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Nayi Dagar Naye Humsafar – Episode 6

Story Hindi 4 pages 14 years ago

Nayi Dagar Naye Humsafar – Episode 6
Hindi Chudai Kahani
This story is part of the Nayi Dagar, Naye Humsafar series सैंड्रा, जैक और जोसफ से विदा ले हम होटल से बाहर आये। हम पार्किंग तक आये और राहुल ने जोसफ के बर्ताव के लिए मुझसे माफ़ी मांगी कि वो मुझे यहाँ लेकर आया और मुझे ये सुनना पड़ा। मैंने भी सोचा नहीं था कि ऐसे किसी व्यक्ति से पाला पड़ेगा। मैं अब भी डर के मारे कांप रही थी। मैंने कार में बैठने के बाद अपनी अनसुलझी पहेलियों को राहुल के सामने रख दिया। मैं: “तुम्हे कुछ अजीब नहीं लगा होटल रूम में?” राहुल: “तुम जोसफ की बात कर रही हो।” मैं: “वो भी पर और भी बहुत कुछ, जैसे जैक और सैंड्रा को देख लगा नहीं कि वो माँ बेटे हैं। ” राहुल: “जैक दरअसल बॉब की पहली बीवी का बच्चा हैं। बॉब ने उसको तलाक देकर अपने से बीस पच्चीस साल छोटी सैंड्रा से शादी कर ली।” मैं: “ओह, अब समझ में आया। पर ये जोसफ इनके कमरे में इस हालत में ! ” राहुल: “मैंने सुना हैं कि जोसफ भी बॉब की एक नाजायज औलाद हैं। अपनी शादी के पहले ही उसने अपने यहाँ काम करने वाली एक लड़की को माँ बना दिया, तब से जोसफ इनके साथ में ही फॅमिली की तरह हैं। सैंड्रा का दूसरा सौतेला बेटा कह सकते हैं। ” मैं: “मुझे नहीं पता तुमने नोट किया या नहीं पर मुझे लगा वो तीनो एक ही बिस्तर पर सोये थे। ” राहुल : “नो कमेंट, ये उनकी निजी ज़िन्दगी हैं। उनके बैडरूम में झाँकने से हमे क्या।” भले ही राहुल ने इतना ध्यान नहीं दिया पर मुझे पूरा यकीन था उन माँ और सौतेले बेटो के बीच बहुत कुछ चल रहा था। सैंड्रा ने इतनी देर से दरवाजा खोला, मतलब उस वक्त भी वो लोग कुछ कर रहे थे और सैंड्रा को गाउन डाल कर आने में थोड़ा वक्त लगा होगा। इन लोगो के रिश्ते भी कितने उलझे हुए थे। पता नहीं बॉब को अपने बेटो के बारे में पता हैं कि नहीं कि वो उसकी बीवी का इस्तेमाल कर रहे हैं। शायद बूढ़े हो चुके बॉब में वो शक्ति नहीं रही कि सैंड्रा की शारीरिक जरूरते पूरी कर सके इसलिए वो काम उसके दोनों बेटे कर रहे थे। हम लोग ऑफिस पहुंच कल की बड़ी मीटिंग की तैयारियों में लग गए। रह रह कर मुझे जोसफ की विशालकाय काया और सैंड्रा के नाजुक बदन के बारे में सोच चिंता हो रही थी कि वो कैसे करते होंगे। फिर जैक के बारे में सोच मन प्यार से भर जाता, कितना आकर्षक लड़का था और किस मासूमियत से मुझे देख रहा था वो। अगले दिन हम ऑफिस से चार लोग मीटिंग के लिए सैंड्रा के ऑफिस पहुंचे। मीटिंग अच्छे से संपन्न हुई, हमें भरोसा था कि जल्द ही हमारी डील साइन हो जाएगी। मीटिंग के बाद राहुल और मैं वही रुक गए और हमारे बाकी के दोनों कर्मचरियो को वापिस ऑफिस भेज दिया। कमरे में हम दोनों के अलावा सिर्फ सैंड्रा और उसका मैनेजर था। उसका मैनेजर उठा और मेरी तरफ मुखातिब हो बोलने लगा : “अपनी कल की गुस्ताखी के लिए मुझे माफ़ कर देना।

