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मीरा दीदी की गाण्ड चुदाई

Story Hindi 2 pages 12 years ago

मीरा दीदी की गाण्ड चुदाई
प्रेषक : राजेश अय्यर
आज तक मैं अन्तरवासना पर यही पढ़ते आया हूँ कि दोस्तों मैं अगली कहानी लेकर हाजिर हूँ। इसका मतलब पाठक काल्पनिक कहानी भी भेजते हैं।
परन्तु मेरे पास ऐसी काल्पनिक नहीं अपितु सत्य घटना है जो मेरे साथ घटी है।
बात कुछ साल पहले की है मेरे एक दूर के रिश्ते के मामा जी एक बड़े शहर में उच्च अधिकारी हैं। मेरी मम्मी ने गर्मी की छुटिटयों में मुझे उनके घर भेज दिया कि जाओ घूम कर आ जाओ।
घर में मामा, मामी, व उनकी बेटी मीरा जो उस समय १८ वर्ष की थी । वह बहुत सुन्दर है।
एक दिन मामी जी ने कहा- राज ,तुम मीरा को स्कूटी चलाना सिखा दो !
हालाँकि मैं दीदी से छोटा था फिर भी मैं गाड़ी चलाना जानता था।
मैं दीदी को आगे बिठाता था और मैं पीछे बैठता था । यूँ तो मेरा लंड रोज ही अकड़ जाता था लेकिन एक दिन दीदी ने अपने पिछवाड़े पर कुछ दबाब महसूस किया। घर आकर गाड़ी खड़ी करते ही गुस्सा करने लगी और कहने लगी- अभी मम्मी को बताती हूँ।

शायद उसने अपनी मम्मी को कुछ बताया भी क्योंकि मामी जी ने एक दो बार मेरे अंग की तरफ गौर से देखा, जब मैं लन्च के लिए नेकर पहन कर टेबल पर आता था।
फिर दो दिन के बाद दीदी ने फिर गाड़ी निकाली। लेकिन इस बार भी उसमें तनाव आ गया, परन्तु मीरा दीदी ने घर आकर मुझे डांटा नहीं बल्कि दूसरी मंजिल में अपने कमरे में ले गई और वहाँ जाकर उन्होंने मुझसे कहा- जरा दिखाओ पैंट खोलकर ! मैं भी तो देखूं क्या चुभता है मुझे ।
मैं शरमा गया और दीदी का कहना टाल दिया ।
फिर अगले दिन मामा जी व मामी जी को अचानक दो दिन के लिए गाँव जाना पड़ा तो मामी जी बोलकर गईं कि डरना नहीं, दोनो भाई बहन नीचे ही सोना और कोई बात होने से तृप्ति आँटी को फोन करके बुला लेना।
आज देखा कि मीरा दीदी बहुत खुश थीं। रात को खाना खाने के बाद दीदी ने जल्दी टी वी बन्द कर दिया और ताश ले आई और कहा- जो हारेगा उसे दूसरे की पीठ मालिश करनी पड़ेगी।
मैं पहले से ही डरा था इसलिए समहत हो गया। अब मैं जीत गया तो भी मैं मालिश कराना नहीं चाहता था लेकिन दीदी ने कमर पर ऐसे ही हाथ फिराते हुए एक बार हाथ को लन्ड से छू दिया जो अपने पूरे आकार में था।
फिर इस बार दीदी जीत गई। जब मैंने मालिश शुरू की तो दीदी ने उल्टी होकर धीरे धीरे अपना पजामा और कच्छा नीचे कर दिया। दीदी की दूध जैसी सफेद गाण्ड देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये और मेरे लन्ड से कुछ चिपचिपा पदार्थ रिसने लगा।
अचानक दीदी ने पलटकर कहा- राजू, तुम क्या देख रहे हो? मम्मी से कह दूंगी और अगर कुछ नहीं देख रहे हो तो यह क्या है दिखाओ पैन्ट खोलकर !
आज मैंने पैन्ट खोलकर दिखा ही दिया।
दीदी तो जैसे पागल हो गई, कहने लगी- बाप रे ! इतना बड़ा और मोटा !
मैंने कहा- अब क्या तुम भी दिखा सकती हो?
मीरा दीदी तैयार हो गई और उन्होंने नीचे के सारे कपड़े उतार दिये।

अब उनकी गुलाबी चूत की फ़ांके काली छोटी छोटी झांटों से ढकी दिख रही थीं।
दीदी ने कहा- राजू देखो, जो मैं करती हूं, मुझे करने दो।
और दीदी ने मेरा ८ इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा लन्ड चूसना शुरू कर दिया।
मैंने कहा- दीदी, यह गन्दी बात है।
दीदी ने बताया- मैंने एक दिन अपने मम्मी पापा को रात में ऐसा करते देखा है।
कुछ देर चूसने के बाद दीदी ने डॉगी पोज़िशन बना ली और कहा- राजू पकड़ कर धीरे से लगाना, क्योंकि बहुत मोटा है !
इससे पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया था इसलिए बहुत देर के बाद दीदी ने खुद पकड़ कर लगाया। लेकिन ६-७ धक्के मारने के बाद ही मेरी पिचकारी छूट पड़ी।
उस रात को दीदी ने चार बार चुदवाया, परन्तु मेरी इच्छा थी कि एक बार दीदी गोरी गाण्ड में लन्ड डालने दे।
दीदी ने कहा- ना बाबा ! गाण्ड फड़वानी है क्या !
दोस्तो और सहेलियो ! अभी दीदी की शादी हो गई है।
मैंने एक दिन मौका मिलने पर गुजारिश की तो दीदी ने मना कर दिया परन्तु थोड़ी देर बाद उन्होंने कुछ सोचकर मुझे अपने घर बुलाया और उस दिन कहा- तुझे मेरी गाण्ड मारने की बहुत इच्छा थी ना?
मैंने पूछा- यह खयाल कैसे आया?
तो उन्होंने कहा- आजकल सीडी देखकर सब मर्द बिगड़ गये हैं, मेरे श्रीमान भी हफ़्ते में एक बार मेरी पिछली मारते हैं और अब मुझे भी मजा आने लगा है।
और फिर दीदी ने उस दिन गाण्ड भी दो बार मरवाई।
मेरे दोस्तो और कन्याओं ! अब आप ही बताये कि इस वास्तविक घटना में क्या मेरा कोई दोष है?
हाँ, जब से मीरा दीदी को चोदा है मुझे एहसास हुआ कि सचमुच मेरा काफी बड़ा है।
मेरी सच्ची कहानी पसन्द आने पर मेल करें।
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