दहेज की कार में सलहज की चूत सेवा
मेरे प्रिय दोस्तो, अपने मेरी पिछली कहानियों को बहुत सराहा है।
पूरे 38 महिलाओं की चूतसेवा करने के बाद मैं अपने आपको को बहुत खुशनसीब समझता हूँ। शादी-शुदा महिलायें हमेशा मुझमें दिलचस्पी दिखाती रही हैं।
मैं बताना चाहूंगा कि मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूँ और सभी महिलाओं की भावनाओं का सम्मान भी करता हूँ।
यह कहानी मेरी शादी के समय की है। बात उस दिन की है.. जिस दिन मेरा तिलक था।
मेरी ससुराल से बहुत लोग आए थे, मेरी सालियाँ और साले की बीवियाँ भी आई थीं।
मेरे साथ नाचने-गाने व डिनर करने के बाद सभी रिश्तेदार घर जाने लगे थे।
मेरे एक साले की पत्नी जिसका नाम कविता था.. अकेले आई थी। वो हमारे शहर लखनऊ की थी, साले साहब शहर के बाहर थे।
सभी लोगों को घर छोड़ने के बाद मुझे उन्हें घर छोड़ने जाना था।
तो ससुराल से मिली कार से ही उन्हें छोड़ने चला गया।
भाभी जी की उम्र 34 साल की थी.. लेकिन देखने में वो 27 की लगती थीं।
वो एक प्रोफ़ेशनल कॉलेज की अध्यापिका थीं।
मेरा साला एक एमएनसी में मैंनेजर है.. और ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था।
कार में बैठते ही मुझे एक बार उनकी आँखों में एक शरारत सी नजर आई.. उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।
कार में मैंने उनसे पूछा- बहुत खुश दिख रही हो भाभी.. क्या कोई ख़ास बात है?
भाभी- खुश क्यों नहीं होऊँगी.. जब तुम्हारे जैसा इन्सान मेरे साथ हो।
मैं थोड़ा सोच में पड़ गया कि ये क्या कहना चाहती हैं।
मैंने पूछा- आपका क्या मतलब है.. मैं समझ नहीं पाया।
भाभी- हाँ जी.. तुमने क्या सोचा कि मेरी कुछ समझ में नहीं आएगा कि तुम क्या हो.. जो लड़का कई औरतों का चहेता हो.. वो तो कुछ खास ही होगा।
मैंने अनजान बन कर पूछा- मैं समझा नहीं.. आप क्या कह रही हो?
भाभी ने अपना हाथ मेरे उस हाथ पर रखा जिससे मैंने गेयर पकड़ा हुआ था। उनके छूते ही मैंने कहा- आपका हाथ कितना गर्म है।
उन्होंने कहा- तुम्हारी भाभी भी तो गर्म है।
मैं समझ चुका था कि ये अपनी सेवा कराना चाहती है।
तब तक हम उनके अपार्टमेन्ट के बेसमेंट में बनी कार पर्किग में पहुँच गए थे।
कार को बन्द करके.. उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए.. मैंने अपना दूसरा हाथ उनके हाथ पर रख दिया।
वो मेरी तरफ़ बढ़ी.. तो मैंने भी उनका स्वागत खुली बाँहों से किया, उन्होंने भी बहुत कस कर अपनी बाँहों में मुझे बांध लिया।
उनकी जुल्फों से एक अजीब सी मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। मैंने अपना हाथ भाभी की चिकनी कमर में डाला और प्यार से सहलाने लगा।
वो मेरे कान को अपनी जीभ से सहलाने लगी।
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फ़िर अचानक उनका चेहरा मेरे चेहरे के सामने आ गया और हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूमने लगे।