पानी भरने के बहाने
प्रेषक – रोहित
तब मैं कुछ काम से उनके घर में चला गया, मैंने देखा कि वह उनकी बच्ची को दूध पिला रही थी। मैं देखता ही रह गया और उन्होंने भी मुझे देखा था पर अनदेखा कर दिया। मैं समझ गया औरर वहाँ से निकल गया, पर मैं फिर से वापिस आया तो वह लेट कर बच्ची को सुला रही थी। तब मैं उनके पास जाकर बैठा और कहा, “टीवी ऑन करो।” क्योंकि रिमोट उनके पास था। मैंने रिमोट के बहाने उनकी चूचियों पर दबाव दिया और उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैं समझ गया कि आग दोनों तरफ है। मैं बैठ गया और धीरे-धीरे उनको बहाने से छूने लगा, वह कुछ नहीं कह रही थी। धीरे-धीरे मैंने उनकी चूचियाँ दबाईं जो ३४ की थीं। वाऊ, क्या मज़ा था आज भी सोचता हूँ तो लंड कड़क हो जाता है। वह भी मज़े ले रही थी। तब मैंने कहा, “करने दो ना!” उसने मना किया, “नहीं अभी नहीं, बाद में।”
पर मैं तो चढ़ गया उनके ऊपर और चूचियाँ दबाने लगा। वह भी सिसकारी भरने लगीं आआआआहहहहहह… ऊऊउउणअम्म्म्म्म्म्म्मम… हम्म्म्म…
मज़ा आ रहा था और मेरे दोस्त ने मुझे आवाज़ लगा कर मुझे बुलाया। उस दिन मैंने उसे प्यासा छोड़ दिया। अब मुझे दूसरे दिन का इन्तज़ार था क्योंकि मेरे मम्मी-पापा गाँव जाने वाले थे। अगले दिन सुबह वो ५:३० बजे गाँव गए। तब मैं तैयार हो गया, और मीना के ख्यालों में खोकर घर में ब्लू फिल्म देखने लगा साथ ही मुठ भी मार ली।
६ बजे उसका पति काम पर चला गया तब मैं फिर से तैयार हो गया। तभी नल में पानी आया तो मुझे एक विचार सूझा…
मैं उसके घर के पास गया और उससे कहा, “मीना आँटी, मुझे भी मटके में पानी भर दो ना।” उसने कहा, “जा, मैं थोड़ी देर में आती हूँ।”
“मैं तो कब से तैयार हूँ” मैंने मन में सोचा। मैं अपने घर आ गया, और आगे का दरवाज़ा बन्द कर लिया। वह थोड़ी देर में पिछले दरवाज़े से आ गई। उन्होंने पानी भर दिया, और जैसे ही जाने को हुई तो मैंने तुरन्त उनको पीछे से पकड़ लिया आर वह छूटने का नाटक कर रही थी। मैं तो चिपक ही गया और उनकी चूचियाँ दबाने लगा। वह आआआआआहहह… उउउऊऊऊहहहहह… जैसी आवाज़ें निकालने लगी। मैंने धीरे-धीरे उन्हें ब्लाऊज़ के बटन खोल दिए। गुलाबी ब्रा में से सफेद चूचियाँ दिख रहीं थीं और मैं उन्हें दबाने लगा। वह भी उत्तेजित हो गई थी, और उसने विरोध करना बन्द कर दिया था।
मैंने उनकी ब्रा उतार दी… वाऊउउउ… मैं तो चकित ही रह गया। उनकी निप्पलों को नज़र ना लगे। मैं १०-१५ मिनटों तक चूचियों को खूब दबाया और मेरा लंड एकदम से खड़ा और कड़क हो गया था और पाजामे का तम्बू बना रहा था। मैंने उससे लंड चूसने को कहा, पहले तो उसने मना किया पर बाद में मान गई। उसने मेरा लंड निकाला और थोड़ा सहलाया और मुँह में डाला। वाऊऊउउ… क्या मज़ा था। १५ मिनटों तक वह उसे चूसती रही। मैं आनन्द के सागर में गोते लगा रहा था… आआआहहहहह…. और चूसो….