तो लग रहा था की साला इसे कोई इस जन्म में तो नही पढ़ पायेगा ,;लौंडा तो हुसियार है ,जा 30 हजार ले के आ “
मेरी तो बांछे ही खिल गई थी ,मेरे लिए असंभव सी चीज संभव हो रही थी,मैं कितने परेशानी में था 14 हजार को लेकर लेकिन अब मेरे अकाउंट में 30 हजार होने वाले थे ,साला अगर मैं 50 बोलता तो वो भी दे देता ,लेकिन मुझे उतना नही उड़ना नही था की खुद को ही सम्हाल नही पाऊ ,ये पैसे मुझे रखने भी थे और इसका हिसाब भी मुझे देना था .एक एक पैसे का हिसाब ..वही सबसे बड़ा चेलेंज मेरे सामने होने वाला था …

*********
शाम हो चुका था कोई 6 बज रहे थे ,मैं खुस था और अपने जेब में 30 हजार को भरे हुए मैं ,अपने चाल से थोड़ी दूर में चाय पी रहा था,तभी बनवारी आ गया ...बनवारी वही शख्स था जिसने मुझे यंहा लाया था ..
“क्या इंजीनियर साहब कैसे हो भई …”
मैंने उसे देखा यही वो शख्स था जिसके कारण मैं आज यंहा था ,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,जैसे मैं उसे धन्यवाद दे रहा था
“अच्छा हु अंकल “
वो खिलखिलाया ..

“अबे अब तो अंकल मत बोल,मेरा नाम है बनवारी ,तू बनवारी काका बोल सकता है ,सारा शहर जानता है की बनवारी एक रंडियों का दलाल है बस,”
“अच्छा ठीक काका ,..”मैं मुस्कराया
“ऐसे दुनिया क्या कहती है वो छोड़ दो लेकिन मेरे लिए तो आप देवता की तरह ही आये थे “
वो मुस्कुराया
“मैं देवता की तरह ही आता हु ,आज ही देख ले ,वो तू जिसके साथ रहता है ना काजल ,कितने दिनों के बाद धंधे में उतरी कोई ग्राहक नही मिल रहा था मैंने ले जाकर दिया है “
“क्या …??”
मेरे आंखों के सामने कुछ पलो के लिए तो अंधेरा ही छा गया,मैं जिसके लिए के सारे प्रपंच कर रहा था वो फिर से ..
“लेकिन उसका तो तबियत खराब है ..”
“अबे ये रंडिया है ,कैसे भी हो लोगो को अपने ऊपर कुदवा ही लेती है ,आज 3-4 ग्राहक आ जाए तो उसका भी 3-4 सौ बन जाएगा ..”
3-4 सौ बस मेरे दिमाग में बात किसी वज्रपात की तरह कौंध गई, …उसके लिए वो इस कंडीसन में 3-4 लोगो के साथ
“क्या हुआ ..”
मैं उसे अजीब से निगाह से देखने लगा ,
“वो कितना लेती है एक बार का “
वो जोरो से हंसा ..
“तुझे कितना बताया था उसने ...अबे ये सब सस्ती रंडिया है यंहा आने वाले 50-100 रुपये भी दे दे तो बहुत है ,अब वो लड़कियों के ऊपर है की वो कितना वसूल ले ,हा उसमे से आधा दलाल का जैसे अभी 1 ग्राहक मैंने भेजा है 100 देगा तो 50 उसके 50 मेरे …”
मैं चाय वही पटक कर जाने लगा ..
“अबे कहा जा रहा है छोरे अभी तो ग्राहक उसके साथ होगा ,सुन ...अबे सुन “
वो मेरे पीछे भागा ..
“अबे क्या कर रहा है क्या हुआ बोल तो सही …”मेरा चहरा लाल था,पता नही मेरे दिमाग में क्या क्या चल रहा था,मैं गुस्से से भरे हुआ था साथ ही दुख भी तेज थी ,मैं नही चाहता था की काजल अभी किसी के साथ भी इस हालत में कुछ करे ,,उसने ऐसे भी 1 महीने का रेस्ट लेने की बात कही थी और अभी मुश्किल से 6-7 दिन ही हुए थे …
“अबे क्या हुआ तुझे कोई तमाशा मत खड़ा कर देना भाई .मेरी जान में बन जाएगी “
मैंने बनवारी को देखा
“उसकी तबियत खराब है अभी ,और कोई ग्राहक लाने की कोई जरूरत नही है ,एक महीने वो कोई धंधा नही करेगी “
“तुझे बहुत फिक्र हो रही है लड़के उसकी “
मैं लाल आंखों से उसे घूर रहा था
“हा हो रही है ,अब और कोई ग्राहक नही समझे “
मैंने कड़े शब्द में उसे कहा ..
वो भी डर कर सर हिलाने लगा..
“लेकिन अभी जो चला गया है उसे तो वापस आने दे ..”मैं चाल के दरवाजे में खड़ा था ,मेरे सामने ही दूसरे माले में वो कमरा था जंहा मैं और काजल रहते थे,मैंने एक बार उसे देखा अभी वो बंद था..
मेरा गुस्सा थोड़ा कम हो गया था ..
“ह्म्म्म ठीक है ..”मैंने सर हिलाया और दरवाजे के बाहर खड़ा बने एक पान ठेले में खड़ा हो गया...

अध्याय 10
दरवाजा खुला तो मैं गेट से अंदर आया,वो कोई मजदूर जैसा शख्स बाहर निकला जो दिखने ही गंदा लग रहा था,काजल भी उसके साथ बाहर निकली ,बहुत थकी हुई लग रही थी ,चहरा जैसे बुझ गया हो ,उसने नीचे देखा और हमारी नजर मिली ,उसके होठो में एक फीकी सी मुस्कान आई ..पूरा चाल ही इस समय अपने पूरे शबाब पर होता था,शाम से ही शराब के नशे में चूर लोगो का आना जाना शुरू हो जाता था,चारो तरफ बस शोर ही शोर होता था,कई गंदी समझे जानी वाली गालियां हवा में जैसे घुली हुई थी ,वैसे ही शराब की बदबू भी अधिकतर देशी शराब की तेज बदबू कही से भी आती हुई मिल जाती थी,कभी कभी किमाम में लिपटा हुए पान और साथ में मिलाए गए सिगरेट के धुंए की बदबू भी आ जाती थी ..
मैं ऊपर चल दिया…
मैं कमरे के अंदर आया,साथ ही वो भी आ गई और कमरा बंद कर दिया,बाहर का शोर थोड़ा कम हो चुका था ,मैं उसे देखे जा रहा था,वो अपने श्रृंगार में थी ,होठो में लाल गाढ़ी लिपिस्टिक थी,हाथो में कुछ सस्ती लेकिन चमकीली चूड़ियां,बाल बिखरे हुए थे,और एक सस्ती चमकीली लाल रंग की साड़ी,देखकर लग रहा था जैसे तैयार तो ये बहुत पहले हुई थी लेकिन फिर जब किसी ने यौवन को निचोड़ा था उसके बाद फिर से तैयार हुई हो...साड़ी जल्दी जल्दी में पहनी लग रही थी ,उसने मुझे देखा उसके चहरे में मुस्कान गहरा गई ,उसने अपने साड़ी में दबे एक नोट को निकाल कर मेरे सामने लहराया …वो 500 का एक नोट था..
“देख रे छोरे मेरे 1 घंटे की कमाई ,साला आया तो 100 रुपये में करने के लिए था लेकिन काजल ने अपना जादू चलाया और जेब खाली करके गया …”वो हँसते हुए मेरे पास आ रही थी वो मेरी पहुच में थी की …
‘चटाक ‘
एक जोर का चांटा मैंने उसके गालो पर दे मारा ,ये मेरे अभी तक के दुख का निचोड़ था,वो सीधे ही बिस्तार में जा गिरी ..
वो आंखे फाड़े मुझे देख रही थी,अभी तक उसने मुझे एक सीधे साधे लड़के के रूप में ही देखा था …
“क्या जरूरत थी तुझे ये सब करने की ,जानती है ना की तेरे लिए आराम कितना जरूरी है ,और ये 500 का नोट क्या दिखा रही है मुझे,मैं नही आता तो तूने तो बनवारी से 3 ग्राहकों का सौदा कर ही लिया था ,सिर्फ 300 के लिए जिसमे तुझे बस 150 मिलते तूने इतना भी नही सोचा की मैं कैसे कैसे तेरा इलाज करवा रहा हु,अरे करना ही है धंधा तो पहले ठीक हो जा फिर कर लेना मैं कौन होता हु रोकने वाला लेकिन अभी ….इस हालत में वो भी 3-3 जानवरो के साथ “
मैं चिल्लाते चिल्लाते कब रो पड़ा मुझे खुद ही पता नही चला,मैं रोते रोते बिस्तर में बैठ गया था ,वो थोड़ी देर बस मुझे देखती रही ..
“तो बनवारी ने तुझे सब बता दिया इस साले बनवारी की तो मैं ..”
वो बाहर जाने वाली थी की मैंने उसका हाथ पकड़कर खिंचा,अब वो बिस्तर में बैठी थी जबकि मैं उसके सामने खड़ा था,
“कही नही जाना है और मैंने से कह दिया है की एक महीने तक कोई ग्राहक नही “
उसके चहरे में भी गुस्सा आ चुका था ..

“साले तू खुद को समझता क्या है ,कौन है तू मेरा ….?? रंडि हु रंडी ही रहने दे ,बहन या दोस्त बनाने की कोशिस मत कर “
वो खुद भी बोलते हुए सिसकने लगी थी …
मैंने अपने को थोड़ा सम्हाला
“तेरा इलाज हो जाए फिर जो चाहे कर लेना ,अभी आराम कर “
उसने मुझे घुरा ..
“और इलाज कैसे होगा मेरा ,100 रुपये कमाने के लिए ना नंगी होकर शराबियों के साथ सोना पड़ता है मुझे ,यही असलियत है मेरी..बीमार ,बुड्ढे सभी चढ़ते है मेरे ऊपर तब मैं रोटी खा पाती हु ,और तू मेरे इलाज की बात कर रहा है,जानती हु कैसे करवा रहा है तू मेरा इलाज ..अपनी पढ़ाई लिखाई छोड़कर तू शकील के चक्कर काट रहा है ,साले चूतिये जानता भी है वो कौन है ,वो तो पैसे के लिए अपनी बहन और माँ को भी बेच दे ,वो तेरी मदद करेगा,तू यंहा जो करने आया है वो कर मेरे कारण अपनी जिंदगी बर्बाद मत कर ,इन लोगो के चक्कर में मत पड़,भगवान ने मुझे जिस्म दिया है इसे बेचकर मैं कुछ ना कुछ कर लुंगी ,यही किस्मत है मेरी ..”
उसकी बाते मेरे दिल छू जा रही थी ,वो अब भी हल्के हल्के सिसक रही थी..
“किस्मत हम खुद बनाते है ,यू रोते रहने से कुछ नही होता …”
उसके होठो में एक तीखी व्यंगात्मक सी मुस्कान आ गई थी ..
“अच्छा…. तो वही तो कर रही थी मैं, अपना काम कर रही थी ताकि तुझे 14 हजार के लिए यू ना भटकना पड़े “मैंने बुरी तरह से चौका
“मैंने डॉ और तेरी बात सुन ली ,ये दुनिया तो किसी को मुफ्त में एक ग्लास पानी का भी नही देती रे,उसमे भी पुण्य कमाने की सोचते है साले ,भिखारी को एक रुपये देने के लिए भी पुण्य पाप का हिसाब लगाते है,और तू एक रंडी के लिए अपनी औकात से बाहर जाकर खर्च करने की सोच रहा है,साले तू रहेगा चुतिया का चुतिया ही …”
अब वो भी तेजी से सिसक रही थी,मानो खुद को रोने से रोक रही हो लेकिन रोक नही पा रही हो ...,मैं उसकी दशा को समझ चुका था इसलिए उसने धंधे में आने की सोची थी,मैं उसके बाजू में बैठ गया और अपने जेब से 30 हजार का बंडल निकाल आकर उसके हाथो में रख दिया …
“जिनके पास हौसले होते है ना वो कुछ भी कर जाते है ,और तू मेरी क्या है मुझे नही पता लेकिन जो भी है ….मैं तुझे ऐसे नही छोडूंगा,जो तेरे लिए जरूरी है वो मैं ले ही आऊंगा चाहे इसके लिए मुझे कोई भी रिस्क उठाना पड़े..”
वो कभी पैसे को तो कभी मेरे चहरे को देखती रही जो गर्व और आत्मविस्वास से भरा हुआ था ,उसका रोना बंद हो चुका था जबकि उसके चहरे में असीम आश्चर्य था ...
“मादरचोद ये पैसे कहा से लाया तू,शकील के पास गया था ना ,साले नशीली दवाई बेचकर पैसे लाया है,या दलाली शुरू कर दी तूने …”वो पैसे को छोड़कर मेरा कॉलर पकड़ कर हिला रही थी
“या कोई लड़की तो नही बेच दी तूने …”
मैं चुप.. मुस्कुराते हुए बस उसे देख रहा था..
“बोल ना मादरचोद कहा से लाया ये पैसे …”
“तुझे पैसे से मतलब कैसे आये छोड़ ना “
वो गुस्से से लाल होने लगी थी,लेकिन आंखे दर्द और आंसू से भरे थे..

“अगर ये पैसे गलत तरीके से लाया है तो मैं इसपर थूकना भी पसंद नही करूंगी ..”
“अच्छा और जिस तरीके से तू पैसे कमा रही थी वो बड़ा सही है ..”
उसने आश्चर्य से मुझे घुरा
“मादरचोद वो मेरी मजबूरी है ,लेकिन तेरी क्या मजबूरी आ गई है …”
“तू ….तू मेरी मजबूरी है “
वो मुझे देखते हुए दहाड़ मारकर रोने लगी ,उसका हाथ अब भी मेरे कॉलर को पकड़े हुआ था और रो रोते रोते मेरे सीने से सिमटने लगी थी,
“मादरचोद ,बहनचोद साल चुतिया…गांडू कही का ..”
वो मेरे सीने में अपना सर रख कर मेरे सीने को अपने मुक्के से मार रही थी …
मैंने उसे जोरो से दबोच लिया था जैसे उसे अपने बांहो में पूरी तरह से समा लेना चाहता था …
“चुप हो जा ,कोई गलत काम नही किया है मैंने इसके लिए ..बस थोड़ा दिमाग लगाया है और कुछ नही ..”
लेकिन वो चुप ही नही हो रही थी अब भी वो मेरे सीने को मार रही थी और मुझमें और भी घुलती जा रही थी,अब भी वो मुझे गंदी गंदी गालियां दे रही थी जो मुझे बड़ी ही प्यारी लग रही थी...मेरे चहरे में मुस्कान थे,आंखों में थोड़ा पानी ,उसके चहरे में ना जाने कौन से भाव थे लेकिन मुह में गली थी,और उसके आंखों का पानी मेरे शर्ट के भिगोने लगा था...
उसका मरना धीरे पड़ रहा था वही गालियां भी धीरे पड़ रही थी लेकिन बंद दोनो ही नही हो रहे थे…
“अब चुप भी हो जा ,नही करूंगा कोई गलत काम ,कसम खाता हु तेरी “
मैंने हल्के से कहा ..
“चुप कर मादरचोद ..बड़ा आया मेरी कसम खाने वाला”उसने रोते हुए कहा और मेरे सीने पर एक मुक्का मारकर मेरे सीने में और भी जोरो से अपने को सटा लिया…..

अध्याय 11
दूसरे ही दिन काजल का टेस्ट हो चुका था उसमे 16 हजार खर्च हो गए,वो तो बड़ी ही बेचैन थी की आखिर उसे हुआ क्या है,लेकिन मुझे कुछ कुछ समझ आ रहा था,रिपोर्ट तो आने वाले दिन में मिलने वाला था,मैं बैंक जाकर अपना खाता भी शुरू कर दिया,अब मेरे सामने जो सबसे बड़ा काम था वो था अपनी पढ़ाई करना,भला हो की मैंने कभी कोई बुक नही खरीदी ,..
असल में मैं लाइब्रेरीज़ से ही बुक्स उठा कर नोट्स बना लिया करता था,और नोट्स को रिविसन करना आसान होता है ,मैं 1 घंटा निकाल कर शकील की दी हुई बुक भी पढ़ रहा था और उसके भी नोट्स बनाने शुरू कर दिया था,मेरे पास मेरा लेपि था जिसमे मैं काजल को भी थोड़ा थोड़ा टाइपिंग ,नेट सर्चिंग के और कभी कभी शेयर मार्किट के बारे में भी बताता रहता था….पैसे की मुझे फिक्र नही थी क्योकि अभी 6 सप्ताह बाद ही कुछ हो सकता था,मैंने अपने पास मौजूद संसाधनों का भरपूर उपयोग किया था,कहते है ना की जिसके पास सुविधा नही होती उन्हें ही इसका उपयोग समझ में आता है ,वही मेरे साथ भी था,...
परीक्षा के दो तीन पहले काजल ने मुझे माँ वाली फिलिंग देना शुरू कर दिया था,वो मुझे कुछ काम भी नही करने देती थी ,खुद ही वो मेरे झूठे बर्तन भी धो रही थी,जब मैं कुछ बोलता तो बस ये कहती ..

“तू बड़ा साहब बन जा ,तो तुझसे पूरा वसूल लुंगी …”
जब वो ये बोलती थी तो उसके आंखों में एक अजीब सी चमक आ जाती थी ,जैसे इस ख्वाब को वो खुद ही मेरे लिए देख रही हो …
जाने कहा से मेरे लिए गाय का देशी दूध ला रही थी ,उसमे केशर और बादाम का तेल डालकर मुझे पिलाती थी ,ताकि मेरा दिमाग तेज हो जाए ..
उस पगली को मैं कैसे समझता की इन सब की मुझे आदत ही नही है,कभी किसी ने इतना प्यार मुझपर नही दिखाया था ,मेरी माँ ने बस प्यार ही दिखाया लेकिन कुछ कर ही नही पाती ,उतना संसाधन ही नही था उसके पास,पिता को रोजी रोटी से फुरसत नही थी,दो वक्त का खाना उन्होंने मुझे खिलाया यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी ….
उनके बारे में सोच कर कभी मेरी आंखे भी भर जाती थी ,तो वो काजल होती जो मेरे आंखों से आंसू पोछकर मुझे हौसला दिलाती ,कहती की ..
‘ऐसे रो कर अपने माँ बाप को खुस कर पायेगा क्या गांडू,अच्छे से पढ़ाई कर बड़ा साहब बन फिर अपने माँ बाप को राजा रानियो की तरह रखना ‘
वो मुझे गांडू या चुतिया ही कहती थी लेकिन इतने प्यार से की मैं उसके लिए प्रेम से भर जाता था,जब घंटो एक जगह में बैठे हुए और बाहर से शोर से मैं थक जाता था ,तब वो मुझे अपने गोद में सुला लेती और प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरती …
इसे दुनिया वाले रंडी ,छिनाल या ना जाने क्या क्या कहते थे लेकिन मेरे लिए तो ये माँ ,बहन और एक सच्ची दोस्त थी...जिसे मुझसे कुछ भी नही चाहिए था लेकिन अपना सब कुछ मुझपर लूटने को तैयार थी …….

मेरी परीक्षाएं उम्मीद से भी बेहतर गई ,और परीक्षा के बाद मैं पूरा ध्यान मार्किट को ही समझन में लगाना चाहता था,काजल का टेस्ट रिपोर्ट भी डॉ को दिखा चुका था,हम दोनो ही आपस में बाते भी हो चुकी थी ,दवाइया महंगी थी लेकिन मेरे पास पैसा भी काफी था,एक महीने की सेलरी भी मिल चुकी थी ,कुल मिलाकर सब ठीक ही चल रहा था…
और जब आपके साथ सब ठीक हो तो लोगो को मिर्ची लगनी शुरू हो जाती है ,ऐसा ही कुछ काजल और मुझे खुश देखकर चाल में रह रही बाकी लड़कियों को लगने लगा था,साथ ही मौसी के भी कान भरने वाले पैदा हो गए थे……
काजल से सबसे ज्यादा जलने वालो में उसके बाजू के ही कोठी की उमराव बेगम थी ,उम्र में कोई 25 की थी ,काजल से उसका हमेशा ही कम्पीटिसन सा रहता था,क्योकि उम्र का खास अंतर नही था दूसरा की वो भी काजल जितनी ही खूबसूरत थी ,लेकिन काजल की तबियत खराब होने से काजल के ग्राहक उसके पास जाने लगे थे ,कभी कभी काजल को ये डर भी लगता की कही इतने दिन के गेप के कारण उसका धंधा मंदा ना पड़ जाए …
उमराव खुश थी क्योकि उसका धंधा ज्यादा चल रहा था,काजल और उमराव जैसी खूबसूरत और जवान लडकिया इस जगह मिलना मुश्किल था,इसलिए वो ज्यादा पैसे भी कमा लेते थे,लेकिन फिर भी उमराव के जेहन में मैं कांटे के तरह चुभने लगा था,और मेरी क्या औकात थी की मैं किसी के जेहन का कांटा बनू लेकिन जो प्यार मेरे और काजल के बीच था वो वँहा कई लोगो के सीने में चुभने लगा था ,और उनमे से सबसे आगे उमराव ही थी …
इस बात को लेकर कई बार उसकी और काजल से कहा सुनी हुआ जाती थी ,दोनो जी खोलकर लड़ते भी थे ,और मेरे आने के बाद काजल मुझे सब कुछ बताती भी थी,मैंने लाख कहा की जाने दो इनकी बातो को लेकिन काजल तो काजल ठहरी …
एक दिन ऐसा ही था,मैं अपना आखिरी एग्जाम दिला कर वापस आया था ,आते आते रात हो गई थी क्योकि लास्ट एग्जाम था और दोस्तो के साथ थोड़ा समय बिता लिया था …
दरवाजा खुला और सामने काजल का मायूस हुआ मुह था ..
“क्या हुआ फुग्गा(गुब्बारा) क्यो फुला हुआ है “
उसकी आंखे कुछ ज्यादा बड़ी हो गई थी …
“वो उमराव साली ….”उसने गंदी गंदी गालियां देना शुरू कर दिया था.मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और उसके सर में एक किस किया ..
वो अचानक ही चुप हो गई ..
“क्यो उसकी बात में आती है ..”
“नही आती लेकिन वो बोल भी तो ऐसा ही कुछ देती है ,आज कहती है की मैंने तुम्हे अपनी कच्छी और ब्रा में फंसा रखा है,साली छिनार सबको खुद के जैसा संमझती है ..”
वो थोड़ी रूवासु हो गई थी ..
“लेकिन तेरी कच्छी और ब्रा तो इतनी छोटी है ,उसमे मैं कैसे फंस जाऊंगा ..बोलना था ना उसे ये ..”
वो मुस्कुराई ..

और मेरे सर में एक चपात लगा दी
“साले गांडू ,उसका मतलब की मैं तुझे अपनी चुद के चक्कर में फंसा रखा है “
“लेकिन मैं कब तेरे चुद का चक्कर काटता हु “
ऐसा नही है की मुझे समझ नही आ रहा था की वो क्या कहना चाह रही है लेकिन बस मैं उसे मुस्कुराते हुए देखना चाहता था ..
उसने अपना माथा पकड़ लिया ..
“छि तू पूरा चूतिये का चुतिया ही रहेगा . अब छोड़ मुझे ,चल जल्दी खाना खा ले ..
मैंने उसे और भी जोर से जकड़ लिया
“अरे बता तो सही की वो क्या कह रही थी जिसके कारण तेरा फुग्गा फुला हुआ है “
वो थोड़ी सीरियस हो गई
“वो ये कह रही थी की मैंने तुझे फंसा के रखा है ,वही सब करके जिसके लिए हमे रंडी कहा जाता है …”वो सच में सीरियस हो गई थी ,उसके आंखों में पानी की कुछ बूंदे आ गई थी ,और शायद पहली बार उसने किसी अभद्र शब्द का प्रयोग किये बिना ये कह दिया की रंडी होना क्या होता है …
मैंने उसे अपनी ओर घुमा लिया था ,उसकी आंखों में झांकने की कोशिस कर रहा था लेकिन वो नीचे देख रही थी ,मैंने उसकी टोड़ी को उठाया वो मुझसे नजर भी नही मिला पा रही थी ,
“उसने कहा और तू दुखी हो गई ,हम जानते है की हमारे बीच का रिश्ता क्या है …”
उसने नजर उठाई और मेरी आंखों में देखा
“क्या है रे ..??? क्या है हमारे बीच का रिश्ता..??”
उसकी इस बात से तो मैं भी निरुत्तर हो गया था ..
“तू कितना शरीफ है ये मैं जानती हु लेकिन दुनिया तो यही देखती है की तू एक रंडी के साथ रहता है ,उसके लिए इतना करता है ..तू दिल का साफ है लेकिन दुनिया संमझती है की तू इसके बदले मेरे साथ वही करता होगा…..रंडियों का एक ही रिश्ता होता है वो है ग्राहक और रंडी का ,सभी तुझे मेरे एक ऐसे ग्राहक के तरह देखते है जो मेरे साथ ही रहता है ,...”
उसकी आंखे भीग चुकी थी ,मेरे पास उसे देने के लिए कोई उत्तर ही नही था क्योकि मैं जानता था की वो जो भी कह रही थी वो सभी सच था,मुझे अभी तक कई लोग कह चुके थे की तू काजल की जमकर लेता होगा,
मैंने एक गहरी सांस ली और उसे अपने बांहो में भर लिया ,वो बीच मेरे सीने में खो चुकी थी …
“लोगो को कहने दे ना क्या फर्क पड़ता है हमे तो पता है ना...और हम उनकी चिंता क्यो करे “
“मुझे अपनी कोई चिंता नही है मैं तो हु ही रंडी लेकिन तू..”
“अरे मेरी चिंता करना छोड़ मुझे कुछ नही होगा “
“ह्म्म्म दुनिया को लगता है ये तो ठीक है वो इसके अलावा और सोच भी क्या सकते है लेकिन ...लेकिन क्या तुझे भी “
वो मुझे देखने लगी...हमारी आंखे मिल चुकी थी
“क्या तुझे भी लगता है की मैंने तुझे फंसा लिया है,”उसके आंखों में कई सवाल खौल रहे थे ..

मैं उसकी आंखों में देखने लगा ,उसे कैसे कहु की मैं फंसा नही था,हा उसने तो मुझे नही फसाया था लेकिन मैं जरूर फंस चुका था,शायद उसके स्नेह में ही इतनी शक्ति थी की कोई बंधन तो हमारे बीच था ,
“तुझे क्या लगता है,?? मुझे ऐसा लगता होगा”
मैंने सवाल के जवाब में सवाल किया
“क्या पता,अब किसी पर जल्दी भरोसा नही होता “
वो पहली बार ऐसे सख्त दिखी थी लेकिन उसकी इस बात ने मेरे दिल में जोर का करेंट दे दिया...क्या अब भी उसे मुझपर भरोसा नही है ??
मैं बस स्तब्ध सा उसे देखता रहा ,शायद उसने मेरी भावनाओ को समझ लिया था ..
वो मेरे चहरे को अपने हाथो से पकड़ कर अपने पास खिंची,मैं उससे थोड़ा दूर हटने को हुआ ..
“मेरा वो मतलब नही था,लेकिन मैंने जीवन में इतने धोखे खाये है की विश्वास कही खो सा गया है…”
मेरे दिल में ना जाने कैसी गहरी पीड़ा जागी थी मैं वँहा से हटना चाहता था,
लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया था ..
“मुझे माफ कर दो राहुल “
शायद पहली बार उसने मेरा नाम सही तरीके से लिया था …
“माफ कर दो ,मुझे सच में नही पता था की मैं क्या कह गई,देख उस उमराव ने मेरे दिमाग में क्या भर दिया “
वो मेरा शर्ट पकड़कर रोने लगी थी मैंने उसे सहारा दिया ,अपने बांहो में लगाया लेकिन …
मैं ठंडा ही था,प्यार की उष्णता कही खोने लगी थी …….

अध्याय 12
परीक्षा के बाद पूरा ध्यान मैं मार्किट को वाच करने में लगा रहा था,काजल मेरे व्यवहार से थोड़ी उदास थी ,क्योकि मुझे लगाने लगा था की वो मुझपर विस्वास नही करती ,
वो मुझे अपने तरीके से समझा रही थी लेकिन मैं फिर भी उदास ही था और मुझे देखकर वो भी उदास हो जाती थी ….
दो दिन अनबोला ही बीत गया था ,
मैं अपने बिस्तर में बैठा हुआ लेपटॉप सामने रखा हुआ मार्किट वाच कर रहा था,ये बहुत ही एक्साइटिंग था क्योकि मैंने कभी पैसे का ऐसा गेम नही देखा था,देखते ही देखते शेयर के भाव बढ़ते और गिरते थे,मैं उसी गणित को समझने की कोशिस में लगा हुआ था,
काजल अपने बिस्तर में पेट के बल लेटे हुए मुझे ही निहार रही थी ..
“सोच रही हु की अब धंधा शुरू कर दु ..”
“ह्म्म्म”
“क्या ह्म्म्म हा या ना कुछ तो बोलो “
“जो तुम्हारे मन में आए तो करो “
मैंने रूखे हुए स्वर में कहा ,वो उठ बैठी ..
“क्या हो गया है रे तुझे ,आजकल देखता भी नही मुझे “
मैंने उसे घूर के देखा
“काम कर रहा हु डिस्टर्ब मत कर “
“अच्छा बड़ा आया काम करने वाला “
मैं चिढ़ गया था ,लेकिन बस मैंने उसे घुरा
“क्या देख रहा है अभी तक नाराज है उस एक चीज के कारण ..”
मेरा भी धैर्य टूट गया था
“एक चीज ...तूने क्या कहा था याद भी है ,तुझे जब मुझपर विस्वास ही नही है तो …”
मैं फिर से लेपटाप को देखने की कोशिस करने लगा
वो मुस्कुराती हुई अपने बिस्तर से नीचे उतर कर मेरे पास आकर बैठ गई ,और मुझे देखने लगी ..
मुझे उसका ऐसा देखना बड़ा ही अजीब लग रहा था..

“अब ऐसे क्यो देख रही है “
“देख रही हु की कही तू प्यार व्यार तो नही करने लगा मुझसे …”
मैंने फिर से उसे देखा
“तुझसे कौन प्यार करेगा ..”
मैंने बुझे हुए स्वर में कहा ..
उसके होठो में एक फीकी सी मुस्कान तैर गई ..
“सही कहा ,रंडी से कौन प्यार करेगा “
वो उठ कर बाहर चले गई ,मुझे अचानक ही अपने कहे पर ग्लानि हुई ,मैने ये क्या कह दिया था उसे मैंने खामखा ही उसे दुखी कर दिया था,..
मैं भी उठकर उसके पीछे चल दिया,ये दोपहर का वक्त था और यंहा आने जाने वालो की संख्या थोड़ी कम थी,वो कमरे के सामने खड़ी नीचे देख रही थी ,उसके बाजू में ही बगल कमरे वाली शबनम थी ,दोनो बात कर रहे थे मैं थोड़ा ठिठक गया …
“क्योकि री काजल तू धंधा कब शुरू करेगी ,साली लगता है तूने उस चिकने को ही अपना मरद बना लिया है ..”
शबनम ने बड़ी अदा से ये कहा था..
“चुप कर छिनाल “
काजल ने बड़ा ही छोटा सा जवाब दिया ,सूरज की धूप उसके चहरे पर पड़ रही थी और वो बड़ी ही खामोश लग रही थी,नीचे से वही पुराना ग्राहकों और रंडियों का शोर सुनाई दे रहा था..
काजल की बात सुनकर शबनम जोरो से हँस पड़ी
“लगता है तू ही उस चिकने की मोहोब्बत में फंस गई है ,बच कर रहना ये साला प्यार मोहोब्बत बस फोकट में चोदने के बहाने होते है इन मर्दों के लिए ..”
शबनम फिर से जोरो से हँसी ..
काजल ने बस उसे घूर देखा ..
“मेरा राहुल ऐसा नही है समझ गई अब चुप कर अपना मुह वरना यही तोड़ दूंगी “
काजल की बातो में बेहद ही गुस्सा भरा हुआ था शबनम भी थोड़ी डर गई
“अरे भड़कती क्यो है ,और वो कब से तेरा राहुल हो गया,साली सभी से तो कह रही थी की ऐसा कुछ नही है ,मेरा राहुल ..वाह ..हमे क्या लेना देना तेरी जिंदगी है तू ही जान ,जिस दिन तुझे चूस कर छोड़ देगा ना उस दिन रोना साली ..हु ..”वो पलट कर दूसरे ओर चले गई और कुछ महिलाओं से बात करने लगी ,वही काजल अब भी आकाश में देख रही थी …
“मुझे माफ कर दो ..”मैं उसके बाजू मे जा चूक था
“किस लिए ..”
“तेरा दिल दुखा दिया ..”
“नही सच बोलने से अगर किसी का दिल दुखे तो कोई क्या कर सकता है ..तुमने तो सच ही कहा था..”
“लेकिन मेरा वो मतलब नही था ..”
उसने मुझे पहली बार देखा
“तो क्या मतलब था ..”
“मैंने बस ...मैंने बस यू ही कह दिया ,तुम तो प्यार करने के ही लायक हो ,और मेरे लिए तुम कोई रंडी नही ,मेरी ..”
वो पहली बार मुस्कुराई ..
“मेरी..???”
“मेरी मोटी काजल हो “मैंने हल्के से हंसते हुए कहा ,उसके मुह में झूठा गुस्सा आ गया और उसने मुझे हल्के से मारा …
“मैं भी उस दिन कुछ कह गई थी ,और मेरा भी ये मतलब नही था की मैं तुझपर भरोसा नही करती ,असल में मैं सिर्फ तुझपर ही भरोसा करती हु ..और तू भी मेरा ..”
वो मुस्कुराई …
“मेरा..??”मैं उसे अधीरता से देखने लगा था
“मेरा चुतिया राहुल है “
वो जोरो से हँस पड़ी ,मेरे होठो में भी एक मुस्कान छा गई थी ….

अध्याय 13
शाम का वक्त था काजल बार बार बाहर जाती फिर अंदर आती ,आज मैं दिन भर से घर में ही था और अपने लेपटॉप में ही घुसा हुआ था,मैंने नोट्स बनाने शुरू कर दिए थे,मार्किट का मुख्य रूप से 2 तरह से एनालिसिस किया जा सकता है,एक तरीका होता है ,उसके पुराने चार्ट को देखकर उसे टेक्निकल एनालिसिस कहा जाता है ,वही दूसरा तरीका होता है ,कंपनी की पूरी इनकम सीट को देखकर उसे फंडामेंटल एनालिसिस कहा जाता है,कई तरीके के साफ्टवेयर और अलग अलग तरीके के इंडिकेटर के माध्यम से सही के आसपास का अनुमान लगाया जाता है,100% की गारेंटी कोई भी नही देता लेकिन अगर 60% फायदा और 40% का घटा भी हो जाए तो बहुत होता है ,इसी 60-40 के रेशियो को लेकर मैं कई कंपनीज को अपनी वाच लिस्ट में डाल रहा था…
मैंने 20 कंपनियां सेलेक्ट की थी ,मुझे बस इनके बारे में सब कुछ जानना था,जो भी मैं अखबारों और मार्किट के मैगजीनस से जान सकू,इसका पूरा डेटा चार्ट मुझे पड़ना था साथ ही टेक्निकल एनालिसिस भी करनी थी ,उसके आधार पर मुझे फाल्स ट्रेडिंग करनी थी(बिना पैसे के ट्रेडिंग बस कागज में ) ..और देखना था की आखिर मुझे कितना फायदा होता है ,ताकि मैं आगे जाकर पैसे लगा सकू…
मैं अपने काम में व्यस्त था,काजल का भी मुझे कोई ध्यान नही रहा,आखिर वो झल्ला गई ..
“अरे बता ना धंधा करू की नही …”
उसने ऊंचे आवाज में बोला..मैं हड़बड़ाया हुआ उसे देखा ..
“मुझे क्या पता ..”
“क्या मतलब तुझे क्या पता ..साले तू अगर कमरे में रहेगा तो मैं कैसे धंधा करूंगी ,सच कहा था शबनम ने तू मुझे भूखा मार देगा ..”वो बेचैनी से कह रही थी ..
“तो ..”
“तो क्या शाम का समय है 2-3 ग्राहक तो लेने दे ..400-500 कमा लुंगी “
कितनी निर्दोषिता थी उसके अंदर कोई भी दिखावा नही था,जैसी वो थी बस वैसी हो थी,उसके लिए धंधा सही या गलत नही था बस धंधा था,ना उसे कोई डर था ना शर्म ,जबकि उसके धंधा करने की बात को सुनकर मैं थोड़ा घबराहट और शर्म महसूस करने लगा था …
“छोड़ ना बाद में कर लेना ,ऐसे भी अभी तो ठीक हुई है थोड़ा रेस्ट कर ले “
वो एक गहरी सांस लेकर मेरे बाजू में आकर बैठ गई ..
“ओहो और कितना रेस्ट करवाएगा मुझे ,कही मैं सब भूल ही ना जाऊ..”
उसने भोले पन से कहा
“ये भी कोई भूलने की चीज है क्या ..”मैं थोड़े आश्चर्य से बोल पड़ा..और वो हँसने लगी
“अरे चूतिये भूलने का मतलब है की आदत से हट जाना,अब रंडी हु तो चुदवाने की आदत तो रहनी चाहिए ना “
वो ये सब इतने सहजता से बोल जाती थी की मुझे कभी लगता ही नही था की अगर ये कोई सामान्य समाज में बोल दे तो हंगामा हो जाएगा ..
उसकी बात उसके मुह से बेहद ही सहज ही लगती थी …
मैं मुस्कुरा उठा..
“तो प्रैक्टिस में रहना चाहती है तू ..”
मुझे मुस्कुराता हुआ देख कर वो नकली गुस्सा अपने चहरे में ले आयी ,और मुक्के से मेरे बाजू को मारा ..
“तो तेरे कारण तो ऐसे अलसी ओ गई हु मैं ,दिनभर कोई काम नही करती ..

”
“ओ तो ये बात है ,आजा तुझे काम देता हु “
मैंने उसे लेपटॉप में देखने को कहा वो मेरे गोद में ही आके बैठ गई ..
“अरे मोटी ये क्या कर रही है ,कितनी भारी है तू ..”
वो खिलखिलाने लगी थी ,लेकिन उसका मेरी गोद में मचलना मेरे लिए बिल्कुल ही नया अनुभव था,भले ही मैं कितना ही शरीफ था या मैंने कभी काजल को ऐसे वैसे निगाहों से नही देखा था फिर भी मैं था तो एक मर्द जो पूरी तरह से जवान हो चुका था,गरीबी और बेबीसी ने मुझे कभी अपनी शारीरिक भूख के बारे में सोचने का मौका नही दिया था लेकिन इसका मतलब ये तो बिल्कुल भी नही था की वो थी ही नही ,वो तो अपने जगह में थी लेकिन बस काम की व्यस्तता से कभी बाहर नही आयी थी,उसका गूदेदार पिछवाड़ा जब मेरे लिंग से रगड़ खाया तो मैं स्तब्ध सा हो गया था,मेरे पूरे शरीर में एक करेंट सा लगा,और वो अकड़ने लगा,मैं घबराया,कही अगर काजल को इसका पता चल जाता तो वो मेरे बारे में क्या सोचती ,वो तो बिल्कुल ही निर्दोष सी अटखेलिया करती हुई मेरे गोद में आ बैठी थी लेकिन उसकी इस हरकत से मेरे अंदर क्या हो रहा था ये मैं उसे नही बताना चाहता था..मैंने उसे थोड़ा आगे किया और जमीन में आ गई लेकिन उसका पूरा शरीर मेरे शरीर से अब भी लगा हुआ था,उसने अपने को मेरे ऊपर और भी डाल दिया,वो तो जमीन में बैठी थी ,मेरे पैर के जमीन में पसरे हुए थे वो अपने पैरों को उस घेरे के अंदर लाकर फैला दिए थे,और लेपटॉप को अपने गोद में रखकर मेरे ऊपर गिर गई थी ,मेरा हाथ अपने ही आप उसके कमर पर लिपट गया था,वो अब पूरी तरह से मेरी बांहो में समाई थी ,अब उसका भी हंसना बंद हो गया था,वो लजा रही थी ,शायद उसे भी अपने औरत होने का अहसास वैसा ही हो रहा हो जैसा मुझे अपने मर्द होने का अहसास हो रहा था…
उसकी गोद में लेपटॉप था मैंने उसपर उंगलियां चलाने के लिए खुद को आगे किया ,मेरे शरीर के साथ साथ वो भी थोड़ी आगे हुई,
उसके गाल अब मेरे गालो के पास थे ,उसकी सौंधी सी खुश्बू से मेरे नथुने भरने लगे थे,
मेरा गाल उसके गालो पर हल्के से रगड़ खाया,मैंने अपना चहरा हटा कर उसे देखा,उसके आंखों में लज्जा और होठो में हल्की सी मुस्कान थी ,मेरा एक हाथ जो की उसके पेट पर था और उसके गदराये पेट के ऊपर सलवार कमीज के पतले कपड़े से उसे अनुभव कर पा रहा था,वो मानो मुझे उसके कांपने लगा था,उस हाथ की हल्की सी हलचल से काजल की सांसे तेज हो गई ,उसने एक गहरी सांस छोड़ी जो गर्म थी ,
मेरे माथे पर भी पसीना आ चुका था,दोनो ही जानते थे की ये क्या हो रहा है लेकिन एक अजीब सी सिचुएशन में फंसे थे,ना हममें इतनी ताकत थी की हम उसे रोक सके ,ना हम आगे ही जाने की हिम्मत कर सकते थे,हमारे बीच एक अजीब सी मर्यादा की दीवार थी,जो हम पार नही करना चाहते थे,उसके बाद भी हम ऐसे सिचुएशन में फंस जाते थे जो हमे ये बता देता था की एक औरत और मर्द हो और एक ही साथ रहते हो ,ना सिर्फ इतना बल्कि

ये भी की एक दूसरे को हम कितना पसंद करते है ,प्यार कहना गलत होगा क्योकि इसकी परिभाषा हमने अभी की नही थी ….
“बताओ ना “उसने हल्के से कहा
काजल की सांसे मेरे गालो से टकराई ,मैं जैसे किसी ख्वाब से जागा था लेकिन अभी भी नीद में ही था..
“क्या ??”
“जो बताने वाले थे..”
उसके चहरे में मुस्कान गहरा गई थी ,वो इतने प्यार से और धीरे से कम ही बात करती थी ,लेकिन जब करती तो मन करता की ….
उसे प्यार करू ..क्योकि और कुछ करने की मैंने सोचा ही नही था,और प्यार कैसे किया जाता है ये मुझे आता नही था………
“हा हा...तो ये ..अरे सामने देख ना “
वो मुझे ही देख रही थी ,मेरी बात से उसकी भी तंद्रा भंग हुई ..
मैं उसे समझने लगा लेकिन ये मेरे और उसके दोनो के लिए ही बेहद मुश्किल था,भला हो बनवारी का जिसने थोड़ी ही देर बाद दरवाजा खटखटाया था ….और काजल ऐसे उठी जैसे हमेशा से उठना चाहती थी लेकिन कोई शक्ति उसे रोक कर रखी थी……..

अध्याय 14
दरवाजे के बार बनवारी था ,पहले तो वो मुझे देखकर थोड़ा डरा फिर काजल को देखने लगा..
“अब बोल भी ना “काजल ने थोड़ा जोर लगा कर कहा ..
“वो ….”
उसने सब कुछ काजल को बताया साथ ही मैं भी सुन रहा था..
“ठीक है थोड़ी देर में आती हु ..”वो दरवाजा बंद करके मुड़ी..और मुझे देखने लगी
“जाऊ की नही “
मैं उसे क्या कहता मुझे समझ नही आ रहा था..
“नही जाएगी तो भी चल जाएगा “
उसे कोई बाहर ले जाने आया था शायद उसका कोई परमानेंट ग्राहक था ..
“तुझे तेरे पैसे भी तो देने है ..”
“मैंने मांगा है क्या ..??”
“तूने तो नही मांगा लेकिन शकिल को क्या बोलेगा ..”
“वो मैं देख लूंगा ..”
वो थोड़ी देर तक चुप ही रही ..फिर पलटी ,
“मैं तुझपर कोई बोझ नही डालना चाहती ,16 हजार कमा के दे दु तुझे तो मुझे भी चैन मिले..”
उसने चहरा दूसरी ओर किये कहा और तेजी से बाहर निकल गई ..
उसके जाने से मुझे एक अजीब से दर्द का अहसास हुआ ,ऐसा अहसास मुझे कभी नही हुआ था,शायद यही दर्द प्यार था,वो प्यार जो मेरे दिल में उसके लिए जन्म ले रहा था..
मैं भी उसके पीछे बाहर आया ,नीचे दो लड़के बनवारी से बात कर रहे थे,साथ में शबनम भी थी ,मैं उन लड़को को देखकर तुरंत ही छिप गया था,मैं उस लड़के को पहचानता था ,वो आकाश था (मेरे क्लास का एक रहीश लड़का )...
मैं थोड़ी देर बाद फिर से छिपकर देखा तो आकाश और उसका कोई दोस्त काजल और शबनम के साथ जा रहे थे…
मेरा दुख पहले तो थोड़ा कम ही था लेकिन अब वो और भी तेज हो गया था …
************
रात हो चुकी थी जब काजल वापस आयी …
मुझे देखकर मुस्कुराया और मेरे हाथो में 5 हजार रख दिए ..
“बड़े रहीस लवंडे थे साले ,एक एक को 5 हजार दिए ..मैंने भी उसे खुस कर दिया है,बोल रहा था की वो फिर से मुझे ले जाएगा …”
वो खुश होकर मेरे बाजू में बैठी मैं अब भी अपनी नजर उससे नही मिला पा रहा था और अपने लेपटॉप को देख रहा था..
“जानता है उसका घर कितना बड़ा था बड़ा सा बिस्तर ,बहुत मखमली था नरम नरम ..

