पापा मम्मी की चुदाई देखी
दोस्तो, यह बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में पढ़ता था। मेरे पिताजी महीने में एक बार 3-4 दिन के लिए अपने गाँव जाया करते थे। लेकिन जब वे घर आते थे, तब वे मम्मी को हर बार बहुत खतरनाक तरीके से चोदा करते थे।
हम किराये के कमरे में रहा करते थे इसलिए दो ही कमरे ही थे, एक ही कमरे में हम तीनों सोया करते थे। मैं पापा के साथ सोया करता था।
एक बार गर्मी में पापा गाँव गए और तीन दिन बाद वापस आये। मुझे पूरी उम्मीद थी कि पापा मम्मी को चोदेंगे। किशोरावस्था में होने के कारण मेरी इसमें दिलचस्पी और बढ़ गई थी।
पापा मम्मी और मैं खाना खाकर रात साढ़े दस बजे सोने लगे। मुझे नींद तो आ नहीं रही थी। मैं यही सोच-सोच कर खुश हो रहा था कि आज मुझे पापा-मम्मी की चुदाई देखने मिलेगी।
तकरीबन 2 घंटे ऐसे ही बीत गए। मेरी आँख हल्की लग रही थी। पापा ने मेरी तरफ करवट करके मेरे ऊपर हाथ रख लिए। तकरीबन 15 मिनट बाद मेरे कानों में चूड़ियों के खनकने की आवाज सुनाई पड़ी। मेरी नींद खुल चुकी थी।
दरसल पापा मेरे पापा मेरी मम्मी के हाथ में अपना हाथ फेर रहे थे।
हमारे बिस्तर बिल्कुल सटे हुए थे। इसलिए पापा को भी कोई दिक्कत नहीं हुई। पाँच मिनट बाद पापा अपने बिस्तर से मम्मी के बिस्तर में जा पहुँचे और मम्मी के पीठ की चुम्मियाँ लेने लगे।
मैं यह सब देख रहा था लेकिन मैंने अपनी आँखें अधखुली कर रखी थी इसलिए मम्मी, पापा को कोई शंका नहीं हुई।
धीरे से पापा मम्मी के दूध दबाने लगे। मम्मी के मुँह से आवाजें निकलनी शुरू हो गई थी। पापा ने धीरे से माँ का ब्लाउज खोल दिया और धीरे से ब्रा भी खोल दी। अब मम्मी को देख कर मैं पागल हो रहा था।
पापा ने इतना तेजी से मम्मी के दूध दबाए और चूसे कि मम्मी ‘आ… आहा, अआ…हह्हा …आआह्ह’ करने लगीं।
पर मम्मी जल्दी ही शांत हो गईं क्योंकि मैं बगल में सो रहा था।
पापा ने धीरे-धीरे मम्मी की साड़ी भी उतार कर किनारे रख दी। और पेटीकोट से ऊपर से ही मम्मी के चूतड़ दबाने लगे। मम्मी ने खुद ही अपनी पेटीकोट उतार कर फेंक दिया। मम्मी अब ब्रा और पैंटी में थी।
मेरे लिए यह अनुभव स्वर्ग से कम नहीं था। पापा ने उठकर मम्मी के पाँव सहलाने शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करने लगे। मम्मी अपना पाँव हटाने लगी।
पापा उनकी पायल को चूमने लगे और हाथ से पाँव पर मालिश करने लगे। पापा धीरे से मम्मी की पैंटी की तरफ पहुँचे और उसे उतार कर किनारे रख दी।
अपना लंड जो इतना खड़ा हो चुका था कि चड्डी फाड़ रहा था मम्मी की चूत में डाल दिया, मम्मी सिसकार उठीं- अआः आआ… आआहः… अहह… हाहा आआहह्ह… हा!
मम्मी ने मेरे जाग जाने के डर से अपनी आवाजें बंद कर ली। पापा चुदाई की गति तेज करने लगे। पूरे पलंग में जैसे भूकंप आ गया हो।