बस से होटल के कमरे तक
सन्नी
पिछली कहानी थी ‘ट्रेन में लंड चूसा‘ उसके आगे…
दोस्तों सभी ने मेरी एक-एक कहानी पसन्द की और मुझे अपनी गाँड मरवाने की दास्ताँ अन्तर्वासना पर देख गुरुजी के पाँव छूने का दिल करता है। जो मेरी चुदाई की दास्ताँ और मेरी की हुई मेहनत पर पानी नहीं फिरने देते।
ट्रेन में मैंने दो फौजियों के साथ ख़ूब मस्ती की। उन्होंने मुझे अपना नम्बर तक दे डाला लेकिन मैंने उनसे मिलना ज़रूरी नहीं समझा क्योंकि मैं सफर में बने सम्बन्ध को वहीं छोड़ देता हूँ।
दोस्तों एक बार मैं कॉलेज के लिए बस पकड़ने के लिए खड़ा था। इन्तज़ार था किसी खचाखच भरी बस का। तभी एक मिनी बस आई, मैं चढ़ गया और मेरी निगाहें किसी ऐसे मर्द को तलाश कर रहीं थीं जिसे देख मैं समझ लूँ कि कहीं वो मेरी हरक़त पर बवाल तो नहीं मचा देगा।
तभी मैंने एक मूछों वाला कड़क सा मर्द देखा। मुझे लगा कि वो सही रहेगा। ख़ैर मैं उसके आगे खड़ा हो गया। मैंने देखा था उसका वो भाग काफी फूला हुआ था, मैं उसके पास ही आगे खड़ा हो गया। 5 मिनट वैसी ही उधर-उधर का जायज़ा लेकर मैंने धीरे से गाँड को हरक़त में लाने की कोशिश की और पहले धीरे से उसपर दवाब दिया। भीड़ की वज़ह से जब धक्का लगा तो हम झुक गए। फिर मैंने गाँड गोल-गोल तरीके से घुमानी शुरु की, अपना जलवा और तज़ुर्बा शुरु किया। उसको मैंने अहसास दिला दिया कि मैं अपनी मर्ज़ी से अपनी गाँड उसके लंड से घिस रहा हूँ। उसके लंड में भी हरक़त महसूस हुई। साफ़ लगा कि वह खड़ा हो रहा था।
मैंने गाँड को और दबाया। मैंने एक हाथ से ऊपर डंडे को पकड़ रखा था, धीरे से दूसरा हाथ नीचे लेकर गया। भीड़ में किसी का ध्यान वहाँ नहीं था। मैंने हाथ से उसको छू लिया। उसे बहुत अच्छा लगा। मैंने और सहलाया और उसने कान के क़रीब आकर बोला- कहाँ जाना है?’
मैंने उसे बताया कि कॉलेज।
उसने कहा,’बहुत मज़ा आ रहा है, लेकिन यहाँ ठीक नहीं है। अगले स्टॉप पर उतर जाते हैं।’
मैंने अनजान बनकर पूछा- ‘लेकिन वहाँ क्या होगा?’
उसने कहा,’यार उतर तो सही, मेरे दोस्त का एक गेस्ट-हाउस है। हमसे कौन सा पैसे लेगा। चले हैं न वहाँ।’
ऐसे ही कान में फुसफुसात हुए, इधर-उधर देख बातें करते हुए उसका लंड मसल दिया।
उसने कहा,’साले गाँडू, यहीं खड़ा करके जुलूस मत निकलवा देना’
दोनों बस से उतर गए, सीधा गेस्ट-हाउस गए। उसका दोस्त वहाँ नहीं था, रूम-सर्विस वाला लड़का था। वह प्यार से उससे मिला, एक कोने में ला जाकर कुछ कहा, उसने एक चाबी उसे दी और हम दोनों दूसरी फ्लोर पर एक ए.सी. कमरे में पहुँच गए।
उसने कहा,’अच्छा कमरा है।’ और उसने दरवाज़ा लॉक कर दिया और सीधा मुझे पकड़ लिया और मेरी गाँड मसलने लगा, मेरे मम्मे दबाने लगा।
मैंने अपनी शर्ट उतार दी और फिर देखते ही देखते सिर्फ अण्डरवीयर में रह गया।