घर में चुदाई का मज़ा लिया
हाय दोस्तो.. आज जो मैं आपको कहानी बताने जा रहा हूँ.. यह मेरी रियल स्टोरी है..
बात तब की है.. जब मैं 12वीं में पढ़ता था.. तब मेरी जवानी छलकने लगी थी। मेरी एक बहन है.. वो भी मस्त माल बन चुकी थी.. वो भी कॉलेज़ में पढ़ती थी.. उसका नाम ज्योति है।
मेरी मॉम और डैड दोनों सरकारी जॉब में हैं।
कमसिन जवानी की उम्र में ही उसके मम्मे काफ़ी बड़े हो गए थे। घर में वो ज्यादातर टी-शर्ट और पजामा पहन कर ही रहती थी। उसकी चूचियां एकदम उठी हुई रहती थी क्योंकि टी-शर्ट के अन्दर वो ब्रा नहीं पहनती थी। जिससे उसके मम्मे पूरे सामने की तरफ उठे हुए दिखते थे.. बहुत बड़े-बड़े खरबूज जैसे लगते थे। मेरा दिल करता था कि बस लपक कर पकड़ लूँ।
मैं रोज उसके नाम की मुठ मारा करता था।
अब तक मुझे सेक्स के बारे में बहुत कुछ पता चल गया था। रोजाना मुठ मार-मार कर मेरा लंड भी काफ़ी लंबा और मोटा हो गया था। मैं बस यही सोचता था कि काश ज्योति को एक बार मैं नंगी देख लूँ। मैंने बहुत ट्राई किया.. लेकिन देख नहीं पाया।
एक बार हमारे मामा जी के लड़के की शादी थी.. तब हमारे दोनों के एग्जाम चल रहे थे.. इस कारण हम दोनों ही शादी में जा नहीं पाए। मॉम-डैड भी एक दिन के लिए ही गए.. वो सुबह जल्दी चले गए थे.. उन्हें शाम को वापिस आना था।
सुबह हम दोनों भाई-बहन एग्जाम देने के लिए स्कूल चले गए.. लेकिन जब वापिस आए.. तो बहुत तेज बारिश हो रही थी।
हम वापिस आते-आते पूरी तरह से गीले हो गए.. वाइट शर्ट गीली होकर ज्योति के बदन के साथ चिपक गई थी। अन्दर उसकी ब्रा साफ दिखाई दे रही थी।
घर पहुँच कर हमने कपड़े चेंज कर लिए। मेरा लंड पूरा खड़ा था.. मैंने जानबूझ कर अपना अंडरवियर निकाल दिया और वैसे ही पजामा पहन लिया.. जिसमें से मेरा लंड साफ फूला हुआ दिखाई दे रहा था। ज्योति ने भी अपनी ब्रा उतार दी थी और टी-शर्ट और पाजामा पहन लिया था।
हम दोनों खाना खाकर टीवी देखने लगे.. ज्योति की नज़र बार-बार मेरे खड़े लंड पर जा रही थी।
थोड़ी देर के बाद मैंने टीवी बंद कर दिया और ज्योति सो गई।
उसकी गाण्ड मेरी तरफ थी.. मैंने पीछे से उसकी गाण्ड के ऊपर हाथ रखा और दबाने लगा.. ज्योति ने कोई हरकत नहीं की तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।
फिर धीरे-धीरे मैंने उसकी गाण्ड पर अपना लंड लगाया.. मुझे बहुत मज़ा आने लगा। मैंने अपने पजामे से लंड बाहर निकाल लिया और पूरे ज़ोर से उसकी गाण्ड पर लगाने लग गया।
अचानक उसकी नींद खुल गई और वो उठ कर बैठ गई। मैं एकदम से बहुत डर गया.. लेकिन वो कुछ नहीं बोली.. बल्कि मेरे लंड को बहुत गौर से देखने लगी।
मैंने ज्योति को लंड पकड़ने के लिए कहा तो वो शर्मा गई, उसने अपने दोनों हाथ अपने मुँह पर रख लिए।
मैंने धीरे से उसके हाथ को पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया और हिलाने लगा।
एक हाथ से मैं उसके मम्मों को दबाने लगा..