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संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-31 (Sanskari vidhwa maa ka randipana-31)

Story Hindi 6 pages 15 years ago

संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-31 (Sanskari vidhwa maa ka randipana-31)
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पिछला भाग पढ़े:- संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-30 हिंदी चुदाई कहानी अब आगे- मम्मी ने एक गुलाबी साटन बाथरोब नाइट ड्रेस पहनी हुई थी, जिसकी लंबाई जांघों से काफी ऊपर उनकी गोल उभरी हुई गांड से बस हल्का सा नीचे तक थी। यह बाथरोब को एक मॉडर्न और स्टाइलिश लुक दे रहा था। हाथों की स्लीव्स और नीचे के घेरे पर चौड़ा ब्लैक फ्लोरल लेस लगा हुआ था। गुलाबी और काले रंग का यह कॉम्बिनेशन ड्रेस को काफी बोल्ड और अट्रैक्टिव बना रहा था। नाइटी के बारीक ट्रांसपेरेंट कपड़े से उनकी नंगी चूचियों की पूरी झलक नज़र आ रही थी। नीचे उनकी लाल जालीदार पेंटी जो बस चूत की फांकों को ही कवर कर पा रही थी। मम्मी का यह बोल्ड लुक देख कर मेरा लंड छोटे साइज के अंडरवियर से बाहर आने को हो रहा था। मम्मी मुझे ऊपर से नीचे तक देख रही थी और मैं उन्हें। मम्मी अपने चेहरे पर हल्की शर्मीली मुस्कान लिए खड़ी थी। मैं उनकी आँखों में देखते हुए अपने कदम आगे बढ़ा कर उनके नज़दीक गया और- मैं बोला: उफ्फ, आपके आगे तो हसीनाएं फेल हो जाएं, इतना कातिल लुक… मम्मी शर्माते हुए बोली: क्या राहुल जी, आप भी इस ढलती उम्र की तारीफें कर रहे हैं… मम्मी हल्की शर्म के साथ मेरे अंडरवियर का उभार देख कर अपने होंठों को रगड़ रही थी। उनकी चूत में महीनों से जलती आग वो अपने होंठों से बयां कर रही थी। मैंने मम्मी के चेहरे पर आई जुल्फों की कुछ लटें साइड करते हुए कहा: यह ढलती उम्र ही आपकी जवानी की पहली दहलीज़ लग रही है… मम्मी मेरी आँखों में देखते हुए चेहरे पर हल्की शर्मीली मुस्कान लिए झट से मुझे अपनी बाहों में समेट लेती हैं। उनके बदन की गर्माहट मुझे अपने नंगे बदन पर साफ़ महसूस हो रही थी। मैं उनकी कमर से लेकर उभरी हुई गांड तक हाथ फेर रहा था। मम्मी हल्के स्वर में बोली: तारीफ का काम तो तुमने किया है, इतनी बड़ी डील हासिल करके। इतनी जल्दी पापा का बिज़नेस इतनी बखूबी से संभाल लोगे, यह सोचा नहीं था! मम्मी मेरे नंगे सीने पर हल्का सा चुंबन कर लेती हैं। मेरे पूरे बदन में एक सिहरन सी उठती है, जिसका सीधा असर लंड पर होता है। मेरा लंड पूरी तरह अपने तनाव में आना शुरू कर देता है और उसके अंदर बढ़ता जोश अब मेरे सिर पर हावी हो रहा था। मैंने कहा: पापा की हर जगह अब मैं संभालना चाहता हूँ। अभी तक मैं पापा राजवीर और उनके नाम के लिए सब कर रहा था। पर अब मैं सिर्फ राहुल बन कर उनकी कमी, हर ज़रूरत और हर घाव को पूरी तरह से भर देना चाहता हूँ! मेरी यह बात सुनते ही मम्मी अपना चेहरा मेरे सीने से उठा कर मेरी आँखों में देखती हैं। मैंने देखा कि उनकी आँखें हल्के आँसुओं की वजह से नम पड़ी हुई थी।