”वो खुस थी की उसकी नजर मुझपर पड़ गई …
“क्या हुआ तुझे ..”
“कुछ नही ..”
“तू मेरे जाने से खुस नही है ना ..?”
“नही तो ..”
“रहने दे ..मुझे पता है की तू दुखी था,लेकिन क्या करे करना तो होगा ना काम ,इससे पहले की शकील को पता चले की उसका पैसा कहा गया ,उसके पैसे इकठ्ठे हो जाने चाहिए ..2 -3 बार और ले जाए साले तो अपनी तो लॉटरी लग गई समझो “
उसने मेरी बांहे पकड़ी और झूल गई ..
लेकिन मेरा अभी भी वही हाल था ..
उसने बड़े ही प्यार से मेरे बालो में हाथो को सहलाया ,
“जानती हु तुझे दुख हुआ होगा,लेकिन करना तो पड़ेगा ना काम है मेरा …”
पहली बार मैंने उसे नजर उठा कर देखा था ,वो हल्के से मुस्कुराई और मैं रोते हुए उससे लिपट गया..
ये रोना यू ही नही आया था,उसके जाने के बाद से ना जाने मेरे मन में क्या क्या नही चल रहा था,मुझे आज अपने गरीब होने पर इतना दुख हो रहा था जितना पहले कभी नही हुआ था,अपनी मजबूरी को मैं काजल को भी कैसे बताता की जिस लड़के के साथ वो गई थी वो मेरे ही क्लास में पड़ने वाला एक लड़का था,मुझे छिपाना पड़ा क्योकि अगर उसे ये पता चल जाता की मैं कहा रहता हु तो वो कालेज में मेरा मजाक बना देता,और मैं कुछ भी नही कर पाता…
काजल को जाने क्या लगा की मैं क्यो रो रहा हु ,वो मुझे अलग अलग बातो से बहला रही थी …
“देख ये मेरे साथ पहली बार तो नही हो रहा है ना,..”
उसने मुझे बहलाते हुए कहा ..
“ह्म्म्म”
“और तू अगर इसलिए दुखी हो रहा है की वो तेरे कालेज के लड़के थे और तेरे बारे में पता चल जाएगा तो फिक्र मत कर मैंने उन्हें कुछ नही बताया ..”
मैं चौक कर काजल को देखने लगा
“हा मुझे तो पहले ही पता चल गया था जब उसने अपने कालेज का नाम बोला ,वो क्या साहब का नाम क्या था ..हा आकाश ..”
मैं आंखे फाड़े हुए उसे देख रहा था..
“लेकिन ना मैंने कुछ बताया ना ही शबनम ने कुछ कहा “
“मैं इसलिए दुखी नही हो रहा हूं ,मुझे इसलिए दुख हो रहा है की मेरे होते हुए भी तुम्हे ये करना पड़ रहा है,ये मेरी ही तो मजबूरी है की तुम्हे ये करना पड़ रहा है …अगर मेरे आपस पैसे होते तो मैं तुम्हे कभी ये काम करने नही देता …”
वो थोड़ी देर मुझे देखते रही फिर खिलखिला कर हँस पड़ी ..
“अरे चूतिये अगर तेरे पास पैसा होता तो तू यंहा थोड़ी ना रहता,ना ही कभी मुझसे मिलता ..”
जो हंसे जा रही थी लेकिन उसने मुझे एक बड़ा सबक दे दिया था,वो सच ही तो कह रही थी ,अगर मेरे पास पैसे होते तो क्या वो मुझसे मिल पाती ,क्या हमारा ये रिश्ता बन पाता जो अभी था??
तो क्या मैं उस कंडीसन में इस लिए दुखी होता ,या उस पैसे का सुख भोग पाता...

शायद उस समय और पैसे की चाह करता क्योकि उस समय मेरे सामने प्रॉब्लम कुछ अलग होती …
उसकी एक ही बात से मेरे देखने का पूरा नजरिया ही बदल गया ,मैं उठ खड़ा हुआ जैसे कोई करेंट का संचार मेरे पूरे बदन में हो गया हो ,मैं इस अहसास को खोना नही चाहता था,ऐसा लगा जैसे जीवन की सच्चाई अचानक से मेरे सामने आ गई हो ..सब कुछ बस खेल तमाशे जैसा ही है,जो आज करोगे वही कल घूमकर मिलता है,मतलब है की इस सेकंड लिया गया एक फैसला आने वाले सालो का निर्धारण करता है ...मेरे सर में तेज दर्द हुआ,मैं किसी गहरे सोच में डूब गया था...
मैं तुरंत ही बाहर निकल गया ,मैं रास्ते में चले जा रहा था,कुछ अजीब से गहरे से ख्यालात में डूबा हुआ,मानो दुनिया रुक गई हो ,सब कुछ ही रुक गया हो और साथ ही मैं भी …
चलते चलते ना जाने कितनी देर मुझे हो गई थी ,जब पैरों में थकावट आयी तो मैं रुका और सामने मेरे कालेज वाली चाय की टपरी थी,अभी कुछ ज्यादा चहल पहल नही थी बस होस्टल के कुछ लोग ही दिख रहे थे..
मैं जाकर कहे सिगरेट पीने लगा,आज मैंने पहली सिगरेट पी थी,इससे पहले मुझे सीनियरों द्वारा पिलाई गई थी लें आज मैं सिगरेट खरीद कर पी रहा था…
लंबे लंबे कस लगा रहा था और अचानक ही उठा और सिगरेट को जोर से फेका ..
“क्या हुआ “दुकान मालिक मुझे देख रहा था
“साले को आज मुह लगाऊंगा तो कल आदत बन जाएगा “
वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा की मैं क्या कह रहा हु,मैं तेजी से दौड़ा और दौड़ाता हुआ हॉस्टल पहुच गया मैं सीधे उस सीनियर के पास पहुचा जो शेयर मार्किट के बारे में जानते थे …
“सर मेरे पास कुछ पैसे है और मैं इन इन कंपनी में उसे लगाना चाहता हु ...आप अपने अकाउंट से लगाएंगे ,जब तक मेरा डीमेट खाता नही खुल जाता …”
मैं उसे एक ही सांस में बोल गया
“तेरे पास इतने पैसे ??”
“वो छोड़ो ,कही से जुगाड है दूसरे के है सामने वाली पार्टी को प्रॉफिट दिखाना है , मैं आपके साथ ट्रेड करूंगा ..जंहा मैं बोलूं वही ट्रेड करना ,हम साथ ही लाइव मार्किट में रहेंगे,मोबाइल से कांटेक्ट में “
उसने मुझे घुरा ..
“10 परसेंट मेरा …”उसने बड़े आराम से कहा
“50 परसेंट आपका ,लेकिन प्रॉफिट का ,टेक्स काटने के बाद “
“तो बचेगा क्या घण्टा …”
“अभी एक बड़ा भूचाल आने वाला है ,****कंपनी का शेयर नीचे जाएगा,,पुट ऑप्शन में ट्रेडिंग करे तो शायद बड़ा फायदा मिलेगा ..”
वो सोच में पड़ गया ..
“तुझे कैसे पता की उसका शेयर नीचे जाएगा,उससे तो पूरी आयल इंड्रस्ट्री की प्राइस गिरेगी ,”
“अक्जेक्टली ,”
“लेकिन तुझे कैसे पता ??”
मैंने उन्हें थोड़ी देर पहले ही रेडियो में चल रहे एक समाचार के बारे में उन्हें बताया जो की उस टपरी में चल रहा था,वो उछल पड़े और तुरंत ही लेपटॉप खोलकर न्यूज़ देखने लगे …
“साले बड़ा जल्दी सिख रहा है तू ,...लेकिन “
“लेकिन क्या सर टाइम नही है कल से भाव गिरना शुरू हो जाएगा ..

”
“नही वो तो है मैं ये बोल रहा हु की अगर तेरे पैसे मैं ही खा जाऊ तो क्या करेगा ….”
मैं जोरो से हँस पड़ा ..
“क्या हुआ साले ऐसे क्यो हँस रहा है “
“सर जिसके वो पैसे है ना ,वो आपका पेट फाड़कर भी पैसे निकाल लेगा,तो सोचना भी मत ..”
मैं मुस्कुराता हुआ वँहा से निकल गया था ...

अध्याय 15
शाम का वक्त था मैं वापस रूम आ रहा था,दिनभर मैंने कई दौड़ भाग किये थे,बैंक से पैसा निकाल कर सीनियर के बैंक में डलवाया था,कालेज भी शुरू हो चुके थे,क्लास अटेंड किया और बुक्स लेकर लाइब्रेरी में भी टाइम बिता आया था,मैं बुरी तरह से थका हुआ था कमरे में जाकर कल की तैयारी करनी थी ,कल से मार्किट में मेरा पैसा लगने वाला था..
मैं बाजार में पहुचा जिसके अंत में वो सकरी गली थी जंहा से होकर उस चाल में जाया जाता था,बाजू में ही एक सिनेमा घर भी था जिसमे हमेशा ही B ग्रेड की फिल्में लगती थी ,ग्राहक अघिकतर वही के पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी करके उस गली से अंदर आया करते थे,वो गली एक तरह एक मैदान के बाउंड्री तथा दूसरी ओर उस सिनेमाघर की बाउंड्री से बनी थी ,लगता था की पाताल लोक में जा रहा हु,बाहर का बाजार शहर के सबसे व्यस्त बाजार में से एक था,कितना हल्ला गुल्ला था वँहा की नरक से कम नही लगता था ……..
मैं थका होने के कारण उस शोर शराबे में और भी गुस्से से भर जाता था,मैं गली के मुहाने पर पहुचा ही था की एक आवाज मेरे कानो में पड़ी ..
“ये…”किसी ने जोरो से चिल्लाया ,और मैं पलटा तो चौक गया.ये आकाश था..
वो पास बने पान ठेले में खड़ा हुआ सिगरेट पी रहा था,साथ उसका वही दोस्त भी था…
वो मुझे हाथो के इशारे से अपने पास बुला रहा था..
“अरे तू तो मेरी ही क्लास में पढ़ता है ना,तुझे भी इसका शौक है क्या “वो हँसने लगा ,मैंने नजर नीची कर ली
“अबे शर्मा क्या रहा है ,मैं भी तो माल लेने ही आया हु यंहा पर ,कल ही दो माल ले गया था ,तबाही थी ,तू किसके पास आया है “
मुझे समझ नही आया की अब इससे क्या कहु ..
“जो मिल जाए ..सस्ते में “मैं डरते हुए बोला ,वो दोनो हँस पड़े
“चल मेरे साथ हमारा एक दलाल है यंहा पर “वो मुझे खिंचता हुआ मेरे ही आशियाने की तरफ ले जा रहा था,मेरी तो सांसे ही रुक सी गई थी ,समझ नही आ रहा हटा की अखिर अब इस साले का करू क्या …
हम उस चाल के सामने पहुचे ,गेट से अंदर गए और बड़े बरामदे में एक कोने पर बने पान ठेले से वो सिगरेट जलाकर कर पीने लगा …बनवारी उसे देखते ही दौड़ाता हुआ वँहा पहुच गया था लेकिन फिर उसकी नजर मुझसे मिली ,वो थोड़ा सकपकाया ..
“अरे बनवारी सुन कल वाली मालो को ही बुला ले .और इस लवंडे के लिए भी कोई सस्ता माल जुगाड़ दे .”उसके साथ आया वो शख्स बोला..

बनवारी की नजर मुझसे मिली लेकिन मेरी आंखों ने उसे कोई भी इशारा नही किया,वो दौड़ाता हुआ ऊपर गया और शबनम फिर काजल के कमरे में गया,थोड़ी देर में ही दोनो लडकिया बाहर आयी,काजल ऊपर से मुझे उनके साथ खड़ा देखा,शायद उसे माजरा समझ आ चुका था..
शबनम और बनवारी दोनो से काजल क्यो बात कर रही थी ,बनवारी थोड़ी चिंता में दिख रहा था ,वो बार बार हमारी ओर देखता मैं साफ देख पा रहा था की वो अपना पसीना रुमाल निकाल कर पोंछा रहा था…
फिर शबनम बनवारी के साथ नीचे आयी ..
“साहब वो लकड़ी तो आज नही जाऊंगी बोल रही है ,आपके लिए कोई दूसरी लड़की जुगाड़ू ..”
आकाश और उसके साथ वाला लड़का थोड़े देर काजल की तरफ देखे ..
“साली क्यो भाव खा रही है ,कितना चाहिए उसे जाकर बोल दुगुना पैसा मिलेगा ,लेकिन लड़की तो वही चाहिए “
आकाश बोल उठा,बनवारी फिर से ऊपर गया,इस बार काजल बात करते हुए मुस्कुरा रही थी साथ ही मुझे देखकर भी मुस्कुरा रही थी ,मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या करू ..
बनवारी फिर से आया ..
“कितना रेट बोली साली रंडी ..”
बनवारी चुप ही था..
“अबे बोल ना “
“साहब वो पागल हो गई है ,आप कोई दूसरी लड़की देख लो ..”
आकाश ने काजल को घुरा जो उसे चिढ़ाने जैसे मुस्कुरा रही थी ..
“तू बोल तो सही की क्या बोली ..”
“साहब 5 लाख मांग रही है ..”
सभी चौक गए ,मुझे भी एक तेज झटका लगा अब ये काजल को हो क्या गया है ,आकाश भी थोड़ी देर के लिए सुन्न हो गया था..
“साली पागल हो गई है क्या ?”
“वही तो कह रहा हु साहब दूसरी लकड़ी ले जाओ “
आकाश थोड़ी देर सोचा ..
“ठीक है दिया साली को 5 लाख,एक बार आ जाए साथ फिर देखो इसकी क्या हालत करता हु साली का पूरा घमंड निकाल दूंगा ..”
आकाश ने जैसे कहा था मेरे अंदर एक डर की लहर दौड़ गई वही ,शबनम और बनवारी तो जैसे उछाल ही गए ,बनवारी खुश होकर ऊपर भागा ..
वो काजल से बात कर रहा था,काजल के चहरे में भी आश्चर्य के भाव आये ,वो मेरी ओर देखने लगी,मैंने ना में सर हिलाया,क्योकि मुझे किसी बड़े खतरे का आभस हो रहा था,काजल थोड़ी देर के लिए सकते में थी ,बनवारी शायद से मनाने की पूरी कोशिस कर रहा था,काजल ने एक गहरी सांस ली और बनवारी से कुछ कहा और अंदर चली गई,बनवारी के चहरे का उतरा हुआ रंग देखकर मेरा चहरा खिल गया था…
बनवारी मायूसी से नीचे आया…
“बोलती है आज मूड नही है ..”
बनवारी की बात सुनकर आकाश का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ गया..
“मादरचोद की ये औकात की मुझे इनकार करती है “वो आगे बढ़ने ही वाला था की मैंने उसका कंधा पकड़ कर उसे रोक दिया ..
“यंहा कुछ करना ठीक नही होगा,ये शकील भाई का रंडीखाना है ,और इन लोगो के पास बहुत से आदमी भी है ,कुछ किया तो हाथ पैर तोड़ देंगे ..”
“साले मैं कौन हु जानता भी है ..”
आकाश भड़का ..
“भाई रंडीखाने में सब एक ही होते है ,नंगे...

अगर गड़बड़ हुई और तस्वीर अखबार में आ गई तो इनका तो कुछ नही जाएगा लेकिन तेरी और तेरे परिवार की इज्जत जरूर उछाल जाएगी ..”
इस बार वो थोड़ा शांत हो गया था,
“इस साली को तो उसकी औकात दिखा कर रहूंगा ..”
वो बोलता हुआ वँहा से बाहर चला गया ….वही बनवारी मुझे खिसियाई निगाह से देखता हुआ उनके पीछे भागा..

अध्याय 16
मैं कमरे की चौखट में खड़ा था,अंदर काजल मुह फुलाये बैठी थी वही बाहर शबनम ,मैं समझता तो किसको …
“इस साली रंडी के भाव तो देखो ,मोटे ग्राहक को ठुकरा दिया,साली खुद तो डूबेगी मुझे भी ले डूबेगी ..”
शबनम खिसिया रही थी ..
“चुप कर छिनाल जा कर चुदवा ले मुहल्ले भर से ,मेरा कोई मूड नही है ..”
काजल अंदर से ही चिल्लाई ,वो भी पता नही किस गुस्से में बैठी थी ..
“हा साली चुदवाऊंगी ,जो आएगा उससे चुदवाऊंगी,तेरे जैसा मेरे पास कोई परमानेंट ग्राहक नही है ..”वो मुझे देखकर बोली ,और काजल भड़क कर बाहर आने लगी
“साली अपनी औकात में रह ..”
मैंने चौखट में ही उसे पकड़ लिया वो मेरे बांहो में ऐसे छटपटा रही थी जैसे शबनम का कत्ल ही कर जाएगी ..
“हा री छिनाल बोलूंगी ,एक बार नही सौ बार बोलूंगी सारा चाल जानता है साली की तू अपने आशिक के कारण धंधा नही कर रही है ,साली तू कही भी अपनी चुद फड़वा लेकिन हमारे पेट में तो लात मत मार ..”
शबनम जाने को हुई ,काजल को मैं मुश्किल से सम्हाल कर रखा था..
“रुक मादरचोद कहा जा रही है ,मैं चुद फड़वाती हु,तू साली धंधे वाली ,छिनाल साली रांड ,एक ग्राहक क्या गया मुझ पर इल्जाम लगा रही है ..”
काजल खुदे जा रही थी ,मेरे लिए उसे सम्हालना मुश्किल हो रहा था,तभी शबनम रुक गई और काजल को देखने लगी,उसकी आंखों में आंसू के बून्द आ गए थे..
“हा चुदवाते है हम ,रोज चुदवाते है,है रंडी,तभी तो पेट पलता है हमारा, तेरे पास तो तेरा आशिक है कही से भी लाकर खिलायेगा,हम क्या करेंगे,हमारे पेट पर क्यो लात मार रही है ..”
शबनम को सुबकता हुआ देखकर काजल बिल्कुल ही शांत हो गई,मैंने भी उसे छोड़ दिया,वो शबनम के पास जाकर उसके कंधे में हाथ रखकर उसे अपने गले से लगा ली ..
मैं बस देखता ही रहा की ये अचानक कैसा परिवर्तन आ गया है ..
“माफ कर दे बहन लेकिन उसके साथ चली जाती तो पता नही वापस आ भी पाती की नही ,वो साला तो इतने गुस्से में था की पूरा नोच कर ही खा जाता ..”
काजल जिसे कुछ देर पहले रंडी छिनाल कह रही थी अब उसे इतने प्यार से बहन कह रही थी ..
शबनम और भी सुबकने लगी ..
“जानती हु बहन लेकिन हमारा तो काम ही ये है,नही करेंगे तो खाएंगे क्या,अभी जवानी है तो लोग पैसा भी दे रहे है,वरना मौसी को देख ना कोई 50 रुपये भी तो नही देता बूढ़े शरीर के ..अभी कुछ कमाएंगे तो बुढ़ापे के लिए कुछ बचा भी लेंगे,”
काजल की आंखों में भी आंसू आ गया था...

और उसकी बातो में जो दर्द था उसने मेरा दिल भी भर दिया …
आसपास की महिलाएं भी जमा हो गई थी ,जिनके पास ग्राहक नही था वो सभी इधर ही देख रही थी ,सभी कुछ ना कुछ इन्हें कह रही थी ,पास वाली मौसी चिल्लाई
“बढ़िया हुआ उस कमीने के साथ नही गई ,साले रंडियों को तो इंसान ही नही समझते ,जाती तो नोच डालता पता नही क्या क्या डालता तेरे अंदर “
पास खड़ी महिलाएं जोरो से हँस पड़ी साथ ही काजल और शबनम भी ,फिर एक दूसरी औरत बोली
“अरे काजल लेकिन 5 लाख कम नही होते,मारता पिटता तो भी इलाज तो हो ही जाता “
किसी ने कहा
“अरे साली रांड 5 लाख में आधा तो वो दल्ला बनवारी ले जाता,पूरी मेहनत ये करे और घी खाये वो साला दल्ला ..”
सभी जोरो से हँसे तभी बनवारी जो की नीचे ही खड़ा था वो भी चिल्ला पड़ा ..
“अरे मौसी दल्ला हु तो क्या हुआ ,काम तो सही करता हु “
“क्या खाक काम करता है मादरचोद ऐसे ग्राहक लाता है ,अगर वो इसको मारता तो बचाने जाता क्या “
“अब 5 लाख के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा ना मौसी “
“तो साले अपनी मा बहन को भेज दे ना “
“क्या करे मौसी तो तुम्हारे जैसी नही है ना सेक्सी “
सभी फिर से खिलखिला उठे …
“तू फिक्र मत कर मैं तुझे अच्छा मोटा ग्राहक दिलवाऊंगी “
काजल ने शबनम के गाल को सहलाते हुए कहा ..वो भी मुस्कुरा उठी..
“हा दुसरो को ग्राहक दिलवा और तू ,शादी वादी करने वाली है क्या इस चिकने से “
पास खड़ी औरतो के साथ काजल भी ऐसे हँसी की मैं बुरी तरह से शर्मा गया..
“क्या मौसी बेचारे को नारभसा दिए “काजल ने झूठे गुस्से में कहा ,हँसी ठिठोली के बीच गाहको का आना जाना चल रहा था,
मैं उन हंसते और झगड़ते चहरो को देख रहा था,बात बात पर एक दूसरे को गाली देने लग जाते,मारने में उतारू ओ जाते ,और थोड़ी ही देर में एक हो जाते,ऐसा लगता की जैसे सबसे अच्छे दोस्त हो ,कोई कपट किसी चहरे में नही थी ,बुझे वक्त के सताए इन चहरो में भी खुशियों को जीने का जज़्बा था,गालियां देने और खाने का हौसला था,और प्यार जताने की हिम्मत …
जब प्यार करने पर आते तो सब लुटा देते और जब दुश्मनी निकालने पर आते तो सब गवाने को भी तैयार रहते,असल में उनके पास लूटने और गवाने को कुछ था भी तो नही ,अगर कुछ होता तो यंहा क्यो होते...
ये ही इस रंडीखाने की असली हकीकत थी ,बिना किसी आशा के भी उनके नरक जैसे जीवन में भी एक उमंग थी,जब दर्द उतरता तो जमाने का दर्द उन आंखों में उतर जाता था,और जब हँसी छूटती तो उस हँसी से जमाना ही खिल जाता,बूढ़ी उदास पनियाई आंखे हो या,जवान मदमस्त खिली हुई आंखे,सभी में एक समानता जरूर थी ..
यंहा कोई सपने नही देखता ……...

अध्याय 17
बहुत ज्यादा बेचैनी थी दिल में दर्द था,ख्वाहिशें थी जो पूरी नहीं हो पा रही थी , पता नहीं मैं उसे कितना चाहता था शायद जान से भी ज्यादा लेकिन शायद वह मुझे समझ नहीं पाई, वही मेरी आखरी तमन्ना थी वही मेरे शख्सियत का किस्सा थी वह मेरी जान थी जहां थी हर आरजू थी हर गुफ्तगू थी सब कुछ थी लेकिन वह रंडी थी…
अब कैसे कहता कि वह क्या थी, मेरी दुनिया थी.. खैर मैं काजल के प्यार में था , मैं उससे कहना चाहता था कि मैं उससे प्यार करता हूं लेकिन शायद वह समझने को ही तैयार नहीं थी, उसे लगता था कि कोई उससे कैसे प्यार कर सकता है, वह अपने आप को उस दर्जे का समझती थी जहां से कोई वापस नहीं आ सकता, उसे मैं कैसे समझाता कि जहां वह है वहां कोई जा नहीं सकता,वो मेरे दिल में बस चुकी थी , मेरा प्यार उसके लिए बिल्कुल बेपनाह था निर्दोष निष्कलंक था,
उसके लिए मेरा प्यार मेरी आंखों से ही झलकता था,मेरे दोस्तो को भी पता चल चुका था की मैं कुछ बदला बदला सा रहता हु ,लेकिन जिसे जानना था वही इन सबसे अनजान थी ..
या अनजान बनने की कोशिस कर रही थी..???
खैर..
जीवन की गाड़ी चल निकली थी ,मेरे पास मेरा अकाउंट था जिससे मैं शेयर मार्किट में पैसा लगाने को तैयार था,लेकिन दिल मे बेहद ही डर भी था,कारण साफ था की वो पैसे मेरे नही थे ,किसी और के थे जो की खुद ही बड़ा खतरनाक आदमी है..
मेरे रहते काजल धंधा नही करती थी ,और मैं अब अधिकतर घर में ही रहता था,वो दिल भर कुछ ना कुछ बोलती रहती लेकिन फिर मुझे अपने लेपटॉप में घुसा हुआ देखकर मुह बना कर बाहर चली जाती ,उसके यू रूठ कर जाने से मेरे होठो में एक मुस्कान सी फैल जाती थी,
अब उसका बिस्तर ही मेरे दिन भर का ठिकाना था,मैं रात सोते समय बस अपने बिस्तर में जाया करता..
मैं यू ही लेपटॉप में मुह गड़ाए बैठा था,और साथ ही पेन से कॉपी पर कुछ लिख रहा था..
वो पैर पटकते हुए कमरे में आयी,उसके पैरों की पायल की आवाज जोरो से आ रही थी,वो मेरे बाजू में बैठ गई और लेपटॉप को देखने लगी जिसपर अभी एक कंपनी के शेयर की चार्ट दिख रही थी,मैंने जितना भी सीखा था उसी हिसाब से मैं अभी पेपर ट्रेडिंग किया करता था,पैसे लगाने की हिम्मत मैं अभी भी नही जुटा पाया था….हेकेनेसी केण्डलस्टिक चार्ट हर एक के बाद एक बनता जा रहा था,मार्किट लाइव चल रहा था..
मैं अपनी उंगली दांतो में फसाये हुए उस 15 मिनट वाली केंडल को बनता हुआ देख रहा था..
अभी भाव 230 रुपये पर था,जो कभी ऊपर जाता तो कभी नीचे,कभी केंडल हरी होती तो कभी लाल (पुराने भाव से ज्यादा होने पर केंडल हरी हो जाती है और कम होने पर लाल) ..
मेरा दिमाग और गणित कह रहा था की भाव बढेगा ,लेकिन फिर भी मैंने पैसे नही लगाए थे,मैं बस ध्यान से मार्किट को देखकर समझना चाहता था..
“इतने ध्यान से क्या देख रहे हो ..

”वो मेरे बाजू में बैठकर मेरे कंधे पर अपना सर रखकर लेपटॉप दो देखने लगी
“यही की ये लाइन ऊपर जाएगी की नीचे “मैंने अपनी होशियारी बघारी ..
“अरे इसमें इतना सोचना क्या है ऊपर ही जाएगी ..”
मैंने आश्चर्य से पलटकर उसे देखा,उसने बड़ी ही मासूमियत से ये कहा था जैसे उसे रत्ती भर भी अपनी कही बात पर शंका नही है ..
“क्यो..क्यो ऊपर जाएगी “
“अरे ये तो दिख ही रहा है ना ..”
मैंने अपनी आंखे बड़ी कर दी ,मैं जो महीने भर से अपना दिमाग पुस्तक में खपा रहा था,हर न्यूज़ देख रहा था,इतना रिसर्च कर रहा था उसे भी इसके बारे में कोई 100% कांफिडेंस नही था की भाव ऊपर जाएगा,100 छोड़ो 50% भी कांफिडेंस नही था,लेकिन इस लड़की ने ऐसा कहा था जैसे ये मार्किट की पृरानी ज्ञाता हो ..
“ओह्ह तो बताओ तो सही की क्या दिख रहा है ..”
वो खुस होते हुए अच्छे से बैठ गई और उंगली स्क्रीन पर दिखाने लगी..
“देखो पहले ये लाइन ऐसे आयी फिर यंहा से मुड़ गई फिर ऊपर गई फिर यंहा से मुड़ गई और नीचे आयी फिर यंहा से मुड़ गई अब यंहा से ऊपर जाएगी ,”
मैं मुस्कुराते हुए उसे देखते रहा,काजल को ये एक खेल लग रहा था ,की ये लाइन ऐसे ही बन रही है,असल में एक एक केंडल अगर 15 मिनट की हो(इंट्राडे ट्रेडर्स अधिकतर 15 या 5 मिनट की केंडल पर ही काम करते है) तो वो 15 मिनट में उस शेयर में हुए हर खरीदी बिक्री ,लाखों लोगो के द्वारा उस शेयर के पीछे चल रही राय को दर्शाते है,वो एक निचोड़ होता है जो 15 मिनट में लाखो करोड़ो लोगो द्वारा उस शेयर में किया गया काम होता है...और ऐसे ही कई हरी और लाल रंगों की केंडल(मोमबत्ती की आकर की होती है ,इसलिए इसे केंडल कहते है) एक चार्ट बनकर तैयार होता है..और काजल को ये बस मजाक लग रहा था..
उसने मेरा मुस्कुराता हुआ चहरा देखा और फिर अपनी बात पर जोर डालकर कहने लगी..
“अरे देखो ना ध्यान से ये लाइन नीचे उतरी लेकिन यंहा से नीचे नही गई ,फिर ऊपर गई लेकिन यंहा से फिर से नीचे,लेकिन दूसरी बार जब ये नीचे गई तो फिर उसी जगह से ऊपर गई जंहा से पहली बार गई थी,और ऊपर गई तो फिर लगभग उसी जगह से नीचे हो गई जंहा से पहली बार आयी थी,मतलब ये लाइन इससे ऊपर और इससे नीचे नही जा रही है,जैसे कोई दीवार हो जो उसे रोक रहा हो..”
मैं काजल को देखता ही रह गया ,क्योकि जो उसने अभी अभी कहा था वो शेयर मार्किट के टेक्निकल भाषा में सपोर्ट और रजिस्टेंस कहलाता है,वो दो भाव जंहा से शेयर ना नीचे जा पता है ना ही ऊपर ,मैं कैसे इतने इम्पोर्टेन्ट फेक्टर को भूल गया था,मैं इतना खुस हुआ की काजल के गालो में एक जोर की पप्पी ले ली ..
वो हल्के से हँसी लेकिन उसे भी ये समझ नही आया की आखिर मैंने ऐसा किसलिए किया था..
और मैंने अपने जीवन का पहला ट्रेड डाल दिया,मुझे कुछ संकेत मिलने लगे थे की ये शेयर ऊपर जाएगा..

मैंने तुरत ही निफ्टी की वेबसाइड से उस शेयर का ऑप्शन चार्ट निकाला,मैंने देखा की उस शेयर में लोगो की भागीदारी तेजी से बढ़ने लगी है(इसे मार्किट की भाषा में वोलेटलिटी कहते है) ,मैंने तुरंत ही एक काल ऑप्शन 10000 की खरीद ली (जब भाव बढ़ने वाला होता है तो लोग काल ऑप्सन और जब भाव गिरने की संभावना हो तो पुट ऑप्सन खरीदते है)
अगर आप लोग नही जानते तो मैं बताना चाहता हु की शेयर में पैसे लगाना और ऑप्सन में पैसे लगाने में बहुत फर्क होता है,शेयर का भाव अगर 1-2 परसेंट भी चढ़ा तो काल ऑप्शन का भाव 50-60 परसेंट चढ़ जाता है,वही put option का भाव वैसे ही गिर जाता है,अगर शेयर का भाव गिरता है तो उसका अपोज़िट होता है,इसलिए भाव चढ़ने पर लोग call को खरीदते है,और गिरने पर put को..और इसलिए ये जितना पैसे कमा के देने के लिए मशहूर है वैसे ही लोगो को नंगा भी कर देता है.. अभी हाल में ही एक शेयर(नाम नही बताऊंगा 3-4 दिन पहले की ही बात है)ऐसे चढ़ा था की उसका call एक ही दिन में 2000% बढ़ गया था,यानी जिसने उसका call खरीदा होगा उसका पैसा एक ही दिन में 20 गुना बढ़ गया..और जिसने put खरीदा होगा उसका पैसा ही डूब गया होगा..
मैं सांसे रोके स्क्रीन पर देखने लगा था,
“अरे क्या हुआ इतने परेशान को हो गए हो “
“तेरे बोलने पर 30 हजार लगा दिया हु ,20 हजार उसके शेयर में और 10 हजार call में “
वो आश्चर्य से मुझे देखने लगी ..
“तू कर क्या रहा है,तूने जुआ खेला है??”
उसकी बात से मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई
“वही समझ ले ,लेकिन ये सोचा समझा जुआ है”
अब तो उसकी भी सांसे रुक गई थी क्योकि ऐसे भी उसे कुछ समझ नही आ रहा था की मैं कर क्या रहा हु लेकिन उसे इतना तो समझ आ चुका था की 30 हजार फंसे हुए है…
हम दोनो की नजर स्क्रीन में जमी सी गई थी ..
और मार्किट नीचे गिरने लगा ,मेरे माथे में पसीने की बूंदे टपकने लगी थी 2 बजकर 15 मिनट हुए थे (भारत का मार्किट 9:15 से 3:30 तक चलता है) अभी 2 घंटे थे मेरे पास ,अभी 15 मिनट ही हुए थे की हम दोनो की सांसे रुक सी गई थी,काजल को मैंने इतना तो समझा दिया था हमने 230 रुपये में खरीदा है और ये जितना ज्यादा जाएगा उतना हमे फायदा होगा,और 15 मिनट में शेयर का भाव 229 हो चुका था,लेकिन मैंने हिम्मत रखी अभी उसे बेचा नही ,स्क्रीन में हर सेकंड में वो पैसा बदल रहा था कभी वो 229.50 हो जाता तो अभी 229.30 तो अभी और कुछ मार्किट में ऐसे भी काम दशमलव में ही चलता है,अचानक से कुछ हुआ और भाव 225 में पहुच गया ,वो इतनी तेजी से गिरा की मुझे कुछ सोचने का मौका ही नही दिया,मैं बुरी तरह के घबरा चुका था ,मैंने तुरंत अपने call का भाव देखा वो 80% गिर चुका था मतलब की मुझे सीधे सीधे वँहा से 8हजार का घटा हो चुका था,मैं शेयर में हुआ घाटा अलग था,वँहा भी 1000 के लगभग का घाटा था ,मैं अपना सर पकड़ कर बैठ ,ये मेरा पहला ट्रेड था और पहली ही बार में इतना बड़ा घाटा ..
“क्या हुआ “
“लगभग 9 हजार का नुकसान हो गया है..

”मेरे मुह से अचानक निकला और मैं अपने शेयर को बेचने के लिए अपना हाथ बढ़ाने ही वाला था की ..
“है भगवान नही “...
“ये क्या किया तुमने ??”मैं बुरी तरह से चिल्ला उठा था क्योकि काजल ने डर के मारे लेपटॉप ही बंद कर दिया था,
अभी तो ये घाटा सिर्फ 9 हजार का था लेकिन अगर अभी उसे नही बेचा तो पता नही 1-2 मिनट में मार्किट और कितना नीचे गिर जाए और लेपटॉप के चालू होते तक कितना नुकसान हो जाए ..
मैं सोचकर ही कांप गया था…
वही काजल रोने लगी थी
“मुझे लगा था इसे बंद कर देने से वो खत्म हो जाएगा ..”
सच कहु मन किया की उसके कान के नीचे एक खिंच कर लगाऊ लेकिन मेरे सामने अभी शकील का खूंखार चहरा घूम गया था ,मैंने तुरंत ही लेपटॉप चालू किया ..
लेकिन ..
जब किस्मत हो गांडू तो क्या करेगा पांडु..
पता नही क्या हुआ था की लेपटॉप चालू होने के बाद भी इंटरनेट से कनेक्ट नही हो रहा था..
मैं अपने आप को कोशे जा रहा था की मैंने इतनी जल्दबाजी में बिना किसी स्टॉपलॉस (स्टॉपलॉस एक तरीका है मार्किट में नुकसान से बचने का ,अगर इसे लगा दिया जाय तो गिरते मार्किट में सॉफ्टवेयर अपने आप ही शेयर को बेच देता है.. और नुकसान कम होता है..) लगाए ही क्यो ट्रेडिंग करने लगा ...लेकिन अब पछताने से होता भी क्या है..
मैं इंटरनेट से कनेक्ट होने की कोशिस कर रहा था वही काजल का चहरा लाल हो चुका था..
लगभग 2 बजकर 50 मिनट हो चुका था,मार्किट बंद होने के करीब था ,मुझे बुरी तरह नुकसान होने वाला था, मेरा मोबाइल घनघनाया …ये 5 वी बार था लेकिन मैं उसे उठा नही रहा था,क्योकि ये उसी सीनियर का था जो पहले से मार्किट में काम करता था,वो आधे घंटे से मुझे फोन लगा रहा था लेकिन मैं अपने ही दर्द में थे लेकिन फोन फिर से घनघना उठा..
“इसकी मा का अब इसे क्या हुआ ..”
उसी सीनियर का फोन था ..
“हल्लो सर “
“अबे कहा था तू पता है ,*** कंपनी के ऊपर आज बड़ी न्यूज़ आयी है”
उसने उसी कंपनी का नाम लिया था जिसे मैंने अभी खरीदा था,मैं सतर्क हो गया..
“उसके CEO ने रिजाइन कर दिया “
“क्या ??”
अब तो मैं पूरी तरह से ही टूट गया था,अब मुझे समझ आया की इसका प्राइस इतने तेजी से क्यो गिरने लगा था,मेरा दिल ही भर गया क्योकि अब मुझे 15 हजार तक या ज्यादा का भी घाटा हो सकता था,call वाले पैसे तो गए ही समझो ,
“लेकिन जानता है कंपनी ने आधे घंटे बाद ही अलाउंस किया की उनका अगला CEO **** होगा ..”
“क्या वो मशहूर बिजनेसमैन “
“हा ,भाई आज जिसने भी उसका शेयर खरीदा होगा वो तो मालामाल हो गया होगा ..”
सीनियर का ने ऐसे कहा था जैसे काश उसके पास वो सस्ते शेयर होते जो भाव गिरने के समय लिए गए थे..
मैंने तुरंत ही उनका फोन काटा और काजल की ओर देखा वो कुछ समझने की कोशिस जरूर कर रही थी लेकिन उसका चहरा बता रहा था की उसे कुछ भी समझ नही आ रहा था..

मैंने फिर से कोशिस की और इस बार इंटरनेट से लेपटॉप कनेक्ट हो चुका था,और जैसे ही मैंने अपना सॉफ्टवेयर खोला मेरा मुह खुला का खुला रह गया ,क्योकि इतने समय में शेयर का भाव 264 रुपये पहुच चुका था मलतब लगभग 15% बढ़ चुका था,मैंने तुरंत ही call का रेट देखा मेरी आंखों से आंसू आ गए वो 400% बढ़ चुका था मतलब की मुझे 4 गुना का प्रॉफिट हो चुका था,मार्किट बंद होने में बस 15 मिनट ही बचे थे और मैं इसे दूसरे दिन के लिए रखकर रिस्क नही ले सकता था मैंने तुरंत ही उसी रेट में सभी को बेच दिया…
काजल मुझे घूर रही थी उसकी आंखों में प्रश्न था और एक दो आंसू भी ,
उसने आंखों से भी पूछा “क्या हु “
“मेरी जान 4 गुना प्रॉफिट हुआ है “मैं खुसी से उसके गले लग गया लेकिन उसके गले तक जाने से ही पहले ही मेरा चहरा उसके चहरे से टकराया और मैं खुसी से भरा हुआ उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया..
ये एक ही झटके में ऐसे हुआ की हम दोनो को ही समझ नही आया की कब वो एक सेकंड की गलती मिनट और फिर मिनटों में बदलने लगी थी………..

नोट-1. यंहा मैंने शेयर मार्किट के कुछ टेक्निकल शब्दो का प्रयोग किया है,अपने तरफ से आप लोगो को समझने की पूरी कोशिस. की है लेकिन अगर ना समझ आये तो मुझे माफ करे और उनके बिना ही कहानी का सार पकड़ने की कोशिस करे..

धन्यवाद

अध्याय 18

काजल के कोमल होठ मेरे होठो में थे,उसके होठो का स्पंदन मेरे दिल की धड़कनों के साथ साथ ही बढ़ने लगे थे,हमे जैसे ही अपने स्तिथि का आभास हुआ हम अलग हुए,काजल शर्म से मुझसे नजर ही नही मिला पा रही थी ,वही स्तिथि मेरी भी थी लेकिन मैं अगल बगल झांकने लगा,काजल के चहरे पर इतना गहरा शर्म मैंने आजतक नही देखा था ,उसकी कोमल आंखे नीची झुकी हुई थी ,होठो में अब भी हल्की हल्की हलचल मालूम पड़ती थी ,इतने दिनों से दोनों के दिल में जो प्यार की लहर चल रही थी वो आज प्रगट हुई थी,आज इस खुसी के मौके पर जब मैंने अनजाने में ही सही लेकिन कुछ ही घंटो में इतना पैसा कमा लिया था,और इसी खुशी में हम फिसल गए..

मैं वंहा से तुरंत ही उठा और बाहर को निकल गया मैं नही चाहता था की मेरे कारण काजल और भी असहज हो जाए …

मैं बाहर खड़ा हुआ नीचे को देख रहा था,मैं अपने को रोकने की बहुत ही कोशिस कर रहा था लेकिन साली जुबान से मुस्कान थी की जा ही नही रही थी,तभी मुझे लगा की कोई मेरे पीछे आकर खड़ा है,

“अब यंहा क्या देख रहे हो ..”

वो काजल ही थी,वो शायद मुझे सहज करने की गरज से यंहा आयी थी ..मैंने उसके चहरे को देखा लगा जैसे आंखों में कुछ नमी हो लेकिन होठो की मुस्कान भी एक अलग ही कहानी कह रही थी,

“कुछ नही बस यही सोच रहा हु की जो हुआ वो …….”मैं आगे नही बोल पाया

“क्या हुआ ??”काजल के चहरे में मासूमियत और आंखों में शरारत ने घर कर लिया था,मैं भी थोड़ा चौका ..

“मतलब..

जो अंदर हुआ “

“वही तो पूछ रही हु की क्या हुआ “

उसके होठो में अब मुस्कान साफ साफ दिख रही थी साथ ही आंखों में एक शरारत भी थी,

“बोल के बताऊँ या करके “

मैं भी पीछे थोड़ी ना रहने वाला था,मेरी बात सुनकर वो बुरी तरह शरमाई

“धत्त कुछ भी “

वो बस इतना ही बोलकर मेरे बाजू में आकर खड़ी हो गई ,मैं उसके उस हसीन चहरे को ही देख रहा था,एक बार उसने मुझे देखा और आंखों से ही पूछा की क्या देख रहे हो ,मैंने भी सर हिला कर कह दिया की कुछ नही ..

वो सामने देखने लगी ,कही आसमान में ना जाने वो क्या देख रही थी ,उसके चहरे में आयी हुई मुस्कुराहट धीरे धीरे गुम होने लगी थी,उसका चहरा संजीदा होने लगा था,मैं उसके भाव को पढ़ रहा था,हमारे बीच जो हुआ वो महज एक इत्तेफाक ही तो था लेकिन देखा जाए तो ये कोई इत्तफाक नही था,इतने दिनों से हम साथ थे,हम एक दूसरे को चाहने लगे थे,मन ही मन ही सही लेकिन दोनों को ही पता था की हमारे अंदर क्या चल रहा है,हम इसे दोस्ती का नाम दे रहे थे लेकिन ये दोस्ती से कुछ अलग था,बस इसे व्यक्त करने का एक माध्यम हमे मिल गया था और वो ही हुआ जो होना था,भावनाओ के तूफान ने हमे डुबो दिया था..

काजल का संगीन चहरा देखते ही देखते बदल रहा था,उसके आंखों में कुछ आंसुओ की बूंदे आने लगी थी,उसने मुड़कर मुझे देखा मैं अब भी उसके चहरे को देख रहा था,

मुझे अपनी ओर देखता हुआ पाकर वो थोड़ी हिचकिचाई और आंखों से आंसू को पोछते हुए तुरंत ही अपने कमरे में चली गई ,मैं भी उसके पीछे बढ़ा…

वो कमरे में अपने बिस्तर पर पाव सिकोड़े बैठी थी ,मैंने उससे कुछ भी नही कहा और उसके करीब जाकर बैठ गया…

“जो हुआ वो भूल जाओ राहुल ,सोचो जैसे कुछ हुआ ही नही..”

उसने मुझे देखे बिना ही कहा था

“क्या नही हुआ “मैं उसके होठो में मुस्कान लाने की गरज से बोला,उसने एक बार मुझे देखा और उसके होठो में कोई भी मुस्कान नही थी,उसका चहरा संजीदा ही था..

“यही की हम एक दूसरे से प्यार करते है,ये नही हुआ हमारे बीच ...हम एक दूसरे से प्यार नही कर सकते राहुल ..”

उसके आंखों से जैसे बांध सा टूट गया था,उसके आंसू बहते ही चले गए ..वो अपना सर छिपकर सिसक रही थी..मैं उसके और भी करीब जा चुका था..

“काजल..ये मैं कैसे मान लू की मैं तुमसे प्यार नही करता,मेरी आंखों में देखो तुम्हे क्या लगता है ..”

उसने मेरी आंखों में नही देखा ,वो तो अब भी वैसे ही सिसक रही थी..

मैंने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा

“बोलो ना काजल ,देखो ना मेरी आंखों में “

“मुझे कुछ नही देखना..

प्यार रंडियों के लिए नही होता राहुल “

मेरे दिल में उसकी बात सुनकर एक टिस सी उठी थी मैं उसका सर उठना चाहता था लेकिन वो उठा ही नही रही थी वो मुझे देखना ही नही चाहती थी,

“मेरे लिए तुम कोई रंडी नही हो काजल “इस बार मेरी आवाज भर्राई हुई थी मैंने अपना रोना रोके रखा था…उसने अपना सर उठाया लेकिन इस बार उसकी आंखे लाल थी वो मुझे अजीब निगाहों से गहरे जा रही थी...

“तुम अब पैसे कमाने लगे हो ,तुम एक दिन बहुत बड़े आदमी बनोगे,दुनिया तुम्हारे कदम चूमेगी तुम्हारे पास तुम्हारा भविष्य है ,तुम इसे ऐसे बर्बाद नही कर सकते ..मैं इसे बर्बाद होने नही दूंगी ..”

उसने मानो एक गर्जना की ,ऐसा लगा जैसे उसके आंसू सुख चुके है उसके चहरे में एक अजीब सा संकल्प था और मैं उस संकल्प से मानो डर ही गया..

“तुम मुझसे प्यार नही कर सकते,हम एक दूसरे के लिए नही बने है ..”वो उठ खड़ी हुई

“लेकिन ..”मैं कुछ बोलने ही वाला था की उसने मुझे रोक दिया..

“मैं एक रंडी हु राहुल और मुझे रंडी ही रहने दो ,आजतक मैं जिसके जीवन में आयी उसकी जिंदगी बर्बाद ही की है मैंने,और मैं अब तुम्हारी जिंदगी बर्बाद नही करना चाहती,मेरे जीवन में प्यार हो ही नही सकता,जिसे मैंने प्यार किया वो मुझसे छीन गया,बर्बाद हो गया ..नही नही राहुल ऐसा अब नही होगा,बिल्कुल भी नही “

उसके चहरा मानो किसी बुखार से तप रहा हो,वो तैश में आ चुकी थी,मैं आज उसका ये अलग ही रूप देख रहा था,

“काजल ..”मेरे मुह से आवाज निकलने के बजाय बस फुट कर रोना निकला ,उसने एक बार मुझे देखा

“मैं तुम्हे कमजोर नही बनाना चाहती राहुल किसी भी हाल में नही ...तुम्हे बहुत आगे जाना है तुम बहुत ही आगे जाओगे ..बहुत पैसे और नाम कमाओगे ..”

वो जाने क्या सोच कर उठी और बाहर चली गई मैं बस उसे देखता ही रहा,वो सीधे मौसी के कमरे की तरफ बढ़ने लगी थी………

मैं वही खड़े हुए बस मौसी के कमरे को देखे जा रहा था लेकिन काजल वंहा से बाहर नही आयी..

लेकिन थोड़ी ही देर में कुछ लोग मौसी के कमरे में आये और फिर वो मेरी ओर बढ़ने लगे,मैं देख कर आश्चर्यचकित था की ये हो क्या रहा है,मैं उनमें के कुछ को पहचान भी गया था ये शकील के लोग थे,

“तुम अपना समान बांधो और हमारे साथ चलो ,अब से तुम शकील भाई के साथ रहोगे..”

“क्या??”

मैं बुरी तरह से चौक चुका था,काजल अब भी मौसी के कमरे में ही थी,

“लेकिन..

”

“लेकिन वेकिंन कुछ भी नही शकील भाई का ऑर्डर है की तुम्हे अपने साथ ही लाये,जल्दी चलो “वो गुर्राया

मैं बस परेशान सा एक बार फिर से उस कमरे की ओर देखने लगा लेकिन काजल और मौसी दोनों का ही वंहा कोई अतापता नही था,दोनों ही अंदर थे ये देखने भी नही निकले की यंहा क्या हो रहा है,मैने बुझे हुए मन से अपना लेपटॉप और बेग उठाया इसके अलावा था भी क्या मेरे पास ,वो लोग मुझे गली से बाहर ले गए और एक कार में बैठने को कहा…

मैं अब भी सकते में था की आखिर काजल ने ऐसा क्या कह दिया की ये लोग मुझे लेने आगये..मैं जानता था की काजल कभी मेरे साथ कुछ गलत नही होने देगी,मैं ये भी जानता था की वो भी मुझे बेहद ही प्यार करती है और उसने ऐसा मेरे भविष्य के लिए किया है लेकिन मुझे बस एक ही बात खाये जा रही थी कि मेरे बाद आखिर काजल का ख्याल कौन रखेगा…??

