पहले प्यार की मिठास
हेलो मित्रो, मेरा नाम नरेन्द्र है, मेरी लंबाई 5’7″ है, मैं बंगलुरु का रहने वाला हूँ।
यह मेरी पहली कहानी है, बात आज से 4 साल पहले की है, मैं एक बार अपने मामा के घर गर्मियों की छुट्टी में गया हुआ था।
मेरे मामा के घर में तीन लोग हैं, मेरे मामा, मामी और उनकी एक बेटी श्रुति (नाम बदला हुआ है)।
श्रुति, मेरे मामा की बेटी, के बारे में क्या बात करूँ… वो बिल्कुल एक परी के जैसी दिखती है।
मैं बचपन से उसको पसंद करता था लेकिन कभी बोल नहीं पाया, डर था कि कहीं वो बुरा ना मान जाए। जब वो फ़्रॉक पहना करती थी तब फ्राक में क्या लगती थी, वो ही मेरा पहला प्यार थी।
हाँ तो, जब मैं अपने मामा के घर में पहुँचा तब उन लोगों ने मेरा अच्छे से स्वागत किया।
मैंने मामा से पूछा- श्रुति कहाँ है?
तो उन्होंने मुझको बताया- वो कॉलेज गई है, शाम को 5 बजे तक आएगी।
वास्तव में मुझको मामा मामी से कोई मतलब नहीं था, मैं तो बस श्रुति को मिलने आया था।
शाम को श्रुति आ गई।
मैं सोफे पर बैठा था, उसने मुझको देखा और हेलो बोला।
मैंने भी हेलो कहा।
वो जानती थी कि मैं उसको प्यार करता हूँ।
इस बार मैं सोच कर आया था कि मैं उसको बता दूँगा।
शाम को जब सोने का समय हुआ तो मामा ने मुझसे कहा- तुम श्रुति के कमरे में सो जाना!
मैंने मना किया तो श्रुति ने हंस कर कहा- मैं तुमको मार नहीं डालूंगी।
हम लोग हँसने लगे।
रात को बात करते करते हम दोनों सो गये।
श्रुति के कमरे में बाथरूम भी था।
सुबह मैं देर तक सोता रहा, श्रुति नहाने गई हुई थी पर तौलिया ले जाना भूल गई थी। उसने सोचा कि नरेन्द्र तो सो रहा है, तो वो नंगी ही बाहर तौलिया लेने आ गई।
ज़रा सी आवाज़ हुई तो मई जाग गया।
वो मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी हुई थी।
मैंने तुरंत आँखे बंद कर ली और कहा- जल्दी सामने से जाओ।
नाश्ते के समय वो ओर मैं एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे और वो कॉलेज चली गई।
मैं रात का इंतजार करने लगा।
रात को मैंने अपने बिस्तर पर पानी गिरा दिया और श्रुति से पूछा- अब क्या करू मैं? मैं आज ज़मीन में सो जाता हूँ।
श्रुति ने बोला- नहीं नरेन्द्र, तुम मेरे साथ बिस्तर पर सो जाओ।
मैंने मना किया तो वो फिर से बोली- मैं तुमको मार नहीं डालूंगी।
हम दोनों हँसने लगे।
उसके मन में कुछ भी ग़लत नहीं था पर मेरा लॅंड फुंफकार मारने लगा।
रात को हम दोनों बातें करते रहे और वो सो गई परन्तु नींद मुझसे तो कोसों दूर थी।
मैंने श्रुति को आवाज़ लगाई तो उसने कोई भी जवाब नहीं दिया।
मेरे दिमाग़ में सिर्फ़ उसकी बदन की खुशबू थी जो मैं महसूस कर रहा था।
मैंने धीरे से उसके होंठों पर चुम्बन किया… उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं की।
मेरी हिम्मत बढ़ गई।
मैंने फिर से चूमना शुरू किया, उसके होंठों को चूसता रहा।
वो भी जाग चुकी थी, धीरे धीरे उसने भी चुम्बन में सहयोग किया।