गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-4
कहानी का पिछला भाग: गाँव की कुसुम और उसकी आपबीती-3
मुकेश जी ने कहा- मैं तुम्हारे लिए दवाई ला दूँगा, तुम खा लेना!
मैंने पूछा- दवाई क्यों?
मुकेश जी ने बताया- मेरे वीर्य से तुम गर्भ धारण कर सकती हो, इससे बचाव के लिए!
मैं बोली- तो क्या? ठहर जाने दीजिए!
‘नहीं हम दोनों की उम्र में बहुत बड़ा फासला है और तुम्हारे सामने बहुत बड़ी जिंदगी है, मैं नहीं चाहता कि तुमको आगे की ज़िन्दगी में कोई परेशानी हो।’
मैं कुछ न बोल पाई..
पर वो कुछ दिन हम दोनों की ज़िन्दगी के अनमोल दिन थे…
पिंकू को कुछ दिन की छुट्टी दे दी थी कि वो गांव हो आए।
मुकेश जी ने इन दिनों में सुबह शाम जब भी मौका मिला, मेरे साथ कई तरह से सम्बन्ध बनाये, कभी उल्टा कभी खड़ा करके तो कभी गोदी में तो कभी घोड़ी बना के हर तरह से शारीरिक सुख मुझे दिया।
मैं भी रोज़ उनकी बाँहों में अपना सब कुछ दे देती।
घर में घुसते ही मैं उनसे लिपट जाती, उनके लंड को दबा देती, उनके सारे वस्त्र उतार देती, उनका लंड मुह में लेती।
एक बार तो उनका रस मुँह में भी ले लिया पर मुझे अच्छा नहीं लगा।
जब वो मेरी चूत चाटते तो मैं पागलों की तरह अपनी गर्दन इधर उधर करती, चादर को कस के पकड़ लेती, उनके बाल नोच लेती।
फिर भी वो मेरी चूत को चाटते रहते!
कुल मिला कर मेरी चूत अब उनके लंड के बिना नहीं रह सकती थी।
अगर मुकेश जी तैयार होते तो मैं शादी भी कर लेती।
मुकेश जी में इस उम्र में भी वही जोश था जो आज मेरी उम्र के लोगों का होता है।
अगर इतनी साल बाद मैं देखूं तो सोचती हूँ कि हर लड़की को अपनी से दुगने उम्र के मर्द के साथ अपना पहला यौन सम्बन्ध बनाना चाहिए क्योंकि उसमें अनुभव होता है और स्टैमिना भी होता है..
लड़की के कौन सा अंग से कब और कैसे तड़पना है, उनको पता होता है।
इस बीच उनका बेटा राकेश किसी काम से भारत आया, वो 22 साल का बहुत हैंडसम लड़का था, बिल्कुल मुकेश जी के जैसा लम्बा, गोरा मस्सल वाला… गांव की भाषा में गबरू जवान!
पर शायद उसको देख कर मुकेश जी को अपनी भूल का अंदाज़ा हो गया कि मेरे साथ सम्बन्ध बना कर बहुत बड़ी गलती कर दी।
वो उम्र में बड़े थे और मुझे समझ सकते थे, उन्होंने भी अपनी गलती सुधारने पहल की।
पहली कि मेरे से दूरी बना कर मुझे मेरे गाँव वापस भेज दिया।
दूसरी… एक दिन वो और उनका बेटा मेरी नामौजूदगी में मेरे गाँव आये और मेरे पिता जी और मेरी माँ से काफी देर बात की।
रात जब मैं ऑफिस से घर आई तो माँ ने बताया कि मुकेश जी मेरा रिश्ता अपने बेटे के साथ करना चाह रहे हैं।
मैं तो सन्न रह गईं… बहुत गुस्सा आया पर मैंने माँ को कुछ नहीं बोला।
अगले दिन मैं उनसे मिली, तब उन्होंने मुझे बहुत समझाया और कहा कि आगे से वो मुझे उस नज़र से कभी नहीं देखेंगे…
वो अपनी उस भूल के कारण मेरा भविष्य सुधारना चाहते हैं।