अध्याय 19

शकील के सामने मैं सर झुका कर बैठा था ,ना जाने काजल ने मौसी से क्या कहा था की शकील ने मुझे बुलाया था..

“तो छोटे उस्ताद कैसे हो तुम “

शकील के लहजे से मुझे समझ नही आया की ये ऐसे क्यो बोल रहा है ..

मैंने उसे सर उठा कर देखा वो मुस्कुरा रहा था

“ठीक हु भाई..”

“तो पूरा प्रॉफिट खुद ही डकार जाना चाहते हो क्या ?”

मैं चौका

“क्या?? ये आप क्या बोल रहे है “

“आज तुम्हे मार्किट से बड़ा प्रॉफिट हुआ है और तुमने हमे बताया भी नही “

ओह्ह तो ये बात थी जो काजल ने मौसी को बताई और इसलिए शकील मुझे अपने पास ही रखना चाह रहा है ताकि साला अपने प्रॉफिट पर नजर रख सके

“अरे भाई मैं तो महीने के आखिर में आपको सारा हिसाब किताब देने ही वाला था,आप कहा काजल की बातों में आ गए वो तो नासमझ है उसे कहा हिसाब किताब की कोई समझ है “

मेरी बात सुनकर शकील मुस्कुराया

“हा सही कहा तूने ,इन साली रंडियों के बात में तो आना ही नही चाहिए ऐसे भी काजल तो सबसे बड़ी रंडी है हमारे रंडीखाने की है ना भोला “

उसने पास ही खड़े 50-55 साल के दुबले पतले शख्स को देखा जिसका नाम भोला था,वो साला अपने सड़े हुए दांत निकाल कर हँसने लगा था..

रंडी ...काजल को उसने रंडी कहा था,उस काजल को जो मेरे लिए किसी देवी से कम ना थी ,जिसने मुझे माँ वाला प्यार दिया था,जो मेरा पहला प्यार थी ,जो मेरी मोहोब्बत थी ..

मैंने भी तक की अपनी जिंदगी में ना जाने कितने बार कितने लोगो से काजल के बारे में ये बात सुनी थी लेकिन कभी मेरे जेहन में वो दर्द नही उभरा था,मन किया की अभी शकील का चहरा तोड़ दु लेकिन इतनी हिम्मत मुझमें नही थी ,शायद काजल को भी पता था की अगर मैं उससे प्यार करता हु तो ये दर्द मुझे जीवन भर झेलना पड़ सकता है शायद इसीलिए उसने मुझे अपने से अलग करने की सोची थी…

मैं बस अपना सर झुकाए हुए था,काजल को रंडी कहना मुझे बिल्कुल भी पसंद नही आया लेकिन मैं कर भी क्या सकता था,इन्हें ये तो नही बता सकता था की मैं उसके बारे में क्या सोचता हु,और मेरे अलावा किसी को इसकी फिक्र ही कहा थी,यंहा तक की काजल ने भी इसकी क्या फिक्र की उसने तो मुझे अपने से दूर ही कर दिया था…

“सुन बे छोरे,एक बात दिमाग में भर ले ,अगर मुझसे गद्दारी की ना तो तेरी बहन से यंहा रंडी नाच करवाऊंगा समझा ,बहन है की नही तेरी “

शकील की आवाज में एक दबंगई आ गई थी ,मैंने ना में सर हिलाया

“भाई ऐसे ये भी चिकना है ,इसका पिछवाड़ा मारने के लिए ग्राहक मिल जाएगा “भोला की बात सुनकर शकील फिर से बुरी तरह से हंसा फिर थोड़ा गंभीर हो गया..

“कितना मुनाफा कमाया आज तूने “

“भाई 4 गुना लगभग जितना अपने दिया था”

शकील और भोला दोनों की ही आवाज बंद हो गई ,मुझे समझ नही आ रहा था की आखिर ये दोनों चुप क्यो हो गए मैंने सर उठा कर देखा तो वो दोनों आंखे फाडे मुझे ही देख रहे थे..

“साला इतना फायदा तो अपने धंधे में भी नही है बे ,शाबास मेरे शेर ,अब तू एक काम कर की वो रंडीखाना छोड़ और यही रह तेरे लिए आलीशान कमरा तैयार कर देता हु और किसी चीज की जरूरत हो तो मांगने में बिल्कुल भी हिचक मत करना ,तुन आज इतना बड़ा प्रॉफिट किया है तो बोल आज तुझे क्या चाहिए,आज तेरी एक मुराद मैं पूरी कर दूंगा …”शकील के चहरे में खुशी के भाव आ गए लेकिन मेरे लिए ये जगह किसी जेल से कम नही होने वाली थी ..

“अरे शर्मा क्यो रहा है बोल भी दे,दारू पियेगा या किसी रंडी को बुलावा दु ठोकने के लिए”

शकील और भी मुस्कुरा रहा था..

“मुझे एक बार काजल से मिलना है..”

मेरी बात सुनकर वो और भोला दोनों ही मुझे आश्चर्य से देखने लगे ..

“मुझे पता था मुझे पता था मुझे पता था ..”शकील ऐसे हंसा जैसे कोई बड़ा जोक सुना दिया गया हो ,वो जोरो से हँस रहा था जबकि भोला आंखे फाडे उसे ही देख रहा था..

अचानक ही शकील ने मुझे देखा,उसकी हंसी रुक गई थी और आंखों में जैसे अंगारे नाच रहे हो ,वो स्थिर आंखे जैसे अभी उनकी नशे फट जाएगी ,उसके आंखों में असीमित गुस्से का उबार आ गया था, मैं उसकी इस मनोस्तिथि को समझ ही नही पा रहा था वो मुझे खा जाने वाली निगाहों से देख रहा था,ऐसा लगा जैसे वो सच में मुझे आंखों से ही मार देने वाला है,बहुत देर तक वो मुझे ऐसे ही घूरता रहा,मेरे हड्डियों में जैसे कंपन हो गई मुझे लगा की अभी ये उठेगा और मुझे जोरो से एक थप्पड़ लगाएगा या शायद जान से ही मार दे…

लेकिन...उसके चहरे के भाव अचानक ही बदलने लगे उसके होठो में मुस्कुराहट ने जगह ले ली थी ..

“जा आज दिया समय तुझे जितना समय तुझे चाहिए दिया,मिल ले काजल से ,मेरे आदमी तुझे वंहा ले जायेगे …”

उसने बड़े ही शांत भाव से कहा,और अपने आदमियों को मुझे वंहा ले जाने की नसियत दे दी ,भोला के चहरे में असीम आश्चर्य देख मुझे माजरा कुछ समझ नही आया ,मैं उसे सलाम करके वंहा से निकला ही था की भोला की आवाज से मेरे पैर रुक गए,शकील के कमरे से मैं बाहर निकल चुका था और उसके आदमी मेरे आगे थे,मैं वही रुक कर उनकी बात सुनने की कोशिस करने लगा…

“आपने उसे काजल से मिलने की इजाजत दे दी भाई”भोला की बात में के आश्चर्य था…

“जाने दे उसे ,मैं चाहता हु की ये काजल से और काजल इससे इतनी मोहोब्बत करे की इन्हें जुदा करने में मजा ही आ जाए “

उसकी बात सुनकर मैं दंग रह गया था

“जैसे पिछली बार किया था “भोला की हँसने की आवाज आयी,मैं और भी दंग हो गया,अब मुझे काजल की कही हर बात का मतलब समझ आने लगा था ..

“पिछली बार तो वो साली बच्ची ही थी,लेकिन इस बार तो उसे ऐसा तड़फाउंगा की उसे अपने लिए फैसले पर जीवन भर दुख रहेगा,मुझे ना कहा था उसने आज देख दुनिया भर से मरवाते फिर रही है,इस बार उसे फिर से प्यार में पड़ने दे,फिर से उसके दिल को चकनाचूर करने का ये मौका मिला है जाने कैसे दु “

शकील की आवाज मुझे किसी दैत्य सी लगने लगी थी,काजल के लिए उसके दिल में इतनी नफरत बेवजह तो नही हो सकती थी,लेकिन उसकी बातों से इसका अनुमान साफ लगाया जा सकता था की वो काजल से कितनी नफरत करता है,वो चाहता था की काजल किसी से बेपनाह प्यार करे और फिर वो उस लड़के को काजल की जिंदगी से जुदा कर दे ,लेकिन क्यो….??

शकील के आदमी मुझसे दूर निकल चुके थे मैं झट से उनकी ओर दौड़ा अब इन सवालों का जवाब तो मुझे काजल ही दे सकती थी……….

********

मैं कमरे के दरवाजे में खड़ा था,अंदर भावनाओ का तूफान खलबली मचा रहा था,मैंने धीरे से दरवाजे को खटखटाया..

“कौन है …”

काजल की वो तीखी आवाज मेरे कानो से टकराई थी ,उसकी आवाज से मुझे समझ आ रहा था की उसका मूड कुछ ठीक नही है ,मैंने कुछ नही कहा था,शकील के आदमी नीचे खड़े थे,शायद मौसी के पास बैठे हो या पान के टपरी में बैठे गपिया रहे हो,शकील ने मुझे काजल से बात करने का पूरा समय दिया था…

दरवाजा खुला ...और …

काजल की निगाह मुझपर ही टिक गई वो थोड़ी घबरा गई थी…

“यंहा क्यो आया है तू शकील को पता चलेगा तो …”

“मैं उसकी परमिशन लेके ही आया हु “वो थोड़ी चौकी फिर कमरे से निकल कर नीचे देखने लगी उसे शकील के आदमी बेफिक्र दिखाई दिए होंगे,वो फिर से मेरे पास थी..

“यंहा क्या लेने आया है चूतिये,यंहा अब तेरा कोई भी नही है,या मेरी लेने आया है “

अब उसके चहरे में फिक्र की जगह गुस्सा था,मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुराया

“अंदर नही आने बोलोगी “

वो मेरे चहरे को देखती रही मैं बिना कुछ बोले ही अंदर चला गया था और उसके बिस्तर में बैठ गया…

वो मुझे अब भी देख रही थी …

“तूने ऐसा क्यो किया काजल ,क्या तुझे मेरे प्यार में यकीन नही था…”

मेरी बात से उसके चहरे में एक अजीब सा तूफान आ गया था...वो थोड़ी देर चुप रही

“कितनी बार कहु तुझे की मुझे प्यार करने का हक नही है ,मैं अब एक रंडी हु बस एक रंडी जो लोगो के जिस्म की आग तो बुझा सकती है लेकिन …….लेकिन किसी को अपने सीने में जगह नही दे सकती ..”

वो थोड़ी झल्लाते हुए बोली लेकिन बोलते ही बोलते उसकी आवाज धीमी हो चुकी थी

“लेकिन क्यो…?क्या किया था शकील ने तेरे साथ जो तू प्यार से इतना डरती है ,तू शकील की फिक्र मत कर मैं उसे देख लूंगा…”

मेरी बात सुनकर थोड़ी देर के लिए उसकी नजर मेरे चहरे में जम गई ,फिर उसके होठो में एक फीकी सी मुस्कान आ गई

“तू शकिल को देख लेगा...मेरे लिए..कितनी बार तुझे कहु की तेरे सामने एक उज्वल भविष्य है ,इस रंडी के चक्कर में उसे खराब मत कर रे..अगर ऐसा कुछ हुआ तो सबसे ज्यादा मुझे दुख होगा,क्योकि इसका कारण मैं ही रहूंगी..”

वो रोते हुए बैठ गई थी मैंने बड़े ही प्यार से उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया वो मेरे सीने में छुपने लगी …

“तुझे नही पता की शकील कितना बड़ा कमीना है ,और वो चाहता है की मैं तुझसे बेपनाह मोहोब्बत करू ताकि उसे तुझे बर्बाद करने में मजा आये,मैं फिर से ये सब नही झेल पाऊंगी राहुल प्लीज्...प्लीज् मेरी जिंदगी से चले जा और फिर कभी मेरे बारे में मत सोचना ..

”

उसके आंखों से टपकते हुए मोतियों ने मेरे कमीज को गीला कर दिया था,मेरी आंखों में कोई पानी नही था मैं बस अपनी ही दुनिया में खोया था,जो शकील हमे मिलने नही देना चाहता,जो शकील हमारे प्यार में सबसे बड़ी बाधा है मैं उसे ही मिटाने के ख्वाब देखने लगा था,मुझे पता था की उसके पास मुझसे ज्यादा पैसे है पॉवर है और मैं अभी तो उसका कुछ भी नही कर सकता लेकिन मैं अपनी काजल को भी नही छोड़ सकता था,और काजल को पाने का एक ही रास्ता था ,शकील के नाक के नीचे से मुझे काजल को ले जाना था,मुझे काजल को इस जहन्नुम से आजाद करना था और अब मेरे लिए यही मेरा लक्ष्य था…

काजल ना जाने कब से मेरे चहरे को देख रही थी

“क्या हुआ तू कहा खो गया ..”

“मैं उस शकील को बर्बाद कर दूंगा,तुझे इस जहन्नुम से बाहर निकलूंगा,तू ही मेरी पत्नी बनेगी ,मेरा पहला प्यार है तू मैं तुझे किसी भी कीमत में नही खो सकता …”

काजल के चहरे में आश्चर्य नाचने लगा था,वो थोड़े देर मुझे ऐसे ही देखती फिर …

‘चटाक’

एक जोरदार झापड़ आकर मेरे गालों में पड़ा…

“तू पागल होई गया है ,मैं तुझे समझने की कितनी कोशिस कर रही हु और तू है की मेरी बात ही नही सुन रहा है,वो एक दैत्य है तुझे खा जाएगा,तेरा केरियर तेरे सपने,तेरे माँ बाप के सपने सबको खा जायेगा ,तेरे लिए क्या इन सबकी कोई अहमियत नही है ,तुझे बस अपनी पड़ी है ,क्या चाहिए तुझे मेरा जिस्म ले अभी पूरी कर ले अपनी तमन्ना “

काजल ने अपनी साड़ी का पल्लू अपने छाती से अलग कर दिया ,उसके आंखों में आंसू लेकिन चहरे में तमतमाहट थी …

और मेरे होठो में उसे देखकर बस एक मुस्कान ..

“तुझे भी पता है की मुझे क्या चाहिए,अगर ये ही सब चाहिए होता तो तू मुझे अपने से यू अलग नही करती ..है ना…”

काजल की नजर झुक आई और उसने मेरे सीने को एक जोर का मुक्का मारा और फिर मुझसे सट गई ..

“तू क्यो समझ क्यो नही रहा है ,हमारा यू मिलना खतरनाक हो सकता है.हमारा प्यार हमारी बर्बादी का कारण बन सकती है “

अब वो खुलकर रोने लगी थी,वो मुझे समझाने में असफल रही थी ..

“मुझे सब चीजो की समझ है काजल,और आज के बाद मैं ऐसे तुझसे कभी नही मिलूंगा,मुझे अपने सपनो की और अपने माता पिता के सपनो की भी फिक्र है और मैं उसे पूरा भी करूंगा,लेकिन इन सबका मैं क्या करूंगा जब तू ही मेरे साथ ना हो ……..तू फिक्र मत कर आज के बाद हम कभी नही मिलेंगे,लेकिन तुझे मुझसे एक वादा करना होगा…”

उसने फिर से मुझे असमंजस से देखा

“तू जब तक ठीक नही हो जाती तब तक कोई धंधा नही करेगी ,दूसरा बनवारी काका तुझे अगर कोई पैसे दे तो तू चुपचाप उसे रख लेगी ,तीसरा तू डॉ के पास नियमित जाएगी और समय पर अपनी दवाई लेगी ..बस इतना तुझे करना है करेगी ना..

”

उसने मुझे झूठे गुस्से से देखा

“मतलब तू नही सुधरेगा “

उसकी वो मासूम आंखे कुछ खिल गई थी जैसे उसे मेरे प्यार और प्यार की ताकत पर भरोसा हो गया हो ,

“मरना और बर्बाद होना इससे ज्यादा वो क्या बिगड़ लेगा मेरा और तेरा हमने इससे भी बत्तर दुनिया देखी है काजल,अब हम और नही सताए जा सकते,अब तो रोने की बारी उनकी है जो हमारे बीच में आएंगे,मुझपर भरोसा कर ,तुझे भरोसा है ना ..”

हम दोनों ही एक दूजे की आंखों में खो गए थे,उसने बस हा में अपना सर हिलाया और मेरे होठो पर अपने होठो को रख दिया,हमारे होठ मिले ,इतने नाजुक होठो को चूमने के बाद भी मेरे जेहन में कोई हलचल नही कौंधी थी मुझे बस उसके प्यार भरे स्पर्श का अहसास हुआ ,वो नाजुक सी छुवन का अहसास ,वो मेरे प्यार की गंध जो मेरे नासिका में गहरा रही थी ,वो भरोसे की महक,वो दर्द के हर कतरे से आजाद होने की खुशी…

मैं उनमे डूब रहा था वो मुझमें डूब रही थी,ना मेरे दिमाग में कोई शकील था ना ही कोई केरियर मेरे दिमाग में थी सिर्फ और सिर्फ मेरी काजल,मेरी काजल जिसे मैं सच में पाना चाहता था,ये पाना क्या होता है मुझे इसका आभास ही था क्योकि काजल तो शायद अब मेरी ही थी,......

बस उसके पास होने के अहसास में ही वो खुशी थी जो दुनिया की कोई दौलत मुझे नही दे सकती थी और ना ही दुनिया का कोई डर मुझसे वो छीन सकती थी……...

अध्याय 20

मेरे दिमाग में बस काजल और शकील ही चल रहे थे,मुझे भी पता था की शकील कितना खतरनाक और पैसे वाला है,वो कितना ताकतवर है इसका अंदाजा भी मुझे नही था ,इसलिए कुछ भी करने की जल्दबाजी करना बहुत ही बड़ी मूर्खता थी,लेकिन मैं काजल को किसी भी हालत में खोना नही देना चाहता था…

सोच सोच कर मेरा दिमाग फटने लगा था लेकिन कुछ भी समझ नही आ रहा था,आखिर में मैं आंखे बंद करके सो गया,मैंने खुद को बिल्कुल ही ढीला छोड़ दिया कई सारे दृश्य मेरे सामने तैरने लगे थे,

काजल का आंसू से भरा हुआ वो चहरा मेरे सामने आ जाता था,उसकी आंखों में मेरे लिए वो प्यार जिसे देख कर मेरे मन एक सिहरन सी दौड़ जाती थी,वही शकील की बाते भी मेरे दिमाग में घूम जाती,मैंने खुद को शांत किया और बस अपने को छोड़ दिया…

मेरे बचपन का वो दृश्य मेरे आंखों में घुमा...

गांव में मेरे बचपन में जब हम स्कूल जाय करते थे तो एक टीचर थे पांडे सर,पांडे सर बच्चों से कई सवाल पूछा करते थे,एक दिन उन्होंने पूछा था…

“बताओ बच्चों की ताकत,पैसा और दिमाग में सबसे महत्वपूर्ण क्या है …”

सभी बच्चों ने अपने अपने तर्क दिए थे,मैंने कहा था की पैसा सबसे महत्त्वपूर्ण है क्योकि उसके बिना जीवन नही चल सकता,अधिकतर बच्चों ने पैसे और ताकत को अहम बताया था,तब सर मुस्कुराए और कहने लगे..

“सभी चीजो का अपना महत्व है लेकिन मेरे हिसाब से अगर तुम्हरे पास दिमाग ही नही है तो तुम पैसे और ताकत का गलत उपयोग करोगे,हो सकता है की तुम उसे खो भी दो लेकिन अगर तुम्हारे पास दिमाग है तो तुम पैसा और ताकत दोनों कमा सकते हो,तुम ऐसा कुछ कर सकते हो जिससे पैसा और ताकत दोनों तुम्हारे कदम चूमे..सोचो एक राजा के बारे में उसकी सेना में बहुत से ताकतवर लोग होते है और साथ ही उसके राज्य में कई धनवान लोग भी होते है लेकिन सभी राजा के गुलाम होते है,अगर राजा को जरूरत पड़ी तो उनका उपयोग करता है,सोचो ऐसा क्यो होता है,क्योकि राजा के पास वो दिमाग है की वो पैसे की मदद से ताकत को खरीदता है और फिर उसी ताकत की मदद से पैसे वालो पर अपना कब्जा जमाता है,और अगर राजा मूर्ख हुआ तो तुमने इतिहास में पढ़ा ही है की बड़े से बड़े राजवंश किस तरह से एक राजा की मूर्खता के कारण खत्म हो गए...हमेशा राजा जैसा सोचो ,दिमाग से सबको काबू में रखो यही राजनीति है…”

पांडे सर की बात याद आते ही मैं अचानक से उठ खड़ा हुआ,जैसे मुझे राह मिल गई हो ……..

रात के करीब दो बज चुके थे और मैं अपने लेपटॉप खोले हुए कुछ सर्च कर रहा था,मैंने एक गेमप्लान तैयार किया मैंने अपनी कैलकुलेशन की और मुस्कुराते हुए सो गया……..

************

मेरे पहले सेमेस्टर का रिजल्ट आ चुका था और सभी की उम्मीद से और शायद खुद की उम्मीद से भी ज्यादा अच्छा मेरा परफार्मेंस रहा था मैंने क्लास में टॉप किया था,इससे मेरा दोस्त प्यारे और संजय सर भी बहुत खुश थे…

“यार पार्टी तो बनती है “मेरे दोस्त ने कहा

“अबे जानता है न की इसकी कंडीसन क्या है और तुझे पार्टी चाहिए”संजय सर ने उसे डांट दिया

“कोई बात नही सर एक नई नॉकरी मिल गई है और सेलरी बहुत ही अच्छी है,एक एक बियर तो पिला ही सकता हु आप लोगो को …

दोनों मुझे आंखे फाडे देख रहे थे…

“बहुत पैसे वाला हो गया बे तू तो “

“सर कुछ जैकपॉट टाइप की चीज हाथ लग गई है लेकिन अभी कमियाबी ये नही है ,असल में असली जैकपॉट के लिए मुझे आप लोगो की भी मदद चाहिए “

दोनों मुझे आश्चर्य से देख रहे थे…

“क्या बात है तू कहना क्या चाह रहा है,और कोई ऐसा वैसा काम हो तो भाई हमे माफ कर “

संजय सर थोडा थोड़े फिक्र मंद नजर आये

“ऐसी कोई बात नही है सर,सब कुछ लीगल ही है..एक बार मेरी बात सुन लीजिए ,क्यो ना बियर के साथ बात किया जाए “

हम तीनो बैठे बियर पी रहे थे,प्यारे चारो ओर ऐसे देख रहा था जैसे बार नही किसी जन्नत में आ गया हो ,

“अब बताओ भी की आखिर ऐसा क्या कर रहे हो की तुम इतने पैसे वाले बन गए हो “

संजय सर थोड़ा घबरा रहे थे..

“सर मैं पैसे वाला नही बना हु बस समझ लीजिए की किसी दूसरे के पैसे पर ऐश कर रहा हु “

“क्या मतलब???”

मैंने संजय सर को बताया की मैं कैसे शकील के पैसे को शेयर मार्किट में इन्वेस्ट कर रहा हु ..

“तू पागल हो गया आई क्या उसके पैसे को ऐसे उड़ा रहा यही अगर उसे कुछ पता चल जाएगा तो ..”

“सर यही तो मुझे आपकी मदद चाहिए “

“मतलब??”

“मतलब ये की सिर्फ एक ही अकाउंट क्यो हम कई अकाउंट से ट्रेडिंग कर सकते है ,मैं चाहता हु की आप और प्यारे भी एक एकाउंट बनाये इसके लिए आपको कुछ भी नही करना है ना ही कोई पैसे लगाने है ,बस आपको अपनी एक आईडी बनानी है ,आपलोगो के पास बस स्मार्टफोन होना चाहिए उसका इंतजाम हम कर लेंगे,यंहा कोई सस्ता स्मार्टफोन आराम से मिल जाएगा,मैं कुछ दिनों में पैसे का जुगाड़ भी कर लूंगा,मैं जिस शेयर को जिस भाव में कहु आपको बस वो खरीदना है,और जिस भाव में कहु उसमें बेच देना है ,जब पैसे ज्यादा हो जायेगे तो हम और भी ब्रोकर के साथ अकाउंट खुलवायेगें ,ताकि हमारा पैसा रोटेट होता रहे,बस इनिशियल अमाउंट का जुगाड़ करना होगा वो मैं कर लूंगा,कम से कम 10 हजार से शुरू करेंगे …”

दोनों मुझे अजीब निगाहों से देख रहे थे..

“तू उसका पैसा मारेगा और उसे पता नही चलेगा ??”

उनकी बात सुनकर मैं मुस्कुराया ..

“सर मैंने कब कहा की मैं उसका पैसा मारूंगा...मैं मैनेज करता हु वो सब आप बस वो कीजिये जो मैं कह रहा हु ..”

प्यारे और संजय सर ने एक दूसरे को देखा और फिर धीरे से सर हिलाया …..

**************

मैं शकील के सामने खड़ा था,

“भाई मुझे कुछ पैसे चाहिए “

उसने मुझे थोड़ी देर घुरा..और मेरे हाथो में रखी किताब को देखा जो उसने ही मुझे पढ़ने के लिए दी थी ..

“अरे छोटे पैसे तो तेरे ही अकाउंट में है ना फिर भी मुझसे मांग रहा है ,”

“भाई पैसे मेरे अकाउंट में जरूर है लेकिन वो आपके पैसे है,उन्हें मैं आपके इजाजत के बगैर कैसे हाथ लगा सकता हु “

शकील के होठो में एक मुस्कान खिली

“कितने चाहिए”

“10 हजार “

“10 हजार…??? साले इतने पैसे का क्या करेगा तू,रहता तू मेरे पास ही है ,खाना तुझे मैं देता हु तो पैसे का करेगा क्या ??”

इस बार शकील के आवाज में थोड़ा गुस्सा था..

“भाई अपने कहा था की आप मुझे सेलरी देंगे और प्रॉफिट में हिस्सेदारी भी देंगे..मैं अपना काम बहुत ही जी जान लगा कर कर रहा हु ,मैंने आपके दिए 30 हजार को कुछ ही दिन में 1.5 लाख बना दिया है,तो इसमें मेरा प्रॉफिट कितने परशेन्ट का हुआ ..??”

मेरी बात से वंहा खड़ा हर आदमी खामोश हो चुका था..

“मादरचोद आज तक किसी की इतनी हिम्मत नही हुई की शकील भाई से हिस्सेदारी मांगे..”

एक आदमी जोरो से चिल्लाया ,वही शकील अब भी खामोशी से मुझे ही देख रहा था..

“भाई आपलोग जो काम करते हो वो अलग काम है ,उसमें हिस्सेदारी वाली चीज नही होती लेकिन ये काम बिल्कुल अगल है और लीगल भी है ,इसमें पैसे में बात नही होता बल्कि परसेंटेज मे बात होती है ,और मैं उस हिसाब से अपना केलकुलेशन करूंगा अगर आप ये बता दे की इसमें मेरा क्या फायदा होने वाला है..

मैं पूरा हिसाब किताब क्लियर रखना चाहता हु ताकि बाद में फिर कोई प्रॉब्लम ना हो ..”

मैं जो रट कर आया था एक ही सांस में बोल दिया

शकील अब भी खामोश था और सभी उसे ही देख रहे थे..

“ह्म्म्म लगता है तुझसे बैठ कर बात करनी पड़ेगी ..तो बोल कितना परशेन्ट लेगा तू ..”

आखिर शकील की आवाज आयी

“भाई मैं कौन होता हु आपसे परशेन्ट मांगने वाला आप जितना दे दो ..”

“10% कैसा रहेगा ..”शकील ने बोला

“अरे भाई इस साने को 10% दोगे,??साला पैसा तो आपका है फिर इसे 10% क्यो “पास खड़ा हुआ उसका चमचा बोल उठा..

लेकिन शकील ने उसे घूर कर देखा और वो चुप हो गया ..

“चल दिया तुझे 10% “आखिर शकील ने बोला

“नही भाई मुझे सिर्फ 5% बस दे दो तो भी चलेगा ,लेकिन प्रॉफिट का 5% “

इस बार शकील थोड़ा कंफ्यूज था

“मतलब ??”

“मतलब भाई की जैसे अभी तक हमे लगभग 1 लाख 10 हजार का शुध्द प्रॉफिट हुआ है इसका 5% आप मुझे दो मतलब 5हजार 500 रुपये बाकी आपका “

शकील थोड़ा खुश दिखा

“लेकिन इससे तुझे क्या फायदा होगा “

“भाई मेरे पास पैसे नही है,अगर घाटा हुआ तो मैं कहा से दूंगा,इसलिए मैं फायदे का 5% मांग रहा हु घाटा हुआ तो वो आपका रहेगा,ऐसे भाई लोग तो 20-30% चार्ज करते है और कई तो बस 20-30% देते है बाकी खुद ही रखते है ,आपका मेरे ऊपर इतना अहसान है तो मैं ज्यादा कैसे मांग सकता हु “

शकील थोड़ा सोच में पड़ गया

“ठीक है ,फायदे का 5% तू रख ..”

“भाई मैं वो पैसा हर महीने निकालना चाहूंगा,आपकी इजाजत चाहिए “

“ठीक है…”

मेरा काम हो चुका था

“भाई और वो 10 हजार रुपये “

“साले तुझे तो 5 हजार मिलने चाहिए थे ना “

“जी भाई लेकिन अभी थोड़ा काम भी तो है ,इतना बड़ा फायदा करवाया हु आपका आप कितना तो कर ही सकते हो ,अगले बार से जो महीने में फायदा होगा उसी से पैसे लिया करूंगा “

शकील को शायद मेरी बात अच्छी लगी ..

“ठीक है इसे 10 हजार दे दो रे...और ये पुस्तक क्यो पकड़कर घूम रहा है “

“भाई वो आपसे कुछ पूछना था “

शकील ने इजाजत दे दी और मैंने उस पुस्तक को खोलकर एक चेप्टर निकाला ..और शकील के पास जाकर उसे दिखाने लगा

“भाई मैं सोच रहा था की क्यो ना हम penny स्टोक्स में पैसे लगाए,ऐसे स्टोक्स जिनका रेट बहुत ही कम है ,सोचिए की अगर कोई स्टॉक सिर्फ 10 पैसे मे मिल जाए तो ,1000 रुपये में हम कितना खरीद सकते है ,और 1000 रुपये का स्टॉक 2हजार होने में बहुत समय लग सकता है लेकिन 10 पैसे के स्टॉक को 20 पैसा होने में कितना समय लगेगा ...

कुछ ऐसे ही स्टोक्स है जो 100 रुपये से कम के है उन्हें खरीदा जाए तो वो परसेंटेज में जायद पैसा कमा कर देंगे “

शकील ने थोड़ी देर अपना सर खुजलाया

“ठीक है ठीक है जो तुझे समझ आये वो कर ,छोटी छोटी बातों को पूछने की क्या जरूरत है “

“भाई वो इसमें रिस्क भी तो ज्यादा रहता है,कमा भी सकते है और गंवा भी सकते है ,मतलब है की 10पैसे का स्टॉक 5 पैसे भी तो हो सकता है ना,इसलिए आपकी इजाजत चाहिए ताकि बाद में आप मुझे ना बोले “

शकील थोड़ी देर चुप रहा और बुक को पढ़ने की कोशिस करने लगा मुझे पता था की उसे घण्टा कुछ भी समझ नही आने वाला था ..

“ठीक है दिया इजाजत जो करना है कर “

“थैंक्यू भाई “

“हम्म और काजल से मिलने गया था ना क्या हुआ उसका “

इस बार शकील के होठो में एक कमीनी मुस्कान थी,लेकिन मैं भी अपने आप को पहले से तैयार करके आया था

“अपने सही कहा था भाई,रंडी तो साली रंडी ही रहेगी..मैं ही चूतिया था जिसे उससे लगाव हो गया था,लेकिन अब नही भाई अब तो जमकर पैसे कमाने है ,पैसे रहेंगे तो वैसी कई रंडियों को खरीद लेंगे ..”

मेरी बात सुनकर जैसा मुझे यकीन था शकील का चहरा थोडा बुझा बुझा सा हो गया,वो तो चाहता था की हमारे बीच प्यार हो ना सिर्फ प्यार हो बल्कि काजल मुझे टूटकर चाहे ताकि वो हमे अलग करके मजे ले सके,लेकिन अब बेचारा शकील किस चीज के मजे लेता,वो मुझे निकाल भी नही सकता था क्योकि मैंने उसे ऐसा ख्वाब दिखा दिया था जिसे पूरा करने में उसे मेरी जरूरत पड़ती ,कम से कम अब मैं सेफ था और मुझे काजल को भी सेफ करना था….

अध्याय 21

शकील की इजाजत मिलने से मेरा एक टेंशन दूर हो गया था मैंने संजय सर और प्यारे के अकाउंट में 5-5 हजार डाले अब टाइम था मेरे गेम प्लान का …

इसे समझने से पहले आपको शेयर मार्किट के कुछ टेक्निकल टर्म को समझना होगा..जिसमे है ask price,bid price,aur volume…

पहले आते है ask प्राइज पर ask प्राइज वो प्राइस होता है जिसपर कोई व्यक्ति किसी स्टॉक को खरीदने के लिए तैयार हो ,वही bid प्राइज वो प्राइज है जिसपर कोई उस स्टॉक को बेेेचने के लिए तैयार हो ..मतलब ये की अगर कोई किसी स्टॉक को 100 रुपये में बेचना चाहे तो वो उसका bid प्राइज हो गया,अब अगर किसी को लगता है की 100 रुपये सही रेट है तो उसमें उसे खरीद लेगा नही तो वो अपना ask प्राइज लगा देना 98 रुपये का ,

अब आते है वॉल्यूम में की आखिर स्टॉक मार्किट में वॉल्यूम क्या चीज है,जब कोई ask और bid प्राइज एक भाव में मिल जाते है,मतलब की किसी एक भाव में कोई समझौता हो जाता है माना की किसी शेयर को कोई 100 रुपये में बेचने को तैयार हो और 100 रुपये में ही कोई खरीदने को भी तैयार हो और वो 1 शेयर बेचे और 1 शेयर खरीदे तो वॉल्यूम हो गया 1 का ..

अधिकतर बड़े शेयर में ज्यादा वॉल्यूम होते है वही छोटे शेयर को खरीदने या बेचने में किसी का ज्यादा इंटरेस्ट नही होता इसलिए उसमें वॉल्यूम ज्यादा नही होता,ये 10करोड़ भी हो सकता है तो कही कही आपको 500-100 भी देखने को भी मिल जाता है,

मैंने ऐसे ही स्टोक्स को सलेक्ट किया जिसमे वॉल्यूम 500 से नीचे हो और उसकी प्राइज भी 5 रुपये से कम ही हो ..मुझे ऐसे कुछ स्टोक्स भी मिल गए अब मेरा प्लान शुरू होने वाला था,

उन कुछ स्टोक्स में से मैंने एक ऐसे स्टॉक को लिया जिसमे वॉल्यूम बहुत कम था और वो ज्यादा बढ़ता भी नही था ताकि मैं उसमें कुछ कर सकू..

मैंने एक शेयर को 1 रुपये में खरीदना शूरू किया इसतरह मैंने कुछ दिनों में लगभग 7000 शेयर खरीद लिए

अब मैंने संजय सर और प्यारे को उस स्टॉक को 1.50 रुपये में 3300 शेयर खरीदने के लिए कहा,उन दोनों ने 3300 शेयर खरीदे और मैंने 1.5 के रेट में उसे बेच दिया इसतरह मुझे लगभग 3300 रुपये का प्रॉफिट हो गया...लेकिन उसी दिन मैंने संजय सर और प्यारे से कहा की पूरे शेयर को 3 रुपये की bid लगा दो ,मतलब की अब वही शेयर 3 रुपये में बिकने को तैयार थे,और मैंने इधर से 3 रुपये की ask लगा कर पूरे शेयर फिर से खरीद लिए ,स्वाभाविक था की इससे उन दोनों में हर एक को 4950 की प्रॉफिट हो गई ,लेकिन पैसा शकील के जेब से गया,इसतरह हमने मिलकर 9900 का प्रॉफिट कर दिया ,और पूरा पैसा लीगल तरीके से हमारे पास पहुच गया ,शकील को शक होने का सवाल नही था क्योकि इससे पहले मैंने वही शेयर 1 रुपये में खरीद कर 1.5 रुपये में बेचे थे ,अब उस शेयर का प्राइज 3 रुपये पहुच गया था,मैं जानता था की अब उसे इस रेट में खरीदने को कोई तैयार नही होगा लेकिन फिर भी मैंने उसे अपने पास रख लिया ताकि अगर उस प्राइज में कोई खरीदने वाला मिल जाए तो मैं उसे ये माल चिपका दु अगर ऐसा होता तो शकील को भी कोई नुकसान नही होता ,और हो भी जाता तो मुझे क्या था मेरे पास तो पैसे आ चुके थे,मैंने पहले ही सोचा था की शकील को भी पता नही लगाना चाहिए और उसका पैसा धीरे धीरे हमारे अकाउंट में ट्रांसफर होता रहे इसके लिए ये भी जरूरी था की उसे मैं कुछ फायदा भी दिखता रहू ताकि उसका लालच भी बना रहे ,इसलिए मैंने अपना ट्रेडिंग शुरू कर दिया,कभी कभी मैं पैनी स्टोक्स के जरिये शकील का पैसा प्यारे और संजय सर के पास भेजता रहा लेकिन बाकी समय में मैं शेयर मार्किट से मुनाफा कमाने के लिए जीतोड़ मेहनत करता था और जिस शेयर में मैं पैसा लगाता था उसपर ही संयज सर और प्यारे को भी पैसा लगाने बोलता,वो मेरे हिसाब से काम कर रहे थे और कुछ लॉस और कुछ प्रॉफिट के साथ हम पैसा कमा रहे थे..

कुछ ही दिन बीते थे और मैं काजल का हाल जानने के लिए डॉ के पास पहुचा

“तो राहुल आजकल तूम काजल के साथ नही आते..”

“वो टाइम पर आ तो रही है ना डॉ ..”

“हा बिल्कुल तुमने कसम जो दे रखी है उसे..”

डॉ मुस्कुराने लगा..

“डॉ आप उससे पैसे मत लेना,आपके और दवाइयों के जो भी पैसे बनेंगे वो मैं आकर दे जाया करूंगा..”

“मैं जानता हु तुमने ये बात मुझे पहले भी कही की इलाज में कितना खर्च हो रहा है वो किसी को पता नही लगाना चाहिए लेकिन राहुल अब समय आ गया है की उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना होगा..”

डॉ की बात सुनकर जैसे मेरी सांस ही रुक गई

“डॉ अपने तो कहा था की ये दवाइयों से ठीक हो जाएगा ..”

मेरी बात पर डॉ थोड़ा चिंतित हो गए थे,वो कुछ देर तक सोचते रहे ..

“मैंने अपनी तरफ से बहुत कोशिस की राहुल लेकिन ..”

“लेकिन क्या डॉ..”

“तुम जानते हो की काजल को lungs केंसर है,अभी वो पहले स्टेज में है लेकिन मैं नही चाहता की वो फैल जाए फिक्र वाली कोई बात नही है एक छोटा सा ऑपरेशन होगा बस”

डॉ की बात से मैं गहरे सोच में पड़ गया,क्योकि हॉस्पिटल में एडमिट करने का मतलब था की उसे वंहा से कुछ दिनों के लिए बाहर निकलना था और जैसा मुझे पता था की उसके पीछे शकील के लोग लगे हुए है जो उसपर नजर रखते है,और अगर ये बीमारी की बात शकील तक पहुची तो वो खुश होगा ना की काजल को हॉस्पिटल में एडमिट करने की परमिशन देगा,मुझे उसकी बीमारी के बारे में टेस्ट के बाद से ही पता चल गया था,इसीलिए 16 हजार का टेस्ट करवाया गया था,मैंने गूगल से ही सारी जानकारी निकाल ली थी लेकिन अभी तक मैंने काजल को कुछ भी नही बताया था ..

मुझे सोचता हुआ देखकर डॉ बोल पड़े ..

“राहुल फिर से सोच लो इस बारे में जल्द ही कुछ करना होगा,दवाइयों से हम उसे कुछ फील गुड़ तो करवा सकते है लेकिन पूरी तरह से ठीक नही कर सकते और अगर कही से भी वो फैलाना शुरू हुआ तो ...तुम पढ़े लिखे हो तुम्हे तो इसका अंदाजा होगा..”

“जी डॉ लेकिन पैसे कितने लग जायेगे..”

डॉ ने मेरी ओर देखकर एक गहरी सांस छोड़ी

“कम से कम 2-3 लाख,हा अगर कही से कोई सहायता मिल जाए तो कम में भी हो सकता है मतलब अगर कोई पोलिटिकल सपोर्ट हो वो विधायक या संसद निधि से पैसे मिल सकते है ,मुझे नही लगता की ऐसे केस में कोई दानदाता सामने आएगा,और जैसा तुमने बताया की उसके इलाज की किसी को खबर नही होनी चाहिए तो तुम्हारे लिए खुद ही फंड का इंतजाम करना थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन इससे कम में तो बात नही बनेगी,मैं अगर अपनी फीस भी माफ कर दु तो जो डॉ ऑपरेशन करेंगे और दवाईयो का खर्च तो आएगा ही ...तुम्हे 2-3 लाख का इंतजाम तो करना ही होगा..

”

डॉ की बात सुनकर मेरे माथे पर पसीना गहरा गया,एक तो काजल को हॉस्पिटल में लाने की टेंशन थी वही दूसरी ओर पैसों की ,मैं डॉ से बिदा मांगकर तो आ गया लेकिन मेरे मन में वही कौतूहल चल रहा था……

मैं संजय सर और प्यारे के साथ उसी चाय की टपरी में खड़ा हुआ चाय पी रहा था,मैंने वंहा से कुछ दूर पर आकाश (पैसे वाला लॉन्डा) को देखा वो बनवारी के साथ खड़ा कुछ बात कर रहा था,अचानक उसकी नजर मुझपर पड़ी और वो मुस्कुरा दिया,क्लास में टॉप करने से मुझे कम से कम मेरी क्लास के लोग तो पहचानने लगे थे,और आकाश मुझे कुछ और भी कारणों से जानता था जिन लोगो को पिछले अपडेट याद हो वो समझ गए होंगे,वही वो लड़का था जिसने काजल को 5 लाख का ऑफर दिया था,एक बार मेरे जेहन में वो बात गूंज गई थी ,5 लाख...सारी मुसीबत एक ही बार में हल हो सकती थी,और मैं जानता था की आकाश काजल से बदला लेने के लिए 5 क्या ज्यादा भी दे सकता था,एक बार मैं सोच में पड़ गया लेकिन अगले ही पल मेरे जेहन में काजल का प्यारा चहरा चमका..

वो उसकी भोली आंखे और उसमें से टपकती हुई मासूमियत,कितने दिन हो गए थे उसे देखे हुए,अगर 5 लाख के लालच में मैं काजल को मना बीच लू तो ये आकाश काजल की क्या हालत करेगा ये सोच कर ही मेरे जेहन में खुद के लिए इस फैसले की वजह से नफरत सी उठ गई ,नही नही ये नही हो सकता मैं ऐसा नही कर सकता……..लेकिन मैं करू तो क्या करू,एक तरफ मेरी जान की ये हालत है की उसे इलाज की जरूरत है और दूसरी तरफ मेरे पास ना तो पैसे है ना ही उसे उस रंडीखाना से निकालने की कोई तरकीब….

इतना तो फिक्स था की अगर काजल वंहा से निकली तो वो वंहा फिर से नही जा सकती थी और शकील ना उसे जिंदा छोड़ेगा ना ही उसे निकालने वाले को मुझे कुछ ऐसा करना था की शकील बस धुंए को खोजता रह जाए और काजल कही धुंए सी उड़ जाए,एक बार वो उड़ गई तो पैसे भी कही ना कही से जुगाड़ ही लूंगा…

दोस्तो मेरे जैसे आदमी के लिए 3 लाख बहुत बड़ी रकम थी लेकिन प्यार आपको वो हिम्मत देता है की आप अपने प्यार के लिए असंभव को भी संभव कर दिखाए,ये एक बार मेरे साथ हो चुका था जब काजल के टेस्ट के लिए 16 हजार लगने थे,मैंने जैसे ही उस टेस्ट का नाम गूगल किया मुझे समझ आ चुका था की ये टेस्ट केंसर के मरीजों के लिए होता है ये कन्फर्म करने के लिए की उन्हें केंसर है की नही ,और मुझे ये भी समझ आ चुका था की काजल के लिए ये टेस्ट कितना जरूरी है ,उस समय भी मेरी वो हैसियत नही थी आज भी नही थी,लेकिन एक यकीन उस समय भी था आज भी है.की मैं अपनी काजल के लिए कोई भी असंभव को संभव कर सकता हु और मुझे ये करना था,या ये कहु की करना ही था..

मैं उसे किसी भी कीमत में नही खो सकता था,वो मेरी किस्मत थी और किस्मत के आगे कोई भी कीमत कम ही होती है ……..

अध्याय 22

मैं चलता हुआ बनवारी के पास चला गया

“अरे कैसे हो इंजीनियर बाबू ,तुम्हारी तो ठाठ है “

बनवारी की बात सुनकर मैं नकली हंसी में हँसने लगा..

“ये आकाश क्या कह रहा था”मैने जाते हुए आकाश की तरफ इशारा किया

“अरे कहेगा क्या वही पुराना चुद का जुगाड़ ऐसे तेरी आइटम पर इसकी नियत पूरी तरह से डोली है ,आज भी उसे पाने को कुछ भी करने को तैयार रहता है “बनवारी ने गंदी हंसी हंसी

“अरे कहे की मेरी आइटम काका,रंडीया आजतक किसी की हुई है क्या ,बस साली के साथ कुछ कर नही पाया “

मैंने बड़ी मुश्किल से ये कहा लेकिन ये कहना जरूरी था ,बनवारी जोरो से हंसा

“और कुछ कर भी नही पाओगे...हा हा जब तक की शकील की मेहरबानी ना हो जाए ,वैसे भी काजल उसकी खास माल जो है “

मैंने उसे थोड़े शक के निगाहों से देखा जैसे मुझे कुछ भी ना पता हो

“क्यो”

“अरे तुझे पता नही “

“नही तो “

“असल में शकील और काजल दोनों ही इस शहर में एक साथ आये ,शकील ही काजल को कही से उठा कर लाया था,उस समय यंहा शकील नही बल्कि उसके चाचा कयामत का जोर था ,जब शकील काजल जैसी माल को लेकर आया तो कयामत बहुत ही खुश हुआ और शकील को अपने साथ ही रख लिया,काजल बेचारी के लिए वो दिन उसके जीवन के सबसे मुश्किल दिन थे,सारे गुंडों ने उसे कई दिनों तक लगातार रौंदा,मैंने ये ये भी सुना है की जितना काजल को दर्द मिलता शकील को उतनी ही खुसी मिलती,पता नही कैसी दुश्मनी थी उस जल्लाद की शकील के साथ ,फिर काजल को रंडीखाने में ले जाकर पटक दिया,और कुछ ही दिनों में शकील ने कयामत को मारकर उसकी जगह ले ली ,तब से शकील इस जगह का राजा है,धीरे धीरे काजल का दर्द कम होने लगा और शकील का उससे ध्यान भी ,लेकिन फिर पता नही उसे क्या हो गया जो काजल का पीछा करने के लिए उसके कई गुंडे साथ ही रहते है ,शायद तेरे कारण हो “

बनवारी हँसने लगा था मैं भी साथ साथ हँसने लगा

“अरे मेरी इतनी औकात कहा जो मैं शकील भाई से पंगा लू..”

