गौने से पहले-2
प्रेषक : ए के
अब तक मैं आपको बता चुका हूँ कि सेक्स का ज्ञान मुझे नीरू से मिला।
कुछ दिनों तक तो मैंने और नीरू ने अकेले होने का पूरा पूरा लाभ लिया और जमकर एक दूसरे की चुदाई की। मेरी जगह यदि आप होते तो आप भी यही करते क्योंकि मुझ जैसा गाँव का लड़का जब इतना कर पाया तो आपकी बात ही और है। नीरू की वजह से ही आज मैं बाप बन पाया हूं क्योंकि मेरी बुद्धि उस समय तो ऐसी थी कि मैं सोचता था सिर्फ चिपकने से ही लड़की गर्भवती हो जाती है।
पर नीरू ने मुझे सिखाया कि चिपकने से नहीं बल्कि जमकर चोदने से बच्चा पैदा होता है।
हमारी यह लीला बीस दिनों तक दिन रात चलती रही और फिर एक सुबह रामू काका वापस आ गए। मेरे मन में नई शंका ने जन्म लिया कि अब मैं नीरू को नहीं चोद पाउँगा तो मेरे दिन कैसे बीतेंगे।
काकी वापस नहीं आई थी वो गाँव में ही रुक गई थी और कुछ दिनों बाद आनेवाली थी।
रामू काका ने सामने से मुझे कहा कि सुबह और शाम मैं नीरू को खाना बनाने में मदद किया करूँ।
मुझे तो जैसे मनचाही मुराद मिल गई और मैं नीरू को चोदते-चोदते खाना बनाने लगा। कुछ ही दिनों में मेरे बॉस की शादी होने वाली थी। उनकी उम्र 28 साल थी उन्होंने भी मुझसे पहले ही कह दिया की सपना (मेरे बॉस की होने वाली बीवी) शहर में नई आ रही है और तुम्हें घर के सभी कामों में उसका हाथ बंटाना पड़ेगा क्योंकि शायद वो भी समझ गए थे कि मैं गाँव का लड़का हूं और चोदने में रूचि नहीं रखता हूँ। पर आप तो जानते ही हैं की नीरू की वजह से मैं पूरा चुदक्कड़ बन चुका था।
मैंने सहर्ष अपने बॉस का आदेश स्वीकार कर लिया और कहा- आप बेफिक्र हो जाएँ, मैं मेमसाब का पूरा ध्यान रखूँगा।
शादी हो गई ..सपना जी भी घर आ गईं। दो-चार दिन में ही बॉस को कलकत्ता जाना पड़ा, वो मेरे भरोसे अपनी चूत छोड़कर चले गए।
मेरी तो दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की हो गई। दिन में दो बार नीरू को चोदना पड़ता था और रात में जाकर सपनाजी की चूत को चाटना पड़ता था।
हुआ यूँ कि बॉस ने जाते समय ही सपना से कह दिया था कि यह लड़का तुम्हारा और घर का पूरा ध्यान रखेगा। फिर क्या बात थी मेमसाब ने हुकुम चलाना शुरू कर दिया- राजू आज से रात को तुम्हें यहीं पर रहना पड़ेगा।
मैंने कहा- ठीक है जैसी आपकी आज्ञा !
शाम को नीरू को चोदकर मैं बॉस के घर आ गया और नई नवेली सपना को निहारने लगा, शायद वो भी मुझे बुद्धू ही समझती थी, वो मस्त घुटनों तक का जालीदार कुरता पहने हुए थी जिसमें से उसके मोटे मोटे चूचे बाहर कूदना चाहते हों, कूल्हे भी गजब ढा रहे थे, कमर के नीचे का भाग ऊपर उठा था जिसे देखकर ही मेरा लंड पैंट फाड़कर बाहर आ जाना चाहता था पर मैं भी अब नीरू की वजह से खिलाड़ी बन गया था, मैंने अपने आपको संभाले रखा और सपना जी के इशारे की राह देखने लगा।