मेरी क्लासमेट की चूत चुदाई
दोस्तो, मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं और सच में उन्हें पढ़ कर मुझे बड़ा मजा आता है. कुछ कहानियाँ हालाँकि मुझे झूठी लगती हैं लेकिन कुछ तो मेरे दिल को छू जाती हैं। तो आपका ज्यादा वक़्त बर्बाद न करते हुए मैं अपनी कहानी पर आता हूँ, अगर कोई गलती हो जाये तो माफ़ कर दीजियेगा, यह मेरी जिंदगी की सच्ची घटना है.
यह उस समय की बात है जब मैं कक्षा 12 में पढ़ता था. मैं एक सुन्दर स्वस्थ और गठीले शरीर का मालिक हूँ, मेरा लन्ड 6 इन्च लंबा और 4 इंच मोटा है लेकिन ये अपने स्टैमिना से किसी भी औरत को पूर्ण सन्तुष्ट कर सकता है।
मैं तब भी अन्तर्वासना पढ़ता था, इसकी सेक्स कहानी पढ़ कर मैं सोचता था कि काश मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड होती लेकिन किस्मत मेरे सोचने से क्या होता है।
एक दिन मेरी किस्मत ने करवट ली और एक सुन्दर सी गेहुँवे रंग की 5 फ़ीट 2 इंच की लड़की का हमारी क्लास में एडमिशन हुआ. जब वो पहले दिन क्लास में आई तो मैं तो उसे देखता ही रह गया और शायद उसने भी इस बात को नोटिस किया कि मैं उसे घूरे जा रहा हूँ.
चूँकि मैं अपनी कक्षा का सबसे बेहतरीन धावक था और दिखने में भी किसी से कम नहीं हूँ तो स्कूल में मेरे चर्चे होते रहते थे.
एक दिन मैं लंच में दोस्तों के साथ घूम रहा था तो पता नहीं कहाँ से एक केले का छिलका मेरे पैर के नीचे आ गया और मैं बराबर में चल रही उस नई क्लासमेट से टकरा गया और बस फिर उसने मुझे सॉरी बोला और मैंने उसे!
और हमारी बातों का सिलसिला शुरु हो गया।
उसकी एक सहेली से मेरा दोस्त फ्रेंडशिप करना चाहता था तो मैंने सपना से बात की और उन दोनों को मिलवा दिया.
एक दिन वो दोनों बेशरम हमारे सामने ही एक दूसरे को चूमने लगे तो पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने भी सपना के लाल-लाल होटों पर अपने होंट रख दिए और वो भी मेरा साथ देने लगी.
लेकिन 1 मिनट के बाद उसने मुझे पीछे धकेल कर एक थप्पड़ रसीद कर दिया और वहां से चली गयी।
मेरे दिल पे तो पहाड़ टूट पड़ा कि एक ही पल में मैंने अपना दोस्त भी खो दिया और मैं अपने घर चला गया.
जब अगले दिन हम स्कूल आये तो सब कुछ सामान्य सा लग रहा था। उस दिन छुट्टी हुई और हम अपने घर चले गए. उस दिन शाम को उसका कॉल आया कि कल वो मेरे साथ घूमने चलना चाहती है. मैंने उसे उस दिन के लिए सॉरी बोला तो बोली कोई बात नहीं!
मैं खुश हो गया लेकिन तब मेरे दिमाग से चुदाई का ख्याल कोसों दूर था।
अगले दिन जब वो मुझे बस स्टॉप पे मिली तो वो कयामत ढा रही थी. दोस्तो, सब उसे ही घूरे जा रहे थे, आते ही बोलने लगी कि पहले उसे अपने दोस्त के घर कुछ काम है तो पहले वहाँ चलना होगा.
मैंने हाँ कर दिया और वो मेरी बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठ गयी.