“लेना भी मत,सोचना भी मत वरना तेरे जिस्म से चमड़ी उतरवा देगा वो शकील ,महामादरचोद आदमी है साला,जल्लाद है “

मैंने हांमी भारी और बनवारी से दुवा सलाम करके उसको चलता किया,मैं फिर से उसी टपरी में आकर खड़ा हो गया था..

मेरे चहरे में आये हुए भाव से प्यारे और संजय सर बेखबर नही रह पाए,

“क्या हुआ राहुल कुछ परेशान लग रहे हो “

संजय सर ने पूछा था,मैं इसी कसमकस में था की इन्हें कुछ बताऊँ या नही लेकिन सोचा की शायद कोई मसाला निकल जाए

और मैंने काजल के बीमारी और अपनी मजबूरी वाली पूरी बात उन्हें बता दी …

“ओह यार ...ये तो बड़ा लोचा है भाई तू इन सबमे मत पड़ ..

”प्यारे ने झट से कहा

“यार मुझे पैसों की फिक्र नही है लेकिन काजल को वंहा रहने नई दे सकता उसे वंहा से भागना होगा”

“तू पागल हो गया है ,अभी अभी तो तूने कहा की शकील के गुंडे काजल के पीछे है ,साले तेरी चमड़ी निकाल लेगा वो “

संजय सर के चहरे पर एक गंभीरता सी आ गई

“सर कोई तो होगा जो मेरी मदद कर सके ..”मैं जैसे फुसफुसाया लेकिन सभी खमोश थे,

“एक है “प्यारे चहका हम दोनों ने उसकी ओर देखा वो एक उंगली दिखा रहा था,बाइक पर एक हट्टा कट्टा नवजवान आ रहा था,माथे में तिलक लगाए उसका गौरा रंग और भी उभर कर सामने आ रहा था ,कंधे पर एक कपड़ा लपेटे हुए और आंखों में गॉगल लगाए वो किसी हीरो से कम नही लग रहा था…

“तू पागल हो गया है “संजय सर की आवाज अचानक से कांपने लगी थी,ये लड़का था हमारा प्रेसिडेंट अविनाश …

अविनाश भी संजय सर को देखकर रुक गया,

सभी ने उसे नमस्कार किया

“क्यो रे छोटे इधर आ …”उसने मुझे ही बुलाया था

“मादरचोद तू तो टॉप कर गया बे,तुझे देख कर लगता नही की तू इतना साना होगा,क्यो बे संजय तेरा लौंडा तो एकदम धांसू निकला ,तुझे ही प्रॉब्लम थी ना कमरे की अब कैसे चल रहा है “अविनाश ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा

“कुछ भी ठीक नही है भाई “

प्यार बोल उठा ,हम उसे ऐसे देख रहे थे की वो कुछ और ना बोल दे संजय सर की मानो फट के चार ही हो गई थी लेकिन प्यारे तो साला प्यारे ही था…

“भाई जिस बंदे ने इसे कमरा दिया था ना ,इस साले को उसकी मासूका से ही इश्क हो गया ,वो भी इसे प्यार करती है लेकिन ..”

हम सब चौक गए थे प्यारे ने हमे आंखों से ऐसे इशारा किया जैसे कह रहा हो की मैं सब सम्हाल लूंगा तुम बस हा बोलो ..

अविनाश भी मुझे बड़ी अजीब निगाह से देखने लगा

“मैं तो साला तुझे सीधा साधा समझ रहा था तू तो एक नंबर का कमीना निकला “

“कमीनापन नही भाई इसने तो उसे अभी तक छुआ भी नही है ,लेकिन इसके मालिक को शक है की उसकी माशूका का किसी और के साथ चक्कर है और रोज बेचारी को बहुत मारता है,जंहा भी वो जाती है उसके गुंडे उसके साथ होते है,,अब ये बेचारा क्या करे वो ठहरा यंहा का डॉन और ये तो सीधा साधा आदमी है,इसकी बस इतनी गलती है की ये प्यार कर बैठा,अब गरीब का प्यार करना भी कोई गुनाह है क्या भाई..वो भी इससे मोहोब्बत करती है लेकिन बेचारी वंहा घुट घुट कर रह रही है “

अविनाश के आंखों में अचानक से मेरे लिए हमदर्दी का भाव आया,जंहा गरीब कह दो तो अविनाश भावुक हो जाता था..

“कोई नही छोटे कोन है वो मादरचोद तेरा मालिक उसके घर में घुस के उसे मारूंगा “

“नही नही भाई”मैं बुरी तरह से डर गया था क्योकि अविनाश को गरीबो से जितनी हमदर्दी थी उतना ही वो जिस्म बेचने वाली औरतो से नफरत करता था,दुनिया भी अजीब है वो रंडियों से नफरत करती है लेकिन ये कोई नही देखता की वो किस मजबूरी में इस धंधे में आ गई है ,ऐसे ही कुछ आदर्शवादियों में अविनाश की भी गिनती थी ..

“वो वो बहुत ही ताकतवर आदमी है शहर का डॉन है,और मैं उसके पास काम भी करता हु मैं नही चाहता की मेरा काम इस वजह से बंद होई जाए अभी उससे कुछ अच्छे पैसे बन जाए तो फिर मैं उसे छोड़ दूंगा “मैंने हड़बड़ाते हुए कहा

“ह्म्म्म क्या नाम है उसका “

अविनाश कुछ सोचता हुआ बोला

“किसका ??”

“अबे तेरी आइटम का और उस डॉन का “

“क क क क क क “मेरी जुबान लड़खड़ा गई थी

“किरण ??”
“नही भाई काजल ,और वो डॉन है शकील ..”

“ओह तो शकील की माल है ,वही ना जो साला रंडियों का धंधा करता है सारे शहर को गंदा करके रखा है मादरचोद की रंडियों ने ,ठीक है छोटे तू फिक्र मत कर तेरा प्यार तुझे मिलेगा और उस शकील के बच्चे को पता भी नही चलेगा ,उस साले के गुंडों के नाक के नीचे से उठाकर लाऊंगा उसे ...ओ चाचा चलो सबको चाय पिलाओ …”

अविनाश की बात सुनकर हम सब एक दूसरे को देखने लगे,ये क्योकि ये जितना आसान लग रहा था उतना ही मुश्किल भी था,अगर अविनाश को थोड़ी भी भनक लग जाती की जिसे वो मेरे लिए उठाने वाला है वो एक जिस्म का धंधा करने वाली है तो हमारी खैर नही थी ……...

अध्याय 23

मैं शकील के हवेली के दूसरे माले में बने एक कमरे में बैठा हुआ था जो उसने मुझे दिया था,वंहा एक बड़ा सा स्मार्ट tv लगा हुआ था और उसमें शेयर के भाव से संबंधित चार्ट चल रहे थे ,उसके कुछ भी दूर पर मैं एक लेपटॉप और एक डेस्कटॉप लिए हुए एक टेबल पर बैठा था बैठा था,शकील को मैं पैसे कमा कर दे रहा था और वो भी अब मेरे मनमुताबिक चीजे मुझे लाकर दे देता,मैं एक प्रोफेसनल ट्रेडर और इन्वेस्टर बनने की राह में निकल पड़ा था,महंगे सॉफ्टवेयर से लेकर महंगा ट्रेडिंग डेस्क तक उससे निकलवाना था लेकिन धीरे धीरे…

सामने की खिड़की खुली हुई थी और कुछ तेज आवाजे मेरे कानो में पड़ रही थी और साथ ही साथ मेरे चहरे में मुस्कान भी बढ़ रही थी,मैं आराम से अपना काम कर रहा था,तभी मेरे कमरे का दरवाजा धड़ाम से खुला,मैंने जानबूझकर बड़े बड़े हेडफोन लगा रखे थे जो मैंने कुछ ही दिनों पहले शकील से मंगवाए थे...मैंने कुछ ना सुनने की एक्टिंग की और साथ ही पेन निकलाकर अपने नोटबुक में शेयर के कुछ प्राइस लिखने लगा..कुछ देर तक कुक नही हुआ थोड़ी ही देर में किसी ने मेरे कानो से हेडफोन निकाल दिया ..मैं हड़बड़ाया ..

“अरे भाई आप यहां “शकील साक्षात मेरे सामने खड़ा था साथ ही उसके कुछ लोग भी थे ,सभी के चहरे में गुस्सा मानो टपक रहा था ..

“ये कान में क्या ठूस के रखा है बे मादरचोद “

उसके एक आदमी ने कहा ..

“इसे हेडफोन कहते है गवार साले..”

मैंने उसके हाथो से अपना हेडफोन छीनते हुए कहा ..

“आइए ना भाई बैठिए,वो क्या है ना की बाहर की आवाज से दिमाग डिस्टर्ब ना हो इसलिए काम करते समय ये लगा लेता हु ,आप के आने का पता ही नही चला,माफ कीजियेगा,बैठिए ना “

मेरी बैठत सुनकर भी शकील नही बैठा..

वो बस मुझे घूरता रहा जैसे सभी लोग घूर रहे थे…

“क्या हुआ भाई की प्रॉब्लम है क्या ??”

मैं थोड़ा डरते हुए उससे पूछा ..

“काजल गायब हो गई है ..”

शकील ने सपाट शब्दो में कहा ..

“वाट क्या मतलब की गायब हो गई है ..”

“वो चाल से निकली थी कही जाने के लिए,मेरे आदमी उसके पीछे ही थे लेकिन फिर एक मोड़ से वो गायब हो गई ,हर जगह ढूंढा लेकिन कही दिखाई नही दी ...तुम्हे कुछ पता है की वो कहा जा सकती है ..”

शकील की आवाज बिल्कुल ही नार्मल थी ,उसे मेरे ऊपर शक तो था लेकिन वो भी जानता था की मैं पिछले दो दिनों से कही नही गया हु क्योकि मैंने कह रखा था की कंपनियों के तिमाही रिजल्ट आने वाले है और मुझे उसकी स्टडी करनी है ,मैं दिन भर अपने कमरे में बैठा हुआ कुछ ना कुछ पढ़ता रहता और ये मैं कोई एक्टिंग नही कर रहा था मैं सच में यही कर रहा था,और शकील भी इसकी जांच करता रहता की मैं क्या कर रहा हु ,इसलिए उसका दिमाग ये फैसला ही नही कर पाया की मैं काजल के गायब होने में शामिल हो सकता हु या नही ...आज उसने मुझे जिस अवस्था में पूरी तरह से मगन होकर काम करते देखा था उसका थोड़ा मोड़ा शक भी डगमगा सा गया होगा…

“भाई मुझे उस रंडी का क्या पता,मैं तो अंतिम बार आपसे परमिशन ले के ही मिलने गया था,उसके बाद से मैंने उसे अपने दिमाग से निकाल कर फेक दिया था और अपने काम में लग गया ..भाई एक चीज कहु इस तीन दिनों में मैंने 5 ऐसी कंपनियां ढूंढ ली है जिसमे 6 महीनों के निवेश में हमे बहुत ही ज्यादा मुनाफा हो सकता है ,भाई इस बार थोड़ा बड़ा अमाउंट लगाएंगे,बहुत हो गया छोटा मोटा गेम अब बड़ा गेम खेलते है,आप बोलो तो मैं कंपनियों के बेलेंस शीट दिखता हु आपको “

मुझे काजल के ऊपर कोई इंट्रेट ना लेता हुआ देखा वंहा खड़े सभी लोगो के चहरे थोड़े फीके पड़ गए शायद उन्हें लगा था की वो आज मुझे तबियत से धोएंगे...वही मैंने कम्पनियों के बारे में इतने इंटरेस्ट से कहा की शकील का भी थोड़ा मोड़ा शक जाता रहा..

“हम्म बाद में देखेंगे अभी नही ,हा अगर उसका कही पता चले तो बताना “शकील ने फिर से शालीनता से कहा

“अरे भाई छोड़ो उस रांड को जितना वो जिंदगी भर में कमा के देगी उतना तो मेरे शेयर आपको 6 महीनों में कमा कर दे देंगे”

मैं हँसने ही वाला था की एक आदमी भड़क गया

“ये मादरचोद चुप कर ,यंहा बात पैसे की नही है इज्जत की है ,भाई के चकले से कोई रांड भाग जाए ऐसा आज तक नही हुआ है ,वो मादरचोद तो मरेगी अब ..

”

उसके आंखों में आग था मैं सच में डर गया था..

“सॉरी भाई ,मुझे उन सब धंधों का कुछ नही पता..”

मैंने थोड़ा कांपते हुए कहा

“ये जाने दे उसे इन सबका कुछ नही पता,इसे इसका काम करने दे ..”

शकील ने उस आदमी को थोड़ा झड़का और बाहर निकल गया

……

मैं जानता था की शकील मुझपर कितना भी भरोसा करे लेकिन वो अपने लोगो को मेरे पीछे लगा कर ही रखेगा,इसलिए काजल से मिलना अभी भी मेरे लिये बस सपना था ,लेकिन अविनाश ने अपना काम बड़े ही खूबसूरती से कर दिया था,शकील को काजल के गायब होने की भनक भी नही लगी ,अविनाश ने ये कैसे किया ये तो वही जाने लेकिन मेरे दिल ने एक डर फिर से उमड़ गया था की अगर अविनाश को काजल की सच्चाई का पता चल गया तो फिर क्या होगा खैर मुझे अभी इन सबसे अपना दिमाग हटाना था,और इसका एक ही तरीका था,पैसे कमाना,मैंने फिर से अपनी नजर स्क्रीन में गड़ा दी …….

**********

मैं बेचैनी से अपने कालेज के एक कमरे में टहल रहा था,शकील के लोग मेरे एक एक मूवमेंट पर नजर रखे हुए थे,मैंने प्यारे और संजय सर से भी अभी के लिए ट्रेडिंग बंद करने को कह दिया था,मैंने उनसे उन शेयर में पैसा लगाने को कह दिया जो 6 महीने में पैसा कमा कर देते,रोज वाली झंझट खत्म कर दिया था क्योकि मैं उनके टच में नही रहना चाहता था,इससे शकील को शक हो सकता था,शकील के लोग कालेज तक तो मेरा पीछा कर सकते थे लेकिन कालेज के अंदर नही क्योकि अंदर आने के लिए आई डि चाहिए था और वो ऐसे मेरा पीछा कर रहे थे जैसे जेम्स बांड की औलाद हो उन्हें लगता था की मुझे नही पता की कोई मेरा पीछा कर रहा है ...खैर मैं बेचैन था क्योकि अविनाश ने मुझे उस खाली कमरे में बुलाया था,काजल को गायब हुए 2 दिन बीत चुके थे मैं भी उसकी हालत जानने को बेताब था,प्यारे ने मुझे बताया था की अविनाश के लड़को ने पहले तो काजल की रेकी की और पता लगाया की कौन कौन है जो उसके पीछे लगे है फिर सफाई से एक मोड़ में काजल को क्लोरोफार्म सूंघा कर बेहोश कर दिया और वही पड़े एक कचरे के डिब्बे में डाल दिया और निकल गए ,शकील के आदमी पागलों की तरह पूरा शहर ढूंढते रहे लेकिन उनके आंखों के सामने रखे कचरे के डिब्बे पर उनकी नजर नही गई जिसे रात में मुन्सिपर्टी की गाड़ी उठाकर ले गई और काजल को सही सलामत गर्ल्स होस्टल के एक कमरे में पहुचा दिया गया...काजल ने होश में आकर कैसे रिएक्ट किया इसके मुझे पता नही लेकिन इतना जरूर जानता हु की उसने इतने नरक अपने इस जीवन में देखे है की कोई भी सिचुएशन उसे डरा नही सकती ..

चिंता में मेरे माथे में आया हुआ पसीना और भी बढ़ रहा था तभी मुझे खिड़की से आविनाश आता हुआ दिखा साथ ही कई चेले भी थे लेकिन वो सभी बाहर ही रुक गए..

“गुड मॉर्निंग सर “

मैंने उसे अंदर आता देख तुरंत ही विस् किया ..

“मादरचोद ..”

अविनाश मुझतक तेजी से बड़ा और चटाक ..

एक जोरो का झापड़ मेरे गालों में धर दिया..

“मादरचोद तुझे अपना भाई बोला,तेरी मदद की और मुझसे ही गद्दारी की तूने,जिससे मैं सबसे ज्यादा नफरत करता हु तुने मुझसे उसकी ही मदद करवाई ,रंडी के प्यार में तूने मुझसे ऐसा काम करवाया तेरी माँ को चोदू”

चटाक चटाक ..अविनाश मेरे बालो को पकड़कर मुझे मार रहा था,ये समझने में मुझे बिल्कुल भी देरी नही लगी की उसे काजल की असलियत का पता चल चुका है,अविनाश रंडियों का चहरा देखना भी पसंद नही करता था लेकिन उसके कुछ दोस्त पक्के रंडीबाज भी थे,और काजल तो शहर की सबसे फेमस वाली थी तो शायद कोई उसे पहचान गया होगा…

“वो तो गिरधारी ने उसे पहचान लिया वरना मैं तेरे कारण उससे मिलकर उसे बहन कहने वाला था...मादरचोद ..भाग जा और ले जा अपनी रांड को यंहा से ,तेरे कारण मैंने एक रांड को गर्ल्स कालेज में रखा है,तेरी माँ का “

मैं नीचे गिर चुका था और वो मुझे लातों से मार रहा था..अविनाश ने अभी तक काजल को नही देखा था और वो अब देखेगा भी नही क्योकि वो रंडियों का चहरा भी नही देखता,लेकिन मेरे लिए ये बड़ी आफत थी क्योकि काजल को वंहा से बाहर निकलना यानी हम दोनों की मौत पक्की ..

“सर आप जितना मरना चाहो मारो लेकिन मेरी बात तो सुनो,वो मर रही है भाई उसे केंसर है ..मेरी बात तो सुनो “

मैं नीचे पड़ा हुआ गिड़गिड़ा रहा था लेकिन वो मेरी बात सुनने के बिलकुल भी मूड में नही था…

“कल की मरने वाली आज ही मर जाए साली रांड ,दुनिया से भार ही कम होगा “वो मुझे और भी जोरो से मारने लगा था

तभी वंहा दो लोग और आ गए

“सर प्लीज एक बार उसकी बात तो सुन लीजिए,एक बार प्लीज् ...मेरी खतिर “

ये संजय सर थे..वो हांफ रहे थे शायद उन्हें पता चल गया था की मेरे साथ क्या हो रहा है ..

“तेरी खातिर मादरचोद तू भी खायेगा,तेरे कारण ह मैंने इस चूतिये की मदद की है “

अब अविनाश मुझे छोड़कर संजय सर को मारने लगा तब तक मैं खड़ा हो चुका था ..

“मारिये सर और जोर से मारिये मुझे भी मारिये और मार ही डालिये लेकिन एक बात याद रखिये वो भले ही जैसी भी है लेकिन मेरा प्यार है.,और कोई रंडी जानबूझकर नही बनती सर कभी वो भी एक अच्छी लड़की थी लेकिन शकील ने उसे रंडी बना दिया,कभी वो भी ऐसी लड़की थी जिसे आप बहन कह सकते थे लेकिन उसे उसके घर से किडनैप करके लाया गया ,उसे मारा गया उसके साथ ना जाने कितने बार बलात्कार किया गया,उसको अपना जमीर बेचने पर मजबूर किया गया,और उसे वो बना दिया गया जो मौत से भी गंदी जिंदगी है ...आप आज उसे भले ही कितनी भी गली दे दे लेकिन याद रखियेगा सर की असली गुनहगार काजल नही बल्कि उसे रंडी बनाने वाला शकील है ...वो तो एक मासूम लड़की थी आज भी वो उतनी ही मासूम है लेकिन लोगो ने उसकी मासूमियत को नही उसके जिस्म को देखा और आज उसके जिस्म का सौदा कर रहे है ,उस बेचारी को केंसर जैसी बीमारी है लेकिन ...

काश की उसे आसान मौत आ जाती तो शायद उसे इस नरक जैसी जिंदगी से तो आजादी मिल जाती ,लेकिन नही मौत ने भी अपनी क्रूरता दिखाई अब अगर उसकी बीमारी बढ़ गई तो वो पल पल मरेगी,और हा सर आप मुझे भले ही चूतिया कहे लेकिन मैं उससे प्यार करता हु,वो मेरे लिए क्या है ये आप नही समझ पाओगे,उसने मुझे माँ के तरह प्यार दिया,बहन की तरह मेरा ख्याल रखा,वो आपके लिए एक रंडी होगी लेकिन मैंने कभी उसे उस नजर से ना ही देखा है ना ही छुआ है …….वो मेरे लिए एक देवी है सर ..”

मैं रोता हुआ नीचे बैठ गया था प्यारे ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा,वही अविनाश मेरी बात को सुनकर रुक चुका था,वो कुछ देर तक कुछ भी नही बोल पाया …..

“तेरे लिए वो क्या है इससे मुझे कोई मतलब नही ,आज ही उसे होस्टल से निकल कर ले जा वरना मैं खुद उसे शकील के पास छोड़कर आऊंगा ,तेरे लिए होगी वो देवी मेरे लिए वो रंडी थी और रहेगी…”

अविनाश इतना ही बोलकर जाने के लिए मुड़ा था

“सर सोचिए की अगर कोई गुंडा तरुणा को किडनैप कर ले “

अविनाश तुंरत ही मुड़कर मुझे देखने लगा,तरुणा अविनाश की मुहबोली बहन थी जो हमारे ही कालेज में पढ़ती थी ,सभी जानते थे की अविनाश उसे अपनी सगी बहन से ज्यादा मानता था ..

तरुणा का नाम सुनकर उसके आंखों में अंगारे जलने लगे वही प्यारे और संजय सर तो ऐसे अकड़ गए जैसे सांप सूंघ लिया हो ..

“सोचिए की उसके साथ कई सप्ताह तक लगातार कई लोग बलात्कार करे “

“मादरचोद ..”अविनाश के सब्र का बांध टूट गया था उसने पास ही पड़ा हुआ डस्टर उठा कर मेरे सर में मार दिया,मेरे सर से खून बहने लगा था …

“और सोचिए की फिर उसे किसी रंडीखाने में फेक दिया जाए ,जब उसका जिस्म मौत से लड़ रहा हो तो भी उसके जिस्म का सौदा किया जाए “

“तेरी इतनी हिम्मत बहनचोद “

अविनाश मेरे ऊपर टूट पड़ा था उसने मुझे जमीन में गिरा दिया था और मेरे ऊपर चढ़कर घूंसों की बारिश कर दी थी ,मैं कुछ बोलता उससे पहले ही मेरे चहरे पर घूंसा पड़ जाता था ..

लेकिन फिर भी मैं बड़ी ही मुश्किल से बोलने लगा

“सर... ,,अगर ,,अपनी भूख मिटाने...के लिए...अपना जिस्म बेचने के सिवा कोई ….चारा ना बचे..”

इस बार अविनाश के मुक्कों की ताकत कम पड़ने लगी थी ...आखिर वो रुक गया लेकिन मेरे ऊपर से नही उठा,उसके हाथ मेरे खून से लाल हो चुके थे,मेरा पूरा चहरा खून से लथपथ था,मैं बेहोश होने की कंडीशन में था लेकिन कोई ताकत मुझे अब भी जगाए रख रही थी ….

“सर...सोचिए की उसके लिए जिस्म की अहमियत ही खत्म हो गई हो,सोचिए की जब आत्मा ही मर जाए तो जीना कैसा लगता होगा,जब प्यार शब्द बस कहानियां लगने लगे,जब अपना कहने को आपके पास बस आपका दलाल हो तो कैसा लगता होगा,जब आंखों में कोई सपना नही रह जाए और आंसू भी सुख जाए तो जीना कैसा लगता होगा….सर उसे ही रंडी कहते है….

और जो मैंने आपको बताया वो किसी मासूम लड़की के साथ हो चुका है ,वो भी तरुणा की तरह किसी की बहन रही होगी ,...आज वो एक रंडी है ...वो मेरी काजल है सर ..उसका भाई शायद उसे नही बचा पाया लेकिन आप उस तरुणा को बचा लीजये ,आप भी एक रंडी के अंदर उस खोई हुई तरुणा को देख पाएंगे,उसे जिंदा रहने दीजिए,उसे फिर से प्यार कर पाने का हौसला दीजिए ,उसे भी खुदा पर और खुद पर भरोसा करने दीजिए सर…..”

मेरे आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था,चहरा खून से लथपथ था लेकिन मैं अविनाश के आंखों से गिरते हुए आंसुओ को अपने चहरे पर महसूस कर पा रहा था..मेरे होठो में एक मुस्कान खिली और सामने बस अंधेरा ही रह गया …….

अध्याय 24

जब मेरी आंखे खुली मैंने खुद को एक बिस्तर में लेटा हुआ पाया,मैं किसी अस्पताल में था ,प्यारे मेरे सामने बैठा हुआ मुस्कुरा रहा था ..

“क्या हुआ बे “

मेरे जबड़े में अब भी दर्द था मैं बड़े ही मुश्किल से बोल पाया..

“तू मुझे सच सच बता ,तूने जो अविनाश को बोला वो पहले से लिख कर लाया था या जो दिल में आया वो बोल दिया..”

वो अब भी मुस्कुरा रहा था

“क्यो”

“क्यो?? अबे उसका तो जैसे हृदयपरिवर्तन ही हो गया,उसने ही तुझे यंहा दाखिल करवाया और साथ में कहा है की वो काजल को होस्टल में रहने देगा और उसकी सुरक्षा भी करेगा ,लेकिन बस वो उसे देखेगा नही ,साले ने कसम जो खाई है की किसी रंडी का चहरा नही देखेगा..”

प्यारे बोल तो गया लेकिन फिर अचानक उसे कुछ याद आया

“ओह सॉरी भाई काजल को ऐसा बोलने के लिए”

उसकी बात सुनकर मैं बस थोड़ा मुस्कुराया और आंखे बन्द करके लेटा रहा..

थोड़ी ही देर हुए थे की शकिल अपने आदमियों के साथ मेरे सामने था..

“किस मादरचोद की इतनी हिम्मत हो गई जो हमारे आदमी पर हाथ उठाये “

शकील मेरे सामने ही खड़ा था ,जबकि प्यारे एक कोने में दुबक गया था..

मैं शकील को देखकर मुस्कुराने लगा

“छोड़ो ना भाई ,वो कालेज का एक छोटा सा मेटर था,सुलझ गया है”

“अबे कैसे छोड़ दे अब तू हमारा आदमी है ,तुझपर हाथ उठाने का सीधा सा मतलब है की हमारे ऊपर हमला ,तू बता बे किसने मारा इसे “

शकील प्यारे का कॉलर पकड़ कर हिला रहा था,प्यारे की तो संट हो चुकी थी वो मुझे देखने लगा ,मैं अब भी मुस्कुरा रहा था ,क्यो??

पता नही लेकिन जीवन में पहली बार मुझे ऐसा आभास हुआ की मैं भी किसी के लिए इतना इम्पोर्टेन्ट हु ,एक कालेज का प्रेजिडेंट मुझे हॉस्पिटल में भर्ती करवाता है,एक मेरा दोस्त जो अपना काम धाम छोड़कर घंटो से मेरे साथ बैठा है और एक शहर का सबसे बड़ा गुंडा जो मेरे ऊपर हुए हमले का बदला लेना चाहता है,कही ना कही सभी के अंदर मेरे लिए प्यार देख पा रहा था,ऐसा इसलिए भी क्योकि मेरे साथ ऐसा कभी नही हुआ था,

प्यारे और शकील दोनों ही मुझे मुस्कुराते हुए देख रहे थे..

“तू क्यो हँस रहा है बे बहनचोद “

शकील का दिमाग थोड़ा खराब हो गया

“भाई मुझे नही पता था की आप मुझसे इतना प्यार करते है,मेरे लिए किसी से लड़ने को तैयार हो गए,सच में ये जानकर बहुत खुसी हुई “

मेरी बात सुनकर जंहा प्यारे चौक गया वही शकील बुरी तरह से झेंप गया,उसके लिए मैं सिर्फ एक मोहरा था जिसे वो लीगल तौर से पैसा कमाने के लिए यूस कर रहा था लेकिन मेरी बातों में छिपे इस अपनत्व के भाव से वो थोड़ा हड़बड़ाया,उसके पूरे गिरोह में उसके साथ अपनत्व का संबंध किसी से नही था सभी के लिए वो बस बॉस था..

“भाई जाने दीजिए बस छोटी मोटी लड़ाई थी ,एक दो दिन में मैं ठीक हो जाऊंगा”

“हम्म लेकिन कौन था वो मादरचोद “

शकील फिर से जोरो से बोला

“अविनाश तिवारी...इसके कालेज का प्रेजिडेंट हु ,इस साले ने मेरी बहन के बारे में उल्टा सीधा बोला था इसलिए ठोक दिया,लेकिन इसने माफी मांग ली और इसे अस्पताल में भी ले आया ,बात खत्म आखिर मेरा भी जूनियर है .. “

सभी दरवाजे की ओर देखने लगे जंहा अविनाश खड़ा था,उसके पीछे ना जाने कितने लड़के और थे,ये सरकारी अस्पताल आज किसी जंग के मैदान जैसा दिख रहा था...शकील और अविनाश आमने सामने थे,लेकिन शकील के चहरे में अजीबो गरीब भाव आ जा रहे थे…

तभी अस्पताल का डॉ अंदर आया

“देखिए ये अस्पताल है आपलोगो का जो भी झगड़ा है वो प्लीज् बाहर निपटाये “

शकील ने एक बार डॉ को देखा एक बार मुझे और एक बार अविनाश को

“ह्म्म्म इसने गलती की तूने मार दिया चल ठीक ,लेकिन आइंदा अगर इसे हाथ लगाने से पहले ये याद रखना की ये मेरा आदमी है “

शकील ने अविनाश से कहा और अपने आदमियों के साथ तुरंत ही वंहा से निकल गया,डॉ ने भी चैन की सांस ली ..

अविनाश भी मुस्कुराता हुआ मेरे पास आया ..

“क्यो बे छोटे अब कैसा है ,होस्टल की लड़कियों को तेरी आइटम का ख्याल रखने के लिए बोल दिया है,मैं तो उससे नही मिल पाऊंगा लेकिन फिक्र मत कर उसे कोई तकलीफ नही होगी ,उसे बता दिया गया है की उसे तूने वंहा लाया है,अब आगे क्या करना है तू देख ले …”

अविनाश पलटा ही था की मैंने उसे रोक लिया

“सर…...धन्यवाद बोलकर आपका मान कम नही करूंगा ,आप मुझे छोटे बोलते हो अपना भाई बोलते हो तो एक छोटे से प्रश्न का उत्तर चाहता हु,आप जिस्म का सौदा करने वाली लड़कियों से इतनी नफरत क्यो करते हो “

मेरी बात सुनकर अविनाश एक बार पलटा उसकी आंखों में जैसे अजीब सा दुख देखा मैंने..वो कुछ भी नही बोला बस एक व्यंगात्मक मुस्कान थी उसके होठो में ,एक दर्द था उस मुस्कान में ,और वो चला गया …..

प्यारे ये सब देखता हुआ उछलता हुआ मेरे पास आ गया अब पूरे कमरे में हम दोनों ही थे ..

“भाई तूने तो कमाल ही कर दिया ,अविनाश और शकील दोनों को सेटल कर दिया ,क्या दिमाग लगाया तूने “

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुराया

“दिमाग नही दोस्त ,बस दिल लगाया,जो दिल से कहने की इक्छा हुई बस वही कहा…”

“ओह तो प्यार का असर है ,दिल विल की बात बहुत ही ज्यादा करने लगा है तू ,”

हम दोनों ही हँस पड़े थे,दिल प्यार ये शब्द ही मुझे मेरी काजल की याद दिला देते थे ..

कैसी होगी क्या कर रही होगी,और फिर मुझे आगे क्या करना है,अभी भी 2-3 लाख का इंतजाम मेरे पास नही था,कुछ 1 लाख मैं इधर उधर से जुगाड़ भी सकता था मैं बस सोचता ही रह गया..

********

हॉस्पिटल से आये मुझे दो दिन हो चुके थे,एक तरफ मैं था जो अपने काम के जरिये अपने मन को सम्हालने की कोशिस में लगा था,.एक तरफ काजल थी ना जाने उसपर इन सबमे क्या बीत रही होगी,शकील मुझपर कितना भी भरोसा करे लेकिन मेरे ऊपर से नजर नही हटाई थी और मैं कोई रिस्क नही लेना चाहता था…

शाम रात में बदल गई थी और मैं लेटा हुआ ना जाने कब नींद के आगोश में डूब गया…

एक मखमली हाथ मेरे सर को सहला रहा था,कुच नर्म जुल्फों की आहट मेरे चहरे में महसूस हो रही थी,एक भीनी सी खुशबू मेरे नथुनों में समा रहे थे,मैंने हल्के से आंखे खोली और खुद को काजल के पास पाया,उसका चहरा मेरे चहरे में झुका हुआ था,उसके मोटे गाल और भी गुलाबी लग रहे थे,उसकी आंखों में चंचलता थी जो मेरे आंखों में समाने लगी थी,मेरी ये हालत देख कर वो मुस्कुराई और बड़ी ही अदा से अपने बालो को सवार..

“तुम यंहा क्या कर रही हो ..”मैं चौक कर उठ चुका था,

“क्यो तुमसे मिलने नही आ सकती क्या ??”

उसने थोड़ा नाराज हो कर कहा

“पागल हो गई हो क्या,यंहा शकील का कोई आदमी देख लेगा तो “

“दुनिया की कोई ताकत मुझे तुमसे मिलने से नही रोक सकती,और मैं यंहा तुमसे मिलने आयी हु और तुम हो की डर के दुबके हुए हो “”

उसके आंखों की चमक से मेरे दिल में एक अजीब सी शीतलता का प्रवाह हो गया था,मैं उससे लिपट गया..

“इतने दिन हो गए हमे मिले हुए मैं तुम्हारे बिना कैसे रह पाता हु ये मैं ही जानता हु ..”

काजल बड़े ही प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी

“और तुम्हे क्या लगता है मुझे अच्छा लगता है तुमसे बिछड़कर जीना ...अब हमे कोई अलग नही कर सकता राहुल..”

मैंने नजर उठाई और उसके कोमल गालों पर अपनी उंगलियां चलाने लगा,वो मखमल से मुलायम थे बेहद ही चिकने,मैं उसकी आंखों में देख रहा था..

“तुम कोई सपना हो या हकीकत “

वो बस मुस्कराई तभी मेरे दरवाजे में कोई खटखटाहट हुई ..

“अबे चूतिये इतनी रात को किससे बात कर है “

बाहर मेरे निगरानी में खड़े आदमी ने कहा,मैंने झट से काजल की ओर देखा वो वंहा नही थी..

मैं मुस्कुराया

“कुछ नही बस सपना देख रहा था..

”

“साले लगता है सर में चोट का असर थोड़ा ज्यादा हो गया है सो जा “

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुराने लगा और फिर से आंखे बंद करके सो गया,दिल में बस काजल ही काजल थी और थोड़ी ही देर में मेरे बाजू में लेटी हुई मिली ,वो अब भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी,मैं उसके गालों को सहला रहा था

“मैं जानता हु की तुम एक सपना हो लेकिन तुमसे वादा करता हु मेरी जान जल्द ही मैं इसे हकीकत में तब्दील कर दूंगा…”

मैं काजल के सीने में फले वक्षो में अपना सर लगाकर सो गया,उसके हाथो के प्यार भरे स्पर्श को मैं अब भी अपने सर में महसूस कर पा रहा था...सोने की इससे बेहतर जगह मेरे लिए और क्या ही हो सकती थी……….

अध्याय 25

जब से मैं हॉस्पिटल से आया था शकील से मेरी बात नही हुई थी,पता नही क्यो लेकिन ना उसने मुझे मिलने बुलाया ना ही कोई मार्किट के संबंध में बात हुई ,इधर मेरे दिमाग में पैसे को लेकर टेंशन बढ़ रही थी मेरे लिए अभी पैसे कमाना जरूरी हो गया था वही मैं प्यारे और संजय सर से भी बात नही कर पा रहा था,मेरे ऊपर सिक्युरिटी बहुत ही बढ़ गई थी ,ऐसे तो हमेशा ही रहती थी लेकिन हॉस्पिटल से आने के बाद से जो बदलाव हुआ था वो मुझे अचंभित करने लगा था ,मैं बहुत हद तक ठीक हो चुका था और अब मुझे बाहर जाना था लेकिन कालेज जाने से भी मुझे मना कर दिया गया था ,मैंने प्यारे को अपने पास बुलाना चाहा लेकिन इसके लिए भी मुझे मना कर दिया गया..

मैं बेहद ही गुस्से में था लेकिन कर भी कुछ नही सकता था ,प्यारे और संजय सर मेरी अनुपस्थिति में काजल की देखभाल कर सकते थे या अगर जरूरत पड़ी तो उसे डॉ के पास ले जा सकते थे ,लेकिन हॉस्पिटल में ले जाने के लिए पैसे चाहिए थे,मैं सोच में ही पड़ा था की आखिर क्या किया जाए …

मैं हवेली में अपने कमरे से बाहर जाकर वंहा काम करने वाले लोगो से मिलने जुलने लगा,क्या पता वक्त में यही लोग मेरे काम आ जाए,वो लोग मुझे कुछ नही समझते थे लेकिन हॉस्पिटल वाले वाकये के बाद से कुछ कुछ सम्मान मुझे मिलने लगा था ,वही मैं एक टोली के साथ बैठा हुआ चाय पी रहा था …

“ऐसे चिरकुट तूने वो कमाल ही कर दिया रे उस तिवारी की बहन को छेड़ दिया तूने हा हा हा…”

यंहा आखिरकार लोग मुझे या तो चिरकुट कहते या चूतिया,खैर ..

“अरे नही भाई बस गलती से निकल गया था “

“हा लेकिन वो अविनाश भी साला है बड़ा वाला,कई बड़े नेताओ से उसके पहचान है ,हमारे भाई की पुरानी दुश्मनी है उससे “

मेरे दिमाग में ये बात खटक गई ,अविनाश ने तो कभी नही कहा था की उसकी शकील से कोई दुश्मनी है…मेरे सामने हॉस्पिटल का वो मंजर घूम गया जब अविनाश और शकील आमने सामने हुए थे,शकील के चहरे में एक अजीब से भाव आये थे ..

“क्यो..

”

“क्या पता यार बस जब जब भाई उसका नाम सुनते है तो उनका चहरा ही थोडा अजीब हो जाता है,हॉस्पिटल में भी देखा ना कैसे उन्होंने कुछ नही कहा और उनका चहरा थोड़ा अजीब हो गया जैसे कुछ सोच रहे हो …”

साला आखिर उनके बीच कौन सी दुश्मनी हो गई ,हर चीज की एक शुरुवात होती है तो हो उनके दुश्मनी की भी कही ना कही से शुरुवात हुई होगी ,आखिर कहा से

“ओ ऐसे भाई यंहा आने से पहले किस जगह में थे …”

“पहले भाई केशरगढ़ में रहता था,यंहा से कुछ 200 किलोमीटर की दूरी पर है ,बढ़िया जगह है पहाड़ झरने सब है वंहा ,उस रंडी काजल के साथ भाई यंहा आया और फिर छा गया …”

रंडी काजल...मेरे जेहन में फिर से काजल का ख्याल उभरा

“भाई आखिर काजल का क्या हुआ वो मिली की नही “

“अभी तक तो नही लेकिन मिल जाएगी ,साली जाएगी कहा,शकील भाई जब से उस अविनाश से मिले तब से उसके पीछे भी आदमी छोड़ रखे है,उन्हें शक है की शायद उसी ने काजल को उठवाया होगा …”

“अविनाश ने वो क्यो उठवायेगा “

मैं बुरी तरह से चौका और साथ ही साथ मेरे जेहन में डर की एक लहर भी दौड़ गई

“”वो तो भाई ही जाने लेकिन जब से उससे मिले है तब से कह रखा है की उसे निगरानी में रखो ,पहले लगा की तेरे कारण कह रहे है लेकिन फिर एक बार उनके मुह से सुना की अगर काजल को इसने उठवाया है तो दोनों को जान से मार दूंगा,तब पता लगा की आखिर वो क्यो ऐसा करवा रहे है “

उसकी बात सुनकर मेरी सांस ही फूलने लगी थी ,मैं चुपचाप वंहा से निकला और अपने कमरे में चला गया,मेरे अंदर डर का एक साम्राज्य खड़ा हो गया क्योकि शकील ने अविनाश के लिए भी आदमी लगा रखे थे,लेकिन फिर मुझे अविनाश की एक बात याद आ गई जब उसने कहा था की वो काजल का चहरा भी नही देखेगा ,यानी वो उससे नही मिलेगा...हे राम ..

मैंने एक गहरी सांस ली मुझे थोड़ा सकून मिल रहा था मैं सीधे शकील से मिलने पहुच गया …

“भाई मुझे कालेज जाना है “

“क्या करेगा तू कालेज जाकर ,यंहा रह और काम कर “

“लेकिन भाई पढ़ाई??”

“अरे मादरचोद पढ़ कर किसने आजतक क्या उखाड़ लिया है जो तुझे पढ़ाई करना है …”

“भाई मैं ऐसे भी कभी कभी ही कालेज जाता हु,सप्ताह में कम से कम दो दिन तो जाना ही पड़ेगा वरना मुझे एग्जाम में बैठने नही देंगे “

“अबे यंहा तो तू कमा रहा है ना फिर क्या करेगा पढ़कर “

पास खड़े हुए एक आदमी ने कहा मैं शकील की तरफ होकर बोला

“भाई ये कमाई कोई कमाई है ,अगर पढ़ लिया डिग्री ले ली तो इसे ही बड़े लेवल में ले जा सकते है,इसके बाद MBA भी कर सकता हु और खुद का एक इन्वेस्टमेंट फर्म भी खोल सकते है ,आपको फिर ये सब करने की जरूरत ही नही होगी एक ही फर्म से आप इतना कमा सकते हो ,और आपके पास इतने आदमी है की हम उनसे मार्केटिंग करवाकर अपने क्लाइंट जोड़ा करेंगे ,पूरी तरह से वाइट मनी वो भी करोड़ो नही अरबो में ,अभी इस हवेली में रहते हो तब आप बंगले में रहोगे वो भी कई एकड़ के ,और स्कार्पियो की जगह आपके बंगले में मर्सडीज और लम्बेर्गिनी खड़ी होगी ,भाई आजकल अंडरवर्ड के धंधे में ना पैसा है ना ही सम्मान ,सोचो अगर पैसा होगा तो आप इलेक्सन भी लड़ सकते हो ,फिर वो अविनाश जैसे चिरकुट आपके सामने मुह भी नही खोल पाएंगे …”

अविनाश का नाम सुनते ही शकील ने मुझे घुरा..

“हा भाई अगर हम ऐसे ही रहे तो एक दिन वैसे लड़के साले इलेक्सन लड़कर फिर नेता बन जायेगे पावर में बैठे तो आपका पूरा धंधा ही चौपट करवा सकते है “

मेरी बात सुनकर शकील तो शांत था लेकिन उसका एक चमचा भड़क गया

“मादरचोद भाई का धंधा बंद करवा दे इतना दम किसी में नही है ,काट के रख देंगे “

उसकी बात सुनकर मैं हंसा

“भाई सही कहु आपकी जितनी भी पहुच हो लेकिन धंधा तो इनलीगल ही है ना,कोई मंत्री अगर चाहे तो आज के आज ही सब बंद करवा देगा ये आप भी जानते हो ,सरकार के पास इतने पुलिस और आर्मी वाले है की आपके एक एक आदमी का एनकाउंटर कर दे ,जब तक सब चल रहा है तब तक सब ठीक है अगर कुछ हुआ तो सब खत्म एक ही झटके में ...भाई आज असली पावर तो सत्ता में ही है ,और अगर आपका कोई लीगल बिजनेस हो तो कोई आपके ऊपर उंगली भी नही उठा पायेगा “

मेरी बात सुनकर वहां एक सन्नाटा सा छा गया था वंहा खड़े लोग सालों से शकील के वफादार थे लेकिन किसी में इतनी हिम्मत नही थी की कोई उसके सामने ऐसी बात बोल सके ,शकील भी मुझे ही घूर रहा था…….आखिर वो जोरो से हँस पड़ा..

“साले तू सपना बहुत ही बड़े दिखाता है ,तुझे कालेज जाना है ठीक है जा,लेकिन इतना मत फेका कर कभी कभी पचता नही है “

शकील फिर से मुस्कुराने लगा

“नही भाई क्यो नही हो सकता बिल्कुल हो सकता है”

शकील फिर से हंसा लेकिन इस बार उसकी हंसी में वो बात नही थी ..

“वो बाद की बात है ,अभी तू जा,पहले तो मैं उस रंडी काजल को ढूंढ कर उसे उसके कर्मो की सजा दे दु फिर नेता भी बन जाऊंगा ,और उस अविनाश के सामने फिर से उसे नंगी करके चोदूगा तभी मुझे सकून मिलेगा …”

शकील की बात में वो गुस्सा था की मैं अंदर तक हिल गया था ,मुझे समझ नही आ रहा था की अखिर मैं कैसे रिएक्ट करू ,मेरे दिमाग में उसका कहा एक शब्द बार बार घूमने लगा था ‘फिर से ‘.....

******************

संजय सर और प्यारे को मैं सप्ताह भर की स्ट्रेटिजी बता रहा था …

“सर ये अविनाश सर है कहा से …”

“शायद केसरगढ़ से क्यो ??”

मैं बस सोच में ही पड़ा रहा

“नही बस ऐसे ही ,सर उनका तो कई लोगो से संपर्क है क्या किसी मंत्री से बोलकर काजल का इलाज नही करवाया जा सकता ,यानी मैंने सुना था की वो केंसर के इलाज के लिए पैसे दे सकते है ,अगर कोई मान जाए तो …”

संजय सर ने एक गहरी सांस ली ,

“हुउम्म देखते है बात करके “

***********************

“ये हीरो इधर सुनो “

मैं अपनी क्लास खत्म करके निकला ही की मेरे कानो में किसी की आवाज पड़ी ,मैं उस देखा तो मुझे तरुणा दिखाई दी ,तरुणा अविनाश की मुहबोली बहन है …

मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया

“यस मेम…”

वो मेरी सीनियर थी,संजय सर की क्लासमेट

“तुम्हारा ही नाम राहुल है जिसे भाई ने बहुत मारा था “

“जी मेम”

“चलो मेरे साथ कुछ बात करनी है “

मैं उनके पीछे पीछे चलने लगा हम अब कैंटीन में थे

अविनाश से मार खाने के बाद मैं पहली बात कालेज आया था और आज मुझे पता चला की मैं कितना फेमस हो गया हु ,सभी मुझे ही देख रहे थे,इस बात से मुझे डर भी लग रहा था क्योकि मेरे फेमस होने से मेरी और काजल की कहानी भी चर्चा आम हो सकती थी …

मेरा डर शायद तरुणा समझ गई

“फिक्र मत करो काजल के बारे में सिर्फ भाई के खास लोगो को और गर्ल्स होस्टल में कुछ लड़कियों को ही पता है ,ऐसे बहुत ही प्यारी लड़की है तकदीर ने उसके साथ बहुत बुरा किया ,मुझे भाई पर गर्व है की उसने इस लड़की की मदद की ,हा ये अलग बात है की तुम्हे बहुत मार खानी पड़ी ..कुछ लोगे “

तरुणा थोड़ा मुस्कुरा रही थी,और काजल के बारे में सुनकर मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी थी …

“मेडम काजल कैसी है “मैने तत्परता से पूछा

“मैंने पूछा था की कुछ लोगो ,कोल्ड काफी चलेगा मेरा फेवरेट है “

“मेडम जहर पिला दीजिए सब चलग आप लोग मेरे लिए जो कर रहे हो उसका अहसान मैं जान देकर भी ना उतार पाऊं “

मेरे आंखों ना जाने क्यो लेकिन पानी आ चुका था,जिसे देखकर वो मुस्कुरा रही थी

“चलो इमोशनल ड्रामा बंद करो ,भइया दो कोल्ड काफी “उसने वही बैठे बैठे काउंटर में हाथ दिखाया

“मेडम काजल…”

“अरे बता रही हु ,थोड़ा आराम से ,सांस तो ले लो ,सही कहती है काजल तुम बिल्कुल ही चूतिया हो ..”