मैंने मम्मी की आँखों से गिरते आँसुओं की बूंदों को हल्के से चूमा और उन्हें एक हाथ से पोंछते हुए बोला: मम्मी, क्या अब मैं इस काबिल हूँ कि उनकी जगह पूरी तरह से ले सकूँ? मम्मी अपने आँसुओं से भीगे चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए मुझे अपनी बाहों में कसकर बोली: हाँ, तुम पूरी तरह से काबिल हो! राहुल, मैं चाहती हूँ कि आप मेरी जिंदगी में सिर्फ एक मर्द बन कर आओ और अपने पिता की खलती हुई कमी को पूरा करो… मम्मी की बात सुन कर मेरा दिल खुशी से झूम उठा। मैंने बड़े प्यार से उनका चेहरा अपने सीने से उठाया, उनकी आँखों में देखा और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। मम्मी के प्यासे होंठ जैसे इसी पल का इंतज़ार कर रहे थे। वो अपनी हथेलियाँ मेरी पीठ पर फेरते हुए मेरे होंठों को चूसने में मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने अपने हाथ उनकी कमर से नीचे, उनकी गांड के उभरे हुए हिस्से पर रखे और उन्हें दबाने लगा। मम्मी मेरी नंगी पीठ सहलाते हुए दीवानों की तरह मेरे होंठ चबाए जा रही थी। मम्मी के बदन की गर्माहट अब मुझे पागल कर रही थी। उत्तेजना की वजह से मेरे लंड का टोपा अंडरवियर की इलास्टिक से बाहर आ गया था। हम दोनों एक-दूसरे को बड़े ही बोल्ड तरीके से चूम रहे थे और अब मम्मी की कामुक सिसकारियां निकलने लगी थी। मम्मी गर्म साँसें लेते हुए आहें भर रही थी। मैं उनकी गांड मसलते हुए अपना हाथ उनकी पेंटी के अंदर डालने ही वाला था कि तभी मम्मी मेरे होंठों से अलग होकर अचानक घूम गईं और मेरी तरफ पीठ कर ली। मैंने उन्हें पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और उनकी गर्दन पर कामुक अंदाज़ में चूमते हुए पूछा- मैंने कहा: क्या हुआ सविता? मम्मी बड़े ही धीमे स्वर में बोली: पता नहीं राहुल, बहुत अजीब सा लग रहा है! मैंने अपने कड़क लंड को उनकी गांड की फांकों पर हल्का सा रगड़ते हुए कहा: आपको यही प्यार चाहिए, यह मुझे पता है… फिर अब क्या सोच रही हो? मम्मी: राहुल मुझे… मैंने मम्मी को पीछे से अपनी बाहों में और जकड़ कर बोला: मम्मी, आपको जो कहना है खुल कर कहो! मैं नहीं चाहता अब हमारे बीच कोई पर्दा रहे, आपकी खुशी के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ। मम्मी बोली: कैसे कहूँ, राहुल मैंने तुम्हें जन्म दिया, पाल-पोस कर इतना बड़ा किया है। पर मैं तुम्हारी तरफ खिंची आ रही हूँ, जब से तुम्हारी बॉडी में ये बदलाव आया है। मैं एक माँ होकर भी अपने आप को नहीं रोक पा रही, मेरी इच्छा वही प्यार पाने की हो रही है जो एक औरत की उसके पति के साथ या कहूँ किसी मर्द के साथ करने की होती है। राहुल, तुम मेरे बेटे हो इसलिए… मैंने झट से मम्मी को अपनी तरफ घुमा कर उनके होंठों पर अपनी उंगली रख कर बोला: बस, मुझे कुछ नहीं सुनना। अब मैं नहीं चाहता कि तुम अपना बदन फिर किसी जुनैद जैसे मर्द से मसलवाओ।

