छवि की बेवफाई
प्रेषिका : रिया सैनी
हाय दोस्तो, मेरा नाम इशा है, मैं लुधियाना में रहती हूँ। यह मेरे एक दोस्त की कहानी है। जैसा कि हम अन्तर्वासना के नियमित पाठक हैं तो मेरे दोस्त ने उसकी और छवि की कहानी आपके सामने रखने को कहा।
अब आप सोच रहे होंगे न कि यह छवि कौन है, तो मैं आपको बता दूँ मैं, रजत और छवि तीनों एक ही स्कूल के विद्यार्थी थे।
छवि का रजत के साथ चक्कर था। छवि इतनी सुन्दर तो ना थी पर उसका फिगर देख के मुझे भी जलन होती थी, उसकी उम्र उस समय 19 साल थी। उसके मम्मे तो एकदम गोल-गोल और 34 इन्च के थे। रंग एकदम गोरा, लंबे बाल, गोल-गोल चूतड़ !
रजत उसे शुरु से बहुत पसंद करता था और हमेशा उसे चोदने के बारे में ही सोचता था। उस समय हमारी आपस में बहुत अच्छी बनती थी, हमारे +2 के इम्तिहान ख़त्म हुए थे, हम तीनों ने मूवी का कार्यक्रम बनाया पर माँ के बीमार होने के कारण मैं जा ना पाई और मैंने उन दोनों को जाने को कहा।
उसके आगे क्या हुआ, वो सब मैं रजत ने जैसा बताया, उसी तरह लिख रही हूँ। इस कहानी में कितनी सच्चाई है, यह आप सब खुद बताना क्योंकि मैं सबकी तरह पहले कुछ नहीं कहूंगी।
रजत और छवि सुबह दस बजे वेवज सिनेमा गए। रजत ने दो टिकेट पहले ही बुक करा ली थी। उसने जान बूझ कर किसी इंग्लिश पिक्चर की टिकेट ली। पिक्चर शुरू हो गई, ज्यादा लोग नही थे वहाँ, इसलिए रजत ने अँधेरे का खूब फायदा उठाना शुरू कर दिया। पहले तो दोनों में प्रगाढ़ चुम्बन हुआ, छवि गर्म हो गई, दोनों एक दूसरे के कामांगों पर हाथ फिराने लगे। इतने में छवि ने रजत के लंड को पकड़ लिया और मसलने लगी।
तभी रजत ने भी मौके का फायदा उठाते हुए छवि की लेगिंग्स में हाथ डाल दिया। इतने में गार्ड विजिट पर आ गया और दोनों एक दूसरे से अलग हो गए।
इतने में रजत ने छवि को बड़े प्यार से कहा- शोना हम कहीं और चलें, जहाँ सिर्फ हम दोनों हों बस, और कोई न हो !
शायद छवि के मन में भी चोर था तो उसने जवाब में कहा- शोना तो ‘पूरा अपनी जान का है, तो जहाँ वो ले जाना चाहे ले जाये !’
इतने में दोनों उठे और बाहर आ गए, रजत उसे अपने फार्म हाउस में ले गया जो लुधियाना से थोड़ी ही दूर जगराओं में है। वहाँ उन दोनों के सिवा कोई नहीं था।
अपने कमरे में ले जाकर उसने दरवाजा बंद कर दिया। उसके बाद वो बिस्तर पर उसके साथ बैठ गया और बातें करने लगे। बातें करते करते उसने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसके होंठों पर चूमने लगा। यह चुम्बन 15 मिनट तक चलता रहा और फिर उसकी छाती पर हाथ फिराना शुरु कर दिया।
उसने विरोध नहीं किया और धीरे धीरे उसके पेट से होता हुआ उसकी चूत को लेगिंग्स के ऊपर से हाथ सहलाने लगा।
अब रजत के होंठ उसके होंठों को चूम रहे थे और एक हाथ उसके वक्ष पर और एक हाथ उसकी चूत पर था।