वो जोरो से हँस पड़ी ..

और दोस्तो मेरी काजल ने मुझे चूतिया कहा था ,दिल में खुसी का गुबार फुट पड़ा था,कोई गाली भी किसी को इतनी खुशी दे सकती है ये मैंने आज ही जाना था ,मेरे चहरे में मुस्कान थी दिल में प्यार ही प्यार था और आंखों में कुछ बून्द जो मैं लाना तो नही चाहता था लेकिन बस साले आ गए थे,तरुणा मेरी हालत को देख कर मुस्कुरा रही थी ..

“बहुत प्यार करते हो उससे “

“क्या पता मेम प्यार को कैसे नापते है मुझे नही पता ,बस इतना जानता हु की कुछ तो हमारे बीच “

वो हँस पड़ी

“तुमने उसके लिए अपने जान और केरियर की परवाह नही की ,आज भी तुम उसके लिए इतने खतरे उठा कर उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो ,तुम उसके लिए मार खा रहे हो ,इतने खरनाक आदमी से पंगा लेकर रखे हो ,गरीब होते हुए भी पैसे की चिंता ना करते हुए उसके लिए तुमने जो कुछ हो सकता था उतना किया ,अब यार अगर ये प्यार नही तो और क्या होगा ,तुमने कभी भी काजल को उस नजर से नही देखा जिससे उसे दुनिया देखती है ,जानते हो काजल के लिए तुम क्या हो ….”

मैं चौक कर उनके चहरे को देखने लगा,काजल ने मेरे बारे में ये सब उन्हें बताया था

“तुम काजल के लिए देवता हो जिसे वो कुछ भी दे सकती लेकिन जिसने उसे दुनिया की हर खुशियां दी है “

इस बार तरुणा के आंखे भी हल्की गीली थी,मैं भी अपने अंदर से फूटते हुए शैलब को बड़ी मुश्किल से सम्हाल पा रहा था,मेरी काजल मुझसे इतना प्यार करती थी की उसने मुझ जैसे आदमी को देवता का दर्जा दे दिया था ..

“नही मेम मैंने कुछ भी नही किया है उसके लिए ,उसने मुझे जो प्यार दिया है उसके सामने तो ये कुछ भी नही है ,जितना प्यार और अपनत्व उसने दिखाया है उतना आज तक मुझे किसी ने नही दिया “

तरुणा के होठो में एक मुस्कान खिल गई

“तुम दोनों को समझना ही बेकार है दोनों एक दूसरे की ही तारीफ करते रहोगे ..खैर छोड़ो ,भाई बता रहे थे की काजल बीमार है क्या हुआ है उसे …”

मैने काजल की बीमारी के बारे में बताया साथ ही ये भी की अगर अविनाश चाहे तो काजल की कुछ मदद कर सकता है ,तरुणा ने मुझे वचन दिया की वो अविनाश से बात करेगी ,मेरे लिए इससे सुकून की कोई बात नही थी क्योकि अगर तरुणा अपनी तरफ से अविनाश को ये बोले तो अविनाश मानेगा ही …

“तो मजनू जी अपनी लैला से कुछ बोलना हो तो बता दो मैं उसे बता दूंगी “

“धन्यवाद मेडम,आप उसके साथ है तो मुझे कोई फिक्र नही है,हा बस उसे ये पुछएगा की उसका घर कहा है ,मैं जानता हु वो बताना नही चाहेगी इसलिए उसे ये मत बताइएगा की मैंने पूछा है बस यू ही बातों बातों में पूछियेगा की वो कहा की रहने वाली है... “

तरुणा के चहरे में अजीब से भाव आये

“क्यो…???”

“बस कुछ जरूरी काम है,शकील से संबंधित ..”

“ठीक है आई होप की तुम जो कर रहे हो सोच समझ कर ही कर रहे होंगे ,ओके टेक केयर अगली बार मिलते है ..

”

अध्याय 26

जिंदगी कई उलझनों में लिपटी हुई चल रही थी तरुणा ने मुझे बताया की काजल ने अपने अतीत के बारे में बताने से उसे साफ मना कर दिया जो हो चुका था वो उसे याद नही करना चाहती थी,

मैं बस कुछ शक ही कर सकता था लेकिन यकीन से कुछ भी नही कह सकता था की आखिर शकील और अविनाश के बीच रिलेशन क्या है…

खैर जो भी हो वो बस इतना तो पता था की शकील अविनाश को जानता है लेकिन अविनाश शकील को नही जानता,क्योकि अविनाश का नाम सुनकर और उसे देखकर शकील के चहरे की हवाइयां उड़ी थी जबकि अविनाश बिल्कुल ही नार्मल था ...और अविनाश और काजल के बीच कोई सम्बंध जरूर है…

खैर अभी मेरे लिए सबसे बड़ी मुसीबत थी दिन रात का पहरा,सिर्फ कालेज के अंदर ही मैं शकील की नजर से दूर रहता था बाकी समय उसके लोग मेरे आसपास ही रहते थे…

कालेज में मेरी मुलाकात मेरे एक सीनियर से हुई जो कम्प्यूटर साइज़ के जीनियस कहे जाते थे,मेरा कोडिंग में इंटरेस्ट देखकर उन्होंने मुझे बुलाया,नाम था देबुजीत ,उन्होंने मेरे अंदर कम्प्यूटर और टेक्नोलॉजी की दुनिया का कुछ अलग ही कीड़ा लगा दिया,उन्होंने मुझे हैकिंग के बारे में बताया जो की नेटवर्किंग का पार्ट था,और अभी कोर्स में भी नही था लेकिन ऐसी चीजो में मुझे इंटरेस्ट बढ़ गया क्योकि मुझे कुछ ऐसा साधन खोजना जरूरी था जिससे मैं शकील के आंखों के सामने ही अपना काम कर सकू और उसे भनक भी ना लगे,देबू सर ने मुझे डार्क वेब के बारे में बताया,डार्क वेब इंटरनेट की वो दुनिया है जंहा कई इनलीगल काम होते है और उन्हें पकड़ा भी नही जा सकता वो एक ऐसा जाल है जंहा अनजान आदमी जाए तो अपना सब कुछ लुटा कर ही आएगा,हैकर्स का गढ़ ,अंडरवर्ड और टेरीरिस्ट लोग भी यंहा एक्टिव है तो पुलिस भी यंहा निगरानी करने की कोशिस करती है,उन्होंने मुझे कुछ बेसिक समझाए और हैकिंग सीखने के लिए डार्क वेब में अपने साथ जुड़ने की सलाह दी ताकि वो मेरा मार्गदर्शन कर सके और वंहा उन लोगो से मिलाए जो की हैकिंग तो करते है लेकिन उसका कोई गलत उपयोग नही करते ….

मैंने भी अपने एक लेपटॉप को खाली किया वंहा से अपने सारे पर्सनल इंफेरमशन डिलीट किया और डार्क वेब के लिए ही उसे रखा,और फिर एक नए दुनिया में प्रवेश किया जो की सामान्य इंटरनेट की दुनिया से बेहद ही अलग थी,कहा जाता है की इंटरनेट की दुनिया का सिर्फ 30% ही सामान्य इंटरनेट है बाकी का 70% डार्क वेब के जरिये ऑपरेट होता है,वो आपको कुछ भी करने की सुविधा देता है लेकिन अगर आप गलत लोगो के हाथ लग गए तो आपका खेल खत्म क्योकि सुरक्षा की कोई गारेंटी वंहा नही होती…

मैं देबू सर के बताए साइट में विजिट किया और उनके रिफरेंस से मुझे वंहा का मेंबर भी बना लिया गया,

वाह ...

ये भी एक दुनिया थी,नए नए इन्फॉर्मेशन वंहा अवेलेबल थे,मुझे बस सीखना था और मैं सीखने लगा था…

इधर

शकील के हवेली में एक हलचल सी थी,दुबई से किसी डॉन का काल शकील को आया था और वो उसे अपने साथ काम करने के लिए दुबई बुला रहा था….वो चाहता था की इंडिया में उसका काम शकील ही देखे ,इससे शकील की पॉवर बेहद ही बढ़ने वाली थी उसे बेहिसाब पैसा मिलने वाला था जिससे वो यंहा नेताओ और पुलिस को खरीद कर अपने काम को और भी आसानी से चला सके ,पहले तो शकील को यकीन ही नही हुआ लेकिन फिर उसने अपनी इन्वेस्टीगेशन करवाई वो नंबर दुबई का ही था आर साथ ही उस डॉन का पर्सनल नंबर था ,बाकायदा उसके लोग शकील से मिलने आये और उनसे बात की ,आखिर शकील का दुबई जाना फाइनल हो गया था,वो यंहा के काम को जल्दी से जल्दी निपटान चाहता था और एक जरूरी काम था काजल को ढूंढना …

मैं शकील के सामने खड़ा हुआ था

“क्यो बे तुझे क्या प्रॉब्लम हो गई अब”

“भाई वो आप दुबई जा रहे हो और यंहा मेरे ऊपर इतने आदमी लगा के रखे हो,आप के जाने के बाद तो ये लोग मनमानी ही करने लगाएंगे, क्या अब भी आपको लगता है की काजल के गायब होने में मेरा कोई हाथ था ,इतने दिन बीत गए है छोड़िए इन सबको ये साले मुझे कोई काम ठीक से नही करने देते हर बात पर सवाल करते रहते है,मैं परेशान हो गया हु इन सबसे और वो रंडी तो साली ना जाने कहा भाग गई अगर इस शहर में रहती तो क्या अभी तक वो नही मिलती ..”

शकील अपने तैयारी में ऐसे भी परेशान था और मेरे मुह से काजल का नाम सुनकर वो और भी बौखला गया ..

“अबे तुझे चाहिए क्या “

“भाई इन चिरकुट लोगो को मुझसे दूर ही रहने के लिए बोलिये ,सालों को कुछ समझ तो आता नही है बस मेरा दिमाग खाते रहते है,आप थे तो आपका नाम लेकर इन्हें समझा देता था अब तो ये मेरे सर में चढ़कर मुतेंगे…”

अब मेरी भाषा भी कुछ कुछ शकील के गैंग वालो की तरह ही हो रही थी …

“ह्म्म्म ठीक है अब से कोई इसका पीछा नही करेगा रे,ऐसे भी यंहा धंधा सम्हालने के लिए मुझे और आदमी चाहिए चूतिये पर अब और आदमी बर्बाद नही करूंगा मैं ,चल जा अब “

मेरी तो बांछे ही खिल गई थी ,शकील कुछ 10 दिनों के लिए बाहर रहने वाला था इन 10 दिनों में मुझे अपने सभी बचे काम करवाने थे,सबसे जरूरी था काजल का इलाज ………

**********

शकील जा चुका था और मेरे पीछे लगे लोगो को उसने बाकी के कामो में लगा दिया था,दुबई वाले डॉन की शर्त ऐसी थी की शकील को काजल और बाकी चीजो से अपना ध्यान हटाकर उन कामो में ही फोकस करना पड़ा,फिर पासपोर्ट वीसा आखिर शकील दुबई के लिए रवाना हो गया……

***********

मैं अभी अभी शहर के एक मशहूर हॉस्पिटल के सामने खड़ा था ,मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था,कारण साफ था की आज मैं इतने दिनों के बाद अपनी काजल को देखने वाला था,तरुणा ने डॉ से बात करके ऑपरेशन की डेट फिक्स करवा ली थी,काजल हॉस्पिटल में एडमिट भी हो चुकी थी,उसके टेस्ट चल रहे थे दूसरे दिन उसका ऑपरेशन होना था..

धड़कते हुए दिल से मैं हॉस्पिटल की ओर बढ़ रहा था,रिसेप्शन में ही मुझे तरुणा मिल गई ..

“क्यो मजनू आखिर आ ही गए लैला से मिलने”

मैं क्या कहता

“कहा है वो ..?”

“सेकंड फ्लोर रूम नंबर 132”

तरुणा ने मुझे मुस्कुराते हुए कहा और बाहर की ओर निकल गई ,मैं भागता हुआ लिफ्ट के पास पहुचा वो ऑलरेडी ऊपर थी मैंने सीढ़ियों का सहारा लिया और दौड़ाते हुए 2nd फ्लोर में पहुच गया ..

सामने वो कमरा था जंहा मेरी जान थी,मैंने धीरे से उसे खोला..

“कौन है आप बाहर जाइये “

मेरे अंदर घुसने से पहले ही एक नर्स चिल्ला पड़ी,

“जानते नही ये केंसर वार्ड है जाइये पहले ग्लब्स पहन कर आइए “

नर्स मेरे साथ ही बाहर आ गई मेरे ही उम्र की लड़की थी लेकिन बेहद ही तीखी..

“मेडम मैं उसका दोस्त हु “

“सभी तो जबसे उसके दोस्त ही आ रहे है परिवार वाले कहा है उसके “

“वो …...वो यंहा कालेज में पढ़ती है तो परिवार वालो के आने में समय है “

“ओह दोस्त हो तो ठीक है अपनी दोस्त से बाद में मिल लेना चलो जाओ यहां से कल आना ऑपरेशन खत्म हो जाए उसके बाद अभी वोऑब्जेर्वशन में है …परिवार वाले होते हो मिलने की अनुमति थी ”

उसकी बात सुनकर मेरा चहरा उतर गया ,मैंने अपना सर झुका लिया था जब मैंने चहरा उठाकर फिर से उस नर्स को देखा तो मैं चौका क्योकि उसके होठो में एक शरारती मुस्कान थी ,मैं उसे प्रश्न भरे नजरो से देखने लगी और वो खिलखिला उठी ..

“तरुणा ने मुझे बताया था की इसका मजनू आने वाला है उसकी लेना,मैंने तो ले ली ,जाओ जाओ तुम्ही लैला अंदर तुमसे मिलने की बेचैनी में मरी जा रही है “

वाह ,यार क्या बताऊँ कैसा लगा ,लगा जैसे उस नर्स को पकड़ कर अभी जोर की झप्पी दे दु लेकिन मैं भगा और तुरंत ही अंदर घुस गया,

मेरी नजर उस चहरे पर थी जिसे देखने को मैं इतने दिनों से बेताब था जिसे मैं बस अपने सपने में ही देख रहा था,काजल ने मुझे देखा और उसके चहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गई,वो अभी बिस्तर में लेटी हुई थी ,हॉस्पिटल में मिलने वाला मरीज वाला गाउन पहने हुए थी ,उसके चहरे को देखकर मेरा दिल ही डूब गया,वो बेहद ही कमजोर दिख रही थी ,आंखों में काले घेरे आ चुके थे,चहरे की रंगत उतर सी गई थी,उसकी मुस्कान से ही उसकी कमजोरी का आभास हो रहा था…

मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसके हाथो को अपने हाथो में ले लिया…..

“क्या हो गया तुझे इतनी कमजोर लग रही है तू”

उसने अपने हाथ मेरे गालों में फिराये

“तू नही था ना मेरा ख्याल रखने के लिए “

उसके आंखों में आंसू आ गए थे,साथ ही मेरे भी

“किसने कहा था मुझे खुद से दूर करने के लिए,तुझे छोड़कर उस उस साले शकील के साथ रहना पड़ रहा है मुझे ..”

काजल मुस्कुराई

“बहुत बड़ा हो गया है ना तू मेरे लिए शकील से पंगा ले लिया,मुझे उठवा लिया,और अब...इतने बड़े हॉस्पिटल में मेरा इलाज करवा रहा है पैसे कहा से आये रे तेरे पास “

“अरे तू अपनी चिंता कर वो मैं देख लूंगा “

“कैसे उतारूंगी तेरा इतना कर्ज “

उसकी बात सुनकर मेरे होठो में एक शरारती सी मुस्कान खिल गई पता नही क्यो लेकिन शायद उसने भी कुछ समझा जो मैंने नही कहा था,उसने मेरे गालों में हल्की सी चपत मारी…

“चूतिया “

और मैं खुद को नही रोक पाया रोता हुआ उससे लिपट गया..

“ये सुनने के लिए तरस गया था मैं “

वो मेरे बालो को सहला रही थी …….

“पूरा बच्चा है तू,मेरा बच्चा..”

उसने बड़े मुश्किल से उठकर मेरे बालो को चूमा और फिर से लेट गई

कुछ पल होते है ना वो जिसमे आप अपना सब कुछ भूल जाते हो ,मेरे लिए वो वही पल था,शकील की सारी टेंशन,काजल के पास्ट की सारी टेंशन सब कुछ उसके इस एक प्यार भरे किस ने ही भुला दिया था,मैं उसकी आंखों में देख रहा था कोई बात हमारे बीच नही हो रही थी ना जाने कितना समय ऐसे ही निकल गया जब मुझे कुछ याद आया …

“मैंने तरुणा को कुछ पूछने को कहा था ,की तुम कहा की रहने वाली हो “

मेरे सवाल से काजल का खिला चहरा कुछ उतर सा गया

“क्या करोगे जानकर.

जो बीत गया वो वापस नही आता “उसकी आवाज बेहद ही कमजोर थी

“मुझे जानना है की शकील तुमसे इतनी नफरत क्यो करता है “

काजल ने कुछ देर मुझे यू ही देखा फिर जोरो से हँस पड़ी

“मुझे तो ये समझ नही आता की शकील तुमसे इतनी मोहोब्बत कैसे करने लगा है,साला तू जो भी बोलता है मान ही लेटा है “

काजल बातों ही बातों में बातों को घुमा रही थी बड़ी ही खूबसूरती से मुझे उसका इंटेंसन तो समझ आ गया लेकिन मैं चुप ही रहा …

मैंने भी बात कोई घुमाया

“अविनाश सर से मिली “

मैं देखना चाहता था की अविनाश का नाम सुनकर उसके चहरे में क्या कोई परिवर्तन आता है और वो आया

“वो तो रंडियों को देखना भी पसंद नही करते ना,खैर उनको मेरा धन्यवाद कहना की उन्होंने एक रंडी की इतनी मदद की “

काजल के चहरे में एक अजीब सा दुख था जिसे मैं पढ़ ही नही पा रहा था और मेरे इस सवाल से और उसके इस जवाब से माहौल कुछ गमगीन सा हो रहा था,मैं काजल के बड़े दिन पर उसे दुखी नही करना चाहता था...मैंने बात वही छोड़ दी

“तरुणा मेडम कैसी है तुम्हारा ध्यान तो रखती है ना “

काजल के होठो में फिर से मुस्कान आ गई

“वो तो बिल्कुल मेरे बहन के जैसी है,राहुल मुझे आज भी यकीन नही होता की मैं यंहा हु,उस रंडीखाने के बाहर जिंदगी जी रही हु,सिर्फ तुम्हारे कारण “

काजल की आंखों में असीमित प्यार देखकर एक बार मैं उनमे डूब ही गया,इतना स्नेह इतना प्यार था उन आंखों में और थोडा सा पानी भी ……

“तेरी याद आती है रे “

मेरा गाला कुछ भर सा गया था,उसने बस मुस्कुराते हुए मेरे बालो में अपनी उंगलियां फंसा ली ,वो बस मेरे आंखों में देख रही थी,वो अजीब पल होते है जब होठो में मुस्कुराहट होती है और आंखों में प्यार से भरा हुआ पानी …

वो कुछ बोल नही रही थी बस मेरे बालो को सहला रही थी ,मुझे निहार रही थी ,मैं उसकी छतियो में सर रखकर सो गया,ये मेरे लिए जन्नत थी इतना सकून दुनिया में कही नही होता जीतना अपने से प्यार करने वाले के सीने में सर रखने का होता है ,

ना जाने कितनी देर ,कोई शब्द कही से नही आ रहे थे ,ना किसी को अपना प्यार जताने की कोई होड़ थी ,ना कुछ समझने समझाने की कोई चिंता,बस मैं था वो थी और अहसास था,शायद ये कहना गलत होगा……

क्योकी कोई दूसरा तो था ही नही बस हम थे जो एक थे और था अहसास वो भी एक ही था……..

अध्याय 27

मैं कालेज से जब हवेली पहुचा तो पता चला की शकील वापस आ चुका है,उसे गए 4 दिन ही हुए थे,माहौल बेहद हि टेंशन का था और जाते ही मुझे कहा गया की शकील भाई मुझे बुला रहे है ,

शकील बेहद ही गमगीन मुद्रा में बैठा हुआ था साथ ही उसके सभी पंटर भी दुखी और उदास ही दिख रहे थे,

“भाई आदाब ,आप बहुत ही जल्दी आ गए,अपने तो कहा था की 10 दिन लगेंगे “

शकील ने सर उठाकर मुझे देखा उसका चहरा बेहद ही ख़ौफ़नाक लग रहा था,चहरे में अजीब से भाव थे,

“तू कम्प्यूटर इंजीनियर है ना मुझे एक चीज बता क्या कोई किसी और के मोबाइल से किसी और कोई काल कर सकता है “

“मतलब “

“मतलब की जैसे क्या कालिया के मोबाइल से तू मुझे काल कर सकता है..”

कालिया शकील का आदमी था और वही पास में ही खड़ा था

“है बिल्कुल क्यो नही ,कालिया भाई अपना मोबाइल देना “

“ऐसे नही ,अगर तेरे पास कालिया का मोबाइल ना हो तो “

मैं चुप हो गया और सोचने लगा..

“ऐसे कैसे हो सकता है भाई ??”

“हो तो सकता है,मुझे एक इंसान ने बताया जो मुझे दुबई में मिला था..सोच सोच “

“हुआ क्या है भाई किसे काल करना है,और मुझे नही पता लेकिन मेरे टीचर शायद बता पाए ऐसे अगर मैं कालिया का मोबाइल हैक कर लू तो ये हो सकता है ,लेकिन वो कैसे करते है मुझे नही आता,हा मैंने सुना जरूर है “

“हम्म्म्म”

शकील ने मुझे ध्यान से देखा

“तो पता कर और ये भी अगर किसी का मोबाइल हैक कर लिया जाए तो क्या उसका पता लगाया जा सकता है की ये काम किसने किया है “

“जी भाई लेकिन हुआ क्या है और आप इतने परेशान क्यो लग रहे है “

“किसी ने हमसे धोखा किया है ,दुबई वाले डॉन ने हमे कभी बुलाया ही नही था,किसी ने उसके नंबर से हमे और इंडिया में उसके कुछ नेटवर्क को चूतिया बनाया ,समझ नही आ रहा है की ये किसने और क्यो किया होगा,”

“भाई मतलब आपका नही बल्कि उस डॉन का मोबाइल हैक किया गया है “

“वही तो साला और भी बढ़ा सर दर्द हो गया है ,उन्होंने मुझे पकड़ कर रखा था उसके पूरे गैंग में ये बात फैल गई ,साला जिंदगी में इतना जलील कभी नही हुआ जिनता उस मादरचोद ने किया “

“लेकिन भाई अगर उसका मोबाइल हैक हुआ तो वो उसकी गलती है आपकी नही और उसके गैंग के किसी आदमी ने ही किया होगा..”

“वो पता लगा रहा है,उसने बड़े बड़े हैकर्स को लगा दिया है की आखिर कौन है वो जिसने उसका मोबाइल हैक करके मुझे काल किया,फिर इंडिया में उसके लोगो को सिर्फ इसलिए की वो मुझे दुबई भेज सके “

शकील की बात से मेरा माथा ठनक रहा था..

“भाई ऐसा भी तो हो सकता है की कोई उसे ये अहसास दिलाना चाह रहा हो की डॉन भी उसके सामने कुछ नही है ,हो सकता है की आप उसके टारगेट हो ही नही ,बल्कि उसने आपको रेंडमली ही चुन लिया हो “

“हु हो सकता है ,डॉन के लोग भी यही कह रहे थे,बड़ी मुश्किल से वंहा से निकल कर आया हु ,वो साला जो भी हो मिलेगा तो साले को कुत्ते की मौत दूंगा “

“भाई उसे तो वो डॉन भी ढूंढ रहा होगा,उसके हाथ लगेगा तो वो ही मार देंगा…”

“हा ये तो है ,तू कुछ कर सकता है क्या “

“भाई वंहा बड़े बड़े हैकर्स बैठे है मैं क्या कर सकता हु ,मैंने तो अभी अभी कम्प्यूटर पकड़ा है “

“देख ले यार अगर कोई ऐसा आदमी मिले जो ये बता पाए की वो आदमी कौन था तो …..हो सकता है की दुबई वाले भाई के नजरो में मेरी कुछ इज्जत बढ़ जाए,साला ना जाने क्या क्या सोच लिया था मैंने सब मिट्टी में मिल गया..”

पहली बार शकील मुझसे कुछ मांग रहा था,छिनने वाला आदमी कभी कभी इतना मजबूर हो जाता है की मांगना शुरू कर देता है वाह क्या बात है,वक्त इंसान को क्या क्या नही बना देता…

“ओके भाई पता करता हु “

“लेकिन साला ये कम्प्यूटर,टेक्नालजी भी क्या जोर की चीज है साला इतने बड़े डॉन को भी चूतिया बना दिया “

शकील अचानक से हँसा..फिर मुझे देखने लगा

“छोटे तू सिख जो ये कहते है ना हैकिंग...तू सिख जो चीज लगे मैं तुझे दूंगा साला अगर ये हमारे हाथ लग जाए तो सोच क्या क्या कर लेंगे..आज हर आदमी के हाथो में मोबाइल है,हर जगह कैमरा लगे है,हर कोई इंटरनेट चला रहा है ,आज जिसने टेक्नोलॉजी को जीत लिया वो तो राजा है ,वही असली डॉन है …”

शकील के चहरे में अजीब सी महत्वकांक्षा खिल गई थी ..

उसने बोलना जारी रखा

“सोच जब उस डॉन को पता चला की उसके मोबाइल से मुझे और उसके बंदों को काल गया था तो साले का चहरा देखने लायक था,जिसका यंहा की पुलिस कुछ नही बिगड़ पाई वो आदमी डर रहा था,”

शकील जैसे सदमे में पहुच गया था ,वो जोर जोर से हँस रहा था..

“वंहा जो हैकर्स आये उन्होंने बताया की किसी का भी बैक अकाउंट भी हैक किया जा सकता है,कुछ भी हैक किया जा सकता है ,सोच मादरचोद इतनी मेहनत करने की ही क्या जरूरत जब सब हमे घर बैठे ही मिल जाए ..हा हा हा …”

“छोटे तू सिख जो लगे मैं तुझे दूंगा लेकिन तू ये सब सिख यार “

शकील की बात सुनकर मैंने बस हा में सर हिलाए और मंद मंद मुस्कुराने लगा ..मैं मन ही मन सोच रहा था

‘सीखा चूतिये सीखा,जिस दिन सिख गया पहले तो तेरी ही गांड फाडूँगा ……’

*************************

मैं अपने कमरे में अपना लेपटॉप खोले हुए बैठा हुआ था,मैं डार्क वेब में गया,और एक वेबसाइड में अपनी id जिसका नाम rocky था से लॉगिन किया,सामने चैट बॉक्स में जाकर मैंने के मेसेज किया

rocky: हैल्लो भाईजान

BadeBhaiya :ह्म्म्म छोटे,कैसी रही

rocky:सोचा नही था उससे कही ज्यादा अच्छा ,धन्यवाद आपका,मछली तो खुद ही जाल में फंसने को तैयार बैठी है ..

BadeBhaiya :गुड ,अब बता की और क्या चाहता है..

rocky:बस यही की उसे बर्बाद कर दु

BadeBhaiya :तब तो पूरा जाल डालना पड़ेगा

rocky:वो खुद ही तैयार है बस आप बताओ की आगे क्या करना है ...

BadeBhaiya :ओके..तो अपने घर में ****** ये सब समान मंगवा ले ,और ये ******* साफ्टवेयर उसके मोबाइल में इंस्टाल करवा ले ,बाकी वो खुद ही बर्बाद हो जाएगा ..

(उसने कुछ डिवाइस और कुछ साफ्टवेयर के बारे में लिखा जिसे मैंने नोट कर लिया )

rocky: धन्यवाद भाईजान आपका अहसान कैसे चुकाऊंगा

BadeBhaiya :उसकी फिक्र मत कर ,मैं अपना हिस्सा खुद ही ले लूंगा...

मेरे चहरे में उसकी बात सुनकर एक मुस्कान आ गई

rocky:ओके

BadeBhaiya :ओके सेटअप तैयार कर फिर बताना,फिर मैं बताउगा की आगे क्या करना है …..

rocky : ओके

मेरे चहरे में मुस्कान थी और दिल में अपार खुसी ,शकील को रोड में लाना इतना आसान होगा मुझे पता भी नही था……

************

इधर

एक कम्प्यूटर स्क्रीन पर

I_am_a_dog :मछली ने चारा कहा लिया

BadeBhaiya :वो तो खुद ही तैयार बैठा है लूटने के लिए

I_am_a_dog :गुड ,तुम्हारा ईमान भी तगड़ा होगा

BadeBhaiya :थैंक्स ,लेकिन लड़का मासूम है

I_am_a_dog :मासूम देखेंगे तो काम कैसे करेंगे,मा चुदाने गई उसकी मासूमियत खुद ही मारने आया है यंहा पर

BadeBhaiya :हम्म ओके

I_am_a_dog :तू रेडी है ना या किसी और को कहु

BadeBhaiya :नही मैं कर लूंगा

I_am_a_dog :गुड सेटअप तैयार हो जाए फिर बताना

BadeBhaiya :ओके ..

*****************

अध्याय 28

मैं खुशी की लहर में सवार था ,सब कुछ ठीक ही चल रहा था,शकील मेरी बात मान रहा था,काजल का ऑपरेशन सक्सेसजफुल था और उसका पैसा भी जुगाड़ हो चुका था,थोड़ा पैसा एक मंत्री मोहोदय ने दिया था बाकी मेरे जेब से गया था,चीजे इतनी ठीक हो गई थी की मुझे कभी कभी अपने भाग्य पर भी भरोसा नही होता था…

तरुणा एक दिन मुझसे कालेज में मिली

“यार काजल वंहा होस्टल में बैठे बैठे बोर हो जाती है क्यो ना वो भी अपनी पढ़ाई पूरी कर ले “

तरुणा के बात से मैं सोच में पड़ गया

“क्या वो पढ़ी लिखी है “

“हाँ उसने 12th तक की पढ़ाई साइंस में की थी मैं सोच रही हु की उसे कालेज में दाखिला दिला दिया जाए “

“लेकिन अभी भी शकील के लड़के उसे ढूंढ ही रहे है “

“तो ढ़ंढने दो ना एक गर्ल्स कालेज में उसका दाखिला करवा देते है ,प्रिंसपल से बात मैं और भाई (अविनाश) कर लेंगे ,काजल से मैंने एक बार पूछा था की उसे क्या बनना है उसने कहा की वो वकील बन कर बेसहारा लोगो के लिए केस लड़ना चाहती है ,तो क्यो ना उसे लॉ से ही ग्रेजुएट किया जाए “

मैं अभी भी शकील के डर में था लेकिन तरुणा बहुत ही कॉन्फिडेंट दिख रही थी…..

“ठीक है जैसा आपलोगो को अच्छा लगे…”

“गुड ,और एक अच्छी खबर है अविनाश काजल से मिलने को तैयार हो गया है “

तरुणा की बात सुनकर मैं उछल पड़ा…

“क्या ये कैसे हुआ “

“बस तरुणा का जादू है ,भाई मेरी बात बहुत कम ही नही मानता ,मैं उसके पीछे पड़ी थी और वो मान गया “

मेरे दिल में ना जाने कितने सवाल घूम रहे थे,

“क्या हुआ मेरा भाई स्मार्ट है लेकिन तेरी काजल को लेकर नही उड़ जाएगा जो तू इतना सोच रहा है “

मुझे सोचता हुआ देख कर तरुणा ने कहा और मेरी तंद्रा भंग हुई

“नही नही ऐसी कोई बात नही है ……..”

मैं हँस तो रहा था लेकिन मैं उस मोमेंट को मिस नही करना चाहता था जब अविनाश और काजल एक दूसरे से मिले……

*************

आखिर वो दिन तय कर लिया गया जब अविनाश और काजल मिलने वाले थे ,अविनाश गर्ल्स होस्टल में जाकर उससे मिलने वाला था ,मुझे खास हिदायत तरुणा और काजल दोनों ने दी थी की मैं वंहा उस समय नही आ सकता,मेरे लिये ये बात और भी चुभने वाली थी की काजल भी मुझे वंहा उस समय नही चाहती थी ….

लेकिन इससे मेरी बेताबी और भी बढ़ गई थी मैं सीधे अविनाश से मिला

“भाई थैंक्स अपने मेरे लिए इतना कुछ किया ,और आप काजल से मिलने वाले भी हो “

अविनाश मुझे देखकर मुस्कुराया

“अरे छोटे इसमें थैंक्स की क्या बात है ,और मेरी बहन ने इतना जिद किया की मुझे उससे मिलने जाना ही पड़ा,मैं तो चाहता था की तू भी मेरे साथ रहे लेकिन ……..लेकिन पता नही को तरुणा मना कर रही है ,शायद वो नही चाहती की शकील को इसकी भनक लगे ..”

मैं जानता था की शकील के लोग मेरा पीछा नही कर रहे थे,मैंने ये बात तरुणा को भी बताई थी लेकिन नही ….वो अब भी चाहती थी की अविनाश काजल से अकेले में मिले…..

“ठीक है भाई अगर ऐसा है तो आप ही जाओ कब जा रहे हो ..”

“कल सुबह 11 बजे के करीब “

“कहा मिलोगे”

“वही गर्ल्स होस्टल के मीटिंग रूम में जंहा लड़कियों के पेरेंट्स मिलते है “

“ओके…”

***************

मैं वंहा से निकल तो गया लेकिन मेरे दिमाग में एक आंदोलन चल रहा था ना जाने अविनाश और कजाल का ऐसा क्या रिश्ता था जो मुझे भी आने से मना किया गया था ,काजल ने मना किया था या नही ये तो मैं नही जानता लेकिन तरुणा जरूर मेरे आने के सख्त खिलाफ लग रही थी ….

मैंने निश्चय किया था की मैं ये पता लगा कर रहूंगा,और मैं दूसरे दिन 11 बजे वंहा पहुच गया

अविनाश अंदर गया मैं भी अंदर गया लेकिन दूसरे तरीके से मैं उस कमरे के पास ही खड़ा हुआ बाहर एक खिड़की से अंदर का नजारा देख पा रहा था,अविनाश बड़े ही आराम से बैठा था ,

थोड़े देर में फिर से कमरा खुला...

काजल और तरुणा अंदर आयी लेकिन तरुणा तुरंत ही वापस निकल गई अभी भी दोनों ही बस एक दूसरे को देख रहे थे……

अविनाश विस्मय से अपना मुह खोले हुआ था ,वही काजल नार्मल ही लग रही थी लेकिन थोड़ी नर्भस थी ,वही तरुणा के चहरे में ना जाने क्यो बेहद ही खुशी थी ………

“प्रिया तुम ……...“

तरुणा के जाने के बाद ही अविनाश बोल उठा काजल नजर गड़ाए खड़ी थी …

“ऐसा नही हो सकता ये तुम नही हो सकती मेरी प्रिया की ये हालत नही हो सकती “

अविनाश दूर ही खड़ा था उसकी आवाज भर्रा गई थी

“वक्त का खेल है अवि ,मेरे पास आओ “

कजाल ने अपनी बांहे फैला दी ,अविनाश किसी बच्चे की तरह दौड़ता हुआ आया और उससे लिपट गया..

“प्रिया,ये क्या हो गया हे,भगवान मैंने कहा कहा नही ढूंढा तुम्हे “

दोनों के नैनो से मोती झर रहे थे ,

“इसमें तुम्हरी कोई गलती नही है अवि “

“जिसकी गलती है मैं उसे कभी नही छोडूंगा प्रिया ,उस रंडी काजल को मैं कभी माफ नही करूंगा “

काजल ने गहरी सांस ली ,उधर मेरी सांस ही रुक सी गई थी

“काजल ने जो किया उसकी सजा तो उसे कुदरत ने दे दी अवि,हमशे उसने जो धोखा किया उसकी सजा उसे वैसे ही मिली,उसने तुमसे प्यार एक झूठा नाटक किया मुझे अपनी दोस्ती के जाल में फसाया और उसे भी झूठे दोस्ती और प्यार का शिकार होना पड़ा,”

अविनाश अब काजल से दूर हट चुका था वो उसे ही देख रहा था..

“तुम्हे और कोई नाम नही मिला जो उस कमीनी का नाम रख लिया “

इस बार काजल मुस्कुराई

“ये नाम तो मुझे शकील ने दिया था ,शायद अपनी प्रेमिका की याद में जिसे उसने अपने ही हाथो से मार दिया “

अविनाश का हाथ काजल के चहरे में था,उसके चहरे का भाव अब बदलने लगा था..

“तो वो शकील था जिसने तुम्हारा ये हाल किया ,इसके लिए वो जिंदगी भर पछतायेगा “

अविनाश की आवाज में गुस्से की कम्पन साफ दिख रही थी ..

“नही अवि नही ,वो बेहद ही ताकतवर है कोई भी गतल कदम खतरनाक हो सकता है ,मैं तुम्हे फिर से नही खोना चाहती ,मैं राहुल को नही खोना चाहती “

काजल की आवाज कांप गई

“प्रिया अब मैं वो सीधा साधा लड़का नही हु जो कभी तुम्हारा दोस्त हुआ करता था “

“हा वो तो जानती हु,मेरा प्यारा अवि अब कितना खतरनाक हो चुका है,जिस दिन मुझे शकील के लोगो के बीच से उठाकर लाये थे मैं तब ही समझ गई थी की ये कोई बड़ा शातिर आदमी है लेकिन जब पता चला की ये तुम हो तो यकीन ही नही हुआ की मेरा अवि ऐसे कैसे हो गया “

“वक्त .

वक्त इंसान को बदलने पर मजबूर कर देता है ,अब राहुल को ही देखो ,पहले मैं भी उसके जैसे सीधा साधा था लेकिन उस रंडी ने …”

काजल ने तुरंत ही अवि के होठो पर अपनी उंगली रख दी

“जो हुआ उसे भूल जाओ अवि अब हमारे पास इस जीवन को फिर से शुरू करने का एक अवसर है “

“शकील को उसके किये की सजा तो मिलेगी प्रिया ,मैं उसे बर्बाद कर दूंगा ,उसने तेरे ऊपर ना जाने कितने जुल्म ढाए है इसकी सजा तो से मिलेगी “

काजल बड़े ही प्यार से उसे देख रही थी

“जरूर मिलेगी लेकिन अभी नही “

काजल के चहरे में वो खुशी देखकर मेरा भी दिल झूम गया था ऐसा लगा जैसे जाकर अभी उन लोगो के बीच में कूद जाऊ और काजल और अविनाश को गले से लगा लू लेकिन ,मैं खुद ही चोरों की तरह छिपा हुआ था…….

तभी कोई नुकीली चीज मेरे माथे में टकराई

“ख़बरदार जो हिले तो यही भेजा खोल दूंगा “

मैं जब पलटा तो वो होस्टल का चौकीदार था

“यंहा क्या कर रहे हो चलो इधर “उसकी आवाज बेहद ही कड़क थी

“छोड़ दो भैया अपनी अपनी महबूब से मिलने आया होगा “

ये तरुणा की आवाज थी जो मुझे बेहद ही नाराजगी से घूरे जा रही थी ,उसे देखकर मेरी और भी हालत खराब हो गई

“अरे बेटी ये साला खिड़की से ताका झांकी कर रहा था “

“अच्छा …”तरुणा ने मुझे घुरा

“वो मैं ..वो “

“चुप रहो,जब बोला था तुम्हे की तुम्हे नही आना है तो तुम यंहा जासूसी कर रहे थे “

तरुणा गरजी

“नही मैं वो..”

“क्या वो ..चलो अब अंदर तुम्हारी क्लास लेती हु “

मैं घबराता हुआ उसके साथ गया,वो मुझे लेकर उसी कमरे में ले गई जंहा काजल और अविनाश दोनों थे ..वी दोनों ही मुझे देखकर चौके ,

“ये देख काजल तुम्हारा आशिक तुम्हारी जासूसी कर रहा था “

“नही नही ऐसी कोई बात नही है “मैं सकपकाया

“ये गलत बात है राहुल ऐसा नही करना चाहिए तुझे अपने प्यार पे भरोसा नही है क्या ?”

इस बार अविनाश ने कहा

“मैंने ये कब कहा “अब मैं सच में परेशान हो गया था क्योकि काजल कोई भी रिएक्शन नही दे रही थी और ये लोग बात को कहा से कहा ले जा रहे थे ,

“सच में राहुल तू चूतिया तो था लेकिन अब शक्की भी होई गया है “

काजल के होठो में एक व्यंगात्मक सी मुस्कान थी

“अरे ऐसा कुछ भी नही है,मैं भी अविनाश सर के साथ आना चाहता था लेकिन मुझे मना कर दिया गया,अब शकील भी केशरगढ़ से है और अविनाश भी,और शकील का चहरा भी अविनाश को देखकर उतर गया था तो ..

तो मैं इतने दिन से जानने को बेताब था की अविनाश सर, काजल और शकील के बीच आखिर संबंध क्या है ,बस इसीलिए “

सभी ने अपना चहरा बनावटी रूप से सोचने वाला किया

“गलत बात गलत बात “तरुणा ने सर हिलाया और सभी जोरो से हँस पड़े

“अब तो तुम सब जान गए होंगे “

काजल मुस्कुरा रही थी

“हा और अविनाश सर आप अभी शकील को कुछ भी नही करेंगे ,मेरे पास प्लान है “

“ओहो तेरा मजनू तो प्लान की खान ही है,हर चीज के लिए इसके पास प्लान पहले से तैयार रहता है “तरुणा की बात से काजल थोड़ा शर्मा सी गई ………...

अध्याय 29

हम सब अभी गर्ल्स होस्टल के कमरे में बैठे हुए थे,अविनाश और काजल अभी भी इमोशनल लग रहे थे,

“भाई मैं तुम्हारे और काजल के बारे में बहुत ही खुश हु ,इस बेचारी ने बहुत दुख देखे है इसे हमेशा खुश रखना “

अविनाश काजल के बालो को सहलाते हुए बोला

“अरे भैया काजल इसकी लैला है और ये काजल का मजनू ..क्यो मजनू “

तरुणा ने अपने चिर परिचित अंदाज में हमे चिढ़ाया ,काजल ने झट से उसके कन्धे पर अपना हाथ मार दिया

“अच्छा मैं चलता हु कुछ जरूरी काम है “

अविनाश उठ खड़ा हुआ ,साथ ही तरुणा भी खड़ी हो गई

“अच्छा मैं भी चलती हु ,लैला मजनू को थोड़ा अकेले छोड़ दिया जाए ना जाने कितने अरमान दिल में दबाए बैठे होंगे “

तरुणा हँस पड़ी वही उसकी बात से मैं और काजल शर्मा से गए थे.

“अरे रुको ना सालों बाद मिले और अभी जा रहे हो “

काजल ने अविनाश को देखते हुए कहा

“जिसने हमारा ये हाल किया है उसको सबक भी तो सिखाना होगा ,राहुल तुम अभी प्रिया के पास रुको हम तुम्हारे प्लान पर बाद में काम करना शुरू करेंगे अभी के लिए मुझे और भी थोड़ी तैयारी करनी होगी ..

”

मैंने हा में सर हिलाया और तरुणा और अविनाश वंहा से चले गए ,

ये अजीब सी सिचुएशन थी आज हम दोनों इतने दिनों के बाद अकेले थे लेकिन बोलने को कुछ भी नही था,बस एक नर्भसनेश हम दोनों को ही घेरे हुए थी ,मैं भी कुछ बोलने से हिचकिचा रहा था और वो भी ,तभी फिर से दरवाजा खुला ,वो तरुणा थी

“अरे अकेले हो फिर भी दूर दूर बैठे हो ,चलो उठो अब क्या यही सुहागरात मनाने का इरादा है काजल इसे अपने कमरे में ले जा “

काजल ने अजीब निगाह से तरुणा को देखा

“अरे ऐसे क्या देख रही है ,तेरा बालम आया है आज तो कुछ हो ही जाएगा “

तरुणा की बात सुनकर काजल ने उसे झूठे गुस्से वाली आंखे दिखाई लेकिन उसके होठो में अब भी शहद सी प्यारी शर्मीली सी मुस्कान थी ,

“चलो चलो ये प्रेजेंट्स के लिए विजिटिंग रूम है और तुम दोनों एक दूसरे के पेरेंट्स नही हो बल्कि तुम दोनों को मिलकर किसी का पेरेंट बनना है “तरुणा फिर से खिलखिला उठी

“क्या मेडम आप भी “मैं पहली बार अपना मुह खोला था

“अरे ये क्या मेडम मेडम लगा के रखा है ,अब से मुझे तरुणा कहना,आखिर तुम मेरी बहन के पति देव जो हो तो मेरे तो जीजा जी हुए ना”

तरुणा के बात से तो मैं भी शर्मा गया था

“ओहो शर्मीले जीजा जी क्या दीदी के साथ अकेले समय नही बिताना ...ऐसे नही बिताना चाहते तो आप जा सकते हो “

मैं थोड़ा शर्म में था तो थोड़ा हिचक में मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या जवाब दु

“तरुणा बस कर यार हम जा रहे है अपने कमरे में “

काजल उठ कर मेरा हाथ पकड़कर मुझे खड़े करती हुई बोली और मैं किसी रोबोट की तरह उसके पीछे पीछे चलाने लगा ,होस्टल की लडकिया अजीब निगाहों से मुझे देख रही थी ,इतना डर तो मुझे उस रंदीखाने में भी नही लगता था,जितना इन शरीफ लड़कियों के निगाहों से लग रहा था ….

काजल के कमरे में दो बिस्तर लगे हुए थे दोनों ही सिंगल बेड थे,पास ही में एक अलमारी सी बनी थी जिसमे कुछ किताबे थी और एक स्टडी टेबल ,ये पूरी तरह बॉयज होस्टल की ही तरह था लेकिन बस ज्यादा साफ सुधरा था चीजे अपनी सही जगह पर थी ,

मुझे एक बिस्तर में बिठा दिया गया था ,

“देखो ये काजल के कमरे के साथ साथ मेरा भी कमरा है तो जो भी करना है जल्दी जल्दी कर लेना ,ऐसे 1 घण्टे में तो काम हो जाएगा ना,नही हुआ तो कोई बात नही मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगी “

तरुणा के चहरे में अर्थपूर्ण मुस्कान थी

“चुप कर कमीनी हम ऐसा वैसा कुछ भी नही करने वाले ,तू अपनी फेंटेसी हमारे ऊपर मत थोप “

काजल ने तरुणा के बांहों में एक मुक्का मारा

“हाय काश मेरे पास भी इतना प्यार करने वाला मजनू होता तो मैं तो रात दिन बस ..

