गाँव की मस्तीखोर भाभियाँ-3
मैं- भाभी.. मुझे भी आपके साथ नहाना हे।
रूपा भाभी- ठीक है.. तुम भी आ जाओ।
मैं वैसे ही नंगा उनके पास चला गया, सभी औरतें मुझे ही देख रही थीं।
मैं अब पानी में घुस गया.. भाभी ने किनारे पर बैठ कर मेरे सामने ही स्टाइल में पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट ‘सररररर..’ से नीचे गिर गया।
मैं तो देख के हैरान था, लगता ही नहीं था कि वो दो बच्चों की माँ थीं, पतली कमर नीचे जाते इतने बड़े कूल्हों में समा जाती थी कि बस…
उनके कूल्हे एकदम बड़े और गद्देदार थे और चूत वाला हिस्सा पूरा गीला था। शायद कपड़े धोने से उनकी पैंटी गीली हो गई थी। पैंटी एकदम सफेद होने की वजह से और गीली होने की वजह से उनकी चूत की लकीर साफ़ दिख रही थी।
तभी उन्होंने मेरे सामने ही दो साइड से दो उंगलियां डाल कर उन्होंने धीरे से पैन्टी को नीचे उतारना चालू किया और अपनी पैंटी को उतार दिया।
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वाउ.. क्या नजारा था.. उनकी चूत चमक रही थी.. एकदम सफाचट.. जैसे अभी ही शेविंग की हो।
वैसे बीच में से उनकी चूत के होंठ बाहर दिख रहे थे और लगता था कि मुझे बुला रहे हों.. आओ मुझे चूसो।
होंठ के साइड की मुलायम दीवारें जो कि एकदम चिकनी दिख रही थीं.. वो नीचे जाकर अदृश्य हो जाती थीं.. और गाण्ड के छेद से मिल जाती थीं।
चूत की दीवार इतनी दबी हुई थी कि ऐसा लगता था जैसे पहले कभी वो चुदी ही ना हों।
धीरे-धीरे वो मस्त चाल से मेरी तरफ बढ़ रही थीं और आखिर में पानी में घुस गईं..
उन्होंने पानी में आते ही मुझे बोला- एक चूत से जी नहीं भरा.. जो दूसरी देख रहे हो.. सारे मर्द ऐसे ही होते हैं।
मैं- तो उसमें गलत क्या है.. भगवान ने चूत बनाई इसी लिए है ताकि मर्द उसे देख सकें.. चाट सकें और फाड़ सकें।
रूपा भाभी- हाँ देवर जी.. मेरी चूत में भी बहुत खुजली होती है.. और तुम्हारे भैया से वो मिटती ही नहीं.. क्या तुम मेरी खुजली मिटाओगे?
मैं- भला.. आपका ये गद्देदार शरीर.. कोई मूर्ख ही होगा जो चोदने को ‘ना’ बोले।
रूपा भाभी- ठीक है.. मैं आज घर जाकर तुम्हें मजे कराती हूँ। रात को तुम तैयार रहना।
मैं- हाँ भाभी.. लेकिन अभी आपका नंगा बदन देख कर मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है.. देखो रसीली भाभी के चूसने के बावजूद भी ये फिर से खड़ा हो गया है।
रूपा भाभी- लण्ड होता ही ऐसा है.. गड्डा देखा और खड़ा हुआ।
यह कह कर वो जोर से हँसने लगीं।
मैं- भाभी क्या आपके बोबे छू सकता हूँ?
रूपा भाभी- अरे यह भी कोई पूछने की बात है.. छुओ क्या.. चूसो.. जितना चूसना है उतना..
फिर मैंने सीधे ही अपने मुँह में भाभी का एक निप्पल भर लिया और दूसरे हाथ से पानी में उनकी चूत ढूंढने लगा।
उनकी फड़कती चूत मुझे तुरंत मिल गई.. एकदम चिकनी गीली-गीली सी..
जैसे ही मैंने निप्पल चूसा.. मेरे मुँह में दूध की धार बहने लगी।