पैसों के लिए शादी कर बैठी-5
सबको प्यार भरी नमस्ते, इस नाचीज़ सीमा की खूबसूरत अदा से प्रणाम!
फ़िर अपने पति के गाँव के एक बाकें जवान से, उसके बाद गली के एक लड़के से तृप्ति हासिल करने के बाद मैं अपने नौकर दीपक और ड्राईवर शाम से चुदी।
दोनों पेलने पर उतारू थे और धीरे धीरे मुझे इस चुदाई का बहुत मजा आने लगा। वे दोनों फाड़ फाड़ मेरी गांड चूत मार रहे थे। पहले दीपक झड़ा तो कुछ समय में शाम की पिचकारी मेरे अन्दर गर्माहट देने लगी।
दोनों काफ़ी देर तक मुझ नंगी को चूमते रहे थे। सुबह के ढाई बजे तक मेरी गेम बजाई और आज एक नया अनुभव प्राप्त हुआ।
फिर शाम और दीपक अक्सर मुझे मसलने लगे, मुझे उन दोनों के बाँहों में जाना बहुत सुखदायक लगने लगा था।
मैं खुश थी, घर में लंड मिल रहे थे। तभी एक दुर्घटना घटी, हमारी कार का एक्सीडेंट हुआ, कार में सिर्फ शाम था, उसकी दोनों टांगों में फ्रैक्चर आया बाजू में भी शीशा माथे पर लगा।
उधर दीपक को किसी ने दुबई जाकर काम करने की ऑफर दी, उसने नौकरी छोड़ दी पर जब तक गया नहीं, वो मुझे चोदने आता था।
उसके जाने के बाद मैंने फिर से मुँह मारना शुरु कर दिया। मेरे पति शुक्ला जी ने घर में पेंट के साथ पी ओ पी करवाने का फैसला लिया।
पी ओ पी के कारीगर आये और उन्हें ऊपर का कमरा दे दिया, वो इसलिए कि इन्होंने उनके साथ ठेका किया था जल्दी से जल्दी काम निपटाने के लिए!
लेकिन उनको क्या मालूम था कि उन्होंने पेंट के काम के साथ साथ एक हसीं दिलरुबा को खुश रखने का काम भी लिया है।
पहले मेरा ध्यान उनमें नहीं था पर वैसे में वासना में जलभुन रही थी, पति रात को ऐसे ही सो जाते, मुझे बहुत बहुत गुस्सा आता और जाकर खुद को और तरीकों से शान्ति देकर सो जाती, मोटे लौड़े की जरुरत थी मेरी प्यासी फ़ुद्दी को जो मेरी हड्डी से हड्डी बजा डाले। वो कुल चार लोग थे, वहीं ऊपर रहना था।
मेरी नज़र पहले दिन शाम को उन पर तब गई जब मैं नहा कर छत पर तौलिया सूखने डालने गई।
मुझे देख कर उसका मुँह खुला का खुला रह गया, बालों से गिर रहा पानी गालों पर से होकर गर्दन से होकर मेरी पहाड़ी पर जा रहा था।
जब मैंने उसको देखा उसने डर कर नजर हटा ली और काम करने लगा, दूसरे की तरफ मेरी पीठ थी, मैं स्लीवलेस ब्लाउज में थी, पीछे सिर्फ स्ट्रिप ही था, पतली कमर बड़े बड़े मम्मे, गोरा रंग, मुझे मालूम था कि एक बन्दा पीछे भी है।
मैंने पीठ दिखाने के लिए पल्लू ठीक करने के बहाने साइड करके भीगे ब्लाउज के दर्शन करवा दिए। पर मुझे यह नहीं मालूम था कि उसने दर्शन किये या डरपोक ने मुँह दूसरी तरफ कर लिया था। मैं एकदम से मुड़ी, उसको गर्दन मोड़ते मैंने देख लिया, मतलब कि उसने देखा था।
नीचे वाले पोर्शन में सब टिपटॉप था ऊपर वाले पोर्शन में ही काम था। दो लोग अंदर कमरे की टुकाई कर रहे थे, उनको देखा वो दोनों काफी सोलिड जोशीले से लगे।