बीवी घर में नंगी घूमती है
दोस्तो, मैं मनुज जैन 27 साल का नवयुवक हूँ. अभी चार महीने पहले मेरा प्रेम विवाह एक सिख लड़की जसप्रीत कौर से हुई..
जसप्रीत की उम्र सिर्फ 19 साल है. वो पंजाब के एक अमीर किसान परिवार से है, वो गजब की सेक्सी लड़की है. मैं खुद देखने में ज्यादा खूबसूरत नहीं हूँ लेकिन खूब पैसे वाला हूँ, मेरा अपना बिजनेस है. हमारा घर बहुत बड़ा है, मेनगेट पर हमेशा चौकीदार होता है क्योंकि घर में सिर्फ हम दोनों ही रहते हैं।
जसप्रीत भी मेरे साथ मेरे बिजनेस में मदद करती है।
एक दिन जब जसप्रीत घर पर थी तो मैं अचानक घर आया तो मैंने देखा कि जसप्रीत रसोई में पूरी नंगी खड़ी थी, वो सलाद के खीरा काट रही थी. उसका गाउन वहीं स्लैब पर पड़ा था।
मुझे पता है कि उसे इस तरह की उलटी सीधी हरकतें पसंद है।
उसे नंगी रसोई में देख मुझे मज़ा आ गया और मैं चुपचाप उसकी हरकतें देखने लगा।
तभी मैंने देखा कि उसने एक लंबा मोटा खीरा पूरा छीला, अपनी एक टांग किचन स्लैब पर रखी, और अपनी योनी में उस बड़े खीरे को घुसाने लगी।
देख कर लग रहा था कि उसे खीरा अन्दर लेने में दर्द हो रहा है फिर भी वो करती रही और उसने आधा खीरा अपनी चूत में घुसा लिया. और उसके बाद वो उसे अन्दर बाहर करके मज़ा लेने लगी।
थोड़ी देर बाद उसे खूब मज़ा आने लगा और वो किलकारियाँ भरते हुए झड़ गई।
उसके बाद उसने खीरा अपनी चूत से निकाला और सलाद वाली प्लेट में गोल गोल काट दिया. उसके बाद उस पर नमक नीम्बू निचौड़ कर उसे फ्रिज में रख दिया..
मैं हैरान था कि उसने अपनी चूत से निकले खीरे को सलाद में काट दिया और वो भी बिना धोये?
यह सब देखने के बाद मैं चुपचाप बाहर आ गया, फिर थोड़ी खटपट करते हुए घर के अन्दर आने का ड्रामा किया।
जब मैं अन्दर आया तो जसप्रीत अपना गाउन ठीक करते हुए रसोई से निकली और मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया।
मैंने उसके लबों को चूमते हुए कहा- डार्लिंग खाना लगा लो !
और मैं हाथ धोने चला गया।
खाने में जसप्रीत ने वही खीरे की प्लेट भी रखी थी।
वो मज़े से उस प्लेट में से खीरा खाने लगी लेकिन मेरा बिलकुल मन नहीं हुआ वो खीरा खाने का !
हालांकि चुदाई करते समय जसप्रीत मेरा लौड़ा चूसती है, मैं उसकी चूत भी चाटता हूँ, मतलब हम दोनों खुल कर मुखमैथुन का आनन्द लेते हैं लेकिन उसकी चूत से निकला हुआ खीरा खाने का सोच कर मुझे घिन्न सी हुई !
जब उसने देखा कि मैंने खीरा नहीं खाया तो वो अपने कांटे से खीरे का एक टुकड़ा मेरे मुंह में डालने लगी और मैं भी उसे रोक नहीं पाया और मैंने वो खीरा खा लिया।
यह तो एक घटना है जिससे मेरे मन में शंकाओं ने जन्म लेना शुरू किया।