”

तरुणा इतना बोलकर खिलखिला उठी जबकि काजल का चहरा शर्म से लाल हो गया था,मैंने काजल को इतना शर्माते हुए नही देखा था,

“चुप कर कुछ भी बोलते रहती है “

इस बार काजल की आवाज भी शर्म की वजह से धीमी हो गई थी

तरुणा के काजल का चहरा अपने हाथो में पकड़ लिया

“ओह हो देखु तो मेरे लाडो का चहरा शर्म से सुर्ख हो रहा है ,कितनी प्यारी लग रही है कही किसी की नजर ना लग जाए ,”

फिर तरुणा का चहरा मेरी ओर हो गया

“ए हीरो मेरी बहन को ज्यादा परेशान मत करना ,”

मैंने हा में सर हिलाया ,तभी तुरुणा के होठो में एक शैतानी मुस्कान खिल गई

“ऐसे थोड़ा परेशान कर सकते हो “

इस बार वो खिलखिलाते हुए बाहर को गई ,

“अंदर से कुंडी लगा लेना नही तो कोई आ जाएगा “

वो बाहर जाते जाते कह गई ,उसकी बात सुनकर काजल बुरी तरह से शर्मा गई थी वही हाल मेरा भी हो गया था,हम दोनों इतने दिनों तक एक ही कमरे में कई दिन एक ही बिस्तर में साथ सोए भी लेकिन इतनी अजीब सिचुएशन हमारे सामने कभी नही आयी थी ,काजल दूसरे बिस्तर में जाकर बैठ गई थी ,

जिससे मिलने की इतनी तम्मना थी ,जिसे निहारने को मैं रातों को तड़फता था,जिससे बात करने को मैं व्याकुल रहता वही आज मेरे सामने थी और मेरे मुह से एक शब्द भी नही फुट रहे थे,मैं उससे निगाहे भी नही मिला पा रहा था ना जाने काजल कितना शर्मा रही थी लेकिन उससे ज्यादा तो मैं ही शर्मा रहा था…….

“कुछ बोलोगे भी “आखिर काजल ने ही वो शर्म की दीवार गिराने की पहल की

“क्या बोलूं “

“कुछ भी “

मेरी नजर सीधे काजल पर गई वो मुझे ही देख रही थी लेकिन मेरी नजर मिलते ही उसने नजर झुका ली ,मैं उसके टमाटर से लाल हुए चहरे को देख रहा था,मुझे अपनी ओर देखता हुआ पाकर उसका चहरा और भी सुर्ख हो गया था,उसकी उन अदांओ में मैं अपनी जान लुटा सकता था आखिर मैं उठा और सके करीब जा बैठा ,वो मुझसे थोड़ा दूर सरकी जिससे मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ..

“जानती हो मुझे कैसा लग रहा है “मैंने बहुत ही हल्की आवाज में कहा

“कैसा ‘उसकी नजर अभी भी नीचे थी

“जैसे आज हमारी सुहागरात हो “

“धत “वो और भी शर्मा गई और मैंने उसे अपनी बांहों में समेट लिया ,वो भी मेरे बांहों में घुलने लगी थी ……

“काजल मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु “

“ये भी कोई कहने वाली बात है”काजल मेरे सीने में सिमटे हुए बोली

“क्या तुम मुझे अपना चहरा नही दिखाओगी “

मैं उसका चहरा नही देख पा रहा था

“नही “उसके आवाज में एक शरारत थी जरूर उसके होठो में मुसकान भी रही होगी ,वो मेरे सीने से और भी कस कर सट गई

“जानती हो मैंने इस दिन का कितना इंतजार किया है “

“मैंने भी “

“फिर भी मुझे अपना चहरा नही दिखा रही “मैंने नीचे देखने की कोशिस की उसके बाल ही मेरे सामने थे

“नही “

मैं अपनी उंगलियों को उसके गालों पर ले गया और उसके कोमल गालों को सहलाने लगा,वो मेरे सीने में ही मचली मुझे उसकी हल्की सी हंसी सुनाई दी …

“तुम्हारे गाल कितने कोमल है “

मैं अब भी उसके गालों को सहला रहा था ,उसने अपने को थोड़ा उठाकर मेरे सीने में एक किस किया और फिर से मुझे कस लिया ,

“अरे अपना चहरा तो उठाओ “

“ना “

“मुझे तुम्हारे गालों को चूमना है “

मैं अधीर हो रहा था

“ना”उसने बड़ा ही प्यारा सा जवाब दिया लेकिन उसकी ना में भी एक मदहोशी थी एक शर्म था ,मैंने उसके चहरे को अपने हाथो से उठाया वो बिना किसी विरोध के मेरे सामने थी ,उसकी आंखे बंद। थी ,उसका प्यारा मुखड़ा मेरे आंखों में भर रहा था,उसके लबो में एक हल्की सी हलचल थी जो मुझे अपनी ओर खिंच रही थी ,मेरे होठो ना जाने किस आकर्षण से उसके होठो से मिल गए….

हम दोनों ही एक दूसरे को भिच कर एक दूसरे को अपने में समाने को आतुर हो गए थे,हमारे होठ एक दूसरे के गीलेपन से भीग रहे थे,कभी हमारे दांत उसने गढ़ जाते तो कभी जीभ उसके मुह में चली जाती ,

दुनिया जैसे खो गई थी काजल मुझसे और सट गई थी मैं अपनी बांहों में उसे कसकर भरे हुए था,मैं उससे इंच भर भी दूर नही था लेकिन हम और भी पास आने को तड़फ रहे थे,हमारे होठो एक दूसरे के मुह की गहराई को नाप रहे थे वो और भी गहरे जाने को बेताब थे,कोई दीवार नही थी कोई पर्दा नही था,कोई हसरत भी नही थी ,और शायद हम भी नही थे,

जो था वो बस एक अहसास था एक प्यार का अहसास एक दूसरे का होने का अहसास एक दूसरे में घुल जाने का अहसास,और दुनिया में कुछ भी तो नही बचा था ………

अध्याय 30

काजल के होठो की मिठास अभी भी मेरे होठो में थी और उसका प्यार दिल में ,रह रह कर मेरे होठो में एक मुस्कान सी खिल जाती थी ,मुझे उसका प्यार भरा ये तोहफा याद आ जाता,लेकिन अभी सिर्फ खुशियां मनाने का वक्त नही था मेरे सामने एक बड़ी चुनोती थी वो था शकील के मोबाइल में सॉफ्टवेयर इंस्टाल करना और साथ ही bhadebhaiya उसकी जानकारी पहुँचाना ..

मैं एक ही झटके में शकील को बेसहारा और मजबूर कर देना चाहता था उसके सारे व्हाइट और ब्लैक पैसे का खात्मा और साथ ही पुलिस तक कुछ ऐसे ठोस सुबूत जिससे वो धोबी का कुत्ता बन जाए ……

शकील ने मेरे मांगने पर अपने मोबाइल की जांच करने के लिए मुझे दे दिया,ताकि मैं पता लगा सकू की उसके साथ धोखा किसने किया है ,साथ ही मैंने इंटरनेट सर्वर के जरिये उसके दूसरे कम्प्यूटर में भी घुस गया था मैंने सारी सेटिंग्स कर ली अब वक्त था की डार्क वेब में जाकर चैटिंग करके उस हैकर को तैयार करने का जिससे मैं बाते किया करता था ……

Rocky :हैल्लो

BadeBbhaiya:हम्म

Rocky :पूरी तैयारी हो गई है आप अपना काम चालू कर दीजिए

BadeBbhaiya:ओके मुझे एक्सेस भेज

Rocky :ओके

BadeBbhaiya:ठीक है कल सुबह धमाल के लिए तैयार रहना

Rocky :थैंक्स

BadeBbhaiya:अभी से बोलने की कोई जरूरत नही है जब काम हो जाए तब बोलना …………

मैं अब चैन से सोने वाला था जो किसी मारपीट या माथापच्ची करके नही होता वो कुछ कोडिंग के जरिये होने वाला था ये मेरी समझदारी थी या बेवकूफी ये तो वक्त ही बताता लेकिन मैं बहुत ही खुश था,मैं खुश था की शकील की आधी दौलत मेरी हो जाएगी और वो होगा जेल में और मैं अपनी काजल के साथ आराम की खुशियों भरी जिंदगी बिताऊंगा ……..

*************

इधर दो कम्प्यूटर स्क्रीन पर

BadeBbhaiya:काम हो गया मुझे एक्सेस मिल गया

I_am_a_dog :गुड अब आज रात में ही उन दोनों की गांड मार दे ,और कल से अपनी जिंदगी ऐश के साथ जीने को तैयार हो जा

BadeBbhaiya:एक बात पुछू तुम इस लड़के में और शकील में इतना इंटरेस्ट क्यो ले रहे हो

I_am_a_dog :हा हा हा ...उससे तुम्हारा कोई मतलब नही होना चाहिए ,तुम अपने काम और पैसे से मतलब रखो

BadeBbhaiya:फिर भी शकील का तो समझ आता है लेकिन उस लड़के ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है

I_am_a_dog :उसने नही लेकिन उससे जुड़े कुछ लोगो ने जरूर बिगाड़ा है ,उसके जरिये मैं सब को रुलाऊंगा,अब और बात नही कल के tv चैनल में खबर मुझे दिख जानी चाहिये …

BadeBbhaiya:ओके

******************

ये सुबह मेरे जीवन की सबसे मस्तानी सुबह होने वाली थी ,जब मेरी नींद खुली तो मैं बाहर हो रहे शोर शराबे को सुनकर खुश हो गया मुझे जो करना था वो बस इतना था की वो बस इतना की मुझे अपने चहरे में दुख रखना था ताकि शकील को भनक भी ना लगे की उसकी इस तबाही के पीछे कौन है …..

मैंने अपना मोबाइल देखा जिसमे अविनाश और तरुणा के कई मिस काल थे मोबाइल साइलेंट में होने की वजह से मैं सुन नही पाया था ,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई शायद मुझे उठाने में थोड़ी देर हो गई थी ये खबर सब जगह फैल गई होगी ,लेकिन मैंने अभी उन्हें काल करने का फैसला रद्द कर दिया अभी तो मैं शकील के मजे लेना चाहता था,या हो सकता है की पुलिस ने उसे पहले ही अरेस्ट कर लिया होगा ,मैं खिड़की से बाहर की ओर झांका मैंने पुलिस की दो जीप वंहा देखी साथ ही कुछ न्यूज़ वाले भी दिखे जिन्हें पुलिस अंदर आने से रोक रही थी ,मैं मुस्कुराता हुआ अपने को सम्हाला और थोड़ी सीरियस शक्ल बना कर बाहर निकला ही था की मुझे मेरी ओर पुलिस वाले आते दिखे …

“हैंड अप बिल्कुल नही हिलना “उन्होंने मेरे ऊपर ही बंदूख तान दी थी मैंने तुरंत ही अपने हाथ उठाये की मेरे हाथो में हथकड़ी डाल दी गई और उन्होंने मुझे ऐसे दबोचा जैसे मैं कोई अपराधी हु ,

“सर हुआ क्या है??”

“ले चलो इसे गाड़ी में “

पुलिस वाले में कोई जवाब ही नही दिया ,वो मुझे हवेली से बाहर के आंगन में लाये मैंने नजर घुमाई लेकिन शकील मुझे कही नही दिखा उसके कुछ लोग ही दिखे जिन्हें पुलिस ने घुटनो के बल बिठा रखा था उन्होंने मुझे भी घुटनो के बल बिठा दिया ..

“भाई ये क्या हो रहा है “मैंने पास ही बैठे हुए शकील के आदमी से पूछा जो सर झुकाए हुए मेरे बाजू में घुटनो के बल बैठा था उसने सर उठा कर मुझे देखा और उसके चहरे का भाव तुरंत ही बदल गया मानो वो मुझे खा जाने वाली नजर से देख रहा हो ..

“मादरचोद तुझे शकील भाई कभी नही छोड़ेंगे,और जो तेरी रांड है ना जिसके लिए तूने ये सब किया देख भाई उसकी क्या हालत करते है ,अविनाश के साथ मिलकर गेम खेला था ना तूने उसे होस्टल में छिपा कर रखा था,अब देखना मादरचोद शकील भाई अब गेम खेलेगा तेरे और तेरी उस रांड के साथ …”

ऐसे लगा जैसे मेरा पूरा खून ही चूस लिया गया हो ,ये क्या हो रहा था मैंने ऐसा तो नही सोचा था,शकील को काजल का पता चल गया और ये भी की ये सब मैंने किया लेकिन शकील कहा था ..??

“शकील कहा है ?”

मेरे होठो से अनायास ही निकल गया ,जिसे सुनकर वो जोरो से हंसा

“वो तेरी मा चोद रहा है “

वो और जोर से हंसा लेकिन कुछ ही दूर खड़े पुलिस वाले ने उसे जोर से लात मार दिया

“राहुल कौन है ??”

अंदर से आते हुए एक अफसर ने कहा ,मैंने अपना हाथ उठा दिया

“इसे अलग जीप में बिठाओ और बाकियों को अलग “

वो गरजा और कुछ पुलिस वाले मुझे पकड़ कर दूसरे जीप की ओर जाने लगे ..

“लेकिन साहब मैंने किया क्या है “मैं हिम्मत करके अफसर से बोला

“मादरचोद तेरे ऊपर धोखाधड़ी का आरोप है ,अबे इतना सा तो तू है तूने मंत्री साहब के पत्नी का अकाउंट हैक किया और चूतिये पैसे अपने ही अकाउंट में डाल दिए ,तेरे कारण शकील की भी लग गई ,चलो अच्छा हुआ धरती से कुछ तो बोझ कम होगा “

मैं स्तब्ध था ,बिल्कुल ही अवाक ,हर चीज समझ के परे थी की क्या हुआ है क्या हो रहा है,मुझे अपने मोबाइल की याद आयी जिसमे तरुणा और अविनाश के मिस काल थे कही मेरी काजल तो खतरे में नही थी ,मेरी सांस ही बंद हो गई थी ……….

मेरे बाहर निकलते ही न्यूज़ चेनल वालो ने मुझे घेर लिया था …

मेरी फ़ोटो उतारी जा रही थी लेकिन एक क्रिमिनल के तौर पर पुलिस ने मुझे सबसे बचा कर जीप में बिठा दिया ……….

***************

“काजल ,काजल कहा है ..”

मैं अविनाश को देखते ही खड़ा हो गया था ,मैं अब भी पुलिस स्टेसन में बैठा हुआ था और पुलिस मेरे खिलाफ चार्ज सीट बना रही थी ,अविनाश के साथ साथी कुछ लड़के भी वंहा आये थे और साथ ही एक वकील भी था ,

अविनाश को देखते ही मैं खड़ा हो चुका लेकिन अविनाश ने मेरे सवालों का कोई जवाब नही दिया बल्कि

‘चटाक ‘

मेरा गाल मानो शून्य हो गया था ,अविनाश बेहद ही गुस्से में लग रहा था ..

“ये क्या तमाशा कर रहे हो यंहा पर ये पुलिस स्टेशन है “

पास खड़ा इंस्पेक्टर भड़का लेकिन फिर अविनाश के चहरे और उसके साथ आये लड़को को देखकर थोड़ा शांत हो गया …

“मादरचोद तेरे कारण मेरी प्रिया फिर से उस शकील के जाल में फंस गई ,अगर उसे कुछ हुआ ना तो तुझे मैं जिंदा जला दूंगा “

अविनाश बेहद ही गुस्से में लग रहा था ,और काजल का नाम सुनकर मैं सकते में आ गया था

“क्या???क्या हुआ काजल को “

“शकील उसे होस्टल से उठा ले गया है ,तू अपने को बहुत ही बड़ा तीसमारखाँ समझता है साले ये सब करने की क्या जरूरत थी तुझे “

अविनाश की बात सुनकर मेरे होश ही उड़ गए थे ये क्या कर दिया मैंने मैं सर पकड़कर बैठ गया था ,अविनाश ने मुझसे फिर कुछ भी नही कहा ..वो वकील के साथ इंस्पेक्टर से बात करने लगा …

“मैं मंत्री जी से बात कर चुका हु,इस लड़के को किसी साजिश के तहत फसाया गया है,उन्होंने कहा है की इसे छोड़ना है वो केस वापस ले रहे है ,”

वकील ने कुछ पेपर्स इंस्पेक्टर को दिखाया

“लेकिन “

“लो बात करो “अविनाश किसी को फोन लगाकर इंस्पेक्टर को देता है ...

कुछ ही देर में इंस्पेक्टर का रुख भी बदल गया था,शकील के सारे लोगो पर कई आरोप थे वही मेरे ऊपर बस धोखाधड़ी के मामले का आरोप लगा था,शकील और उसके कुछ साथी रात से ही गायब थे ,उनके सारे काले कारनामे खुल गए थे उसका एकाउंट भी खाली कर दिया गया था,उसके पास से बहुत मात्रा में ड्रग्स ,हथियार और पैसे बरामद किये गए थे लेकिन शकील पुलिस के हाथो में नही आया ,मुझे तुरत ही पुलिस से छुड़ा लिया गया था लेकिन इन सबके बीच में मेरे दिमाग में कई सवाल खड़े हो गए थे,..

आखिर शकील को किसने काजल के बारे में सूचना दी थी ?

आखिर किसने उसे आगाह किया की पुलिस उसके हवेली और दूसरे ठिकानों पर छापा मारने वाली है ?

आखिर किसने उसे ये बताया की इन सबमे मेरा हाथ है ,फिर भी वो मुझे छोड़कर काजल को पकड़ने क्यो गया ?

सवाल तो कई थे लेकिन मेरे दिमाग में एक ही नाम घूम रहा था …

BadeBbhaiya लेकिन आखिर वो था कौन और उसने मेरे साथ ऐसा क्यो किया ?????

अध्याय 31

हम सब इसी सोच में डूबे हुए तब की आखिर शकील काजल को ले कर कहा गया होगा ,

“कौन सी ऐसी जगह होगी जंहा शकील को सहारा मिले,वो पुलिस से छिप सके और उसके मदद करने वाले लोग भी उसे मिल जाए “

अविनाश अपना दिमाग लगा रहा था

“ऐसी जगह हो घर ही हो सकती है “प्यारे के मुह से अचानक ही निकल गया

“घर ,शकील का घर यानी ...केशरगढ़ “

अविनाश के मुह से निकला और सभी उसे ही देखने लगे..

“यस हमे अभी वंहा के लिए निकलना होगा “मैं बोल उठा अविनाश ने एक बार फिर हिरकत वाली नजर से मुझे देखा लेकिन फिर सर हिला कर हामी भरी……..

*************

हम केशरगढ़ के लिए निकलने ही वाले थे की तरुणा हमारे पास दौड़ाते हुए आयी …

“भैया,आकाश…”

उसकी हालत बेहद ही खराब लग रही थी

“क्या हुआ तरुणा “अविनाश ने उसे सहारा दिया ,और उसने अपना मोबाइल अविनाश के सामने कर दिया मेरी भी आंखे मोबाइल के स्क्रीन पर जम गई थी ..

सामने जो दृश्य था वो देख कर हमारे रोंगटे ही खड़े हो गए ,वो मेरी काजल थी ,

काजल के शरीर में एक भी कपड़ा नही था उसे किसी बिस्तर में लिटा कर बांध दिया गया था ,उसकी आंखे खुली थी लेकिन मुह में एक पट्टी बंधी हुई थी ,ये एक वीडियो था ,सामने वाले शख्स का चहरा तो नही दिख रहा था लेकिन उसकी आवाज सुनाई दे रही थी …

“रंडी हमेशा रंडी ही रहती है,वो कभी भी किसी की बहन, दोस्त ,बीवी और प्रेमी नही बन सकती ...

और ये तो मेरी रंडी है अब सारी दुनिया को पता चल जाएगा की ये एक रंडी है चूतिये राहुल और गांडू अविनाश तुम मेरा कुछ भी नही बिगाड़ सकते ,मैं तुम्हारी पहुच से बहुत दूर हु ,अब तुम देखना की कैसे मैं इस रंडी के वीडियो बना बना कर इसे इंटरनेट में फेमस कर दूंगा …”

इसके साथ ही एक भयावह हंसी भी थी,मैं आवाज को पहचान गया था ये शकील की ही आवाज थी ,मेरे शरीर में मानो ताकत ही नही बची थी मैं सर पकड़ कर बैठ गया था ,आखिर काजल की इस हालत का दोषी मैं ही था,उसे फिर से बलात्कार झेलना पड़ रहा था तो वो सिर्फ मेरी वजह से ..

“मुझे जिंदा रहने का कोई हक नही है मैं ही काजल का दोषी हु,मुझे मार डालो अविनाश ..तरुणा मुझे मार डालो मुझे जिंदा रहने का कोई हक नही है “

मैं रोता हुआ नीचे बैठ गया था ,मेरे कंधे में एक हाथ रखा गया ,वो अविनाश था इस पूरे वाकये में पहली बार उसने मुझपर सहानुभूति दिखाई थी वही तरुणा मेरे बगल में बैठ गई

“हिम्मत रखो राहुल अगर तुम ही ऐसी हिम्मत हार जाओगे तो काजल का क्या होगा,उसके बारे में सोचो वो सभी जुल्म सह कर भी जिंदा रहेगी क्योकि उसे तुमपर भरोसा है,वो मुझसे कहा करती थी की मेरा चूतिया मेरे लिए कुछ भी कर जाएगा ,समझो उसके विस्वास को उसे धोखा मत दो ,उसे तुमपर जान से ज्यादा भरोसा है और तुम्हे उसे छुड़ाना यही उसे तुम्हे नई जिंदगी देनी है जिसकी वो हकदार है ,तुम्हे उसे बचाना है तुम ऐसी कमजोर नही हो सकते ,तुम उसकी उम्मीद को ऐसे तोड़ नही सकते उठो ..उठो राहुल और जाओ हमारी काजल को सही सलामत वापस लेकर आओ “

तरुणा की बातों ने मुझमें जैसे एक नया जोश भर दिया मैं तो टूट ही चुका था लेकिन तरुणा ने सही कहा था मेरी काजल को मुझपर पूरा भरोसा था और मैं किसी भी कीमत में वो भरोसा तोड़ नही सकता था ...मैं उठ खड़ा हुआ और अपने आंसू पोछते हुए उस वीडियो में अपनी काजल को देखने लगा

“मैं आ रहा हु काजल मैं इस बार उस शकील को जिंदा नही छोड़ूंगा तुम्हारे गुनहगारों को सजा मिलेगी काजल ,ये वीडियो तुम्हे किसने भेजा ..”

मैंने तरुणा को देखा

“पूरे कालेज के लड़के लड़कियों के वाट्सअप पर ये मेसेज भेजा गया है “तरुणा बोल उठी और अविनाश और मैंने तुरंत ही अपना मोबाइल निकाला,वो सही थी हमे भी वीडियो भेजे गए थे ..

“ये किसका नंबर हो सकता है “अविनाश सोच में पड़ गया

“देबू..देबू हमारी मदद कर सकता है “मैं बोल उठा और हम उसके कमरे की तरफ भागे ,जब हम कमरे में पहुचे तो देबू बहुत ही गंभीर मुद्रा में कम्प्यूटर के सामने बैठा हुआ था …

“देबू ????”

मैं बोल उठा

“मुझे भी ये वीडियो मिला है और मैं इतने देर से इस नंबर का पता लगाने की कोशिस कर रहा हु लेकिन ...

ये कोई इंटरनेशल नंबर है और इसे ट्रेक करना मेरे तो क्या किसी एक्सपर्ट हैकर या साइबर क्राइम वाले के बस का भी नही है “हमारे बिना कुछ बोले ही देबू बोलने लगा

“और इतना ही नही जब मैंने ये वीडियो सर्च किया तो मुझे पता चला की काजल की ये वीडियो कई पोर्न साइट में भी डाली गई है,कोई हमारे साथ बड़ा गेम खेल रहा है ..”देबू चिंतित था

“BadeBhaiya “ मेरे मुह से अचानक ही वो नाम निकला जिसने मेरी पूरी दुनिया कुछ ही घण्टो में उजाड़ दी थी

“हो सकता है लेकिन उसका शकील से क्या कनेक्शन है समझ नही आ रहा ,उसने तो शकील को नंगा ही कर दिया फिर वो शकील की मदद क्यो करेगा “देबू फिर से बोला ,सभी के मन में ढेरो सवाल थे लेकिन उत्तर किसी के पास नही था …

“हो सकता है की ये काम शकील का ही हो ,आवाज तो उसकी ही है “अविनाश ने कहा

“नही ...उसके पास इतना दिमाग नही हो सकता की वो ऐसे इंटरनेशनल नंबर से वीडियो भेजे और उसके पास पूरे कालेज के लड़के लड़कियों के मोबाइल नंबर कहा से आएंगे,इसके लिए किसी ने कालेज का डेटा बेस हैक किया होगा,मैं शकील के पास इतने दिन तक था उसके पास टेक्नोलॉजी का इतना ज्ञान नही हो सकता “मेरी बात सुनकर सभी सकते में आ गए

“मुझे तो लगता ही की शकील ने किसी हैकर को अपने साथ रखा होगा ,वैसे भी ये काम इतना छोटा है की ये कोई भी सामान्य हैकर आराम से कर सकता है बस उसे वीडियो बना कर देंगे होगा ,मुझे लगता है की शकील ने कही से वीडियो बना कर उस हैकर को भेजा होगा और फिर हैकर ने उसे फैलाया होगा “देबू की बात में दम तो था..

“राहुल हमे जल्द ही केशरगढ़ के लिए निकलना होगा ,और देबू तुम अपना प्रयास जारी रखना अगर किसी भी तरह से हमे ये पता चल जाए की ये वीडियो आखिर कहा से भेजे गए है तो हमारा काम आसान हो जाएगा “

अविनाश ने मुझे और देबू को कहा हमने भी हामी भर दी …

“मैं इंटरनेट पर डाले गए वीडियो के जरिये भी उसे तलाशने की कोशिस करता हु ,तुम लोग अपना काम करो मैं तुम्हारे कांटेक्ट में रहूंगा ………”
देबू ने सहमति दिखाई और हम तेजी से वंहा से केशरगढ़ के लिये निकल गए …….

अध्याय 32

हम दोनों अविनाश की कार से केशरगढ़ के लिए निकल गए थे,साथ ही अविनाश के दो दोस्त भी थे ,राकेश और जॉनी,दोनों की ही छबि एक गुंडे की थी ,लड़ने और मरने मारने में आगे रहते थे शायद इसी लिए अविनाश ने इन्हें अपने साथ रखा था ..

केशरगढ़ प्रकृति की गोद में बसा एक शहर,वहां के सदियों पुराने महल जो की अब खण्डार हो चुके थे बेहद प्रसिद्ध थे साथ ही प्रसिद्ध था वंहा का एक इंसान नाम उनका थोड़ा अजीब था,’डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवदा वाले ‘लोग उन्हें डॉ चूतिया के नाम से जानते थे,पहले वो एक डॉ हुआ करते थे ,सुना था की वो एक जासूस भी थे और अपने जीवन में कई बड़े केस उन्होंने साल्व किये थे,लेकिन अब वो सब छोड़कर केशरगढ़ में जा बसे थे और यंहा लोगो को ज्ञान बाटने के लिए एक आश्रम चलाते थे ,

खैर हमे उनसे क्या हमे तो शकील को ढूंढना था लेकिन मेरे दिल में उनसे मिलने की एक तमन्ना थी शायद वही से कुछ रास्ता मिल जाए ……..

गाड़ी के बड़े घर के पास पहुची हमारा समान घर के नॉकर ने उठाया और उसे अंदर ले गया ,सभी घर के अंदर गए ये अविनाश का घर था ,घर देखकर ही मुझे समझ आ गया था की अविनाश एक बेहद ही अमीर परिवार से तालुक रखता है ,हवेली के जैसा घर था और घर में कई नॉकर चाकर थे ,उसके माता पिता भी बेहद ही मिलनसार थे और जैसे ही उन्हें प्रिया यानी काजल के बारे में पता चला उन्होंने हमे पूरी मदद करने का आश्वासन दिया,

यंहा मुझे काजल के अतीत के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिली ,पहली ये की उसके माता पिता का देहांत बहुत पहले हो चुका था और उसके पिता अविनाश के पिता के बहुत अच्छे दोस्त थे इसलिए काजल की परवरिश अविनाश के साथ ही उसके ही घर में हुई थी,दोनों में बहुत ही अच्छी दोस्ती थी वो भाई बहन के जैसे एक दूसरे को प्यार करते थे ,जब वो जवान हुए तो अविनाश के जीवन में एक लड़की आई जिसका नाम काजल था,अविनाश के पैसों की लालच में उसने अविनाश को फसाया था,और प्रिया की अच्छी दोस्त बन गई ,लेकिन बाद में इन्हें पता चला की वो किसी और की मासूका है...आगे क्या हुआ ये तो शकील और काजल ही जानते है लेकिन इन बातो से मुझे ये जरूर समझ आ गया था की अविनाश के लिए काजल की क्या अहमियत थी…

आज भी अविनाश के घर में काजल के बचपन से जवानी तक के फ़ोटो थे उन्हेंने उसे ढूंढने की भी बहुत कोशिस की लेकिन उनकी प्रिया कही नही मिली ,और अब जब वो मिली तो फिर से ये घटना हो गई ……..

हम दोपहर में ही केशरगढ़ पहुच चुके थे और शाम से ही हम शकील का ठिकाना ढूंढने निकल पड़े ,पुलिस स्टेशन से उसके पुराने क्रिमिनल रिकार्ड निकलवाये और शकिल के जितने पुराने दोस्त थे उन्हें टारगेट किया ,वंहा का इंस्पेक्टर भी हमारे साथ था अविनाश के पिता की यंहा अच्छी चलती थी शायद इसलिए इंस्पेक्टर भी हमारी पर्सनली मदद करने को राजी हो गया था ,रात तक हमारे पास पूरी जानकारी थी ,अब बात थी की उन ठिकानों पर छापे मारना,हमने तीन टीम बनाई एक में मैं ,इंस्पेक्टर और कुछ सिपाही थे,दूसरे में अविनाश और कुछ सिपाही थे और तीसरे में राकेश ,जॉनी और कुछ सिपाही थे ,तीनो टीम को एक साथ अलग अलग जगहों में छापा मरना था जंहा से जो भी मिले उसकी जानकारी वाकी टोकि के द्वारा हम सभी टीमो तक पहुचा सकते थे ,

हमने पूरी रात छापे मारे,शकील के सभी पुराने दोस्त या सहयोगी हमारी गिरफ्त में थे लेकिन शकील और काजल का कही कुछ भी पता नही लगा ना ही ये पता लगा की शकील यंहा आया है या किसी को लाया है …….

सुबह के 5 बज चुके थे जब सभी टीम फिर से पुलिस स्टेशन में इकट्ठा हुई ……

“ये ऐसी तो कुछ नही बताएंगे 3rd डिग्री देना पड़ेगा सालों को फिर मुह खोलेंगे “

अविनाश ने इंस्पेक्टर को देखते हुए कहा,हमने कुछ लोगो को गिरफ्तार भी कर लिया था जो शकील के खास सहयोगी हुआ करते थे …

“हा लेकिन तिवारी साहब शकील कई साल पहले यंहा से जा चुका है मुझे नही लगता की इन लोगो से उसका कोई संपर्क रहा होगा…”

इंस्पेक्टर ने अविनाश से कहा

“कोई कितनी भी दूर क्यो आ चले जाए अपने बचपन के दोस्तो और सहयोगियों से अलग नही रह सकता,और शकील तो ऐसे बिजनेस में था की उसे इन जैसे चोर उचक्कों की जरूरत पड़ते ही रहती होगी,ट्राई करने में हर्ज ही क्या है “

अविनाश ने इंस्पेक्टर को मना ही लिया और फिर शुरू हुई कुटाई ,,,

और एक दो लोगो ने शकील से कनेक्शन होनी की बात भी कबूल ली,फिर हुई और कुटाई ,और आखिर 3-4 घण्टो की महेनत के बाद एक ने अपना मुह खोला …

“शकील भाई का सुबह फोन आया था की वो केशरगढ़ आये यही और उन्हें छिपने की जगह चाहिए लेकिन केशरगढ़ से बाहर ,वो जानते थे की अगर पुलिस उन्ह ढूंढेगी तो वो कभी ना कभी यंहा जरूर पहुचेगी इसलिए वो यंहा नही रहना चाहते थे,उन्होंने अपनी गाड़ी यंहा ठिकाने लगाई और दूसरी गाड़ी लेकर निकले,सच कह रहा हु साहब हमे नही पता की वो कहा गए लेकिन वो जंगल की तरफ बड़े है …”

उसने रोते रोते कहा

“अच्छा तो वो कितने लोग थे “

“नही पता साहब वो तो गाड़ी लेने अकेले ही आये थे शायद वो नही चाहते थे की उनके साथ कौन कौन आया है उसकी हमे भनक भी लगे ,वो उन लोगो को किसी दूसरी जगह छोड़ कर आये थे ….

”

उस आदमी के कबूलनामें के बाद हमारे लिए चीजे थोड़ी और सुलझ गई थी ,हमे उस गाड़ी का नंबर पता था जिसमे वो भागा था,इंस्पेक्टर ने आस पास के थानों में बात की और घेरा बंदी की बात कह दी साथ ही उस गाड़ी का पता लगाने की बात कही ,सभी लोग बहुत थक चुके थे लेकिन सच बताऊँ तो मेरे और अविनाश के चहरे से थकान जैसी कोई भी चीज कोसो दूर थी …

“हमे जंगलों की तरफ निकलना चाहिए ,हम यंहा यू की नही बैठ सकते”

मैं बोल उठा ,इंस्पेक्टर ने मुझे एक अजीब निगाह से देखा

“उन लोगो के पास हथियार हो सकता है,अगर वो मिल भी गए तो तुम 4 लोग उनका क्या ही बिगड़ लोगे “

“जितना मुझे पता है शकील के साथ 8 से ज्यादा आदमी नही हो सकते और हमारे पास ही हथियार है हम उनसे निपट लेंगे क्यो अविनाश “

मैंने वो माउजर इंस्पेक्टर को दिखाई जो अविनाश ने मुझे दी थी ,अविनाश ने भी मेरी बात पर सहमति जताई ,

“घर चलते है कुछ समान और रख लेते है और फिर निकलनेगे “

अविनाश ने मुझे देखते हुए कहा और हम घर की तरफ चल दिए ,राकेश और जॉनी की तो कार में बैठे बैठे ही आंखे लग गई थी ,अविनाश के घर जाकर हम फ्रेश हुए नाश्ता किया और अविनाश ने कुछ सामना और अपने पास रखा उसने ना जाने कहा से कई बड़ी बन्दूखे ला के कार में लोड किया और फिर हम उसके घर से जंगल की तरफ निकले ,कुछ ही दूर में हमे एक और गाड़ी मिली शायद ये अविनाश के दोस्त ही थे ,सभी लड़को को उसने गले लगाया और अपने कार से हथियार निकाल कर उन्हें दिए और मुझे उनके साथ दूसरी कर में आने को कहा ताकि मैं भी थोड़ी देर सो सकू ,अब हम 10 लोग थे दोनों गाड़िया जंगल की तरफ दौड़ाने लगी ,2 घण्टे बाद ही हम दूसरे थाने में पहुच चुके थे ,वंहा के इंचार्ज ने हमे बताया की आसपास के किसी थाने में उस गाड़ी का पता नही चल पाया है ,हो सकता है की वो यंही कही जंगलों में छिपा होगा,उसने बताया की वंहा से कुछ दूर जंगल के बीच एक छोटा पहाड़ है ,पुराने समय में डाकू उस जगह को छिपने के लिए उपयोग में लाते लाते थे ,वंहा छोटे छोटे गांव भी है शायद वही कही शकील ने शरण ले रखी हो ….

हम लोग उस पहाड़ी की ओर निकल गए ,सड़क से उतर कर कारे पगडंडियों में चलने लगी थी ,कुछ दूर बाद ही वो भी खत्म हो गई हमे एक कार के निशान दिखाई पड़े और लगभग तय हो गया की शकील हमे यही मिलेगा थोड़ी दूर तक गाड़ी गई लेकिन आगे जंगल बेहद ही घना था और कार से जाना मुमकिन नही था हमने कार को कही छिपाने का प्लान बनाया और हमारे दिमाग में आया की शकील ने भी अपनी कार यही कही छिपाई होगी,हम बेहद ही शांति से उसे ढ़ंढने लगे और हमे झाड़ियों के झुंड में उसकी कार मिल गई ,हमने उसके टायरों की हवा निकाल दी और अपनी कारो को ऐसे पोजिशन में छिपाया की हमे वंहा से निकलने में सुविधा हो,सच में मेरे लिए ये सभी काम बहुत मुश्किल थे लेकिन हमारे साथ आये लोगो के लिए ये जैसे रोज का काम हो ,पूछने पर पता लगा के अविनाश ने जिन लोगो को बाद में बुलाया था वो लोग पहले फोर्स में काम कर चुके थे या कुछ कर रहे थे और उन्होंने जंगल वॉर की ट्रेनिंग ले रखी है …..

मुझे यकीन हो गया था की अब हम काजल को आसानी से शकील के चुंगल से बचा लेंगे इतना ही नही बल्कि हम शकील को ठिकाना भी लगा देंगे ….

हमने उन लोगो को ही लीड करने दिया और उनके कहे अनुसार ही हम उनके पीछे चलने लगे ,दोपहर के 2 बज चुके थे लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे शाम हो गई हो ,घने जंगल में चलना भी दुर्भर था,पास की पहाड़ी पर चढ़कर हमे दूर एक गांव दिखाई दिया,उसे गांव बोलना भी शायद गलत होगा क्योकि वंहा महज 5-6 घर जो झोपड़ियों जैसे दिख रहे थे ,हमारा लक्ष्य था वंहा तक पहुचना हम निकल गए और 1 घण्टे में हम उस गांव के पास थे ,उन्होने पहले दूरबीन से जांच की और कन्फर्म किया की कुछ लोग एक घर के बाहर बैठे है ,उन्होंने हमे समझाया की गोली बारी से किसी मासूम गांव वाले की जान जा सकती है इसलिए जंगलों में लड़ने वाली लड़ाई लड़नी होगी,जिसे गोरिल्ला युध्द कहा जाता है एक एक कर लोगो को ठिकाने लगाना और वो भी इतने खामोशी से की किसी को पता भी नही चले ,उनमे से 4 लोग आगे आये और हमे वही छिप कर देखने को कहा अगर जरूरत पड़ती तब हमे आना था ,वो बोल बड़े ही अभ्यस्त थे पास ही पहरा दे रहे शकील के दो आदमीयो को पलक झपकते ही ठिकाने लगा दिया और कोई शोर भी करने नही दिया,मैं उन लोगो को पहचान गया था ये शकील के खास आदमी थे ,वो उस झोपड़ी के बाहर से उसका निरक्षण करने लगे ,और हमे अपना अंगूठा दिखाया मतलब की सब ठीक है ,तभी हमे पास से ही एक बुड्ढा आदमी आता हुआ दिखा,हमारे लोग उसके पास पहुचे और उसने बताया की एक मोटा आदमी पास की झोपड़ी में आया हुआ है उसने उन लोगो को बहुत पैसे दिए जिसकी एवज में वो उसकी खातिरदारी कर रहे थे...

हमने उसको और उसके परिवार को झोपड़ी से दूर रहने को कहा,पता चला की उसका परिवार अभी जंगल में लकड़ियो की तलाश में गया है और शाम होने पर ही लौटेगा ,,,,अब हमारे लिए काम आसान था,हम सभी एक साथ टूट पड़े और एक एक करके शकील के आदमियों को धूल चटा दी लेकिन अभी तक एक भी गोली चलानी नही पड़ी ,अंत में बारी थी उस झोपड़ी की जंहा शकील आराम फरमा रहा था ,मेरे दिल की धड़कने जोरो से चल रही थी क्योकि शायद काजल भी वही थी …..

हमने दरवाजा तोड़ा और शकील बुरी तरह चौकते हुए उठा,उसके साथ दो लोग और भी थे वो कोई भी एक्शन ले उससे पहले ही अविनाश का पिस्तौल बोल उठा…

‘धाय धाय ‘

शकील के दोनों आदमी ढेर थे,लेकिन शकील के चहरे में ख़ौफ़ का कोई नामोनिशान नही दिख रहा था…

“तुम साले चूतिये आखिर यंहा तक पहुच ही गए ,मुझे लगा ही था की तुम मुझे ढूंढ ही लोगे ..”शकील ने मुझसे नही बल्कि अविनाश से कहा था ..

“प्रिया कहा है “अविनाश बौखला गया था और काजल को नही देख कर मैं भी

“प्रिया ...ओह वो रंडी काजल . कोई चोद रहा होगा उसे मुझे क्या पता “

शकील बुरी तरह से हंसा और अविनाश ने आगे बढ़कर उसके मुह में कई घुसे लगा दिए …

“मादरचोद एक बार तूने उसे मुझसे अलग कर दिया था लेकिन अब नही अगर मुझे उसी समय पता होता की उसके गायब होने में तेरा और उस रंडी का हाथ है तो अब तक मैं तुझे कब का मार चुका होता,बता मादरचोद कहा छिपा कर रखा है तूने …”

अविनाश बोलता रहा लेकिन शकील को जैसे कोई फर्क नही पड़ा वो हंसता ही रहा …

उसने मुझे देखा

“तू तो मुझे चोद कर काजल को बचाना चाहता था ,मेरा भरोसा जीता,जीवन में पहली बार मैंने किसी के ऊपर भरोसा किया,साला पहली बार चूतियापा किया ,लेकिन किस्मत देखो किसी ने हम दोनों को एक साथ चोद दिया ….काजल मेरे पास नही है ,हा मैंने उसे होस्टल से उठाया था लेकिन केशरगढ़ में आकर गाड़ी चेंज करने के दौरान कुछ लोग मेरे आदमीयो को मार कर काजल को अपने साथ ले गए,मुझे लगा की वो अविनाश के आदमी होंगे लेकिन फिर मैंने अपनी जान बचाने की सोची ,मुझे मेरे लोगो ने सेटेलाइट फोन के जरिये बताया की उसका एक वीडियो वायरल हो रहा है ,तब मुझे समझ आया की किसी ने मुझसे और काजल से बदला लिया है और जरिया बना तू ,मेरा सब कुछ गया,पैसे मेरी पवार ,यू जंगलों में भटकने के लिए मजबूर हो गया,लेकिन तुम दोनों से तुम्हारी काजल छीन गई ,काश वो आज मेरे पास होती तो मैं अपना सपना पूरा करता,उससे प्यार करने वालो के सामने ही उसे चोदता …”

वो फिर से शैतानों वाली हंसी हँसने लगा,हमारा दिमाग ही घूम गया था और अविनाश ने अपना पिस्तौल निकाल कर सीधे उसके सीने में गोलियों की बौछार कर दी ……..

शकील ने वही दम तोड़ दिया था ,एक एक करके सभी लाशों को ठिकाने लगा दिया गया ,लेकिन हमारे दिमाग में अब भी एक बात घूम रही थी की अगर काजल शकील के पास नही है तो आखिर किसके पास है ?????????

हम फिर से केशरगढ़ पहुच चुके थे,मैंने अविनाश से रिक्वेस्ट किया की मुझे डॉ चूतिया से मिलना है क्योकि मैंने उनका नाम बहुत सुन रखा था ऐसी स्तिथि में शायद वो हमारी कुछ मदद कर पाए …

अविनाश बहुत देर तक शून्य चित्त से मुझे देखता रहा वो मानो बिल्कुल ही चुप हो गया था,शकील को मारने के बाद से अभी तक उसने एक बार भी कोई बात नही की थी,उसने बस अपना हिलाया और हामी भरी…………..

अध्याय 33

फिर से सुबह हुई हम अविनाश के घर में थे ,सुबह ही हमारे मोबाइल पे उसी नंबर से फिर से एक वीडियो आ गया था ,आवाज अब भी शकील की ही थी ,कोई लड़का काजल के मुह में अपना लिंग जबरदस्ती डाले हुए उसके बालो को अपनी ओर खिंच रहा था…

“ढूंढो चुतियो ढूंढो इसे बहुत गुमान था ना तुम्हे अपने प्यार पर अब देखो मैं कैसे इसे असली रंडी बनाता हु ,”

वो दरिंदगी से भरा हुआ हँस रहा था,मैंने काजल की आंखों में देखा एक आंसू उसके आंखों में ठहर गया था वो बह तो नही रहा था लेकिन गिर भी नही रहा था,मेरे दिल में एक जोरो की टीस उठी ,ऐसा लगा की अभी उस कुत्ते को जान से मार दु लेकिन …..

लेकिन वो मेरी पहुच के बाहर था …..

मैं और अविनाश नाश्ता करके डॉ चूतिया के आश्रम की ओर बढ़ गए …

एक दम शांति ,इतनी शांति मैंने अपने जीवन में महसूस नही की थी ….नही नही काजल के गोद में मुझे इतनी शांति मिलती थी..

लोग यंहा वंहा ध्यान में बैठे हुए थे,हम डॉ को ढूंढते हुए आगे बड़े और के पेड़ के नीचे कुछ लोगो के साथ वो ध्यान में बैठे हुए मिल गए ….

हम भी जाकर उसी भीड़ के साथ बैठ गए ,थोड़ी देर बाद जब सब उठकर जाने लगे तो डॉ की नजर अविनाश पर पड़ी …

उन्होंने हम दोनों को अपने पास बुलाया …

“तुम तिवारी जी के बेटे हो ना “

“जी ..”

“तुम्हारे पिता जी से मेरे अच्छे संबंध है वो यंहा आते रहते है,मुझे पता चला उस लड़की के बारे में बहुत दुख हुआ “

डॉ की नजर मुझपर पड़ी ,उन्होंने मेरे बारे में पूछा और हमने उन्हें शुरू से लेकर अंतिम तक सभी बातें बता दी ,कैसे मैं काजल से मिला ,कैसे शकील ने मुझे अपने अपने पास बुलाया,कैसे काजल और मैं प्यार में पड़ गए और कैसे मैंने उसे अविनाश के मदद से शकील के चुंगल से बाहर निकाला ,कैसे मैं डार्क वेब में गया और कैसे शकील और मुझे लूट लिया गया,हमने ये भी बता दिया की हमने शकील को ढूंढ लिया लेकिन काजल उसके पास नही थी और शकील को जान से मार दिया ….

डॉ सब कुछ शांति से सुनते रहे फिर मेरी ओर मुड़े…

“तुम्हे अगर प्रीति उर्फ काजल को ढूंढना है तो पहले तुम्हे खुद को शांत करना होगा,जब कुछ समझ नही आये तो कुछ सोचने से अच्छा है की अपने दिमाग को शांत कर लिया जाए ,अभी के केस में यही हो रहा है ,कोई भी क्लू तुम्हारे पास नही है ,किसने किया होगा क्यो किया होगा कुछ भी नही पता,तो आंखे बंद करो और खुद को शांत करो ,शुरू से सोचो की क्या हुआ था शायद कही ना कही कोई ना कोई घटना ऐसी हुई होगी जिसे तुम मिस कर रहे हो ….हर कड़ी को ढूंढो और शुरू से शुरू करो ……”

अविनाश और मैं दोनों ने आंखे बंद कर लिए और डॉ के कहे अनुसार अपने सांसों पर ध्यान लगाने लगे,धीरे धीरे मन शांत होने लगा ऐसा लगा जैसे सदियों का बोझ मिट गया हो…

मन अपने गहराई में गोते खा रहा था कई चीजे दिमाग में घूम रही थी एक के बाद काजल के साथ बिताए हुए लम्हे सामने आ रहे थे ,कुछ भी खोजने का प्रयास नही किया जा रहा था बस चीजे आ रही थी बार बार दिमाग में आ रही थी जा रही थी ……

मुझे वो रंडीखाना दिखा और उसमें दिखी हंसती हुई काजल साथ ही शबनम मौसी बनवारी ……….

मैंने झट से आंखे खोली…

“मुझे एकबार फिर से वही जाना होगा जंहा से मैंने और काजल ने शुरुवात की थी “

डॉ अब मेरे सामने नही थे ना ही अविनाश ही था ,मैं कितने देर तक बैठा रहा मुझे पता नही लेकिन जब मैंने इधर उधर देखा तो डॉ को कुछ लोगो से बात करता पाया वही अविनाश एक कृत्रिम झील के पास बैठा हुआ उसे निहार रहा था.मैं उसतक पहुचा और उसके कंधे में हाथ रखा …..

