जीजा ने मेरा जिस्म जगाया-3
प्रेषिका : नीना
पता नहीं जीजा इन कामों में कितना हरामी था, बोला- क्या बात है, आज तेरी चाल में फर्क है?
“नहीं तो? तुम भी जीजा जो मर्ज़ी बोलते हो?”
“साली, जिंदगी देखी है ! बोल यार के नीचे लेटकर आई हो ना?”
“शटअप जीजू ! आप भी न !”
“साली कपड़े देख अपने ! आज अंदरूनी कपड़े पहन कर नहीं गई? देख कैसे नुकीले हुए हैं?”
दिमाग में सोचा- हाय ! ब्रा वहीं रह गई थी ! उसने उतार फेंकी थी, शायद बैड के नीचे रह गई !
“उड़ने लगे रंग ना? पार्टी में गई थी या किसी कबड्डी के मैदान में? जाकर कपड़े बदल ले, नहीं तो साफ़ साफ़ पकड़ी जायेगी।”
जल्दी से कमरे में गई, दूसरा सूट निकाला, पहले कमीज़ उतारी, जल्दी से ब्रा डालने लगी, जीजा आ गया अन्दर, उसने रोक दिया- वाह ! लगता है उसने खूब मसले ! देख दांत के निशान ! हमसे मत छुपाया कर रानी ! हम इस खेल के मंझे हुए खिलाड़ी हैं !
जीजा ने मुझे लट्टू की तरह जोर से अपनी तरफ घुमाया और सीधे होंठ मेरे चुचूक पर टिका चूस लिया।
“जीजा, माँ-दीदी आने वाली हैं, पकड़े जायेंगे।”
“हमारे लिए ना और बाकी सब के लिए हां?”
“ऐसी बात नहीं है, सच में ! समय देखो !”
जीजा ने जोर से बाँहों में भींचा उनकी बाजुएँ सतीश से मजबूत थी, होंठ मेरे मम्मों पर रगड़ने लगे, मैं फिर से गर्म होने लगी।
जीजा मुझे चूमते हुए मेरे पेट पर चूमने लगे फिर धीरे से सलवार का नाड़ा खींच दिया, सलवार गिर गई वो भी वहीं बैठ पैंटी एक तरफ़ सरका कर चूत देखने लगे- साली, पकड़ी गई तेरी चोरी ! अभी चुदी हो ! ज्यादा वक़्त नहीं हुआ।”
मुझे शर्म सी आने लगी- आप भी ना?
“बता ना? यार से मिलकर आई हो ना? ताज़ी ताज़ी बजी है।”
“आपके पास यंत्र मंत्र है?”
“मेरे पास आ जा जान !” जीजा ने जिप खोल दी।
जैसे उन्होंने निकाला, मेरा मुँह खुला का खुला रह गया, इतना बड़ा इतना भयंकर लौड़ा, काले रंग का मोटा लौड़ा !
“जीजा मुझे नहीं तेरे संग लेटना तेरा लौड़ा बहुत ज़ालिम दिखता है !”
“रानी, अभी तो बच्ची है, तुझे मालूम होना चाहिए कि औरत मोटे से मोटा लौड़ा ही पसंद करती है, जिसका ख़ासा लंबा हो, तेरी दीदी इस पर मर मर जाती है, मगर जब से उसने बच्चा दिया है तब से वो ढीली हो गई है।”
“हाय जीजा, प्यार से मसलो इनको ! बच्ची हूँ अभी !”
जीजा मुँह में जुबान डाल जुबान से जुबान को लड़ाने लगे। मैं गर्म हो चुकी थी, उनका तरीका ख़ास था जिसने मुझे भुला दिया था कि मैं कुछ देर पहले ही चुदी हूँ, उनके हाथ बराबर मेरे मम्मों पर फिसल रहे थे, मस्ती से मेरी आँखें बंद थी।
“दीदी आ गई तो बवाल होगा !”
“साली साहिबा। डर मत !”
“आपका बहुत बड़ा है !”
“तेरे यार काबड़ा नहीं है क्या?”
“आप जितना नहीं है जीजा !”
“ले थाम इसको ! चूस !”
थोड़ी देर चूसने बाद रुक गई मेरा जबाड़ा थक गया तो जीजा ने मेरी टांगें फैला दी, पाँव की तरफ जाकर चूत चाटने लगे।