देसी चुत की देसी चुदाई की कहानी
नमस्ते… यह मेरी देसी चुत की देसी चुदाई की पहली कहानी है। मेरा नाम राहुल है.. मैं जयपुर में अपने माँ-पापा और भाई के साथ रहता हूँ, इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा हूँ। मैं एक साधारण सा दिखने वाला 19 वर्ष का लड़का हूँ।
उस वक्त हमारे परिवार में गाँव वाले घर में शादी थी। मेरा परिवार बहुत बड़ा है। मेरी छुट्टियां चल रही थीं इसलिए मैं जल्दी ही गाँव चला गया था।
घर में बहुत काम होने के कारण मेरी ताई जी ने अपनी भतीजी को बुला रखा था। उस लड़की का नाम पिंकी था। घर में कम लोग होने के कारण मेरी पिंकी से बहुत जल्दी दोस्ती हो गई।
एक दिन जब मैं उल्टा सोया हुआ था तब वो आकर मेरे चूतड़ों के ऊपर अपने चूतड़ रख कर बैठ गई शरारत करने के लिए! उसके मुलायम चूतड़ों का अहसास इतना अच्छा था कि उसके भारी वजन का पता ही नहीं चला।
तब मुझे लगा कि अगर मैं थोड़ी मेहनत करता हूँ तो पिंकी को चोदने का सौभाग्य प्राप्त हो सकता है।
मैं आपको उसके फिगर के बारे में तो बताना ही भूल गया। देखने में तो वो साधारण देसी लड़की ही थी.. पर उसकी काया मस्त 34-30-34 की फिगर वाली थी। अगर आप उसे एक बार देख लो तो कसम से उसको एक बार चोदने का विचार जरूर आ जाएगा।
उस घटना के बाद मैं उसके चक्कर में रहने लगा। आखिर कर एक दिन ऐसा आ ही गया।
उस दिन अचानक मेरी तबियत थोड़ी ख़राब हो गई। मैं अपने रूम में वैसे तो अकेला ही सोता था.. पर तबियत ख़राब होने के कारण मेरा ख्याल रखने के लिए ताई जी ने पिंकी को मेरे साथ सोने को बोल दिया।
मैं ऊपर चौबारे में सोता था जो गेस्ट रूम की इस्तेमाल करते थे… जहाँ 2 बिस्तर लगे थे।
पिंकी मेरे से 3 साल बड़ी थी तथा घर वालों की नज़र में मैं अभी भी बच्चा ही था।
रात में जब हम दोनों सो रहे थे तो मैंने उससे डर लगने का बहाना बना कर अपने बिस्तर पर आने को कहा। शायद उसका भी मन मुझसे चुदने का था.. इसलिए वो तुरंत मेरे पास आ गई।
फिर शुरू हुआ असली खेल।
मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि मैं उसे कैसे चोदूँ, यहीं मेरे दिमाग में चल रहा था।
फिर मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ उसके बदन पर ले जाने शुरू किए। उससे कोई विरोध न पा कर मेरा हौसला बढ़ा और मैं तेज़ सांसों के साथ उसके होंठों की तरफ बढ़ चला। जैसे ही मेरे होंठ उसके होंठ से मिले पूरे बदन में चिंगारी सी दौड़ गई। उसने भी मेरा साथ ऐसे दिया जैसे वो इसी चीज़ का इंतज़ार कर रही हो।
करीब 10-15 मिनट तक उसके होंठों और बदन को चूसने के बाद दोनों अलग हुए। मेरे अन्दर जैसे करंट दौड़ रहा था क्योंकि ये मेरा पहला एहसास था। मैं इतना उतावला था कि बस किसी भी तरह उसकी चुत में अपना लंड डालना चाहता था।
मैंने कहा तो वो कंडोम लगाने की जिद करने लगी। इसलिए उस रात हमें सिर्फ एक-दूसरे के बदन को चूस कर बितानी पड़ी।