उसने मुड़कर मुझे देखा और जोरो से रो पड़ा..

“सब मेरी गलती है राहुल सब कुछ मेरी ही गलती है ...मेरे ही कारण प्रिया को इतने कष्ट झेलने पड़ रहे है ,ना ही मैं उस रंडी काजल के प्यार में पड़ता और ना ही शकील प्रिया को अपने जाल में फंसा पता ..”जो रोता हुआ मेरे सीने से लग गया...मैंने पहली बार इस शख्स को इतना टूटा हुआ देख रहा था,शायद हम दोनों ही प्रिया उर्फ काजल के सबसे बड़े मुजरिम थे,उसने हम दोनों से ही बहुत उम्मीद की हम दोनों से ही प्यार किया और हम दोनों की गलती के कारण उसे दुख देखने पड़े ,एक की गलती ने उसे शकील के चुंगल में फंसा दिया और मेरी गलती ने उसे फिर से उसी नरक में झोंक दिया ...अविनाष के इस प्रकार के व्यवहार से मेरे आंखों में भी पानी आ गया था ……….

****************

ये दोपहर का वक्त था ,मैं उसी जगह पर खड़ा था जंहा से मैंने इस सफर की शुरुवात की थी ,वही रंडीखाना….

लेकिन आज इसकी हालत थोड़ी अलग थी ,शकील के पकड़े जाने और उसके सारे धंधों पर पुलिस की रेट पड़ने के कारण ये भी बंद कर दिया गया था,अधिकतर लड़कियों को जिस्म बेचने के इल्जाम में जेल में डाल दिया गया था कुछ एक जमानत में छूट आयी थी तो कुछ पुलिसवालों के साथ सोकर छूटी थी और अब हफ्ते में उन्हें अपना जिस्म मुफ्त में किसी सरकारी कर्मचारी को सौपना होगा ,मैं धीरे धीरे ही उस ओर बढ़ने लगा जंहा मेरे और काजल के बीच प्यार के बीज ने जन्म लिया था….

मुझे चंपा मौसी(जो पहले इस की मालकिन हुआ करती थी ) दिखाई दी मुझे देखते ही वो मेरे पास तेजी से बड़ी और ‘चटाक ‘

मेरे गालों में एक जोरदार थप्पड़ पड़ा …

“साले तुझे काजल को ले जाना था तो ले जाता शकील को अंदर करवाना था तो करवा देता ये धंधा क्यो बंद करवा दिया,देख रहा है इन चहरो को अब ये किसके सहारे रहेंगे,जिस्म से कुछ पैसे इन्हें मिल जाते थे जिसमे कम से कम कुछ रोटी का इंतजाम तो हो जाता था अब इन भूखे शरीर को कौन रोटी देगा…”

मौसी कहते कहते रोने लगी थी,मैं चारो ओर देख रहा था इस कोठे की पूरी रौनक ही गायब थी ,कुछ एक दो लडकिया कही कही खड़ी थी लेकिन बिल्कुल ही बेजान सी लग रही थी ,मैंने ऊपर देखा तो बाहर शबनम खड़ी दिखाई दी ,और मुझे देखते ही उसने नीचे थूक दिया ,मानो कुछ बेहद ही गंदी चीज देख ली हो …

मैं बिना कुछ कहे ही ऊपर जाने लगा सामने शबनम थी …

“मादरचोद मिल गई तेरे दिल को तसल्ली,साले तुझे तो तेरी महबूबा मिल गई लेकिन यंहा के लोगो की रोटी क्यो छीन ली तुमने ,साले बहनचोद यंहा क्या करने करने आया है अब हमारे हालात में हँसने आया है “शबनम इतने जोरो से भड़की थी की आसपास की औरते भी बाहर आ गई थी ,मैंने शबनम से कुछ नही कहा बस अपने मोबाइल से वो दो वीडियो जो वाट्सअप के जरिये मुझे मिले थे मैंने उन्हें खोल कर उसने सामने कर दिया …

देखते ही देखते सभी के चहरे में आश्चर्य भर गया था ,

“जो भी हुआ वो मैंने नही किया है,हा मैं शकील को बर्बाद करना चाहता था लेकिन किसी की रोटी छीन जाए या तुम लोगो को कोई परेशानी हो ऐसा कोई भी काम मैं नही करने वाला था ये इसी आदमी का काम है जिसने काजल को किडनैप किया है “

मैं पहली बार कुछ बोला

“ये तो शकील की आवाज लग रही है..”

“नही ये शकील नही है शकील को हमने कल ही मार दिया था ,ये कोई और है जिसने काजल को किडनैप किया और तुम लोगो की ये हालत कर दी…”

सभी एक दूसरे का चहरा देखने लगे .उनमे से एक अधेड़ उम्र की महिला सामने आयी ..

“बेटा हमारी काजल को बचा ले ,ये जो कोई भी है ये दरिंदा है ,ये धंधा बंद हुआ तो हुआ कोई बात नही कुछ दिन रोटी नही मिलेगी तो नही सही जैसे तैसे कोई ना कोई उपाय निकाल ही लेंगे ,ऐसे भी सदियों से रंडियों की जरूरत इस समाज को पड़ते आ रही है अब भी पड़ेगी ही ,पहले ही गैरकानूनी तरीके से चल रहा था अब भी चलेगा,हमारी फिक्र मत कर ,बस हमारी काजल को बचा ले ...कोई एक लड़की भी इस दलदल से निकल जाए तो हमारे लिए ये सबसे बड़े खुशी की बात होती है ,तू कजाल को इस दलदल से निकाल कर ले गया लेकिन वो बेचारी किस्मत की मारी थी जो फिर से एक दलदल में फंस गई है उसे निकाल ले बेटा,हम लोगो से जो भी मदद लगे हम वो करेंगे …”

उस महिला की बात से मेरे होठो में के मुस्कान आ गई ,इन रंडी कहे जाने वाली महिलाओं का दिल इतना बड़ा होगा मुझे यकीन ही नही आया ,मैंने भी एक फैसला कर लिया था …

मैं चंपा मौसी की तरफ मुड़ा जो अब तक ऊपर आकर हमारी बात सुन रही थी …

“मौसी यंहा जो भी हुआ वो मैं ठीक कर दूंगा और इन सबकी जिम्मेदारी भी मेरी मैं आप लोगो के बिजनेस का नया तरीका निकलूंगा ,बिल्कुल आधुनिक टाइप …”

वो मेरी बात सुनकर हँसने लगी वही बाकी भी थोड़े खुश हो गए ..

“तो तू शकील की जगह लेना चाहता है “

“नही मौसी शकील जबरदस्ती लकड़ियों को इस धंधे में डालता था मैं ऐसा गुनाह कभी नही कर सकता लेकिन आप लोगो को एक ऐसा सिस्टम जरूर बना के दे सकता हु ताकि आप लोग ज्यादा से ज्यादा कमाई करे और सेफ रहे ,इसके लिए मैं कुछ लोगो से बात करके इन सबका इंतजाम करता हु …”

सभी के चहरे खिले हुए लग रहे थे…

“तू काजल को ढूंढ वो तेरे लिए जरूरी है “

“मुझे आप लोगो की मदद चाहिए ..”

“अगर बात काजल की है तो हम सभी तैयार है “इस बार शबनम बोल उठी

“जिसे भी काजल की कुछ भी भनक लगे वो मुझे बताइएगा,क्योकि ये जो भी हो उसे शकील और कजाल दोनों से कोई खास दुश्मनी है,तभी तो उसने शकील को तो फसाया ही लेकिन काजल को भी केडनेप कर लिया और ये सब हरकत कर रहा है ,ताकि दुनिया को पता चले की काजल कौन है,और मेरे अलावा आप लोग ही ऐसे हो जो काजल और शकील दोनों से जुड़े हुए हो तो मुझे लगता है की आप लोगो को कोई तो हिंट जरूर मिलेगा “

सभी ने सहमति जताई और मैं अपना नंबर छोड़कर वंहा से आ गया…

मैं सोच में पड़ा था की आखिर मैं इन लोगो के लिए क्या करू की इनकी जिंदगी थोड़ी और अच्छी हो जाए ,और मैंने प्यारे और संजय सर को फोन लगा दिया ...

अध्याय 34

दिन बीत रहे थे और काजल के नए नए वीडियो रोज ही आने लगे थे अब तो लगता था की काजल को भी इन सबकी आदत सी हो गई थी उसके आंखों में पानी तो होता था लेकिन उसके दिल की उम्मीद शायद खत्म होने लगी थी साथ ही हमारी भी ……

मैंने कुछ स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर उस रंडीखाने में मुफ्त शाररिक और मानसिक इलाज की व्यवस्था करवा दी ,साथ ही मैंने उन सभी का प्रोफ़ाइल ऑनलाइन कर दिया उसके लिए एक वेबसाइड भी बना दी ,सभी का फोटोशूट करवा दिया यंहा पर बेहद ही भद्दी दिखने वाली औरते भी सजने धजने के बाद और फोटोशॉप की मदद के कारण किसी मॉडल से कम नही लगती थी,महंगी साड़ियों में उनकी फोटो उतारी गई साथ ही नकली उधारी के जेवर भी थे,सभी का प्रोफ़ाइल ऑनलाइन था और जिसे पहले एक बार के 50 रुपये मिलते थे वो अब 1000 रुपये से कम में तो बात ही नही करते थे ,मैंने उन्हें समझाया की भले ही दिन में एक ही ग्राहक मिले लेकिन अपना भाव तगड़ा रखना,मुझे इसी सिलसिले में एक और व्यक्ति मिल गया,नाम था गणपत ,वो फोटोग्राफर था,उसने मुझे आईडिया दिया की क्यो ना यूट्यूब में इन लोगो का वीडियो डाला जाए और साथ ही वेबसाइड में भी वीडियो अपलोड किया जाए ताकि इन लोगो की पहुच और भी बढ़ जाए ,मुझे आईडिया पसंद आया ,और गणपत बन गया वीडियोग्राफर साथ ही मेरा दोस्त प्यारे भी उसके साथ शूट में मदद करने लगा वो साला था ही ठरकी तो उसने कहानी लिखने और डारेक्ट करने की सोची यंहा की औरते उस हद तक जा सकती थी जंहा तक कोई सामान्य लडकिया नही जाती तो उसके लिए ये बेनिफिट था की वो कोई भी कहानी लिख सकता था ,कुछ लड़के भी मिल गए उन्हें फिल्मों में एक्टिंग करने के लिए,मैंने उन्हें सख्त हिदायत दी थी की हमे पोर्न फ़िल्म नही बनानी है बल्कि b या c ग्रेड टाइप की फिल्में बनानी है …

वो लोग उसी में भिड़े रहे और देखते ही देखते अपने खतरनाक एडल्ट कंटेंट के कारण और मजेदार स्टोरीयो के कारण वेबसाइट हिट हो गया,साथ ही यूट्यूब में भी देखने वालो की बाढ़ आ गई और साथ ही बढ़ा इन लड़कियों का रेट ,यंहा तक की कुछ ने तो धंधा ही छोड़ दिया और सिर्फ फिल्मों और शॉर्ट मूवी या वेबसिरिज में काम करने लगी ….

इधर मैने और अविनाश ने अपनी जान लगा दी लेकिन काजल या वीडियो भेजने वाले का कोई भी पता नही चल पाया ….

एक दिन मैं गनपत के स्टूडियो पहुचा जंहा वो फ़िल्म की एडिटिंग करता था प्यारे का अधिकतर वक्त अब वही बीतता था और वो अब इंजीनियरिंग छोड़कर इसी में अपना केरियर तलाशने की सोच रहा था ,मैंने गणपत और प्यारे को मैंने बड़े ही ध्यान से मोबाइल पर कुछ देखते हुए पाया ,मैं पास पहुचा तो काजल की वीडियो देख रहे थे ,उन्हें देख कर मेरा दिमाग गर्म हो गया …

“मादरचोदों तुम काजल की वीडियो देख रहे हो “

वो मुझे देखकर सकपकाए लेकिन गणपत तुरंत बोला

“राहुल भाई आप गलत समझ रहे है हा हम कजाल की वीडियो देख रहे थे लेकिन हमारा उद्देश्य वो नही था जो आप सोच रहे थे “

प्यारे भी बोलने लगा

“भाई सच में काजल तो मेरे लिए भाभी है ,लेकिन जब हम शूट कर रहे थे तो गणपत ने कुछ टेक्निकल बात बताई तो मेरे दिमाग में एक ख्याल आया “

मैं अचानक से ही शांत हो गया

“क्या ??”

“भाई जिस कैमरे से इस वीडियो को रिकार्ड किया जा रहा है ,जिस कमरे में रिकार्ड किया जा रहा है उसके बारे में हमे अगर वीडियो देखकर कुछ पता चले तो ….तो शायद हम कुछ करीब तो पहुच ही सकते है …….”

गणपत की बात सुनकर जैसे मेरा दिमाग ही खुल गया लेकिन इतने कम सोर्स से हम उस आदमी तक कैसे पहुचेंगे ये मुझे समझ नही आया लेकिन मरता क्या नही करता वाली तर्ज में मैंने हामी भर दी ..

वीडियो को अब कम्प्यूटर में डाला गया और जो चीज मैं कभी नही देखना चाहता था वो मेरे सामने फिर से चलने लगी थी ,काजल की आंखों का दर्द मुझे साफ दिखाई दे रहा था और वो कमीना मुझे और अविनाश को बार बार चेलेंज कर रहा था ,उसने काजल को एक बिस्तर से बांध दिया था काजल पहले से बहुत ही कमजोर दिख रही थी ,उसे देखकर मेरे आंखों में आंसू आ गए थे ,लेकिन गणपत ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और ध्यान से वीडियो को देखने लगा ..

“लो भाई पता चल गया ,ये **** कंपनी के *** मोडल का कैमरा होगा या फिर **** कंपनी के *** मोडल का ...

अच्छी बात ये है की दोनों ही बेहद ही महंगे है कम से कम 3 से 4 लाख के बीच के तो सिर्फ घर में इस्तेमाल के लिए ये सबसे महंगे कैमरा है,बाकी इस रेंज में प्रोफेन्सल कैमरा भी आ जाते है लेकिन इन कैमरों को घर में इस्तेमाल के लिए ही लिया जाता है ,अमीरजादों के द्वारा तो स्वाभाविक है की वो ऐसे कैमरा गिने चुने ही होंगे ,अब इसमें शकील की आवाज कैसे आयी ये तो सिंपल है की शकील का वाइस सेम्पल पहले से रिकार्ड किया गया होगा और फिर किसी साफ्टवेयर के माध्यम से आवाज चेंज कर ली जाती होगी ,मेरे ख्याल से तो वाइस को वीडियो में बाद में एडिटिंग करके डाला जाता होगा,और अगर आप ध्यान से देखो तो ये बंद कमरा है और सीलन से भरा हुआ है ,क्योकि ध्यान से देखने पर पता चलता यही की इस कमरे में धूप तो आती नही होगी तो आर्टिफिसियल लाइट लगाई गई है ,और दीवारों में थोड़ी नमी भी दिख रही है ,मतलब पुराने घर का कोई कमरा जंहा आसपास थोड़ी हरियाली हो …”

“हरियाली हो ??/मलतब “

“मतलब भाई आजकल चिड़ियों की आवाज कहा सुनने में मिलती है और रिकार्डिंग में चिड़ियों की आवाज साफ आई है इतनी चिड़िया या तो चिड़ियाघर में मिलती है या किसी ऐसे जगह में जंहा थोड़ी हरियाली होगी “

गणपत ने तो अपने विचार रख दिए थे लेकिन अब इतने बातों में उस आदमी को हम कैसे ढूंढेंगे ये साला अब भी समझ नही आ रहा था ,फिर भी मैंने उन कैमरा मॉडल के कुछ फ़ोटो निकलवाये और उसे आपने साथ ले गया ,और लग गए हम तलाश में पूरे शहर में सभी दुकान मिलाकर पिछले 6 महीनों में ऐसा कैमरा बस एक दो लोगो ने ही खरीदा था,वो एक दो लोग भी ऐसे थे जो शक से पूरी तरह से बाहर थे,दुकानदार ने बताया की ये कैमरा वो रखते भी नही कोई ऑर्डर देता है तो ऑनलाइन मंगाते है,अधिकतर लोग तो इसे ऑनलाइन ही खरीद लेते है ...मतलब हमारे हाथ में कुछ नही आने वाला था ….

मैं कैमरे का फ़ोटो पकड़कर होस्टल में गया लेकिन पता नही क्या हुआ की मैं अविनाश से मिलने की बजाय तरुणा के पास चला गया ,मैं थक कर चूर हो चुका था मैं उसके कमरे में जाकर उसके टेबल में वो फोटोज फेक दी और उसके बिस्तर में धम से गिर गया,मैं आंखे मूंदे पड़ा था,तरुणा आयी लेकिन मुझसे कुछ नही कहा ,वो अब ज्यादा बाते नही करती थी उसने वो फोटोज उठाई शायद साथ कोई और लड़की थी …

“मेम ये तो बहुत महंगा कैमरा है पूरे कालेज में बस एक ही शख्स के पास है आप ले रही हो क्या इसे “

वो कोई जूनियर थी ,मैं तुरंत ही उठ कर खड़ा हो गया और उस लड़की का मुह देखने लगा मेरी अजीब हरकत से तरुणा ने मुझे अजीब निगाह से देखा

“किसके पास है ऐसा कैमरा ??”

मैंने उस लड़की से झट से कहा

“आकाश के पास ,पिछली बार वो क्लास के साथ पिकनिक में आया था तो ले के आया था “उस लड़की ने डरते हुए कहा ……...

अध्याय 35

तरुणा ने तुरत ही अविनाश को फोन लगाया और हम एक्शन में आ गए ,मैंने अविनाश से कहा की अभी ये बात किसी को ना बताए अपने जिगरी दोस्तो को भी नही हम दोनों ही तुरत आकाश के घर की ओर बढ़े वो घर नही बंगलो था,मुझे साफ साफ वो दिन दिखाई दे रहा था जब आकाश ने काजल को देख लेने की धमकी दी थी ,शायद उसे ये भी पता चल गया था की काजल उसके साथ क्यो नही आयी थी उसका कारण मैं था ,लेकिन शकील से उसकी क्या दुश्मनी हो सकती थी ,खैर अभी तक हम इस बात को लेकर कन्फर्म नही थे की वो शख्स आकाश ही होगा बस उसके पास उन दो कैमरा मॉडल में एक था ,और उसके पास काजल से बदला लेने की भी वजह थी,लेकिन वो कम्प्यूटर में इतना भी जीनियस नही था की badebhaiya बनकर कुछ ऐसा कांड कर दे ,जरूर अगर ये आकाश ही था तो उसने इसी को हायर किया होगा,जो भी हो मुझे बस मेरी काजल मिल जाए फिर बाकी चीजे बाद में भी देखी जा सकती थी ……

“हमे पता नही की हम सही आदमी के पीछे है की नही ,आकाश का बाप यंहा का बहुत बड़ा बिजनेसमैन है अगर हम गलत हुए तो हम जेल के अंदर होंगे ,और इतने छोटे से सबूत के सहारे हम कुछ कर भी नही सकते “अविनाश ने एक स्वाभाविक सी बात कही थी

“हा लेकिन चांस तो लेना होगा,अगर हमने कैमरे की बात को माना है तो उस कमरे की बात पर भी हमे गौर करना चाहिए, गणपत ने कहा था की वो कमरा सीलन भरा होगा और हरियाली के पास होना चाहिए तो ,,इसका ये घर तो नही हो सकता ऐसे भी यंहा वो अपने पूरे परिवार के साथ रहता है तो मुझे नही लगता की उसने काजल को यंहा छिपाया होगा …”

“मतलब की इसका कोई दूसरा घर भी होगा “

“ये अमीर आदमी है शायद कोई फार्महाउस “

अविनाश थोड़ी देर सोच में पड़ गया फिर उसने अपना मोबाइल निकाला ,मैंने उसे तुरंत ही मना किया

“अगर ये शख्स आकाश ही है तो कालेज का कोई भी आदमी उससे मिला हो सकता है वो पैसे के जोर में किसी को भी खरीद सकता है “

अविनाश मेरी बात को समझ चुका था लेकिन उसके चहरे में हल्की सी मुस्कान आई

“फिक्र मत कर मैं उसे फोन लगा रहा हु जिनके लिए दोस्ती पैसों से कही ज्यादा महत्व रखती है “

अविनाश ने जॉनी को भी फोन लगाया और एक ठिकाने में राकेश के साथ आने को कहा …ये दोनों वही थे जो हमारे साथ केशरगढ़ गए थे ...

हम सभी वंहा पहुच चुके थे जंहा अविनाश ने जॉनी को बुलाया था..

“आकाश पर नजर रखना होगा वो कहा जाता है क्या करता है उसका वीडियो रोज ही आता है इसका मतलब है की वो रोज अपने घर से निकल कर उस जगह पर जाता होगा ...

कोई ऐसा आदमी है जो इस काम को अच्छे से कर सके क्योकि आकाश को इसका पता नही लगना चाहिए…”

जॉनी ने सर हिलाया उसके पास ऐसा आदमी था …

वो तुरंत ही काम में लग चुका था ,आज रात ना मुझे नींद आने वाली थी ना ही अविनाश को ना ही तरुणा को ,तरुणा को स्पेशल हिदायत दी गई थी की उस लड़की को जिसने हमे ये बताया की ऐसा कैमरा आकाश के पास है उसे अपने से अलग ना करे ,कही ऐसा ना हो की वो किसी और को बता दे और बात आकाश तक पहुच जाए ,सच कहु तो हम डरे हुए थे,हमे पता था की ये आदमी जो भी हो है बेहद ही चालाक ,और उसे हमारे हर एक मोमेंट की भनक थी ,

जैसे तैसे दिन बिता और सुबह की पहली किरण निकलने से पहले ही हमारे फोन घनघना उठे …

फोन जॉनी का था आकाश शहर से दूर अपने किसी फार्महाउस में गया था ,हम तुरंत ही उस तरफ निकल गए ,हम 4 लोग थे मैं ,अविनाश राकेश और जॉनी…

फॉर्महाउस शहर से कोई 10 किलोमीटर की दूरी पर था ,बाहर एक गार्ड बैठा ऊंघ रहा था,सुबह के 6 बजने को थे और रोज की तरह हमारे फोन की घण्टी बजी एक और वीडियो ….हम अभी थोड़ी दूर छिपकर देख रहे थे ,आकाश बाहर आ चुका था और वंहा से जा चुका था,हम सीधे गार्ड के पास पहुचे एक आदमी ने उसका ध्यान भटकाया और दूसरे ने उसे बेहोशी की दवाई वाला रुमाल सुंघाया ,...वो वही लुढ़क चुका था…

फॉर्महाउस को पूरी तरह छान मारने के बाद हमे एक कमरा दिखाई दिया जो की अंदर एक कोने में बना हुआ था जब हम वंहा गए तो वंहा एक कम्प्यूटर मिला और कुछ चीजे बिखरी हुई थी ,हमारे दिलो की धड़कने तेज हो रही थी,हमने उसी कमरे से लगे एक और कमरे का दरवजा देखा और उसे खोलते ही मानो आंखों का बांध ही टूट पड़ा …

हा वो मेरी काजल थी,वो बेहोश थी ,मैं जाकर उससे लिपट चुका था ,और उसका हाथ मेरे बालो को सहलाने लगा ,मैंने अपना सर उठाया ..वो मुस्कुरा रही थी …

“मुझे पता था तुम आओगे “

उसकी इस बात से ऐसा लगा जैसे कई काटे एक साथ मेरे दिल में चुभ गए हो,वो मेरे कारण ही तो यंहा थी लेकिन फिर भी उसे मुझपर इतना भरोसा था ………..

अध्याय 36

सुनसान कमरे में दो लोगो को बांध कर रखा गया था ,हम सभी ने उन पर अपना पूरा जोर आजमाया था,मानसिक और शाररिक चोट के कारण काजल को हॉस्पिटल में रखा गया था और हम यंहा थे काजल के गुनहगारों के साथ ……

आकाश का बाप बड़ी ही पहुची हुई चीज था,वो कानूनी रूप से उसे बचा सकता था,या हमे कानूनी दांवपेचों में फंसा सकता था, इसलिए हमने उसे किडनैप करने की सोची और किसी ऐसे ठिकाने पर ले आये जो पुलिस और उसके बाप के पहुच के बाहर हो …..

हम दोनों ही लोगो को बुरी तरह मारकर अपनी भड़ास निकाल चुके थे,वो खून से लथपथ कुर्सी में बंधे हुए थे……..

“भाई इनसे कुछ पूछना हो तो पूछ लो फिर इन्हें मारकर इनके लाश ठिकाने लगा देते है “

राकेश ने अपने गुंडों वाले अंदाज में अविनाश से कहा ..

“इन मादरचोदों ने मेरी प्रिया को इतना दर्द दिया है इन्हें तो मैं अभी मार के फेक दूंगा कुछ पूछने की बात ही नही है “

अविनाश मेरी ओर देखने लगा …

“हा भाई मैं भी यही चाहता हु लेकिन मैं इनसे बात करना चाहता हु ,कोई इतना दरिंदा कैसे हो सकता है मैं जानना चाहता हु की आखिर क्या ऐसी वजह थी की इन्होंने ये दरिंदगी दिखाई …”

मेरी बात सुनकर अविनाश ने हा में सर हिलाया और थोड़ा रिलेक्स होकर उन लोगो से थोड़ा दूर हो गया…

“ठीक है दिया तुझे समय ,फिर इनको हमेशा के लिए सुला देंगे “

अविनाश ने खतरनाक तरीके से कहा और कमरे से तुरंत ही बाहर निकल गया …वही राकेश और जॉनी अभी भी वही दीवार से सटे सिगरेट पी रहे थे ...

मैं एक कुर्सी खिंचकर आकाश के सामने बैठ गया था,उसका सर लटका हुआ था मुह से भी खून बन रहा था..मैंने पास रखी पानी की बोतल उसके मुह में घुसेड़ दी ,वो थोड़ा नार्मल हुआ …

“क्यो किया तुमने ऐसा “

वो बड़ी मुश्किल से अपना सर उठाया लेकिन उसके होठो पर मुस्कान थी ..

“ताकि दुनिया को पता चल जाए की काजल एक रंडी है “उसकी हर बात से ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसे अभी मार दु लेकिन फिर भी मैं संयम बरते हुए था...

“इससे तुम्हे क्या हासिल हुआ “

“सुकून ...उस साली ने मुझे मना किया था,बड़ी सती सावित्री बन रही थी ,फिर मुझे पता चला की उसने ऐसा तेरे प्यार के कारण किया है ,रंडियों को प्यार करने का कोई हक नही होता वो साली कैसे किसी से प्यार कर सकती है ,मेरे ईगो को ठेस पहुची थी ,मैं उसे सबक सीखना चाहता था ,मैं शकील के पास गया और उसे और भी ज्यादा पैसे की पेशकश की ,मैंने उससे कहा की वो काजल को मुझे सौप दे और बदले में जितना चाहे उतना पैसा मैं उसे दूंगा,और काजल को अपनी गुलाम बना कर रखूंगा,लेकिन उस अड़ियल आदमी ने भी मुझे धक्के मार कर बाहर कर दिया,वो मुझसे बोला की काजल सिर्फ उसकी गुलाम है और उसके ऊपर हर जुल्म करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ उसे ही है ,मैं उसके घमंड को तोडना चाहता था और कुछ ऐसा करना चाहता था की वो दोनों ही मेरे घुटनो में आ जाए लेकिन इसी बीच काजल रंडीखाने से गायब हो गई ,मुझे इसने(उसने बाजू में बंधे आदमी की ओर इशारा किया ) बताया की तुमने और अविनाश ने मिलकर ये किया है,तब से ही हम ये प्लान करने लगे की आखिर हम एक तीर से दो शिकार कैसे करे,और हमे तेरी बेवकूफी का पता चला,तू डार्क वेब में घुसना चाहता है शकील को बर्बाद करने के लिए,हमने जाल बिछाया और तू उसमें फंस गया ….

और फिर मैंने काजल को अपनी गुलाम बनाकर यंहा रखा ,लेकिन साली फिर भी नही टूटी ,मैं उसे तोडना चाहता था ,मैं दुनिया को और तुम्हे दिखाना चाहता था की वो मेरी कुतिया बन चुकी है मैं उसका जैसे चाहु वैसे इस्तेमाल कर सकता हु,लेकिन वो नही मानी उसे तुम्हारे और अविनाश के ऊपर कुछ ज्यादा ही भरोसा था,मैंने उसे मारा पीट लेकिन वो मेरी गुलाम बनने को तैयार नही थी ,इसलिए उसे मैंने बांध दिया उसके साथ जबरदस्ती की और दुनिया को ये बताया की देखो ये काजल है जो अविनाश की दोस्त और राहुल का प्यार है और मैं इसके साथ क्या क्या कर रहा हु ,क्यो???

क्योकि वो रंडी है और रंडियों के साथ यही होना चाहिए ,..वो इसी के लिए बनी होती है ,अपनी चुद बेचने के लिए,उन्हें प्यार करने का कोई हक नही है ,वो बस चुदवाने के लिए पैदा….”

आकाश की बात अब मेरे सहन के बाहर थी मैंने वही पास रखा एक लकड़ी का टुकड़ा उठाया और उसके गले से भोंग दिया,खून के फुहारे उसके गले से फूटने लगे और उसकी आंखे बाहर लटकने लगी ………

मैं गुस्से में पागल हो चुका था मेरी सांस मेरे ही काबू में नही था,और आखिर मैंने वो किया जो करने को मैं इतने दिनों से बेताब था…….

कमरे में सिर्फ सन्नाटा था ,बस बाजू में बंधे हुए आदमी की सिसकियां ही सुनाई दे रही थी ,अब मैं उसकी ओर मुड़ा……..

वो मुझे खोफ से भरी आंखों से देख रहा था,

“अब तुम्हारा क्या किया जाय”

मैंने बड़े ही ठंडे लहजे में उससे कहा,

“मुझे छोड़ दो राहुल मैंने जो किया वो पैसों की लालच में किया,मुझसे गलती हो गई ,मैं सारे पैसे तुम लोगो को दे दूंगा मुझे जिंदा छोड़ दो “

उसकी बात सुनकर मैंने राकेश और जॉनी की ओर देखा वो उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे…

राकेश पास आया और एक जोरदार थप्पड़ उसके गालों में मार दिया…

“मादरचोद तूने दोस्ती का सौदा किया है ,हमारे बीच रहकर तूने इस आदमी का साथ दिया सिर्फ पैसों के लिए ,अबे पैसे तो तुझे राहुल भी दे देता लेकिन तूने बेचारी काजल की जिंदगी बर्बाद कर दी ,तुझे कैसे छोड़ दे साले तु तो आकाश से भी ज्यादा गुनहगार है “

राकेश की बात सुनकर वो बस रोने लगा और छोड़ने की भीख मांगने लगा था…..

“मुझे बताओ देबू की आखिर तुमने ये सब क्यो और कैसे किया “

देबू मुझे ध्यान से देखने लगा और फिर उसने कहना शुरू किया …

“जब तुम मेरे पास आये थे उससे पहले ही आकाश ने मुझे पैसे का लालच दे दिया था ,मैं उसके ही कहने पर तुम्हे डार्क वेब के बारे में जानकारी दी और उस ग्रुप में ऐड किया ,वही मैंने तुमसे अपने दूसरे अकाउंट के जरिये badebhaiya बनकर संपर्क किया,तुम्हे अपने झांसे में लिया और तुम्हारी मदद की ताकि तुम्हे मुझपर पूरा यकीन हो जाए ,इसकाम को मुझसे आकाश(I_am_a_dog) ने करवाया था,उसके ही कहे अनुसार मैंने शकील के सारे धंधों की जानकारी पुलिस को दी ,उसका पूरा अकाउंट हैक करके उसे कंगाल किया और फिर तुम्हे फंसाया,मैं तो बस इतना ही करना चाहता था लेकिन आकाश की आकांक्षा और भी कही ज्यादा थी वो तो काजल को के साथ ….खैर मैं उसकी बात नही मानना चाहता था लेकिन उसने मुझे मार देने की धमकी दी,शकील का पूरा पैसा अभी भी मेरे अकाउंट में है और उसकी जानकारी अभी तक पुलिस को नही लगी है ,मेरा यकीन करो राहुल की मैं काजल के साथ ऐसा नही करना चाहता था लेकिन मैं फंस चुका था,मैं उस पैसे को नही खोना चाहता था,अगर पुलिस को पता लग जाता की किसी ने शकील के अकाउंट को खाली कर दिया है तो वो पीछा करते हुए कभी ना कभी मेरे अकाउंट तक पहुच ही जाते,ऐसे मैने ऐसा जाल बुना था की पुलिस को मुझतक पहुचने के लिए भी सालों लग जाते लेकिन फिर भी मेरे अंदर पैसों को खोने का और अपनी जान का डर हावी हो गया था,मैंने आकाश की मदद की और उसके एवज में उसने मुझे और पैसे देने का वादा भी किया,और कुछ पैसे दिए भी,मुझे वो रोज ही काजल की एक वीडियो भेजता था जो उसके आवाज में ही होती थी मुझे उस आवाज को शकील की आवाज में चेंज करना होता था और उसके बाद इंटरनेशल नंबर से सभी कालेज वालो के पास भेजना होता था,इसके लिए हमने कालेज का ऑफिशल सर्वर भी हैक किया था,मुझे माफ कर दो मैं मानता हु की मैं गलत था और गलत आदमी के साथ था लेकिन सच में काजल के साथ कुछ बुरा करने का मेरा कोई इरादा नही था…”

देबू ने बोलना बंद किया,मैं उसकी बात बड़े ही ध्यान से सुन रहा था और मेरे हाथो में अब भी वो लकड़ी का टुकड़ा था जिसे मैंने आकाश के गले में घुसाया था,मेरे हाथ जोरो से चले जिनका निशाना देबू का गला था,लेकिन ….

“राहुल इसे अभी छोड़ दो ,ये हमारा पुराना दोस्त है हमे इससे निपटने दो ,तुम हमे थोड़ी देर के लिए अकेला छोड़ सकते हो “

राकेश ने मेरा हाथ पकड़ लिया था मैं उसकी आंखों में देख रहा था ,काजल के मुजरिम पर मुझे कोई भी दया नही आ रही थी लेकिन राकेश अब मेरा दोस्त था जिसने मेरी इतनी मदद की थी मैं उसकी बात को कैसे काट सकता था,मैंने बस हा में अपनी गर्दन हिलाई और वंहा से निकल गया…….

मैं बाहर टहल रहा था तभी वंहा अविनाश भी आ गया था ,उसने एक सिगरेट मेरे आगे किया ,मैं इतने दिनों बाद आज सिगरेट पी रहा था,हम दोनों ही कमरे के बाहर सिगरेट के गहरे कस लगा रहे थे,

“प्रिया अब ठीक है तरुणा में मुझे फोन किया था वो तुम्हे ही याद कर रही है ,अब तुम्हे उसके पास होना चाहिए “

अविनाश की बात पर मैंने बस हा में सर हिलाया

“पुलिस का क्या ,उसे क्या कहेंगे “

“प्रिया ने बयान दिया है की वो उस मुजरिम को नही पहचानती जिसने उसे किडनैप किया था,वो बस बोर होकर उसे जंगल में छोड़ आया फिर वो जैसे तैसे रोड तक आयी ,वंहा उसको एक गाड़ी आती दिखाई दी ,सौभाग्य से उस गाड़ी में आकाश और देबू थे जो दोनों ही उसे पहचानते थे,वो वंहा से जाने ही वाले थे की उस सनकी ने उन्हें देख लिया और फिर से हमला कर दिया इस हमले में आकाश और देबू जख्मी हो गए और वही रह गए जबकि प्रिया जैसे तैसे गाड़ी लेकर वंहा से भागने में कामयाब रही ,अब पुलिस उसकी बताई जगहे देबू और आकाश को ढूंढने निकली है …”

अविनाश की बात सुनकर मुझे जोरो की हंसी आयी,और मैं हँसने भी लगा,साथ ही अविनाश भी हँस रहा था…

“अच्छी कहानी बनाई तुमने ,अब पुलिस बस उस केडनेपर को ढूंढती रह जाएगी ,जो है ही नही और आकाश और देबू की जाली हुई लाश उन्हें मिलेगी ,जिससे मामला ही क्लोज हो जाएगा…”

“हा वो तो है लेकिन पहले हमे अच्छे से फिंगर प्रिंट मिटाने होंगे,मेरे ख्याल से अब तुम्हे यंहा से चले जाना चाहिए इस काम में राकेश और जॉनी पुराने खिलाड़ी है उन्हें ही ये काम करने दो “

“हा वो तो ठीक है लेकिन देबू अभी भी जिंदा है राकेश उससे कुछ बात करना चाहता था “

मेरी बात सुनकर अविनाश मुस्कुराया

“करोड़ो का मामला है राकेश ऐसे कैसे जाने देगा ,पैसे मिल जाए तो देबू खत्म “

“ह्म्म्म “

थोड़ी देर बाद राकेश और जॉनी बाहर आये उनके हाथ में एक डायरी थी ,उन्होंने उसे मुझे पकड़ा दिया ..

“हमने उससे उसके अकाउंट के सारे डिटेल्स निकलवा लिए है ,साले में विदेश में अकाउंट खुलवा के रखा है जिससे पुलिस उस तक ना पहुच पाए लेकिन ये हमारे लिए अच्छी बात है क्योकि अब उसके बाद पुलिस उस अकाउंट तक नही पहुच पाएगी ..देबू का काम तमाम कर दिया है अब लाश को ठिकाने लगते है ,तुम अकाउंट के माल को ठिकाने लगा दो “

राकेश के चहरे में एक मुस्कान थी

“कितना माल होगा “

मैंने थोड़ी उत्सुकता से पूछा

“देबू के अनुसार यही कोई 40 करोड़ “

मेरा और अविनाश का मुह खुला का खुला रह गया था…..

*****************

किसी का हाथ मेरे सर को सहला रहा था,मेरी नींद टूटी सामने काजल मुस्कुरा रही थी,वो अभी हॉस्पिटल के बिस्तर में लेटे हुई थी,और मैं उसके बाजू में बैठा हुआ था,जब मैं हॉस्पिटल पहुचा तो वो सो रही थी मैं उसके बाजू में ही बैठ गया था ना जाने कब मैं नींद के आगोश में समा चुका था…

आखिर उसका हाथ सर में पड़ते ही मैं जाग गया …

“अब कैसी हो “

मैंने उसे प्यार से पूछा

“बस तुम्हे देखकर ठीक हो गई ‘वो हल्के से मुस्कुराने लगी

“पता नही क्यो लेकिन अब भी मुझे डर लग रहा है कही कोई हमे फिर से अलग ना कर दे “

मैंने बेचैनी से कहा, काजल की मुस्कान और भी बढ़ गई थी ,उसने मुझे अपने हाथ उठाये और मैं उसके सीने से सर रखकर सो गया वो मेरे बालो को सहला रही थी ….

“अब किस बात का डर है ,तुमने इतने मुस्किलो के बाद भी मुझे पा ही लिया “

“नही काजल अभी नही ,अभी हम एक नही हुए है ,मैं हमेशा के लिए तुम्हारा होना चाहता हु,मैं तुमसे शादी करना चाहता हु ,करोगी मुझसे शादी “

अब मैं उसके आंखों में देख रहा था उन आंखों में जिन आंखों में मेरे लिए अपार प्रेम था और शायद वो प्रेम आंसुओ की शक्ल में बाहर झरने लगा था,वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन उसका गला भर्राया हुआ था,उसने बस सहमति में अपना सर हिला दिया और मुझे अपने पास खिंच लिया,उसके होठ मेरे होठो से मिल गए थे,उसने मुझे अपने बांहों के घेरे में जोरो से जकड़ रखा था जैसे वो कभी मुझसे अलग नही होना चाहती थी ,ये अहसास बड़ा ही अनोखा था एक होने का अहसास ,किसी का हो जाने का अहसास और हम बस इस अहसास में ही डूबते जा रहे थे जैसे कहते है ना

‘मेरा मुझमें कुछ नही जो कुछ है वो तोर,तेरा तुझको सौपते क्या लागत है मोर…….”

अध्याय 37

वो हॉस्पिटल का लक्जरी कमरा था ,किसे यकीन होगा की कुछ दिनों पहले ही कौड़ी कौड़ी को तराशते हुए लड़के के अकाउंट में आज 10 करोड़ रुपये थे,शकील से मिले 40 करोड़ को हमने 4 हिस्से में बाटा था,जिसमे राकेश,जॉनी और अविनाश के हिस्से में 10-10 करोड़ आये थे वही मैंने अपने और काजल के लिए 10 करोड़ रखे थे,ऐसे इस बात को लेकर अविनाश और उसके दोस्त नाराज हो गए थे,उसका कहना था की 4 नही 5 हिस्से होने चाहिए काजल को भी एक हिस्सा मिलना चाहिए लेकिन मैंने और काजल ने दोनों ही मना कर दिया ,हम इतने में ही खुश थे ,लेकिन वो नही माने उनका कहना था की मुझे और काजल को ज्यादा मिलना चाहिए ,लेकिन हम और पैसे नही लेना चाहते थे,जब वो अड़ ही गए तो काजल ने एक सुझाव दिया की क्यो ना वो कुछ पैसे हमारी प्रोडक्शन कंपनी में लगाए जिसे मैंने प्यारे की मदद से रंडीखाने की औरतो के मदद करने के लिए खोला था,इस बात पर सभी मान गए थे और कंपनी के अकाउंट में अब 6 करोड़ थे तीनो में 2-2 करोड़ दान किया था ,प्यारे की भी बल्ले बल्ले हो गई थी वो अब और भी अच्छी मूवी बना सकता था…..

उस कमरे में आज बहुत ही खुसी का माहौल था,साथ ही आज काजल से मिलने शबनम और चंपा मौसी भी आये हुए थे,आते ही उन्होंने काजल को गले से लगा लिया ….

“तुम्हारे कारण आज हम सबकी जिंदगी आबाद हो गई काजल ,ये शबनम तो कोई बड़ी हीरोइन जैसे फेमस हो गई है ,कई लोग तो इसका ऑटोग्राफ भी लेते है और वो क्या कहते है सेल्फी लेते है “

चंपा की बात से काजल बहुत ही खुश थी ,

“ऐसे काजल ये तेरा चूतिया इतना भी चूतिया नही है क्या दिमाग लगाया इसने,इसके कारण हम शकिल के चुंगल से भी निकल गए और देख साले ने हम रंडियों को हीरोइन बना दिया ...तेरे इस चिकने पर तो सब कुछ लुटाने का दिल करता यही एक रात के लिए ले जाऊ क्या इसे “

शबनम की बात सुनकर काजल जोरो से हँस पड़ी ,बड़े दिनों बाद मैं भी इस तरह की बाते सुन रहा था,और काजल को ऐसे खिलखिलाता हुआ देखकर मेरा तो दिल ही गार्डन गार्डन हो गया था……

“ले जा ले जा लेकिन तू तो अब बहुत महंगी हो गई होगी हीरोइन जो बन गई है “

“हा पहले तो कोई साला 100 रुपये नही देता था अब तो 50 हजार लेती हु एक रात का और तुझे यकीन नही होगा फिर भी लोग मरे जाते है लेने के लिए,बाकायदा अपॉइमेन्ट लेते है “

शबनम जोरो से हंसी और साथ ही काजल भी ,वो लोग बहुत देर तक बात करते रहे ,वो उसे बताते रहे की प्यारे कैसे मूवी बनाता है और उसकी पुरानी सहेलियां कैसे उसकी मूवी में काम करती है,उनके पास कहने को बहुत कुछ था और उनकी बातों पर काजल जोरो से हँस रही थी ,उसका चहरा खिला हुआ था वो कभी कभी मेरी ओर देखती उसकी आंखे मुझसे कुछ बात कर रही थी जैसे कह रही हो की ये सब तुम्हारे ही कारण हुआ है …

हंसते हंसते उसकी आंखों में पानी आ जाता था वो उसे पोछती और फिर से बात करने लग जाती ….

,मैं बहुत खुश था काजल भी खुश थी और मुझे क्या चाहिए था..

*************

पढ़ाई चल रही थी साथ ही शेयर मार्किट और प्रोडक्शन का काम भी ,मैं अब मा पिता जी को भी शहर लाना चाहता था ,मैं काजल,अविनाश और तरुणा के साथ गांव के लिए निकल गया ,मैंने एक कार ली थी हम उसी में वंहा गए थे,जैसे जैसे गांव पास आ रहा था मेरे आंखों में पानी आते जा रहा था,मैं इसी गांव में बड़ा हुआ था,यही मैंने लोगो के मुह से सुना था जब वो पिता जी को कहते थे की इसे पढ़ाकर क्या करेगा उससे अच्छा इसे भी मजदूरी ही करवा कम से कम घर में पैसे तो आएंगे,लेकिन मेरे मा बाप ने अपने पेट की चिंता किये बिना मुझे खिलाया और हमेशा मेरे पढ़ने पर जोर दिया,आज मेरे पास इतना पैसा था की मैं पूरे गांव को ही खरीद दु,मैं अपने मा बाप को खुश देखना चाहता था,मैं उस झोपड़ी के सामने पहुचा जिसे हम घर कहते थे…….

हम गाड़ी से उतरे पूरा गांव गाड़ी देखकर वंहा इकठ्ठा हो गया था,बच्चों के लिए ये कर किसी अजूबे से कम नही थी ,और बच्चे क्या बड़ो ने भी ऐसी कार शायद अपने जीवन में कभी ना देखी हो

दो हॉर्न के बाद मेरी माँ बाहर आयी मैं सामने ही खड़ा मुस्कुरा रहा था…

वो आंखे फाडे कभी मुझे देखती तो कभी मेरी गाड़ी को को तो मेरे दोस्तो को ,वो बहुत देर तक ऐसे ही खड़ी रही जैसे मुझे पहचानने की कोशिस कर रही हो ,वही मेरे पिता भी बाहर आ चुके थे,शायद अभी काम से आये थे और थककर लेटे होंगे …

“मुन्ना ये तू है क्या “

आखिर माँ ने बड़े ही संकोच से कहा और मैं दौड़ाता हुआ उनसे जा लिपटा

“हा माँ ये मैं ही हु,क्या तू भी मुझे पहचान नही पा रही है “

मेरे आंखों से आंसू बहने लगे थे

वो भी कुछ ना कह सकी थी बस मेरे कंधों में कुछ गीलेपन का अहसास हो रहा था...थोड़ी देर बाद वो मुझसे अलग हुई ,और फिर मैंने पिता जी के पैर पड़े

“आप भी नही पहचान रहे थे क्या “

मैंने माजक में कहा

“अरे कैसे पहचानते तू तो शहर से पूरा साहब बन कर आया है “

पास खड़े गांव के मुखिया ने कहा ,वही पिता जी के आंखों में बस गर्व के आंसू थे,उन्होंने बस आशीर्वाद के रूप में मेरे गालों पर हाथ फेरा ,मैने जाकर मुखिया के पैर पड़े ..

