गंधर्व विवाह
प्रेषक : अन्नू
निशा मेरी एक मात्र लंगोटिया दोस्त है।
एक दिन की बात है, जब मैं निशा के बुलाने पर उसके घर गया तो उसके घर वाले कहीं बाहर गए हुए थे। घर में हम दोनों ही अकेले थे, उसके जान-पहचान के कोई बाबा उसके घर पर आये हुए थे।
निशा बोली- ये बहुत ही अच्छी जन्म-पत्री देखते हैं। तुम अपनी जन्मपत्री इन्हें बताओ !
उसके कहने पर मैं मान गया और झट से अपनी जन्मपत्री बना कर उन्हें दिखा दी।
बाबा मेरी पत्री देख कर बोला- तुम एक वर्ण शंकर में हो।
तो निशा ने पूछा- इसका क्या मतलब बाबाजी?
तो वो बोले- इसका मतलब यह है कि इस जातक के लिंग पर ३ तिल हैं, ये जातक विशेष होते हैं, इनमें स्त्री को वश में रखने की विशेष क्षमता होती है, इनकी दो शादियाँ होती हैं।निशा ने मुझसे पूछा- क्या यह सच है?
मैंने कहा- मुझे नहीं मालूम !
तो बोली- जाओ और तुम यह देखकर बताओ।
मैं बाथरूम में गया और देखा तो सुचमच मेरे लिंग पर तीन तिल थे।
मैंने जाकर उसे बताया- सही है।
मुझे भी आश्चर्य हुआ, जो बात मुझे नहीं पता थी, आज वो एक अनजान बाबा ने मुझे बताई थी।
फिर वो बाबा बोला- आप किसी भी पराई औरत से सावधान रहें और हर किसी से सेक्स सम्बन्ध स्थापित न करें, नहीं तो इन तिल का मतलब ख़त्म हो जायेगा, इसका विशेष ध्यान रखें।
और चाय नाश्ता करके पचास रुपए की दक्षिणा लेकर बाबा चलता हुआ।
अब निशा ने जल्दी ही दरवाजा बंद किया और मेरे पास आकर बोली- जरा मैं भी तो देखूँ मेरे यार के लिंग का तिल !
और वो झुक गई, मेरी निकर की ज़िप से और मेरा लिंग बाहर निकाल कर ध्यान से देखने लगी और जोर जोर से चूमते करते हुए बोली – क्या बात है। तब ही तो मैं कहूँ क्या आलिशान लौड़ा है, मेरी चूत के लिए तो एकदम फिट है।
मैं बोला- बाबा ने परस्त्रीगमन का मना बोला है न, तुम अब मुझसे दूर रहा करो।
तो वो बोली- एक उपाय है।
मैं बोला- वो क्या?
“हम दोनों गंधर्व विवाह कर लेते है।”
मैंने पूछा- वो कैसे?
तो निशा बोली- पुराने ज़माने में जब राजा महाराजा शिकार खेलने जाते थे तो कोई अपनी रानी को तो ले नहीं जाते थे, जंगल में जो भी सुन्दर औरत मिलती थी, तो उसे अपनी संगिनी बना लेते थे और अपनी कोई निशानी दे देते थे। ये विवाह कुछ समय के लिए ही होता है।
मैंने कहा- कोई जरूरी है?
तो वो बोली- हाँ, मुझे तुम्हारा साथ जो चाहिए। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
और वो अन्दर कमरे में गई और बन संवर कर दुल्हन के लिबास में आई तो मैं उसे देखता ही रह गया, क्या खूब लग रही थी, टिपिकल मराठा लड़की !
उसके हाथ में एक सिन्दूर की डिबिया थी, बोली- लो मेरी मांग भरो ! आज हम गंधर्व विवाह कर रहे हैं। हम दोस्त सही, पर कुछ समय के लिए हम पति-पत्नी बन कर रहेंगे।
और मैंने निशा की मांग में सिन्दूर भर दिया।