हसीन धोखा-2
इशरत की गोरी गोरी मुलायम टाँगें, मांसल जाँघें और गोल गोल चूतड़ का क्या नज़ारा दिख रहा था..
और पीछे से उस आदमी का लंड इशरत की गाण्ड की दरार की बीच से होता होता हुआ चूत में घचागच घुसे जा रहा था..
फ़च फ़च की आवाज़ से कमरा गूँज रहा था।
सच बताऊँ तो यह नज़ारा देख और इशरत की कामुक चीखें सुन मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया लेकिन फिर जब महसूस हुआ कि यह मेरी बीवी है..
एक पल तो मुझे बहुत तेज़ गुस्सा आया और जैसी ही मैं उस आदमी को मारने के लिए आगे बढ़ने लगा…
इशरत बोली- ओह मा.. आह आह आह आह.. और ज़ोर से, फाड़ दो आज मेरी फुद्दी को ! …माआ आआ आ… मर गई मा.. आह.. म्म्म्म… रूको मत.. और ज़ोर से…
अचानक मुझे ऐसा लगा जैसा मेरे साथ धोखा हुआ है, मेरी बीवी मेरे पीठ पीछे गैर मर्दों से चुदती है… इतना बड़ा धोखा…???
लेकिन ना जाने क्यूँ मुझे बुरा नहीं लग रहा था.. बल्कि वो हैवान जिस तरह मेरी इशरत को चोद रहा था… उसे देख कर ही मेरा लंड फटने को हो रहा था।
फ़च… फ़च… की आवाज़ गूँज रही थी पूरे कमरे में !
इशरत की दर्द भारी आहें किसी को झाड़ने के लिए काफ़ी थी..
बहुत तेज चीख रही थी वो- ओह… हाँ… और चोदो मुझे.. चोदो चोदो.. चोदो मुझे… आज मज़ा आ रहा है चुदाई का.. …आज मुझे चोदते रहो.. रहम मत खाओ मुझ पर… मा… आ.. म… मैं … झड़ने वाली हूँ…
तभी वो आदमी और जोर से इशरत को चोदने लगा.. किसी मशीन की तरह चूत के अंदर बाहर हो रहा था..
मेरी इशरत की चूत के पानी की वजह से उसका पूरा लंड चमक रहा था..
इशरत भी अपने चूतड़ पीछे की तरफ़ उछाल उछाल कर चुद रही थी..
तभी वो मचलने लगी और उसका शरीर में थरथरत हुई और वो झड़ने लगी..
झड़ते वक़्त बहुत तेज़ी से चीख रही थी और गालियाँ दे रही थी- …चोद मुझे रंडी के बीज… फाड़ दे आज मेरी इस छीनाल चूत को..
…आआ… आआआ…आअहह… माइईईई मैं …त त तो गई…
तभी उसने इशरत का मुँह घुमाया और ज़ोर से उसके होंठों को चूमने लगा.. दोनों जीभ निकाल कर चूस रहे थे.. लार बह रही थी.. एक दूसरे की लार को चाट रहे थे.. इतना गंदा लग रहा था देखने में.. लेकिन वो दोनों तो अलग ही दुनिया में खोए हुए थे !
झड़ने की वजह से अब इशरत से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था.. तो उसने इशरत को गोद में उठाकर बेड पेर लिटा दिया और और उसके ऊपर आ गया..
तभी अचानक उसने मुझे देख लिया।
उस हैवान की चुदाई करने के अंदाज से मैं इतना डर गया था कि जब उसने मेरी तरफ देखा तो मेरी गांड फट गई.. और शायद वो इस बात को समझ भी गया…
उसने मेरे तरफ देखते देखते अपना लंड इशरत की फ़ुद्दी पर टिकाया और एक ज़ोरदार धक्का दिया.. यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
“…आह ह ह ह… मर गई माँ… उईईइ माँ…!!”
और फिर उसने ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी।
…फ़च फ़च… आ..ओह..
यही सब आवाज़ें सुनाई दे रही थी.. वो अभी भी मुझे देख रहा था..
मुझसे अब रहा ना गया और मैंने धीरे धीरे अपना लंड सहलाना शुरू किया..