“खुश रहो बबुआ,हम जानते थे की तुम पढ़ लिखकर एक दिन बड़े आदमी बनोगे,हम कहते थे ना हरिया तुमसे की ये लड़का कुछ करेगा “

मुखिया के मुह से ये बात सुनकर मुझे हंसी आयी क्योकि ये ही वो आदमी था जिसने मेरे पिता को मेरे कालेज जाने के लिए पैसे देने से मना किया था,मेरे पिता जी इसी के खेतो में काम करते थे,और मुखिया नही चाहता था की उसके मजदूर का बेटा शहर में जाकर पढ़ाई करे …

“जी मालिक “

मुखिया की बात सुनकर मेरे पिता जी ने कहा

“अरे अब कहे का मालिक रे हरिया अब तो तेरा बेटा साहब बन गया है ,देख कितनी बड़ी गाड़ी में आया है,ऐसे कौन सी गाड़ी है हम भी लेने की सोच रहे थे,कितने की है “

मुखिया ने बड़े ही अजीब नजरो से उस कार को देखा और मेरे बोलने से पहले ही अविनाश बोल उठा

“ये ऑडी है मुखिया जी ,ज्यादा नही सिर्फ 70 लाख की है “

“70 लाख???? “

मुखिया का मुह खुला का खुला ही रह गया ,मुखिया हमारे गांव का सबसे अमीर आदमी था लेकिन ये एक कार उसकी पूरी जायजाद के आधे के बराबर थी ,वही 70 लाख सुनकर मेरे माता पिता का चहरा ही पिला पड़ गया था….

उस घर में सिर्फ एक ही कमरा था इसलिए हम सभी बाहर ही खाट पर बैठे थे,लोग अभी भी वंहा जमा था इएलिये माँ ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर आने को कहा ,वो घबराई हुई लग रही थी,साथ ही मेरे पिता जी भी अंदर आ गए थे……

“क्या हुआ माँ “

“बेटा तू सच सच बता इतने कम दिनों में तूने इतने पैसे कैसे कमा लिए,तू कोई गलत काम तो नही करता ना और ये लोग कौन है बेटा जो तेरे साथ आये है सभी बड़े घर के लोग लगते है,इतने बड़े लोगो से दोस्ती करना हम जैसे गरीब लोगो के लिए ठीक नही है बेटा”

माँ सच में बहुत घबराई थी ,लेकिन उनके इस भोलेपन के कारण मुझे उनके लिए बहुत प्यार आया ..

“बेटा हम भूखे मर जाएंगे लेकिन कभी हमने हराम का नही खाया है,अगर तुमने गलत तरीके से पैसे कमाए यही तो थू है ऐसे पैसे पर,भूखे रह जाएंगे लेकिन गलत काम नही करेंगे,तू अपनी माँ की कसम खा की ये पैसे तूने किसी गलत काम से नही कमाए है बल्कि ये तेरे मेहनत के पैसे है …”

मेरे पिता ने मेरा हाथ पकड़ कर माँ के सर में रख दिया,मैं उन्हें भी प्यार भरी नजरो से देखने लगा,इन लोगो को 70 लाख सुनकर चक्कर आ गया था,अगर मैं इन्हें सच में बता देता की मेरे पास कितने पैसे है तो ये तो बेहोश ही हो जाते ,जीवन भर इन्होंने दो रोटी के लिए संघर्ष किया था ,सुख में रहने की भी इनकी आदत नही थी ,सभी बातों को सोचकर मेरे होठो में मुस्कान आ गई

“ये मेरी मेहनत के पैसे है मा,मैंने कोई गलत काम नही किया है और हा ये जो मेरे साथ आये है वो सभी मेरे दोस्त है बल्कि मेरे भाई बहन जैसे है और इनमें से एक तेरी बहु है “

माँ की आंखे फैल गई थी ,

“कौन ??”

“वो “मैंने झोपड़ी की खिड़की से काजल की ओर इशारा किया ,जबकि माँ बड़े ही हैरत से मेरी ओर देखने लगी

“इतनी सुंदर लड़की तेरे से शादी करेगी ??”

माँ की बात सुनकर मैं जोरो से हँस पड़ा था ,मैं इतना जोरो से हंसा था की बाहर बैठे लोग भी खिड़की की ओर देखने लगे थे,

मैंने इशारे से काजल को अंदर बुलाया काजल के साथ तरुणा भी आई थी ,मैंने काजल को दिखाते हुए फिर से कहा ..

“माँ ये है काजल तुम्हारी बहु “

मेरी बात सुनकर काजल थोड़ा चौकी फिर तुरंत ही माँ और पिता जी के चरण स्पर्श किये ऐसे जब काजल को पता चला की वो मेरे गांव जा रही है उसने जीन्स की जगह सलवार पहनने का फैसला किया था,और अब पैर पड़ते वक्त उसने अपनी चुन्नी ओढ़ ली थी …

मेरे माता पिता तो जैसे अभी इस दुनिया में ही नही थे वो किसी और ही दुनिया में खो गए थे,लेकिन जब काजल ने उनके पैर पड़े तो उनके मुह से अनायास ही निकल गया

“खुश रहो बेटा …”

काजल थोड़ी शर्माते हुए खड़ी थी तभी मेरी माँ ने उसे पूछ ही लिया

“बेटा क्या तुम सच में मेरे बेटे से शादी कर रही हो “

मैं और तरुणा जोरो से हँस पड़े वही काजल शर्मा गई थी ,माँ ने मुझे हंसता हुए देखकर मेरे बाजू में एक मुक्का मारा,अब मेरी मा की हालत सही हुई थी लेकिन अगले ही पल उसके आंखों में आंसू आ गए …

उसने बड़े ही प्यार से अपना हाथ से काजल के सर को सहलाया

“बहुत बहुत खुश रहो मेरी बेटी ,हम तो कभी तुझ जैसी सुंदर बहु नही ढूंढ पाते जैसा हमारे बेटे ने ढूंढ लिया है ...लेकिन बेटा मुझे माफ करो की तुम्हे देने के लिए मेरे पास कुछ भी नही है ,मैं भी कैसी अभागी हूं जो मेरी बहु मुझसे पहली बार मिल रही थी लेकिन मैं उसे कुछ भी नही दे पा रही …”

मैं माँ के दर्द को समझ सकता था असल में ये मेरी ही गलती थी मुझे माँ और पिता जी को कुछ पैसे पकड़ा देने थे ताकि वो काजल को वो दे सके ,लेकिन माँ की बात सुनकर काजल मुस्कुरा उठी

“मुझे कुछ भी नही चाहिए माँ जी अपने मुझे अपना लिया यही मेरे लिए बहुत है “

माँ ने अपने आंसुओ से भरे आंखों पर अपनी उंगली फेरी और थोड़ा काजल निकाल कर काजल के सर पर लगा दिया “

“नजर ना लगे मेरी बच्ची को “

बहुत ही एमोशनल सीन चल रहा था

“ऐसे मा जी मैं भी आपकी बेटी ही हु मुझे भी कुछ आशीर्वाद दे दो “

इस बार तरुणा थी ..

“क्यो नही क्यो नही “माँ ने फिर से अपने आंखों से काजल निकाल उसके सर पर लगाया और सभी को चौकाते हुए तरुणा माँ से लिपट गई ..कुछ ही देर में सभी घुल मिल गए थे,मैं अविनाश और पिता जी बाहर खाट में बैठे थे शाम हो चुकी थी लेकिन भीड़ जाने का नाम ही नही ले रही थी सभी शहर के किस्से कहानियां सुनना चाह रहे थे लेकिन आखिर मैं बताता भी क्या लेकिन इसका जिम्मा अविनाश ने उठा लिया था,वो सभी के सवालों के जवाब दे रहा था ,और वो भी बड़े ही मजेदार ढंग से जिससे लोगो का इंटरेस्ट और भी बढ़ रहा था ….

वही काजल और तरुणा माँ के साथ अंदर खाना बनने में लगी हुई थी …

रात होते होते लोग जाने लगे लेकिन खाना खाकर फिर से आने को कहकर …

ये तो सच है की माँ के हाथो की सामान्य सी रोटी किसी भी महंगे खाने से लाख गुना स्वादिष्ट होता है,क्योकि उसमें ममता और प्यार कूट कूट कर भरी होती है,जिन लोगो के नसीब में ये रोज ही लिखी हो उन्हें शायद इसका आभास कभी नही होता लेकिन जिनके पास ये नही होता वो ही इसकी कद्र जानते है ,उसी तरह मैं भी था,यंहा रहते हुए मुझे कभी इसकी कद्र नही हुई लेकिन आज इतने दिनों बाद जब रोटी का पहला निवाला मेरे मुह में गया तो मेरी आंखे अपने ही आप बंद हो गई थी ,मैं उस सुख में डूब ही गया था,इतना स्वादिष्ट खाना जैसे मैंने सालों से नही खाया था…

“तेरे हाथो में तो जादू है माँ”

“माँ के हाथो में तो जादू तो होता ही है लेकिन सिर्फ आज ही क्यो मैं तो रोज ही ऐसा खाना खाना चाहता हु “

अविनाश बोल उठा

“हा माँ आप दोनों कल ही मेरे साथ शहर जा रहे हो “

मेरी बात से जैसे पिता जी और माँ हड़बड़ा से गए थे..

“ये क्या बोल रहे हो बेटा हम वंहा जा कर क्या करेगें”

“अरे क्या करोगे हमारे साथ रहोगे ,मैं वंहा एक घर ले रहा हु ताकि हम सब एक साथ ही रहे “

पिता जी और माँ एक दूसरे का मुह ताकने लगे थे

“अरे इसमें सोचने वाली क्या बात है “

“बेटा हमारा जन्म इसी मिट्टी में हुआ है और हम यही रहकर मरना चाहते है ,शहर में हमे जानता ही कौन है यंहा हमारा पूरा परिवार है ,घर है “

पिता जी बोल उठे

“किस परिवार की बात कर रहे हो आप जब दुख था तब तो कोई सामने नही आता था मुझे तो पता भी नही की आप किस परिवार की बात कर रहे हो,बापू परिवार ये है आपके सामने आपका बेटा और बहु ,आप लोग साथ चल रहे हो बस “

“बेटा समझने की कोशिस करो हमने सारी जिंदगी यदि बिताई है ,हमे इस जगह की आदत सी हो गई है ,हम वंहा कैसे रह पाएंगे, तुम लोगो से मिलने आया करेंगे ना हम लोग लेकिन ...यहां सब छोड़कर वंहा रहना ...

बेटा ये हमसे नही हो पायेगा “

इस बार माँ ने कहा था

“लेकिन माँ जब वंहा मेरे पास सब कुछ है तो फिर आप लोगो को यंहा दुख में रहने की क्या जरूरत है “

मैं थोड़ा चिढ़ सा गया था

“बेटा काहे का दुख ,तूने पैसा कमा लिया सुख देख लिए तो तुझे ये दुख लग रहा है वरना तू भी तो अपना बचपन यही बिताया था,इसी झोपड़े में रहकर ,तूने कभी हमे दूखी देखा था क्या,हा कभी कभी पैसों की थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन इसे दुख तो नही कहते ना,तूने कभी मुझे और तेरी माँ को लड़ते हुए देखा ,या कभी तुझे लगा की हम तुझे प्यार नही करते नही ना…और पैसे वाले सुखी ही रहते है ये तू कैसे कह सकता है उन्हें भी तो दुख होता होगा ना “

पिता जी की बात सुनकर मैं पूरी तरह से अवाक रह गया था,पैसों से सुख नही खरीदा जा सकता ये मैंने सिर्फ सुना था लेकिन आज देख भी रहा था…

अविनाश ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और वो बोलने लगा

“ठीक है ठीक है अगर आप लोगो को यही रहना है तो एक काम क्यो नही करते ,राहुल यंहा आपलोगो के लिए एक घर बनाएगा और कुछ जमीन खरीदेगा ,आप लोग किसी और के घर काम करे ये राहुल कैसे सह पायेगा जबकि उसके पास आज सब कुछ है ,यंहा मजदूरो के जरिये आप लोग खेती कीजिए और यही रहिए लेकिन अभी तो साथ चलिए आखिर राहुल की शादी भी तो करनी है आपलोगो को “

अविनाश की बात का मैंने भी समर्थन किया पिता जी ने भी सर हा में हिला दिया लेकिन फिर बोल उठे

“बेटा क्या शादी यही नही हो सकती “

इस बार मैंने सर पकड़ लिया था

लेकिन अविनाश हँसते हुए बोलने लगा

“अरे चाचा जी यंहा भी कर देंगे शादी लेकिन अभी कोर्ट में करना है फिर जब यंहा घर बन जाए तो यंहा फिर से कर देंगे “

अविनाश की बात सुनकर माँ पिता जी दोनों ही अजीब निगाहों से हमे देखने लगे

“बेटा दो दो बार शादी “

उन्होंने अचंभे से कहा

और मेरे साथ अविनाश भी हँस पड़ा

“हा बापू फिक्र मत करो शहर में ये सब होता है और 2 नही 3 बार शादी करेंगे आखिर वंहा भी तो पार्टी देनी पड़ेगी ना “

अब वो क्या कहते बेचारे बस हमारे चहरे को अजीब भाव से देख रहे थे …….

******************

रात हो चुकी थी गपसप चल रहा था,गांव के कई लोग हमे घेरे हुए बैठे थे वही महिलाएं घर के अंदर थी आसपास की महिलाएं भी काजल को देखने पहुच गई थी ,तभी एक पुलिस की गाड़ी आकर हमारे घर के सामने रुकी सभी चौक गए थे,एक पुलिस इंस्पेक्टर कुछ सिपाही और गांव का मुखिया भी साथ था…

पुलिस वाले हमारी ही ओर बढ़ रहे थे वही मुखिया के चहरे में एक अजीब सी मुस्कान खिल रही थी……….

अध्याय 38

इंस्पेक्टर बड़े ही रौब के साथ हमारे पास आ रहा था वही मुखिया ने मुस्कुराते हुए कहा,

“अरे हरिया ,साले भीखमंगे की औलाद के पास इतना पैसा कहा से आया रे,तेरा बेटा चोर है पता नही साले ने इतना पैसा कहा से कमाया है अभी जब स्टेशन में ले जाकर डंडे पड़ेंगे तो सब उगलेगा”

मुखिया की बात से मेरे पिता बुरी तरह से डर गए थे,वही इंस्पेक्टर आकर मेरे कॉलर को पकड़ चुका था ..

मेरे पिता के मुह से निकल गया

“मालिक…”

लेकिन वो कुछ और बोल पाते उससे पहले ही अविनाश ने उन्हें चुप करवा दिया और खुद बोलने लगा

“ये इंस्पेक्टर तू सरकार की खाता है या इस मुखिया का कुत्ता है ,जो इसकी एक बात पर यंहा दुम हिलाता हुआ चला आया..”

इंस्पेक्टर मेरा कॉलर छोड़ अविनाश की ओर मुड़ा वो अविनाश की बात से भन्ना गया था ….

“ये शहरी लड़के साले ज्यादा जुबान चल रही है तेरी... “

इंस्पेक्टर कुछ और बोलता उससे पहले ही अविनाश गरजा

“चुप कर भोसडीवाले तेरे जैसे दो कौड़ी के इंस्पेक्टर से डरेंगे हम लोग ,साले अपनी औकात में रह कर बात कर तू जानता नही तूने किसपर हाथ लगाया है ,जिसका तूने कॉलर पकड़ा है ना वो मेरा भाई है ,और मैं तेरा बाप हु ,रुक साले …”

अविनाश ने तुरंत ही अपना मोबाइल निकाला और किसी को फोन लगाने लगा,इंस्पेक्टर को जैसे सांप ही सूंघ लिया था,अविनाश ने चीजे इतने कांफिडेंस के साथ बोली थी की उसकी भी फटने लगी थी ,वही मुखिया भी मुह खोले सब देख रहा था,मुखिया ही क्यो सारे गांववाले भी अपना मुह फाड़े हुए थे…

“हैल्लो हा मंत्री जी ,हा मैं ठीक हु दोस्त के साथ गांव आया था,जी ,असल में एक इंपेक्टर मेरे दोस्त के साथ बत्तमीजी कर रहा है ,...जी ..ठीक है लीजिए बात कीजिये “

अविनाश ने फोन इंस्पेक्टर के सामने कर दिया ..

“ले गृहमंत्री है बात कर “

गृहमंत्री का नाम सुनकर वो कांपने लग गया था ..

“मुझे माफ कर दो सर “

वो गिड़गिड़ाया

“अरे बात कर साले “

अविनाश फिर से उसके ऊपर भड़का और उसने कांपते हुए हाथो से फोन पकड़ा

“जी ..जी सर ..समझ गया सर...सॉरी सर ...ओके सर ..ओके सर ..”

बात करके उसने फोन अविनाश को पकड़ा दिया और अपने माथे में आया हुआ पसीना पोंछा ..

और सीधे अविनाश एक पैरों में गिर गया

“सर गलती हो गई माफ कर दीजिए मैं इस मुखिया की बातों में आ गया था,इसने ही कहा था की बहुत गरीब घर का लड़का है और इतने पैसे इतने कम समय में कमाया है तो जरूर कोई गलत काम किया हुआ इसने शायद कोई कोई बैक वगेरह लुटा हो या कोई बड़ा घोटाला ,नही पता था सर की आप लोग तो इतने पहुचे हुए लोग हो “

अविनाश ने उसे उसकी बांहे पकड़कर उठाया …

“कोई बात नही लेकिन गरीबो का माजक बनाना बंद कर दो तुमलोग ,और ये मुखिया तुझे लगता है इसने जो पैसे कमाए है वो सब इसकी मेहनत के है ,जांच करवाऊं क्या ,पता चल जाएगा की इसने कितने काले कारनामे किये है “

मुखिया के चहरे का रंग ही उड़ गया वो सीधा मेरे पिता के पैरों में गिर गया

“मुझे माफ कर दो हरिया,गलती हो गई ..”

उसकी इस दशा को देखकर मेरे होठो में मुस्कान आ गई लेकिन मेरे पिता तो ठहरे गांव के भोले आदमी

“नही मालिक ये आप क्या कर रहे हो ,आप तो मालिक हो आप तो हमारे अन्नदाता हो ‘

उनकी बात सुनकर मेरी नजर अविनाश पर पड़ी वो आंखों ही आंखों में मुझे इशारा किया जैसे कह रहा हो ‘ये नही सुधरेंगे ‘

***************

रात गई बात गई और हम शहर के लिए निकल पड़े ,मा पिता जी के आने के बाद मैंने अपने दो मंजिला घर का उद्घाटन किया और फिर शुरू हो गई मेरी शादी के तैयारियां,हमने प्लान किया था की पहले शादी कोर्ट में करेंगे फिर एक रिसेप्शन शहर में फिर जब गांव का घर बन जाए तो फिर वंहा रीति रिवाज से फिर से शादी करेंगे ..

काजल खुश थी बहुत ही खुश थी ,मैं भी खुश था,काम भी अच्छे से चल रहा था ,शादी की तारीख भी पास आ रही थी ..काजल अभी तरुणा के साथ ही रहती थी लेकिन अधिकतर समय हमारे घर में ही बिताती थी,वही अविनाश भी होस्टल नही छोड़ना चाहता था उसी की वजह से तो वो नेता बना था,मेरे दोस्त भी हमारे घर आते जाते रहते थे,

मेरे माता पिता भी शहर के वातावरण के साथ होतदे कंफरटेबल हो रहे थे,वो आसपास घूमने जाते ,बाजार जाय करते और पास के ही पार्क में बैठा करते सब कुछ ठीक चल रहा था,वो मेरे साथ यंहा रहने को भी राजी हो गए थे लेकिन कहते है ना की जब किस्मत में लगे हो लौड़े तो कहा से मिलेंगे पकोड़े ……….

माँ पिता जी एक दिन शाम गार्डन से घूम कर आये लेकिन इस बार उनका चहरा उतरा हुआ था वो बेहद ही दुखी लग रहे थे…

“क्या हुआ माँ ऐसे क्यो मुह उतार कर रखे हो “

मैं माजक में उनसे बोला

“बेटा ..”

माँ की आवाज कांप रही थी जैसे वो कुछ कहना तो चाहती थी लेकिन कह नही पा रही थी …

क्या हुआ मा..मुझे भी उनकी आवाज से बात की गहरी का आभास हुआ ,मैं उनके साथ सोफे में बैठ गया ..

“वो बेटा …”

वो फिर से बोलने को हुई लेकिन कुछ नही बोल पाई

“हा बोलो ना “

उन्होंने पिता जी की ओर देखा ,मैंने भी उनकी ओर देखा ,उनका चहरा मानो गुस्से से धधक रहा था ..

“क्या हुआ पिता जी “

अब मुझे भी डर लगने लगा था ,उन्होंने एक बार मुझे देखा जैसे आंखों में आग लिए हो ,मैं बुरी तरह से डर गया था

“क्या सर रही हो इससे बोल दो ना “

उन्होंने मा को देखा लेकिन वो कुछ नही बोल पाई बल्कि उनके आंखों में आंसू जरूर आ गए मैं बेहद ही असमंजस के भाव से दोनों को देख रहा था ..

“तेरी माँ और मैंने ये फैसला किया है की काजल से तेरी शादी नही हो सकती “

“क्या ???”

ऐसा लगा जैसे कोई आसमान ही मेरे ऊपर टूट पड़ा हो .

‘ये...ये आप लोग क्या कह रहे हो ..”मेरी आवाज लड़खड़ा रही थी

“हम सही कह रहे है ,हम इतने भी बेगैरत नही है की एक जिस्म बेचने वाली से अपने बेटे की शादी करवा दे “

पिता जी की बात से मैं बुरी तरह से चौका था की एक आहट ने मुझे और भी जोरो से चौका दिया था ,दरवाजे पर काजल खड़ी थी ,उसकी आंखों में आंसू था और चहरे में बेहद ही गहरे दर्द का भाव ..

“काजल ‘

मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही वो मुड़ी और भागी,मैं उसकी ओर भागने ही वाला था की किसी के हाथ ने मेरे हाथो को थाम लिया ,वो मेरे पिता जी थे…..उनकी आंखे अब भी जल रही थी और साफ साफ बता रही थी की वो क्या चाहते है ,वो नही चाहते थे की मैं काजल के पीछे जाऊ,

एक ओर वो लोग थे जिन्होंने मुझे अपना पेट काटकर पढ़ाया लिखाया था जो मेरे लिए देवता के समान थे तो दूसरी ओर मेरी काजल थी जिसके कारण ही तो इस मुकाम में पहुच पाया था,जो मेरा प्यार थी मेरा सहारा थी मैं बस इसी असमंजस में फंसा हुआ बस कभी दरवाजे को देख रहा था तो कभी अपने मा बाप को …………….

अध्याय 39

काजल जा चुकी थी और मैं बस देखता ही रह गया ….

मेरे मा और पिता जी गांव जाने की जिद कर रहे थे,वो मुझसे काजल के विषय में कोई भी बात नही करना चाहते थे,कुछ आधे घण्टे ही हुए थे की मेरे घर के सामने एक गाड़ी आकर रुकी ,

और अविनाश के साथ तरुणा अंदर आयी ..

अविनाश सीधे मेरे पिता जी के पैरों में जा बैठा था …

“बापू पता नही की आपको क्या पता चला है ,लेकिन यकीन करे ये उसकी बीती जिंदगी थी,और वो राहुल से बेहद ही प्यार करती है “

मेरे पिता जी उसका चहरा भी नही देख रहे थे.

“ये हमारे घर का मामला है ,अच्छा होगा की हमे अकेले छोड़ दो “

मेरे पिता ने बस इतना ही कहा

“वो बहुत अच्छी लड़की है ,इनकी शादी मत तोड़ो ये दोनों एक दूसरे के बिना जिंदा नही रह पाएंगे “

अविनाश के आंखों में आंसू थे,लेकिन मेरा बाप हंसा

“वाह बेटा तुम तो अपने को राहुल का दोस्त बोलते हो ,और ऐसी लड़की के साथ उसकी शादी करवाने को राजी हो गए,अगर तुम्हारा कोई अपना होता ना तो तुम्हे पता चलता की इज्जत क्या चीज होती है ,वो लड़की जिसे दुनिया रंडी कहती है ,जिसका नंगा जिस्म सारे दुनिया के सामने नुमाया हो रहा है,लोग मोबाइल में जिसे देख रहे है,उसे तू हमारे घर की इज्जत बनाना चाहता है ,ये हरगिज नही होगा,और अगर इसे उस लड़की से शादी करनी है तो …...

तो इसे हमसे हमेशा के लिए रिश्ता तोडना होगा “

मेरे पिता जी के चहरे से मानो आग उगल रहा था,मैं जानता था की वो एक गरीब मजदूर जरूर है लेकिन अपने उसूलों के पक्के भी है,उन्होंने जो ठान लिया वो ठान लिया,एक सच्चे और सीधे आदमी के साथ यही सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी दोनों ही होती है की वो अपने उसूल के सामने दुनिया की कुछ भी नही सुनते..

अविनाश मानो उनके पैरों में गिर ही गया था,उसने अपना सर पिता जी के पैरों में गिरा दिया …

“अपने कहा की मेरा क्या रिश्ता है तो सुनिए वो मेरी बहन है ,और उसके इस हालत का मैं ही जिम्मेदार हु मेरे ही कारण उसकी ये हालत हुई है ,वरना ……”

अविनाश फुट फुट कर रोने लगा था ,मैं और तरुणा तुरंत ही उसके पास आकर उसे दिलासा दिलाने लगे लेकिन अविनाश के दिल से मानो कोई ज्वालामुखी सा फुट गया था ,उसके रोने में वो करुण भाव था की एक बार को मेरे पिता भी गल से गए थे वही मेरी माँ तो अभी भी अपने ही आंसुओ को सम्हाल रही थी और अवाक सी बस अविनाश की ओर देख रही थी ….

“मेरी प्रिया कितनी प्यारी लड़की थी ,पूरे घर की दुलारी थी ,लेकिन मेरे ही कारण वो काजल बनी ,मेरी ही गलती थी की उसे ऐसा काम करना पड़ा ,मेरी गलती की सजा मेरी बहन को मत दो ,वो राहुल से प्यार करती है …”

अविनाश रोये जा रहा था,उसने कभी काजल को अपनी बहन नही कहा था लेकिन आज कह रहा था,आखिर मामला क्या था लेकिन जो भी था उसके बातों की सच्चाई उसके आंखों से आता हुआ पानी बयान कर रहा था वही उसके चहरे के भाव चीख चीख कर सच्चाई कह रहे थे….

अविनाश थोड़ा सामान्य हुआ और फिर उसने कहना शुरू किया ..

“प्रिया और मेरे पिता बहुत ही अच्छे दोस्त थे,उनकी अकस्मात मौत के बाद प्रिय हमारे ही साथ रहने लगी ,हम एक ही उम्र के थे ,मैंने कभी उसे बहन नही कहा ,असल में मेरे घर वाले चाहते थे की वो उनके घर की बहु बने,हमे ऐसे ही पाला गया था ,हमारे बीच प्रेम का रिश्ता तो था लेकिन उसे कोई नाम नही दिया गया था ,मेरे घर वाले नही चाहते थे की मैं उसे बहन कहु ,इस रिश्ते को हमने दोस्ती का नाम दे रखा था,मै उसे अपने जान से ज्यादा चाहता था वही वो अपनी जान मुझपर लुटाती थी,हमे एक दूसरे के आंसू और तकलीफें बर्दास्त नही थे ,हम जवान हुए और स्कूल के दिनों में मेरे जीवन में एक लड़की आयी ,नाम था काजल …..

मुझे नही पता था की ये बस एक छलावा थी ,मैं एक बड़े बाप का लड़का था और उसे मुझसे नही मेरे पैसों से प्यार था लेकिन उस लड़की ने मेरे अंदर अपने लिए प्यार जगाया और मैं पीछे पागलों की तरह भागने लगा,प्रिया को जब इस बात का पता चला तो उसने मेरे कारण काजल से दोस्ती कर ली ,हम खुश थे लेकिन हमे क्या पता था की उस दोस्ती का ये सिला हमे मिलेगा,असल में काजल एक बहुत ही कमीने इंसान शकील की रखैल जैसी थी ,उसने पैसे के कारण मुझे प्यार के जाल में फसाया था लेकिन जब शकील की नजर प्रिया पर पड़ी तो वो उसे पाने को बेताब हो गया ,बेचारी मेरी प्रिय काजल के साथ इसी उम्मीद में रहती थी की वो मेरा प्यार है लेकिन उसे क्या पता था की उसे भी फसाया जा रहा है ,कजाल तो मेरी नही हो सकी लेकिन शकील ने प्रिय को पाने की बहुत कोशिस की लेकिन प्रिय ने उसे हर बार मना कर दिया लेकिन मेरे प्यार के कारण उसने कभी शकील का जिक्र मुझसे नही किया,उसे यही लगता था की शकील काजल का भाई है और जैसे बहन की आम आवारा आशिकों को अपने बहन की सहेलियों से लगाव हो जाता है वैसे ही शकील को भी उससे हो गया है ,आखिर वो वक्त आया जब शकील ने प्रिया और काजल को अपने घर बुलाया,प्रिया इसी भरोसें में उसके साथ चली गई की उसकी सहेली का भाई उसे बुला रहा है और उसकी सहेली उसके साथ है,लेकिन वंहा शकील के प्रिया को कोई मादक दवाई देकर उसके साथ जबरदस्ती की और मुझे बुलाकर ये सब दिखाया गया ,मुझे नही पता था की ये शकील ही था लेकिन मुझे प्रिया से उस वक्त नफरत सी हो गई ,मुझे लगा की वो एक बतचलन लड़की है ,मुझे काजल ने बताया की वो ऐसा पैसों के लिए कर रही है और वो एक रंडी है ,मुझे उसी दिन से रंडियों से चिढ़ सो हो गई मैं अब प्रिया का चहरन भी नही दिखना चाहता था,लेकिन फिर दिन बीते लेकिन प्रिय घर नही आयी ना ही काजल कभी लौट कर आई ,मैंने पता किया तो मुझे काजल की सच्चाई का पता चला की वो खुद किसी और की रंडी थी ,और दौलत वालो को फसाना उसका पेशा था ,तब मुझे समझ आया की मेरी प्रिया इन सबके जाल में फंस गई है मैंने उसे बहुत ढूंढा लेकिन वो कही नही मिली ,अब वो प्रिया से काजल बन चुकी थी ,फिर आपके बेटे की वजह से वो मुझे मिल गई ,शकील ने उसके ऊपर इतनी ज्यादती की है की अगर कोई सुन ले तो उसकी रूह कांप जाए ,फिर उसके जीवन में राहुल आया ,एक ऐसा लड़का जो उसकी हर हकीकत जानते हुए भी उसे प्यार करता है,ये दोनों एक दूसरे के प्यार में पड़ गए और आज हम आपके सामने है …….

”

अविनाश की बात सभी बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे,लेकिन किसी ने कुछ भी नही कहा

“मैंने ये कभी नही कहा,मैंने आज तक मेरे और प्रिया के रिश्ते को कोई नाम नही दिया ,लेकिन आज आप कह रहे हो की मेरा उससे रिश्ता क्या है तो मैं कहता हु,अपने दिल की गहराइयों से कहता हु की प्रिय मेरी बहन है ,हमारा रिश्ता इतना ही पवित्र और प्यार से भरा हुआ है जैसे किसी भाई बहन का होता है,उसने मेरे लिए बहुत कुर्बानियां दी है मैं उसे और दुख में नही देख सकता,उसके लिए जीवन की एक ही उम्मीद है वो है राहुल ,उसे और कुछ नही चाहिए उसे बस एक आम लड़की की तरह जिंदगी जीने का एक मौका चाहिए और वो मौका आप दे सकते है,इनके प्यार के दुश्मनों ने इन्हें अलग करने की कई कोशिशें की थी ,उनमे एक को अपने मोबाइल में देखा लेकिन आप ही मुझे बताइए की आखिर इसमें उस बेचारी की गलती क्या थी ??,उसे बंधक बना लिया गया था उसके साथ ज्यादती की गई ,जो एक सहानभूति की काबिल है उसे आप घृणा की दृष्टि से देख रहे है...मैं आपसे अपनी बहन के जीवन की भीख मांगता हु उसके जीवन में बस तकलीफें ही तकलीफें रही है मैं उसकी खुसी आपसे मांगता हु ,मैं आपका राहुल आपसे मांगता हु …..इन दोनों को जुदा मत कीजिये ये एक दूसरे के बिना मर जाएंगे…”

अविनाश रोता हुआ मेरे पिता के पैरों को जकड़ लेता है ..

“लेकिन समाज का क्या ???”

मेरे पिता ने अनायास ही कहा

“समाज किस समाज की बात कर रहे हो बापू तुम,जो एक बेसहारा लड़की के जिस्म को भोगता है और उसे ही रंडी कहकर तिरिस्कार की नजरो से देखता है,ऐसे समाज की चिंता है तुम्हे ,जिसने काजल को जिस्म बेचने पर मजबूर किया उसे कभी किसी ने कुछ नही कहा,जिसने ये वीडियो बनाया,जिसने ज्यादती की उसे ये समाज कुछ नही कहता और जो इन ज्यादतियों का शिकार हुआ उसे ही समाज गालियां दे रहा है ,और अगर ऐसा है तो मैं इस समाज को और इसके नियमो को नही मानता,आप मेरे लिए भगवान के समान हो लेकिन मेरी काजल से तो मुझे कोई भगवान भी जुदा नही कर सकता ……….”

मेरी बात सुनकर मेरे पिता सकते में आ गए थे ,आखिर उन्होंने चिल्लाकर कहा

“आज तो तू उसके प्यार में है लेकिन जब जिंदगी भर रास्ते में जाते हुए लोग तुझे एक रंडी का पति कहकर बुलाएंगे तो क्या ,ये कलंक लेकर तू जी पायेगा “

मेरे पिता भी भावुक हो गए थे उसके आंखों में ना सिर्फ आंसू थे बल्कि उनकी आवाज भी धीमी पड़ गई थी

मैं उसके चरणों में बैठ गया था ..

जो लोग किसी लकड़ी को रंडी कहते है उन्हें पहले ये सोचना चाहिए की वो लड़की रंडी क्यो है ,वो इसी समाज के किसी व्यक्ति के कारण एक रंडी है जो उसके जिस्म को भोगता है,लेकिन समाज उस इंसान को कुछ नही कहता जिसके कारण एक लकड़ी रंडी बनती है ,और अगर कोई कहे की मैं एक रंडी का पति हु तो भी मेरे लिए ये कोई जिल्लत की बात नही होगी क्योकि मुझे पता है की रंडी होना क्या होता है ,रंडी वो है जो इस समाज में फैले हुए वासना के आग को अपने जिस्म से बुझती है,जिस्म का शोदा तो हर जगह किया जाता है,कोई पैसे के लिए तो कोई पॉवर के लिए,और यंहा तक की लड़के भी दहेज की लालच में शादी करके अपना जिस्म बेच रहे है ,लेकिन समाज उन्हें तो ऐसे नामो से नही बुलाता …..”

सभी शांत थे बस शांत थे लेकिन ना जाने सबके अंदर क्या तूफान चल रहा था….

“तू प्यार में अंधा हो गया है पढ़ लिख कर और भी बेवकूफ हो गया है तुझे वो नही दिख रहा है जो सामने है मटर भविष्य क्या होगा बेटा उस लड़की से शादी करके “

मेरा बाप आखिर फुट ही गया था वो रोये जा रहा था,मेरी मा रो रही थी ,अविनाश रो रहा था,तरुणा रो रही थी और मैं भी ,इस कमरे में भावनाओ का तूफान सा आ गया था सभी के आंखों में आंसू थे लेकिन सबके अलग कारण थे ……

पिता जी की बात से मेरे होठो में एक अजीब सी मुस्कान खिल गई

“आप मेरे भविष्य की बात कर रहे है ,जब मैं गांव से यंहा आया तो क्या था,मैं आज जो भी हु वो इसी लड़की की वजह से हु,इसके प्यार ने मुझे हिम्मत दी वो करने की जो मैं सोच भी नही सकता था,मेरा भविष्य तो इसी के साथ है बापू,मुझे फर्क नही पड़ता की वो क्या थी मुझे बस इस चीज से फर्क पड़ता है की वो क्या है ,और वो मेरा प्यार है ,मेरी जान है ,मेरा सब कुछ वो ही है ,वो है वो मैं हु,उसके बिना मैं जिंदगी की कोई कल्पना भी नही कर सकता….

आप लोगो ने मुझे जन्म दिया मेरे लिए इतना कुछ किया आप मेरे भगवान है लेकिन उसने मुझे जीना सिखाया है मुझे जिंदगी का मतलब बताया है,आप का कहा मैं नही टाल सकता ,आप कहो तो मैं ये शादी नही करूंगा लेकिन …...आपका बेटा सिर्फ उसका है उसके सिवा किसी और का नही हो सकता ,और मेरी जिंदगी भी सिर्फ उसकी है उसके सिवा किसी और की नही हो सकती …….”

मेरी बात से वंहा बस शांति थी मेरे पिता ही नही कोई भी कुछ बोलने के हालत में नही था ………

तभी तरुणा का मोबाइल बज उठा ….

“क्या????????”

वो जोरो से चिल्लाई

“क्या हुआ “मैं और अविनाश एक साथ उसे देखने लगे

“काजल ……...काजल ने जहर खा लिया है “

अध्याय 40

वही हॉस्पिटल अब तो इस हॉस्पिटल का सारा स्टाफ भी मुझे और काजल को पहचानने लगा था ,आज काजल फिर से वहां थी,हमे बाहर तरुणा की सहेली मिल गयी जिसने काजल को यंहा लाया था,थोड़ी ही देर बाद डॉ ने हमे काजल से मिलने की इजाजत दे दी….

“ये क्या बचपना है काजल क्यो किया तुमने ऐसा “

मैं काजल के पास ही बैठा था ,वो आंखे खोले मुझे प्यार से देख जरूर रही थी लेकिन उसकी आंखों में अब भी दर्द साफ दिखाई दे रहा था …

“राहुल तुम्हे यंहा नही आना चाहिए था,तुम्हे मा-पिता जी के साथ ही रहना चाहिए था,तुम्हारे यंहा आने से उन्हें बुरा लगेगा..”

उसकी बात से मैं मुस्कुरा उठा ,

“तुम्हे क्या मेरे मा-पिता जल्लाद लगते है ,वो भी इंसान है और उनके सीने में भी दिल है ,वो भी मेरी खुशी चाहते है और वो भी मेरे साथ यंहा आये है बाहर ही बैठे है …”

मेरी बात से वो थोड़ी घबरा सी गई

“राहुल पिता जी सही कह रहे थे मैं तुम्हारे लायक नही हु “

“तूम पागल हो गई हो क्या,मैं आज जो भी हु वो तुम्ही ने तो बनाया है मुझे और अब तुम कह रही हो की तुम मेरे लायक नही हो ,अरे पागल हम तो बने ही एक दूसरे के लिए है “

“नही राहुल वो सही कह रहे थे,जीवन भर दुनिया तुम्हे ताने मारेगी ,हम जंहा भी रहे मेरी सच्चाई दुनिया से छिप नही सकती ,उन्होंने सही कहा राहुल की मैं एक रंडी हु..”

“मुझे दुनिया की कोई फिक्र नही है काजल ,मैं तो बस तुम्हारा साथ चाहता हु ,और तुम्हे किसने कहा की तुम रंडी हो तुम तो एक देवी हो जिसने मुझे इतना प्यार दिया इतना दुलार दिया,इस अदन से इंसान को तुमने क्या बना दिया ..”

“राहुल मैं तुम्हारे लिए कुछ भी हो सकती हु लेकिन ये दुनिया,ये तो मुझे उसी नजरो से देखेगी ,उसके लिए तो मैं वही रंडी हु जिसका वीडियो आज सभी लोग देख रहे है ,मैं दुनिया के सामने नंगी हो चुकी हु राहुल ,मैं अपने स्वार्थ के कारण तुम्हारा भविष्य खराब नही कर सकती ..”

“ओह तो तुम इसलिए अपनी जान देने निकल गई “

काजल सकपकाई और नीचे देखने लगी ,मैंने उसके चहरे को अपने हाथो से सहलाया ,उसकी इस हालत को देखकर मेरा दिल भर आया था.

‘तुम मेरी जान हो काजल ,और ये दुनिया मुझे तुमसे अलग नही कर सकती ,अगर मैं तुम्हारा नही हुआ तो और किसी का नही होऊंगा...और किस दुनिया के तानों से डर रही हो तुम ,उन लोगो से जो खुद ही इंटरनेट से ढूंढ ढूंढ कर तुम्हारे वीडियो निकाल कर देख रहे है,या उन नामर्दो से जो किसी लड़की की इज्जत लुटता देख कर भी मजे ले रहे है,या उन लोगो से जो खुद पैसे देकर अपनी हवस मिटाते है और फिर उन्ही को रंडी कहकर जलील करते है,नही काजल उन लोगो के ताने ना मेरे लिए कोई अहमियत रखते है ना ही तुम्हारे लिए रखने चाहिए ,इनका खुद का कोई जमीर नही है तो वो दूसरे को क्या जमीर की शिक्षा देंगे...

मैं तुमसे प्यार करता हु और तुम मेरे लिए मेरी जान हो ,क्या तुम मेरी जान को मुझसे दूर कर दोगी …”

एक बार फिर से हमारी आंखे मिली लेकिन इस बार उसकी आंखों में दर्द नही था बल्कि अपार प्रेम था,वो मेरे गालों को सहलाते हुए उसे अपने पास लाई और हमारे होठ आपस में मिल गए ,ना जाने कितनी देर हम इस अहसास में ही डूबे हुए थे की दरवाजा खुला और किसी के खांसने की आवाज से हम दोनों अलग हुए ,वो मेरे मा-पिता जी थे …

“बेटी हमे माफ कर दो ,हम तुम दोनों के प्रेम को समझ नही पाए,मैं तो एक जाहिल मजदूर हु मुझे हीरे और कोयले में कोई फर्क समझ नही आया ,मुझे अपने बेटे की पसंद पर गर्व है बेटी ,एक वादा करो अब कभी मेरे बेटे को छोड़कर यू जाने की सोचोगी भी नही ..”

मेरे पिता जी भावुक हो गये थे वही मा ने अपने आंखों से कजाल निकाल कर मेरी काजल के माथे में लगा दिया …..

****************

ल गयेला जब लिपिस्टिक हिलेला आधा डिस्टिक …

डीजे के शोर में गाना अपने जोर पर था ,तभी मेरे पास खड़े संजय सर कह उठे …

“ये तेरे शादी की पार्टी कम और डांस बार ज्यादा लग रहा है,कौन है ये सब लडकिया जो इतने घण्टो से पागलों जैसे नाचे जा रही है,और इस साले प्यारे को तो देखो ऐसे लग रहा है जैसे बार में कोई शराबी आ गया है “

उनकी बात सुनकर मैं हँस पड़ा,मैं और काजल अभी अपने शादी के रिसेप्शन में स्टेज पर थे ,

“अरे सर ये सभी काजल की पुरानी दोस्त है आज कल सभी मॉडल बन गई है ,और प्यारे इनका डारेक्टर “

“ओह तो इस काम में बिजी है ये जनाब आजकल “

“कभी तू भी पुस्तक से बाहर निकल जाया कर “

इस बार अविनाश था जो संजय सर के पास आ खड़ा हुआ था वो पसीने से पूरी तरह भीगा हुआ था ..

“अरे सर आप तो जानते हो ..”

“बेटा मैं कुछ नही जानता आज तो तू पियेगा भी और नाचेगा भी “

संजय सर मानो वंहा से भागने को हुए लेकिन अविनाश और उसके दोस्तो ने उन्हें उठा ही लिया और शराब की एक बोतल उनके मुह में डाल दी अब वो मेरी तरफ बड़े मैं समझ गया था की क्या होने वाला था उन्होंने हमे भी उठाकर डांस फ्लोर में ला दिया …

मैं नाच रहा था काजल नाच रही थी ,मेरे माता पिता,शबनम ,प्यारे,अविनाश,चंपा मौसी,तरुणा, संजय सर,और हमारे कई दोस्त सभी नाच रहे थे…

सभी ने मिलकर मुझे और काजल को एक दूसरे की तरफ धकेल दिया ,काजल मेरे बांहों में थी उसके आंखों में पानी था …

हम उस शोर से थोड़ी दूर खड़े हो गए वंहा शांति थी क्योकि पार्टी तो खत्म हो चुकी थी बस डीजे चल रहा था और कुछ खास दोस्त बस रुके हुए थे...काजल को मैंने फिर से अपनी बांहों में भर लिया था ...

“यकीन नही होता की ये सच है “

उसने मेरे कानो में कहा ,

“अच्छा एक किस लेके देखो तो की पता तो चले की सच है या सपना “

उसने मेरे छाती पर एक जोर का मुक्का मारा ,तभी हमारे कानो में कुछ आवाज पड़ी ..

“अबे जानता है ये वो ही लड़की है जिसका वीडियो बना था ,सुना है पहले रंडी थी शकील भाई के चाल वाली “

कोई आदमी घिनोनी सी हंसी लिए बोल रहा था,

“हा सही है बड़ा अच्छा मुर्गा फसाया है साली ने ,और वो भी कैसा चूतिया है जो एक रंडी से प्यार कर बैठा “

दोनों ही जोरो से हँसने लगे

“ना जाने साली रांड कितनो से चुदी होगी, साला दूल्हा तो कड़ाई में चम्मच चलाएगा “दोनों फिर जोरो से हंसे

उनकी बात सुनकर मेरा खून ही ख़ौल गया ,वो दोनों वंहा के वेटर थे ,मैं गुस्से में आग बबूला होकर उधर जा ही रहा था की काजल ने मुझे और भी जोरो से जकड़ लिया …

“इन मादरचोदों को तो मैं ..”

काजल ने मेरे होठो में उंगली रख दी

“अब एक रंडी से प्यार किया है तो ये सब बाते तो होती ही रहेगी,”

इतना सुनने के बाद भी उसके होठो में मुस्कान ही थी ..

“तुम फिर से शुरू हो गई “

“आपका अतीत आपका पीछा कभी नही छोड़ता राहुल ये सच्चाई है,लेकिन मैंने तुमसे ही सीखा है की अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाना चाहिए चाहे वो हमारा पीछा क्यो ना छोड़े “

“लेकिन ..”

उसने फिर से मेरे होठो में उंगली टिका दी

“अगर दुनिया की बातों से तुम्हे कोई फर्क पड़ता है तो हमे अगल हो जाना चाहिए “

“ये क्या बोल रही हो ..”

“सच बोल रही हु,अगर तुम ऐसे लोगो की बातों में आकर गुस्सा करोगे तो मुझे प्यार कब करोगे ,दुनिया में ऐसी सोच के लोग मिलेंगे ही राहुल,दुनिया इनसे भरी हुई है ,हमे इनसे फर्क नही पड़ना चाहिए हमे तो बस इस बात से फर्क पड़ना चाहिए की हम एक दूसरे से प्यार करते है या नही और मैं तुमसे बहुत प्यार करती हु “

काजल की आंखों में आंसू थे मैंने अपने होठो से उसके आंसू को पी लिया …

“पगली कही की बात बात पर रो देती है “

“पगली हु या जैसी भी हु अब तुम्हारी हु,बस तुम्हारी हु “

हम दोनों एक दूजे के आंखों में गहराई से देख रहे थे ,जैसे हमारे रूह भी एक हो गए हो हमारे होठ अपने ही आप मिल गए ,जब हम अलग हुए तो दिल में कोई दुख नही था बस पाने की खुसी थी अपना प्यार पाने की ...दोनों के ही होठो में मुस्कान थी …

“अब चले सब ढूंढ कर रहे होंगे “काजल ने धीरे से कहा

“ह्म्म्म ,यार उस वेटर ने जो कहा ,कढ़ाई में चम्मच चलाना इसका मतलब क्या होता है “

मुझे सच में ये बात समझ नही आयी थी ,लेकिन काजल जोरो से हँस पड़ी …

“तुम सच में चूतिया ही हो ,अब चलो जल्दी “

अब उसका मतलब जो भी हो लेकिन मेरी काजल की हंसी सुनकर और उसके मुह से ये शब्द सुनकर ऐसा लगा जैसे मुझे जन्नत ही मिल गई ,मैं चाहता था की वो ऐसे ही हंसते रहे और मुझे कहती रहे ..

‘तुम सच में चूतिया हो ….’

**************** समाप्त ***************

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