कितने लोगों के नीचे मेरी माँ-1
नमस्कार दोस्तो, आज मैं आपको एक हकीकत बताने वाला हूँ जिसे मैंने कई सालों से अपने दिल में ही छिपा रखा है। यह बात उन कुछ सालों की है जब मैंने बचपन से जवानी में कदम रखा।
मेरा नाम विकास है, मेरे घर में माँ-पिताजी के साथ मेरे एक छोटी बहन रहती थी जो मुझसे तीन साल छोटी थी।
मेरे पापा की ड्यूटी शिफ्ट में होती थी तो महीने के 15 दिन उनकी रात की ड्यूटी होती थी। बात उन दिनों की है जब मैं आठवीं कक्षा में था और मेरी बहन छटी में थी।
हमारा घर थोड़ा अलग-थलग था क्योंकि उस समय हमारे मकान के आस पास कोई घर नहीं बना था तो हमारे में बिजली भी नहीं थी।
हमारे घर एक बड़े भैया आते थे जो कॉलेज में पढ़ते थे और हमें ट्यूशन देते थे, उनका नाम कमल था। वो तो मुझे बाद में पता चला कि वो क्या देते थे। वे मुझे और मेरी बहन को बहुत डरा कर रखते थे तो हम चुपचाप पढ़ने में लग जाते थे।
मेरी माँ, जिसका नाम मधु था, उनकी उम्र 30 साल से भी कम होगी क्योंकि उनकी शादी बहुत कम उम्र में ही हो गई थी, मगर उन्होंने अपनेआप को खूब संवार कर रखा था, उनकी बदनाकृति 34-30-36 होगी, खास बात यह थी कि उनकी गांड बहुत चोड़ी थी जिसे हर कोई मारना चाहता था।
एक दिन जब मेरे पिताजी की रात की ड्यूटी थी तो पिताजी खाना खाकर सात बजे चले गए और हम दोनों भाई-बहन अपनी पढ़ाई करने लगे।
कुछ समय बाद हमारे दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी, तो मेरी माँ ने दरवाजा खोल दिया और दरवाजे खुलते ही कमल भैया अन्दर आ गए, कमल की उम्र करीब 24 वर्ष होगी और आते ही उन्होंने हमें खुद ही पढ़ने को बोल दिया, क्योंकि मेरी माँ रसोई में थी, वो रसोई में ही चले गए।
थोड़ी देर के बाद मुझे मेरे माँ की आवाज सुनाई दी- अभी नहीं प्लीज़!
तो मैं आहिस्ता से रसोई में गया और छिप कर देखने लगा। कमल ने मेरे माँ की साड़ी पीछे से उठा रखी थी और वो उनकी गाण्ड पर अपना हाथ फेर रहा था। क्योंकि मुझे तब तक ज्यादा यह सब पता नहीं था तो मैं उनके सामने अंदर चला गया और बोला- मेरे मम्मी को छोड़ दो!
मुझे देखते ही कमल ने माँ की साड़ी छोड़ दी और मेरे मम्मी बहाना बनाते हुए बोली- बेटा, मेरे घुटने में दर्द हो रहा था, तो ये उसकी मालिश कर रहे थे।
कुछ देर बाद कमल ‘रात में आता हूँ!’ कह कर चला गया और मेरी माँ ने हम लोगों को खाना खिला कर सुला दिया। लेकिन क्योंकि मुझे पता था कि कमल रात में आयेगा तो मैं सोया नहीं।
रात में करीब 11 बजे फिर से दस्तक हुई, मेरी माँ ने चुपके से उठ कर दरवाजा खोला और कमल धीरे से अन्दर आ गया।
अंदर आते ही उसने मेरे माँ से कहा- आज तो बाल-बाल बच गए!
और मेरी माँ को गले से लगा लिया। मेरी माँ उसे अपने से हटाते हुए बोली- रुको ना! पहले तसल्ली कर लूँ कि ये शैतान सोये हैं या नहीं!
और हमें देखने आई। मैंने सोने का नाटक कर लिया और वो निश्चिंत हो गई।