सहेली की समस्या
यह पत्र रूपा वर्मा ने कामिनी सक्सेना को लिखा दोनों की एक सहेली मालिनी की समस्या के बारे में :
प्रिय कामिनी,
मैं रूपा वर्मा हूँ, मालिनी की रूम-मेट, मैं उसी के कॉलेज से बीएससी बायलोजी कर रही हूँ।
आज काफ़ी सुबह से उठकर मालिनी नेट पर बैठी थी, मैंने उससे पूछा कि कोई परेशानी है क्या तुझे?
तो फिर उसने सब बताया और आपके बारे में भी बताया।
मालिनी गांव की सीधी सादी एक लड़की है जो इन्दौर आई है पढ़ने के लिये, वो देखने में भी काफ़ी अच्छी है। उसकी फ़िगर ३२ २४ ३४ होगा करीबन। यहां इन्टरनेट पर बैठ कर उसकी जवानी मचल उठी है, जिसकी वजह से उसे परेशानियाँ हो रही हैं।
अब जवान लड़की की चूत है, आग तो लगेगी ही उसमें, उसका तो कोई क्या कर सकता है !
मैं उसके साथ ही सोती हूँ और मैंने उसे कई बार तड़पते हुए महसूस किया है, वो यह समझती है कि मैं सो रही हूँ।
वो अकसर करवट बदल बदल कर अपनी योनि पर सलवार के ऊपर से हाथ फ़ेरती है, रज़ाई डाल लेती है ऊपर से, और कम से कम रात में ६ या ७ बार बाथ रूम जाती है।
आप समझ सकती है कि क्या करने पर उसकी बेचैनी दूर होगी पर उसे पता ही नहीं कुछ और प्यासी ही लौट आती है शायद।
ऐसे में मेरी चूत में भी खुजली होने लगती है, पर मैं कंट्रोल कर लेती हूँ। मै भी अपनी योनि में उँगली करती हूँ कभी कभी !
अकसर नहाने से पहले या सुबह पहले पेशाब करने के बाद, मेरी झिल्ली अभी फ़टी नहीं है पर मैं इतना अन्दर कर लेती हूँ कि मजा आए और शान्ति मिल जाये, पर मालिनी इतना नहीं कर पाती।
ना जाने क्यूँ अब यह तो उसकी चूत देखकर ही पता चलेगा कि क्या प्रोबलम है, पर आज उसने मुझे मना कर दिया चूत दिखाने को, पता नहीं क्यूँ, वो बोली कि नहीं मैं पहले कामिनी जी से बात करूंगी।
और फिर मैने डाक्टर का कहा तो उसने मना कर दिया बोली कि नहीं, मैं डाक्टर के सामने नंगी नहीं होना चाहती हूँ !
अब आप तो समझ ही सकती है कि कोई लड़की कितना भी कर ले, लण्ड का मजा तो लण्ड से ही मिलता है, और वो हमको शादी से पहले नहीं मिलेगा।
वैसे मैं तो बायो की स्टूडेन्ट होने के कारण ये बोल सकती हूँ कि जब तक चूत की झिल्ली नहीं फ़टेगी तब तक पूरा पूरा सेटिस्फ़ेक्शन कभी नहीं होगा क्यूँकि योनि में जो आग लगती है जवानी में, वो अन्दर झिल्ली के पीछे लगती है। जब तक झिल्ली के पीछे तक उंगली य लण्ड नहीं जाता तब तक चूत प्यासी ही रहती है चाहे कोई ऊपर से कितना भी फ़िन्गर कर ले।
झिल्ली यानी हायमन एक पर्दा होता है, चमड़ी या स्किन कह लो, जिसमे बहुत छोटे छोटे छेद होते हैं या एक थोड़ा बड़ा भी हो सकता है,
इन छेदों से ही मासिक-धर्म का खून और चूत का पानी आता है, पर झिल्ली इसके बीच में एक रुकावट का काम करती है।
एक बार झिल्ली फ़ट जाये तो फ़िर सब खुल कर फ़्लो होता है, नहीं तो रुक रुक कर आता है।