अब से हम एक-दूसरे की ज़रूरत के लिए सिर्फ एक औरत और एक मर्द हैं। इतना बोल कर मैंने मम्मी की कमर में एक हाथ डाल कर उन्हें अपने नंगे सीने से चिपका लिया, फिर उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मम्मी अपने होंठों को कुछ सेकेंड ही चूसने देती हैं, फिर झट से वो अपने होंठों को अलग करके बोली: राहुल, एक बार और सोच लो, आगे बढ़ने से पहले… ये समाज हमें बहुत बुरा-भला बोलेगा। मैंने कहा: समाज की माँ का भोसड़ा, मैं तुम्हें हर रूप में प्यार करूँगा चाहे दुनिया कुछ भी कहे! मम्मी ने मेरी आँखों में आँखें डाल कर कहा: ठीक है, आज से ये सविता तुम्हारी हुई। मुझे चाहे तुम अपनी रखैल बनाओ चाहे बीवी… मम्मी मेरे नंगे सीने को चूम कर फिर अपने होंठ मेरे होंठों की तरफ बढ़ाती हैं। मैं थोड़े जोशीले अंदाज़ में अपना एक हाथ उनकी गांड पर रख कर उसे मसलने लगता हूँ और उन्हें अपने बदन से चिपका कर उनके होंठों को लॉक कर लेता हूँ। मम्मी का इस बार मेरे होंठों को चूसने का अंदाज़ पहले से ज़्यादा जोशीला था, वो अपना एक हाथ मेरे सीने पर रखे मेरे होंठों के साथ मेरी जीभ को भी चूस रही थी। मैं मम्मी का जोश बढ़ाने के लिए अपना हाथ सीधा उनकी पेंटी में डाल कर गांड को मसलने लगा था। मम्मी कामुक सिसकारियां लेते हुए अपने दूसरे हाथ से मेरी पीठ को नोच रही थी। मम्मी का पूरा जिस्म अब आग की तरह तपने लगा था, उनकी चूत की गर्माहट उन्हें बेकाबू करे जा रही थी। मम्मी होंठों को अलग करके लंबी-लंबी सांसें ले रही थी। मैंने गौर किया कि अब उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान उतर आई थी। मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उनकी कमर पर बंधी नाइटी की बेल्ट पर रखा और कहा: सविता, यही मुस्कान तुम्हें और भी कातिल बनाती है! मैंने नाइटी की बेल्ट को एक झटके में खोल दिया, जिससे वह साटन की नाइटी उनके बदन से अलग होकर दो हिस्सों में बंट गई। मम्मी के बूब्स के बीच की लाइन से लेकर उनकी पेंटी से झांकती चूत की फांकें तक अब साफ़ नज़र आ रही थी। मम्मी इस तरह मेरे सामने अर्ध-नग्न खड़ी शर्मा रही थी। मैंने उनके कंधों पर हाथ रख कर उनकी आँखों में देखते हुए कहा: उफ़, चेहरे पर क्या नूर है! अक्सर मैं इस सुंदर चेहरे को देख कर तुम्हारे बदन की कल्पना करता था। मम्मी शर्मीले अंदाज़ में अपनी आँखें घुमाते हुए बोली: जी, अब मैं पूरी तरह से आपकी हूँ। आपको कल्पना करने की ज़रूरत नहीं, बस हुक्म कीजिए। मैंने मम्मी के कंधों से नाइटी को नीचे गिरा दिया, जिससे वह फर्श पर जा गिरी और मम्मी अब ऊपर से पूरी तरह नग्न हो गई। उनके गोल और भारी बूब्स के निप्पल्स पूरी तरह तने हुए थे, जिन्हें देख कर ऐसा लग रहा था मानो वो मुझे चूसने के लिए पुकार रहे हों। मम्मी शर्म से अपनी आँखें बंद किए खड़ी थी। मैंने बड़े आराम से अपना अंडरवियर उतारकर पैरों से दूर फेंक दिया।

