हादसा-2 (Haadsa-2)
Baap Beti
पिछला भाग पढ़े:- हादसा-1 मेरी तो मानो सांस ही अटक गई थी। बस बीच-बीच में सांस लेने के लिए अपना लंड मेरे मुंह से बाहर निकालते, और फिर मुंह चोदने लगते। ऐसा करीब 15 मिनट चला, और उसके बाद एक जोर के झटके से अपना सारा पानी मेरे मुंह में छोड़ दिया। उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह में रख कर मेरा सिर दबा कर रख दिया, और जब तक मेरी सांस फूल नहीं जाती, तब तक वैसे ही दबाए रखा। जब उन्होने लंड बाहर निकाला, तब मैं जोर-जोर से हांफने लगी, और उनका पानी पी गई। मैंने देखा कि राजेश्वर जी का लंड अब भी खड़ा ही था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े निकाल दिये, और नंगी हो कर सोफे पर अपने पैर फैला कर लेट गई। फिर चूत में उंगली डाल कर उन्हें इशारे करने लगी। वो भी बिना किसी झिझक के मेरी चूत के सामने खड़े होकर मेरी चूत को देख रहे थे। राजेश्वर जी ने अपना लंड मेरी चूत के उपर थोड़ा रगड़ा, तो मैं पूरी तरह से हवस की दुनिया में खो गई। मैंने कहा- मैं: अब आप मुझे मत तड़पाओ, मेरी चूत आपके लंड की भीख मांग रही है। यह सुन कर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में थोडा अंदर डाला, और मेरी सिस्कारी निकल गई आह्ह। उन्होंने अपना लंड फिरसे बाहर निकाला और एक ही जोर के झटके से अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। झटका इतना जोर का था कि मैं वहीं झड़ गई और चीखने लगी आआऊऊईई अरे मर गई आआ। कुछ देर बाद दर्द थोड़ा कम हुआ, तो उन्होंने फिरसे धक्के लगाने शुरु कर दिये, और मैं भी मजे से उनसे चुदने लगी आ आ आ करके सिस्करियां लेने लगी। कुछ देर बाद उनके धक्के तेज हो गए, और में फिरसे झड़ने की कगार पे थी। उन्होंने एक जोर का झटका लगाया, और हम दोनों एक साथ झड़ गए। उनके लंड का सारा पानी मेरी चूत में बह गया। वो मेरे उपर ही लेट गए, और कुछ पल बाद वो उठ गए, और अपना लंड मेरी चूत में से बाहर निकाला। मैं देख कर हैरान थी, कि उनका लंड अब भी शांत नहीं हुआ था। राजेश्वर जी ने मुझे बड़ी ही आसानी से गोद में उठा लिया, और अपने कमरे में लेकर गए। कमरे में ले जाने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर ऐसे फेंक दिया कि मानो मैं कोई छोटी गुड़िया थी। अब वो भी वासना से भर चुके थे। वो बिस्तर पर चढ़ गए, और मेरे पैरों को फैलाया, और मेरी चूत में उंगली करने लगे। बाद में वो मेरी चूत को चाटने लगे, और मैं उउउम-उउउम करके मजा ले रही थी। कुछ देर बाद मैं फिरसे झड़ने वाली थी, तो मैंने उनका सर मेरी चूत में दबा के रखा, और मेरे पैर भी बंद कर दिये। फिर मैं इतनी जोर से झड़ी कि मेरा पूरा शरीर ढीला पड़ गया, और मैं कपकपाने लगी। राजेश्वर जी उठ गए और अपना लंड चूत पर सेट किया, और धक्के देने लगे। करीब आधे घंटे बाद वो फिर मेरी चूत में झड गए। हमने उस रात सुबह 4 बजे तक सेक्स किया, और हम दोनों थकने के बाद खुद बा खुद सो गए। सुबह के 9:30 को मेरी आंख खुली।