जाने कब मिलेंगे
प्रेषक : माणक नाहर
हैलो दोस्तो,
मैं पहली बार कोई कहानी लिख रहा हूँ। यह मेरी वास्तविक कहानी है। मैं ट्युशन पढ़ाने का कार्य करता हूँ। बात उस समय की है जब शमा परवीन नाम की एक लड़की ट्युशन पढ़ने आई। पहले ही दिन से उसे देखकर ना जाने मेरे मन में क्या होने लगा। हालांकि मैंने सैकडों लड़कियों को पढ़ाया है पर उसे देखकर ना जाने मेरे मन में क्या-क्या उमंगें उठने लगी।
वार्षिक परीक्षा के बाद जब सभी छात्र आखरी दिन मिलने आये तब वह बहुत जोर-जोर से रोने लगी और कहने लगी- अब तो हम सभी आपसे जाने कब मिलेंगे !
तब मैंने कहा- इसमें रोने की क्या बात है तुम जब चाहो मेरे मोबाईल पर कॉल करके मुझसे बातें कर लिया करना।
यह सुनकर उसने रोना बंद कर दिया।
उसके बाद उसने अगले दिन मुझे कॉल किया। तब हमने थोड़ी बहुत बातें की और उसके बाद हमारी बातों का सिलसिला चल पड़ा और यह सिलसिला धीरे-धीरे कब प्यार में बदल गया दोनों को पता ही नहीं चला।
फिर एक दिन हिम्मत जुटा कर मैंने उससे अपने प्यार का इजहार भी कर दिया। इजहार करते वक्त मुझे कितनी घबराहट हो रही थी, इसको मैं बता भी नहीं सकता। लेकिन मेरी घबराहट तब खुशी में बदल गई जब उसने भी मुझसे कहा कि वह भी मुझसे प्यार करती है।
इसके बाद हम दोनों अकेले में मिलने के रास्ते ढूँढने लगे। हमारा कस्बा ज्यादा बड़ा नहीं है, लगभग सभी लोग एक दूसरे को जानते हैं, ऐसे में बाहर हमारा मिलना सम्भव नहीं था।
तब एक दिन उसने मुझसे कहा- क्या तुम रात को मेरे घर पर आ सकते हो? मैं पढ़ाई के बहाने अलग कमरे में आ जाऊँगी।
मैंने भी उसे हाँ कर दी। इसके बाद उस रात को करीब २ बजे मैं उसके घर गया। हम दोनों अकेले एक बंद कमरे में अलग थे और उसके मम्मी-पापा तथा भाई बहन अलग कमरे में थे। हम दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे से बातें करते रहे। धीरे-धीरे मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और फिर उसके गालों पर एक चुम्बन दे दिया। यह पहला मौका था जब मैंने उसे छुआ था। मेरे शरीर में एक अजीब सी सिरहन दौड़ गई। फिर हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरू किया और एक दूसरे से लिपट गये। धीरे-धीरे मैंने उसके स्तन दबाने शुरू किये जो कि बहुत ही कड़े थे, तो उसने मना कर दिया।
चूमा-चाटी तथा बाहों में लेने का यह सिलसिला करीब २ घण्टे तक चला और फिर मैंने कहा- अब मुझे चलना चाहिए।
उसके बाद करीब ४ बजे मैं वापस आ गया।
इसके बाद जब भी मौका मिलता हम उसके घर मिल लेते। एक बार उसने मुझे बताया कि उसके घर के सभी सदस्य किसी रिश्तेदार की शादी में गये हैं और वो आज घर में अकेली है।
यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।
मैं रात को ११ बजे ही उसके घर पहुँच गया। यह पहला मौका था जब हम बिना किसी डर के एक दूसरे से मिल रहे थे। जब मैं वहाँ पहुँचा तो मैंने देखा कि उसने बिस्तर लगा रखा था।