फिर मम्मी को अपने सीने से लगाया और उनके होंठों को हल्का सा चूमते हुए कहा: आज की रात शर्माने के लिए नहीं, बल्कि सारी हदें पार करने के लिए है। अपनी आँखें खोलो और देखो, क्या मुझमें आपको अब भी वही राहुल नज़र आता है जिसे आपने जन्म दिया था? इतना कह कर मैंने मम्मी की बंद पलकों को चूम लिया। मम्मी ने धीरे से अपनी पलकें उठाई और मेरी आँखों में देखा। मैंने अपना तना हुआ नंगा लंड मम्मी को महसूस कराने के लिए उनकी जांघों के बीच रगड़ दिया। जांघों से लंड टकराते ही मम्मी के मुँह से एक हल्की आह निकल गई। फिर मैंने उनके एक बूब पर हाथ रख कर उसे हल्का सा दबा दिया। मम्मी मेरी आँखों में देखते हुए बोली: उफ़ राहुल! इन्हें पिला कर ही तुम्हें बड़ा किया था। तुम्हारे जवान हाथों में मेरे बूब्स फिर से आएँगे, यह सोचा नहीं था। मैंने अपनी गर्दन नीचे झुकाई और अपने होंठों को उनके निप्पल पर रख कर उन्हें चूसने लगा। मेरे होंठ लगते ही मम्मी के बदन में सिहरन दौड़ गई। वह हल्की सिसकारी भरते हुए अपने हाथों से मेरे बालों को सहलाने लगी। मैंने दूसरे हाथ की मुट्ठी में उनका दूसरा बूब्स दबोच लिया था। मम्मी कामुक सिसकारियां भरते हुए बोली: आह… आह… राहुल, आराम से चूसो ना… तुम्हें फिर से अपना दूध पिला कर अच्छा लग रहा है। मैं बदल-बदल कर उनके दोनों बूब्स चूस कर निचोड़ रहा था, मम्मी जोश में खड़े-खड़े अपनी जांघों को आपस में रगड़ रही थी। फिर मैं सीधा खड़ा हुआ और मम्मी के होंठों को चूसकर बोला: सविता, अब मुझसे सबर नहीं हो रहा है, मुझे वो जगह देखनी है जहाँ से मेरा जन्म हुआ था! मम्मी बोली: इसमें पूछने वाली क्या बात है, देख लो ना। यह जगह हर किसी की किस्मत में नहीं होती, पर तुम लकी हो जो इसे देखने के साथ इस्तेमाल भी करोगे। वैसे, सब खड़े-खड़े ही करना है या मुझे बिस्तर पर भी ले चलोगे? मैंने तुरंत नीचे झुक कर मम्मी को अपनी गोद में उठा लिया और उन्हें बेड पर लिटा कर खुद भी ऊपर चढ़ गया। मेरे बेड पर चढ़ते ही मम्मी की नज़र मेरे तने हुए लंड पर पड़ी, जो आज एक-दम साफ और पूरे तनाव में खड़ा था। मैं मम्मी की कमर के पास घुटनों के बल खड़ा था और मेरे लंड का सुपारा सीधा मम्मी के चेहरे की तरफ निशाना साधे हुए था। जैसे ही मम्मी की नज़रें मेरे लंड पर पड़ी, उनके मुँह से निकला: ओह गॉड! उफ़… इतना प्यारा और इतना बड़ा कब हो गया ये? मैंने लंड पर हल्का हाथ फेरते हुए कहा: मम्मी, मैंने पापा की कमी पूरी करने के लिए इस पर भी उतनी ही मेहनत की है, जितनी बिज़नेस पर। मम्मी लंड की नसों को देखते हुए बोली: उफ़ राहुल, तुम्हारी इस मेहनत का फल मैं अपने जिस्म के हर कोने से देने को तैयार हूँ!’ मैंने कहा: ‘तो फिर आगे बढ़ो सविता, हमें रात ढलने से पहले अपने जिस्मों को एक करना है।

