मेरी मदमस्त रंगीली बीवी-14
अंकल और मैं, हम दोनों अकेले घर में रहे। मुझे आज भी याद है उस घर की पहली रात!
सलोनी को तो यही सब कुछ अच्छा लगता है… उसके पास आज तीन मर्द थे जो उसके बदन की सेवा में लगे थे।
पर मुझे तो सलोनी की पहली चुदाई से सरोकार था कि उसकी कुँवारी चूत में कैसे पहली बार लंड गया।
सलोनी- मुझे तो ऐसे ही अंकल का साथ अच्छा लगता था इसलिये उनके घर में किसी के होने या ना होने से मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला था।
अंकल ने मुझको अपने गले से लगा कर प्यार किया जैसे हमेशा करते हैं, फिर वे बोले- मेरे कमरे में AC है, इसलिये तुम इसी में रहो। पढ़ाई करने के बाद रात को यहीं सो जाया करना!
मुझे वो पहली रात्रि और उसके बाद वाली सब रातें भली प्रकार से याद हैं, उस वक्त ने मेरी ज़िंदगी में एक नया रंग दे दिया था जो कुछ मुझे पता नहीं था, .अंकल ने मुझे वह सब सिखाया।
अंकल के घर आने से पहले मैं घर में नाईट सूट पहनती थी पर मेरी मम्मी ने मुझे अब यहाँ के लिए नाईटी दी थी कि वहाँ यही पहनना!
पहली बार नाईटी पहनना… वो भी अपने प्यारे अंकल के सामने… मुझे रोमांच हो रहा था क्योंकि उस वक्त अंकल ही थे जो मेरी हर बात की तारीफ़ किया करते थे।
मैरून रंग की सिल्क नाईटी मेरे ऊपर बहुत फ़ब रही थी और मेरे स्लिम चिकने बदन से जैसे चिपक सी गई थी।
मैंने सपष्ट महसूस किया कि अंकल अजीब सी निगाहों से मुझे देख रहे थे।
मैं जब पढ़ने जाने लगी तोवे बोले- बेटी, आज तो सफ़र से आई हो.. थकी होगी, आओ आज आराम कर लो! मैं तुम्हें सुबह जल्दी उठा दूँगा पढ़ने के लिये! अभी तो पहला पेपर ही तीन दिन बाद है, हो जायेगी पूरी तैयारी… मैं हूँ ना… तुम चिंता बिल्कुल मत करना!
और उन्होंने उस रात मुझे पढने नहीं दिया… पढ़ने का दिल तो मेरा भी नहीं था।
मैं उनके पास ही जरा से दूरी बना कर लेट गई… मैंने दूसरी ओर करवट ली और कुछ ही देर बाद ही अंकल का हाथ मेरी कमर पर था।
वे बोले- अरे, इतनी दूर क्यों लेटी हो? पास आओ ना… कुछ देर बात करते हैं, नींद आने लगी है क्या?
मैंने कहा- नहीं अंकल्…
बोलकर उनकी ओर करवट ले ली।
उनका हाथ जो मेरी कमर पर था वो अब मेरे उभरे हुए कूल्हों पर आ गया था।
इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं थी, यही सब तो अंकल हमेशा करते थे जब भी मौका मिलता था और आज तो पूरा मौका था।
उन्होंने मुझे और अपनी तरफ़ खिसका कर, अपनी एक बाजू फैलाकर मुझे उस पर लेटा लिया।
अब हम दोनों के सिर आपस में मिले हुये थे, उन्होंने ‘बहुत प्यारी हो तुम!’ कहते हुए… मेरे गाल को चूम लिया।
ऐसे तो वे जाने कितनी ही बार मेरे दोनों गालों को चूम चुके थे, इसलिये मुझे कोई आपत्ति नहीं थी।