” मुझे उसकी तरफ देखते रह गयी वो मुझसे कब मिला और माफ़ी किस बात की मांग रहा हैं। गौर से देखने पर पता चला वो जोसफ ही था, आज सूट पहने एक दम सभ्य इंसान की तरह बैठा था तो मैं उसको पहचान ही नहीं पायी। मेरी आँखें खुली की खुली रह गयी। सिर्फ कपड़ो से आदमी में कितना फर्क पड़ जाता हैं। कल जिसे देख मैं डर रही थी आज वो हानिरहित लग रहा था। मैं: “कोई बात नहीं। एक बार तो मैं तुम्हे पहचान ही नहीं पायी।” अचानक मुझे जैक का ख्याल आया, उसकी वो नीली नीली आँखें मैं भूल नहीं पायी थी। मैं: “जैक कहा हैं ? वो नहीं आया ?” सैंड्रा : “उसकी बिज़नेस मीटिंग में कोई रूचि नहीं। वो मेरे ऑफिस में बैठा बोर हो रहा हैं। चलो मिलवाती हु तुम्हे।” हम लोग मीटिंग रूम से निकल सैंड्रा के ऑफिस में आ गए। वहा जैक बैठा अपने टेबलेट पर कुछ कर रहा था। हमारे पहुंचते ही वो पीछे मुड़ा और हमें देखा। उसकी वो नीली नीली आँखें मुझे ही देख रही थी। उसने राहुल से हाथ मिलाया और फिर मेरी तरफ देख कुछ सोचा और दोनों हाथ जोड़ नमस्ते करने ही वाला था कि मैंने तुरंत अपना हाथ मिलाने के लिए आगे कर दिया। उसने मुस्कुराते हुए मुझसे हाथ मिलाया। उसके गौरे गौरे मक्खन से मुलायम हाथ थे। छोड़ने की इच्छा नहीं थी पर छोड़ने पड़े। कल सिर्फ चेहरा दिखा था, आज उसको पूरा देखा। पतले दुबले शरीर वाला एक गौरा चिट्टा लड़का था। उसकी आँखों में एक अजीब सी कशिश थी जो अपनी तरफ खिंच रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और पूछने लगा। जैक: “क्या तुम मुझे अपना शहर घुमाने ले जाओगी।” सैंड्रा : “वाह , सुबह से मैं इसे ऑफिस के कई और लोगो के साथ घूमने भेजना चाहती थी पर इसने मना कर दिया और प्रतिमा को देखते ही आगे बढ़कर खुद पूछ रहा हैं।” मैं तो हां बोलने वाली थी पर ऑफिस का समय था तो राहुल की तरफ देखने लगी। राहुल: “ये तुम्हारी चॉइस हैं, कोई जबरदस्ती नहीं। अगर तुम्हे ठीक लगे तो ले जाओ वरना कोई बात नहीं। ऑफिस की चिंता मत करो, ख़ास मीटिंग हो गयी हैं। आज की तुम्हारी छुट्टी, घूमने के बाद सीधा घर चले जाना। ” सैंड्रा ने फ़ोन कर बाहर कार और ड्राइवर का इंतजाम कर लिया था। मैं और जैक अब बाहर आ गए। उसने ड्राइवर को साथ आने से मना कर दिया और खुद ही ड्राइवर सीट पर बैठ गया। मैं उसके बगल वाली सीट पर बैठ गयी। जैक: “यू आर लुकिंग वैरी गॉर्जियस ” मैं: “थैंक यू ” राहुल ने मेरी एक तारीफ़ करने में महीनो लगा दिए थे जब कि जैक ने पहली ही मुलाकात में मेरी तारीफ़ कर दी थी। मैं फूली नहीं समाई और उसके होंठो, बालो और आँखों की तारीफ़ की। मैं उसको रास्ता बताती गयी और वो वो ड्राइव करता रहा। हमें शहर के ख़ास जगहों पर घूमना था। बहुत जल्द ही हम दोनों की अच्छी दोस्ती हो गयी। बातों बातों में पता चला कि हमारी पसंद भी काफी मिलती हैं।

