मेट्रो में मुलाकात
अन्तर्वासना के तमाम पाठकों एवं पठिकाओं को मेरा प्यार भरा नमस्कार!
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और हर कहानी को बहुत मजा लेकर पढ़ता हूँ। मैं दिखने में एकदम गोरा और हट्टा कट्टा लम्बे कद वाला हूँ। मेरा लंड 9 इंच का है जितनी भी लड़कियों को आज तक चोदा, सबने मेरे लंड की जमकर तारीफ की है और दुबारा चुदने की इच्छा जाहिर की है।
जैसा कि मैंने आपको बताया कि मैं अन्तर्वासना की हर कहानी पढ़ता हूँ तो एक दिन सोचा क्यूँ न मैं भी अपनी सच्ची कहानी लिखूँ। तो आज मैं जो आपको लिखने जा रहा हूँ वो घटना आज से एक साल पहले की है जब मैं गुड़गाँव में नौकरी करता था, हर रोज मेट्रो से जाना होता था.
मेरी एक आदत है कि मैं जब भी मेट्रो सफ़र करता हूँ तो मैं अपने मोबाइल में अन्तर्वासना की कहानी पढ़ता जाता हूँ। और हर लड़की को देख कर सोचता हूँ कि वो लड़की मेरे साथ चुदाई करे और एक दिन यही हुआ।
जब मैं मेट्रो में मैं अन्तर्वासना की कहानी पढ़ रहा था, तभी मेरे बराबर में बैठी एक लड़की जो दिखने में बहुत पैसे वाले घर की लग रही थी, उसकी उम्र 22-24 साल होगी और उसका रंग बहुत गोरा था और क्या कहूँ उसके बारे में, जो एक बार देख ले बस उसका लंड वहीं सलामी देने लग जाये, मोटे मोटे चुच्चे थे उसके, कसम से क़यामत थी वो लड़की!
उस लड़की ने शायद मुझे कहानी पढ़ते देख लिया, वह मुझसे बोली- सुनिए!
मैंने उसे देखा और पूछा- क्या आप मुझसे कुछ कह रही हैं?
तो उसने कहा- हाँ!
मैंने कहा- बोलिए, मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए?
तो उसने कहा- मैंने नया मोबाइल ख़रीदा है, क्या आप बता सकते हैं कि इसमें इन्टरनेट कैसे चलता है?
मैंने हाँ में उत्तर दिया और उसका मोबाइल लेकर उसमे सेट्टिंग कर दी और मोबाइल में इन्टरनेट चला दिया।
उसने मुझे थैंक्स कहा, मैं फिर से अपनी कहानी पढ़ने लगा।
उस लड़की ने दुबारा मुझसे पूछा और जो उसने मुझसे पूछा, मेरे तो वो सुन कर रोंगटे खड़े हो गये और मेरा लंड जो पहले से ही सलामी दे रहा और तन गया, उसने मुझसे पूछा- आप जो कहानी पढ़ रहे हैं, वो क्या मेरे मोबाइल में चला सकते हैं?
मैं थोड़ा झिझक रहा था लेकिन मैंने उससे कहा- सॉरी मैडम, यह कहानी थोड़ी गन्दी वाली है, यह आपके लिए नहीं है।
तो उसने कहा- दिखाओ! इसमें ऐसा कहाँ लिखा है कि केवल लड़के ही इस कहानी को पढ़ेंगे?
मैं चुप रहा। मेट्रो में काफी भीड़ होने से कोई एक दूसरे पर ध्यान नहीं दे रहा था तो मैंने कहा- ठीक है मैडम, जैसी आपकी मर्जी!
मैंने उसका मोबाइल लिया और उसमें अन्तर्वासना चलाने लगा। मैं कहानी ओपन कर ही रहा था, तभी मेरी जांघों पर मैंने कुछ हलचल महसूस की। देखा तो वो लड़की धीरे धीरे मेरी जांघों को सहला रही थी। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था, मैंने कोई विरोध नहीं किया और अपने बैग उठा कर अपने पैरों पर रख दिया ताकि कोई देख न सके।