मम्मी बेड पर थोड़ा आगे बढ़ते हुए बोली: हाँ राहुल, मैं भी चाहती हूँ कि कल सुबह के बाद मुझे तुम्हारे पिता की विधवा बन कर ना जीना पड़े। मम्मी ने मेरे लंड के पास आकर उसे घूरते हुए हाथ से पकड़ लिया। उनके कोमल हाथों का स्पर्श मिलते ही मेरा लंड एक झटके के साथ ऊपर-नीचे हुआ। यह देख मम्मी के चेहरे पर कामुक मुस्कान आ गई। उन्होंने अपनी आँखें बंद की और चेहरे को आगे बढ़ा कर लंड की खुशबू को गहराई से महसूस किया। फिर एक गहरी साँस लेकर उन्होंने आँखें खोली और बोली: उफ़ राहुल, ऐसा लंड तो तुम्हारे पापा का भी नहीं था। इतना प्यारा, लंबा और मोटा… (मम्मी ने हल्के हाथ से मेरे सुपारे की चमड़ी को पीछे किया)। उत्तेजना और हल्के दर्द के कारण मेरे मुँह से निकला: आह… मम्मी मुस्कुराते हुए मेरी आँखों में देख कर बोली: ओहो, लगता है लंड की नसें अभी सही से खुली नहीं हैं। मैंने मम्मी के खुले बालों में हाथ फेरते हुए कहा: हाँ मम्मी, मेरा लंड अभी तक कोरा है। मैं अपनी ज़िंदगी में सेक्स की शुरुआत आप ही से कर रहा हूँ! मम्मी अपनी जीभ से सुपारे के चारों तरफ चाट कर बोली: उफ़… कितना मीठा स्वाद है। आज मैं खुशनसीब हूँ कि एक जवान कोरा लंड लेने जा रही हूँ… उम्म… आह। मम्मी ने मेरे लंड पर ढेर सारे चुम्बन किए और फिर सुपारे को मुँह में ले लिया। उनकी मुँह की गर्माहट ने मुझे सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। मैं हल्की-हल्की सिसकारियाँ लेते हुए बोला: आह… उफ़… सविता, बड़ा मज़ा आ रहा है, बस ऐसे ही… मम्मी एक हाथ से मेरे लंड की चमड़ी को आगे-पीछे करते हुए सुपाड़े को मज़े से चूस रही थी। उनके थूक से चिकना मेरा लंड अब उनके टाइट होंठों के बीच फिसलना शुरू हो गया था। मैं अपने दोनों हाथों से मम्मी का सिर पकड़कर उनके मुँह में लंड को तेज़ी से अंदर-बाहर कर रहा था और मम्मी मेरा लंड हलक तक बड़े आराम से ले रही थी। मम्मी के मुँह की गर्माहट से मेरे लंड से वीर्य की बूँदें रिसने लगी थी, जिन्हें चाटने के बाद मम्मी मेरी तरफ देख मुस्कुरा देती थी। मम्मी मेरे लंड को किसी कुल्फी की तरह चूस रही थी, अब मेरे सब्र का बांध जैसे टूटने ही वाला था। मैं गहरी सांसें भरते हुए बोला: उफ़… आह… मेरा निकल जाएगा… उफ़! मम्मी ने लंड मुँह में लिए हुए ही मेरी आँखों में देखा और पलकें झपका कर इशारा किया; वह मेरे लंड का सारा माल पीना चाहती थी। मैंने उनका सिर मज़बूती से पकड़ा और पूरा लंड उनके हलक में उतारकर झड़ गया। मम्मी ने पूरा वीर्य पी लिया और लंड पर लगा हुआ अंश भी चाट कर साफ़ कर दिया। मैं लंबी-लंबी सांसें लेते हुए मम्मी को बाहों में लेकर बेड पर लुढ़क गया। मम्मी मेरे सीने पर सिर रख कर लेटी हुई थी। मैं उनकी नंगी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोला: माफ़ करना, मुझसे रुका नहीं गया और मैंने आपके मुँह के अंदर ही झाड़ दिया।

मम्मी ने मेरे सीने को चूम कर कहा: ओहो, इसमें माफ़ी वाली क्या बात है? एक औरत को यही तो चाहिए होता है। और तुम तो मेरे बेटे हो, तुम्हारा प्रोटीन कैसे बर्बाद होने दे सकती हूँ? उफ़ बेटा, मुझे तो तुम्हारा वीर्य पीकर ही मज़ा आ गया! तो दोस्तों इसके बाद माँ बेटे से चुदाई का मजा कैसे लेती हैं। वो मैं अगले भाग में बताऊंगा। [email protected]

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