मैंने सोचा मैं इसकी माँ के इससे और जोसफ के बीच के संबंधो के बारे में भी थोड़ी जानकारी ले पाऊँगी। दिन भर हम घूमते रहे और लंच भी साथ में किया। हम दोनों ही खुश थे एक दूसरे के साथ घूम फिर कर। मौका देखकर मैंने जिक्र छेड़ दिया। मैं: “तुम अपनी माँ के बहुत क्लोज हो?” जैक:: “मेरी माँ तो दूसरी शादी करने के बाद मुझसे मिली तक नहीं। पर सैंड्रा मेरा काफी ध्यान रखती हैं। ” मैं: “सैंड्रा बहुत खूबसूरत और आकर्षक हैं। ” राहुल “हां, ये तो सच हैं, मैं भी सैंड्रा को बहुत पसंद करता हूँ। आई लव हर ” खैर मुझे तो पूरा शक था ये कैसा वाला प्यार हैं। पर इससे आगे कैसे पुछु। मैं: “जोसफ तुम लोगो के साथ ही रहता हैं?” जैक: “वो हमारी फॅमिली की तरह हैं, बचपन से देखा हैं। हमारे साथ ही रहता हैं, खाता हैं , और सोता हैं । ” काफी खुले विचारो वाले बेटे और माँ की जोड़ी थी। हमने सारी खास घूमने की जगह कवर कर ली थी। दिन भर मैं उसके सुनहरे बालो और नीली नीली आँखों को देखने के आनंद लेती रही। आखिरी स्थान को घूमने के बाद हम कार में आये और वो मुझे घर पर छोड़ने वाला था। कार शुरू करने से पहले उसने मुझे धन्यवाद दिया कि मैंने पुरे दिन उसका साथ दिया और बोर नहीं होने दिया। उसको बहुत मजा आया। जैक: “एक बात बोलू अगर बुरा ना मानो तो।” मैं: “अब तुम मेरे एक दोस्त हो, कुछ भी बोल सकते हो।” जैक: “कैन आई किस यू ?” मैं एकदम सोच में पड़ गयी, उसके गुलाब की पंखुड़ियों से होंठो को देखा और मन किया कि उसको चूसने से कैसे मना कर सकती हु। फिर थोड़ी शर्म के साथ मैं सामने आगे की ओर नीचे देखने लगी। मैं अब हां बोलने ही वाली थी। जैक: “कोई बात नहीं, तुम्हे समय चाहिए तो आराम से सोच कर कल बता देना।” मैं: “हमने तो सारी ख़ास जगह आज ही घुम ली हैं। कल कहाँ घुमाऊ” जैक: “मैं कल बोर हो जाऊंगा, प्लीज मेरे साथ कल भी टाइम स्पेंड करो। कम खास जगह भी घुम लेंगे कल।” मैं: “मेरा ऑफिस भी हैं कल । अभी चलते हैं। ” उसने कार चालू की और मुझे मेरे घर पर ड्राप कर दिया। घर आकर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने पूरा दिन जैक के साथ बिताया। थोड़ा अफ़सोस भी था कि जल्दी से हां नहीं बोल पायी वरना उसके चूमने का मजा भी ले पाती। रात को ख्याल आया कि मैं फिर से क्या करने जा रही थी। मैंने शपथ ली थी कि मैं अब इन सब चक्करो में नहीं पड़ूँगी। फिर भी मैं जैक के साथ चूमने के बारे में सोच रही थी। फिर सोचा चूमने में क्या बुराई हैं। फिर तो मुझे राहुल को भी उस रात चूमने देना चाहिए था, उसको तो मना कर दिया। शायद ये सब दिल की बातें थी, जैक के साथ मैं सीधा कनेक्ट कर पायी इसलिए तैयार हो गयी, जब कि राहुल के साथ सिर्फ एक स्पर्धा थी। इस हिसाब से अगर जैक मुझे चूमने के बाद मुझे चोदने के बारे में पूछेगा तो भी मैं क्या हां कर दूंगी । मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी।

