समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई-4
प्रेषिका : नीनू
मुझे ससुराल में प्यास बुझाने का साधन मिल गया, पति तो था ही नाकारा ! वो मेरे पास रात के सिवा कम ही आता, वो जानता था उसमें कुछ नहीं है।
सासू माँ मेरे पीछे पड़ गई कि पोता का मुँह दिखा !
पोते का मुँह कहाँ से दिखाती ! पति जानता था उसने कभी वहाँ तक पहुँचाया नहीं था जहाँ से मेरे पेट में उसका बीज रुके !
लेकिन अपने बेटे में दोष नहीं बोलती थी, दोष मेरे में है यह था उनका कहना !
राहुल और अभय के साथ करते समय मैं माला-डी का इस्तेमाल करती थी।
मैंने सोच लिया था कि मैं राहुल के बच्चे की माँ बनूँगी।
एक दिन सासू माँ मुझे एक बाबे के पास ले गई, दिखने में ही वो एक नंबर का हरामी नज़र आया मुझे।
मेरी सास बोली- बाबा, इसके बच्चा नहीं होता, देखो क्या दोष है, कोई उपाय बताओ।
“इसके तो माथे में दोष दिख रहा है, एक विशेष पूजा रखनी होगी !”
बाबा काफी हट्टाकट्टा था, मैंने नशीली आँखों से उसकी तरफ देखा, अपना निचला होंठ चबाते हुए बोली- कैसी पूजा बाबा?
सासू माँ मेरे पीछे बैठी थी।
“चलो, अन्दर चलो, ध्यान लगाना होगा मेरे साथ एकांत में !”
सासू माँ बोली- हाँ बाबा, कैसे भी करके दोष मुक्त कर दो इसको।
मैं मटकती हुई अंदर गई बाबा के साथ मेरा गुंदाज जिस्म देख देख बाबा पागल होने लगा था, एक तरफ बाबा ने बिस्तर लगा रखा था।
“तुम बहुत सुंदर हो लेकिन तेरी सास तुझमें दोष निकालने आई है !”
“कुछ करो ना बाबा !”
नशीली आवाज़ थी मेरी।
वहाँ हवन चल रहा था, जाकर वहाँ लेटो, पहले देखना पड़ेगा।
मैंने अपनी चुन्नी उतार कर एक तरफ़ रख दी, मेरे मम्मे बाहर कूदने को बेताब थे, बाबा के माथे पर पसीना आ गया था।
मैं लेट गई, मेरी पहाड़ जैसी छाती उभर कर सामने आ गई, बाबा ने सिर्फ धोती पहनी थी, उसका मरदाना जिस्म किसी औरत को पिंघला देने वाला था।
उसने मेरे पेट पर हाथ फेरा, मैं कसमसा गई, बदन कांप गया, उसके हाथ ऊपर मेरे मम्मों की तरफ चलने लगा। मैं उठी, अपना कमीज उतार दिया।
“आपको दिक्कत आ रही थी चेक करने में, इसलिए उतार दी !”
काली ब्रा में कैद गोरे मम्मे देख बाबा पागल हो गया।
“ओह हो ! काफी समझदार हो ! लगता है पति को ज्यादा कष्ट नहीं करना पड़ता होगा?”
“कष्ट करने के लायक ही नहीं है आपकी भगतनी का बेटा !”
“तुम मेरी भगतनी नहीं हो?”
“अभी देख रही हूँ, आपकी नीयत खराब है, देखना होगा कि आप भगतनी बनवाने के लायक हो?”
“मुझे तो बच्चा चाहिए गुरु जी बस !”
उसने मेरी नाभि में उंगली घूमाते हुए मेरे निचले होंठ को चूमते हुए कहा- हड्डी से हड्डी बजा दूंगा तेरी ! तू खुद भगतनी बनेगी !
“यह क्या कर दिया? होंठ क्यूँ चूमा? शोर मचा दूँगी !”
“कुछ नहीं होगा, तुझ पर अपने सेवक छोड़ दूँगा !”
उसने नाभि पर चूमा, मैं सिसकने लगी।