कोमल की कोमलता
मेरा नाम लोकेन्द्र शर्मा शर्मा है मैं अभी दिल्ली मैं रहता हूँ। मैं एक 5’7″ इंच लंबा तगड़ा और सुंदर जवान हूँ। मेरी उमर 22 साल और मैं उत्तर प्रदेश से हूँ।
यह मेरी एक सच्ची कहानी है।
बात उस समय की है जब मैंने क्लास १२ की ही थी और पुलिस की नौकरी की तैयारी कर रहा था।
जब मेरा टेस्ट के लिए नम्बर आया तो मैं खुश हो गया अब मुझे जाना था। मेरे पास एक दोस्त मनोज का फोन आया कि वो भी उसी भरती में जा रहा है तो उसने मुझे अपने घर आने के लिए बोला। उसका घर मेरे घर के करीब ३० किलोमीटर की दूरी पर था।
मैं बस-स्टैंड पर उतरा ही था कि मेरा दोस्त मनोज स्कूटर लिए वहाँ खड़ा था मेरे इन्तज़ार में। मैं उसके घर पहले कभी नही गया था। हमें रात हो गई थी घर पहुचने में।
जैसे ही हम गेट पर आए तो मनोज बोला- तू अंदर चल ! मैं स्कूटर लगा कर आता हूँ।
बिजली न होने से अन्दर घर में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। अचानक मुझे आवाज सुनाई दी- भैया नमस्ते !
वो कोमल थी, मनोज की बहन।
मैंने हाथ आगे बढ़ाया तो मेरा हाथ उसके छाती से टकरा गया।
मैं डर गया और जल्दी से अपना हाथ पीछे हटाया और सॉरी बोला।
वो कुछ नहीं बोली।
अंधेरे के कारण हम एक दूसरे का चेहरा नहीं देख पा रहे थे।
हम रात को सो गये। सुबह जब मैं जगा तो देखा कि मनोज बिस्तर पर नहीं है।
तभी कोमल चाय लेकर आई।
उसने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुराने लगी।
मैंने देखा कि मेरा लंड मेरे अंडरवीयर में तना खड़ा है।
मैंने जल्दी से चादर अपने ऊपर कर ली।
कोमल मेरे पास बिस्तर पर आ गई और बोली- आज चेस्ट पर हाथ नहीं लगाओगे?
उसके घर में उसकी माँ और उसका मनोज ही थे। माँ बीमार थी तो वो बिस्तर पर ही थी।
उसने मेरे लण्ड को हाथ से पकड़ लिया।
मुझे तो जैसे करंट लग गया हो। उसने मेरे गाल पर चुम्मी ली और चली गई।
तभी मनोज ज़िम से आ गया और बोला- लोकेश भरती आज नहीं कल होगी। आज तो तू हमारे घर पर ही रुक जा !
मैं मान गया। वो मार्केट जा रहा था, बोला- तू चलेगा?
मैंने कहा- नहीं !
तो बोला- तू यहीं रुक ! मैं आता हूँ।
कोमल तो कोमल ही थी, क्या फ़ीगर था उसका ! क्या बताऊँ यार जवाब ही नहीं। अब तो मैं भी उसे चोदने की सोच रहा था। तभी
कोमल कमरे में आई और पूछने लगी- क्या लोगे खाने में?
मैंने कहा- तुम्हें ही खा लूंगा !
तो खाओ ना !
मैंने उसके होठों पर जोर से किस किया और उसने मुझे।
अब तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटा लिया और उसके बदन को पागलों की तरह चूमने लगा।
मैंने उसके और उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए।
उसके चूचुक तने हुए थे।
मैंने उन पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा। वो पागल के जैसे आ आआऽऽ आ सीऽऽऽ ईईईऽऽ ईईईऽऽ ईईई क्या कर रहे हो ! बोल रही थी।
एक हाथ मैं उसकी बुर पर ले गया और सहलाने लगा। उसमें से कुछ पानी जैसा चिपचिपा सा निकल रहा था।
उसने मेरे लंड को मुँह में लिया और लोली-पॉप के जैसे चूसने लगी।