मेरा प्यार दीप्ति
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को विक्रम का प्यार भरा नमस्कार। बड़ी कोशिशों के बाद मैं अपनी पहली कहानी आपके सामने लाया हूँ। दोस्तों मेरा नाम विक्रम है और मैं भरतपुर राजस्थान का रहने वाला हूँ।
मेरी उम्र इक्कीस साल है, कद 5’11” है। बात पिछले वर्ष की है जब मैं बी. टेक प्रथम वर्ष में था। दीप्ति मेरे पड़ोस में रहती है, दिखने में वो बहुत ही सुन्दर है, हमेशा हँसता हुआ चेहरा, गोरा रंग, बड़ी-बड़ी आँखें, और 5 फुट 7 इंच कद है। उसकी फ़िगर 31-25-34 है और उम्र में मुझसे 2 साल छोटी है।
मेरी माँ उसे बहुत पसन्द करती है, इसलिए वो अक्सर हमारे घर आती रहती थी। हम छत पर भी मिलते थे। दिन गुज़रते रहे और कब हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई, वो मुझे मना नहीं कर पाई, क्योंकि वो पहले से ही चाहती थी। हम मज़बूरी में ज़्यादातर फोन पर बातें करते थे। साल का आख़िरी दिन आया। हम फोन पर बातें कर रहे थे, वो और उसके घरवाले कुछ देर पहले ही बाहर से आए थे, इसलिए जल्दी सो गए। मेरे घरवाले भी सो चुके थे।
बातों-बातों में मैंने पूछा “क्या, मुझे नए साल का उपहार मिलेगा?
पहले तो उसने मना कर दिया, फिर मान गई। रात को ठीक १२ बजते ही मैं उसके घर पहुँच गया, उसने दरवाज़ा खोल। वो मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी, शायद शरमा रही थी… उस रात उसके चेहरे पर एक नई खुशी थी।
उसने दरवाज़ा लगाया और मेरे सीने से चिपक गई और बोली “हैप्पी न्यू ईयर मेरी जान…” पहले तो मैं थोड़ा डर गया, फिर उसने बिस्तर पर बिठा दिया। हम फोन पर कई बार सेक्स कर चुके थे, पर हकीक़त में कभी मौक़ा नहीं मिला था, सिर्फ चूमना छोड़कर।
अब भी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ करने की। बस दोनों बातें कर रहे थे प्यार भरी! एक-दूसरे को निहार रहे थे, एक-दूसरे के आगोश में, बिना कुछ किए ही दोनों तड़प रहे थे। मैं उसके पैरों पर सिर रख कर लेटा हुआ था, वो मेरे बालों और होंठों पर हाथ फेर रही थी।
आख़िरकार मेरे सब्र का बाँध टूट गया, और मैं उस पर टूट पड़ा। उसे चूमने लगा, वो भी यही चाहती थी, इसलिए मेरा साथ देने लगी। हम दोनों की हालत ख़राब हो रही थी… उस वक़्त दिमाग ने काम करना बन्द कर दिया…।
सच में क्या होंठ थे…! एकदम गुलाबी और रसीले… मज़ा आ गया, फिर मैं उसे गर्दन पर चूमने लगा। वो मस्त होने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी… आह… उउह्ह ह्हह… शह्हहह… उसकी सिसकारियाँ मुझमें जोश भर रहीं थीं।
बोलने लगी “विक्रम प्लीज़ हट जाओ…” वरना मैं पागल हो जाऊँगी, पर मैं कहाँ मानने वाला था।
थोड़ी ही देर में हम नंगे हो गए…। कसम से, क्या चूत थी… एकदम गुसाबी। मेरा एक हाथ उसकी चूचियों पर चल रहा था और दूसरा उसकी चूत पर। चूत भट्ठी हो रही थी और पूरी गीली हो चुकी थी… उसकी साँसें तेज़ और गरम थीं जो मुझे महसूस हो रही थीं।