गैर मर्दों की बाहों में मिलता है सुख-2
गैर मर्दों की बाहों में मिलता है सुख-1
अन्तर्वासना में अपनी कहानियाँ भेजने वालों को एक बार फिर से गीता का प्रणाम! खुली फुद्दी से मेरी कहानी पढ़ने वालों को प्रणाम! सो दोस्तो अब तक चुदाई का सफ़र में मैं अब शादीशुदा हूँ लेकिन चुदाई का सफ़र में मेरी ज़िंदगी में पड़ोसी के बाद दूसरा लौड़ा किसने डाला?
मैंने बताया था कि पड़ोसी ने मेरे साथ अवैध संबंध बनाए वैसे भी मुझे शादीशुदा मर्दों से चुद कर मजा आता है पड़ोसी के ऑस्ट्रेलिया जाने से अब मेरी फुद्दी प्यासी थी तड़फ़ रही थी। एक दिन घर में मेरी बड़ी बहन का नंदोई आया था, मम्मी घर नहीं थी और वो किसी काम से शहर आया था। रात हो जाने के कारण उसको रुकना पड़ा।
मैं डिनर तैयार करने लगी। पापा उसको बिठा कर खुद बाहर ठेके से दारू की बोतल लेने गये। मैं किचन में काम करते वक्त चुन्नी नहीं लेती थी और वैसे भी मैं डीप-नेक और पीछे ज़िप वाले सूट पहनती हूँ।
वो किचन में ग्लास, पानी, नमकीन लेने आया, बोला- नमकीन दे दो!
मैं डिब्बे से नमकीन निकालने लगी जो उपर वाली शेल्फ पे था। मैंने कहा- रुकना! मैं स्टूल ले कर आती हूँ।
वो बोला- उसकी क्या ज़रूरत? उसने पीछे से आकर उठा दिया और बोला- लो डिब्बा उतार लो उसकी इस हरक़त में उसने मेरे चूतड़ों को हल्के से दबा डाला। जाते जाते मेरे मम्मों को भी दबा गया।
फिर पापा और वो बैठ कर पीने लगे। उसकी क्षमता काफ़ी लगती थी पापा को चढ़ गई लेकिन दूसरी बोतल भी खुल गई। पापा थोड़ा नमकीन और पानी लाने के लिए उठने लगे। वो बोला- प्लीज़ अंकल जी! आप बैठो मैं लाता हूँ।
रसोई में आकर उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और मेरी गर्दन पे अपने होंठ रख दिए। मुझे गरम करने के लिए उसने मेरे मम्मों को दबाया और बिना बोले वहाँ से चला गया। उसकी मजबूत बाहों से मेरी प्यासी फुद्दी गीली होने लगी।
थोड़ी ढेर में पापा को ज्यादा चढ़ गई। तभी भाई का फोन आया कि वो आज अपने ससुराल में ही रुकने वाले है। मैंने गेस्ट रूम में बिस्तर लगा दिया। उसके लिए खाना लगाने लगी।
तभी वो एक पेग हाथ में लेकर मेरी तरफ आया और मुझे पिलाने लगा। मैंने मना किया लेकिन उसने पेग पिला ही दिया। सरूर जल्दी ही चढ़ने लगा। दोनों खाना खाने डाइनिंग टेबल पे बैठ गये। वो उठा और दो पेग बना लाया, बोला- गीता जी! एक जाम और मेरे नाम का!
मैं वो पेग गटक गई। खाना खाने के बाद मैं उठी, बर्तन वगैरा रख के अपने कमरे में चली गई और नशे में सरूर सा आने लगा। तभी वो कमरे में आया और कुण्डी चढ़ा दी।
उसने आते ही मुझे दबोच लिया, ज़िप खोल मेरा कमीज़ उतार दिया, ब्रा उतार कर मेरे मम्मों को मसलने लगा, बोला- गीता! तुम बहुत मस्त माल हो ,कैसी गोल-मोल गाण्ड! उफ़फ्फ़! कायल कर दिया तूने!
कहते ही मैंने भी उसके गले में बाहें डाल दी और बोली- आप भी असली मर्द हो।