जन्म दिन का तोहफ़ा-2
दोस्तो, इस कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मैं लिंडा की मित्र मीरा का बर्थडे गिफ्ट था और उसे रात को बालकनी में चोदा। रात के खेल में देर हो गई तो सुबह 9:30 पे ही नींद खुली। मीरा तब भी बेसुध सी नग्न सो रही थी। रात की चुदाई और दारु के नशे में !
मैंने कमरे में नज़र दौड़ाई तो सिगरेट का पैकेट दिखा और उसके नीचे एक थैले में मेरे साइज़ के टी-शर्ट और बरमूडा थे, शायद लिंडा ने रखवाये थे। एक जोड़ी पहन के सिगरेट पीते हुए बाहर निकला, सोचा कि थोड़ा घूम कर तजी हवा ले लूँ।
तभी फार्म हाउस केअर टेकर की पत्नी आई, “साहब नाश्ता बनाना है?”
घूर कर देखा तो पाया कि वो काफी सांवली थी और नाक नक्श भी ठीक ठाक थे, पर चूचे मस्त थे, वो भी इम्प्लांट्स के बिना।
“नहीं, अभी कसरत करूँगा।” बोलते हुए मेरी नज़र उसकी छाती पर ही थी।
फार्म हाउस में कुएँ का पानी एक झरने जैसे फाउंटेन से हो कर ही खेत में जा रहा था। उसी कारण थोड़ा कीचड़ सा भी हो गया था। एक लम्बी छलांग लगा मैंने कीचड़ पार किया और वहीं पास में अपना टी-शर्ट निकाल पुश-अप व अन्य एक्सरसाइज करने लगा।
तभी टहलते हुए कनिका आई और मेरे कसरती बदन को निहारने लगी, मेरी ओर आने लगी, तभी कोशिश के बावजूद पैर फिसल गया और वो कीचड़ में गिर गई।
मैं गया और उसे हाथ पकड़ कर निकाला, “लगी तो नहीं आपको?”
“लगी नहीं पर गंदी हो गई हूँ”, कनिका बोली।
“झरना बह रहा है, साफ़ हो जाइये !”
“यहाँ खुले में?”
“क्यूँ, एकदम फ्रेश पानी है, केअर टेकर भी नहीं है, उसकी वाइफ ने बोला कि वो पास के गाँव तक सामान लाने गया है और मैं चला जाता हूँ।”मैंने कहा जबकि मैं जाना नहीं चाहता था।
“तुम चले जाओगे तो साफ़ कौन करायेगा?” कनिका आँख मारते हुए बोली।
मेरा हाथ पकड़ झरने के नीचे गई और पानी से धुल उससे कपडे नंगे जिस्म से चिपक गए। अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था। और कनिका एक कामुक हसीन हूर लग रही थी।
“यहाँ भी लगा है !” कहते हुए मैंने उसके चूतड़ नाप लिए।
“और कहाँ लगा है साफ़ कर दो ना !” कनिका एकदम करीब आते हुए बोली।
“यहाँ !” इशारा समझ एक चुम्बन दे दिया। कनिका आलिंगनबद्ध हो बेतहाशा मेरे नंगे बदन को चूमने लगी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने कनिका को निर्वस्त्र किया तो उसने मेरी बरमुडा उतारा और मेरे लौड़े को चूसने लगी। कनिका की हरकत से एक बात साफ़ थी कि कामवासना उस पर हावी थी क्यूंकि ज्यादातर क्लाइंट्स लंड नहीं चूसती है, हाँ चूत चटवाती हैं। झरने के नीचे कनिका ने अपने मम्मों को भींचा और मेरा लंड उसके बड़े बड़े मम्मों के बीच चलने लगा। झरने से निकल एक पत्थर के सहारे कनिका झुकी और मैंने पीछे से उसके चूतड़ चूमना चालू किये और गांड चाटने लगा। रात को यही गाण्ड लिंडा ने चाटी थी।