एक तरफ मेरी शपथ थी तो दूसरी तरफ जैक का आकर्षण। मैं सो गयी इस इंतजार में कि कल क्या होने वाला हैं , क्या मेरी शपथ टूटेगी या कायम रह पायेगी। अगली सुबह मैंने अपना वो बेग निकाला जिसमे ऑफिस में पहनने के लिए छोटे कपड़े रख दो महीने पहले छिपा दिया था। मैंने उसमे से अपनी पेंसिल स्कर्ट निकाल पहन ली और एक तंग बटन वाला शर्ट पहन लिया। शायद आज जैक के साथ चूमने का अवसर मिलने वाला था। ऑफिस पहुंच मैं अपने काम में झूट गयी। कुछ घंटो बाद राहुल ने अपने केबिन में बुलाया। राहुल :”सैंड्रा का फ़ोन था, जैक कल की तरह आज भी तुम्हारे साथ बाहर घूमने जाना चाहता हैं। क्या तुम्हारी हां हैं?” मैं मन ही मन थोड़ी ख़ुशी हुई, ये जानते हुए भी कि जैक आज फिर फरमाइश रखेगा मुझे चूमने की। पर जैक से मिलने की ख़ुशी ज्यादा थी। मैं “पर ऑफिस का काम !” राहुल: “उसकी चिंता मत करो, इसे ऑफिस का काम ही समझो।” जैक के साथ जाना राहुल की नजरो में ऑफिस का काम था। क्या मुझे जैक के प्रस्ताव के बारे में राहुल को बता देना चाहिए। कहीं मेरे और जैक के चूमने से उस डील पर कोई विपरीत प्रभाव तो नहीं पड़ेगा। मैंने बताना ही उचित समझा। मैं: “कल जैक ने मुझे चूमने का प्रस्ताव रखा था। ” राहुल “क्या बात कर रही हो? अगर तुम कहो तो सैंड्रा को तुम्हे भेजने से मना बोल देता हूँ, कोई बहाना मार दूंगा।” उसकी बातों में मेरे प्रति एक चिंता का भाव था। पर मेरा सवाल उसके लिए कुछ और था। मैं “नहीं, मैं ये पूछना चाहती थी कि हम दोनों के चूमने से दोनों कंपनी की डील पर तो कोई अच्छा या बुरा असर होगा?” राहुल: “मैं डील की वजह से तुम्हे उसके साथ नहीं भेज रहा हूँ। डील पाने के लिए तुम्हे उसको चूमने की कोई जरुरत नहीं हैं। तुम उसको मना बोल सकती हो। जैक और तुम्हारे बीच एक निजी मसला हैं , इसको डील से मत जोड़ो। ” मैं: “फिर ठीक हैं, मैं उसके साथ जाना चाहती हु।” मेरी बात सुन राहुल सदमे में आ गया। उस पार्टी की रात मैंने उसको चूमने से मना कर दिया था और आज मेरी बातों से उसे लगा कि मैं जैक को चूमने की इजाजत देने वाली थी। एक दिन रूही उसको छोड़ गयी और अब जब वो मुझमे रूही की झलक देख रहा हैं तो मैंने भी उसको कैसे छोड़ दिया था। राहुल की आँखों में एक दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था। कहानी आगे जारी रहेगी..! [email protected]

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