ऋतू की सहेली
प्रेषक : सचिन कुमार
प्यारे दोस्तो !
मेरी पिछली कहानी ‘ ऋतू की इच्छा ‘ को काफी अच्छा समर्थन मिला पाठकों से, इसलिए अब मैं आपको आगे की कहानी सुनाता हूँ।
ऋतू के घर मैं, जब भी उसके पति बाहर गए होते, तभी चला जाता था। एक दिन जब मैं ऋतू के घर गया तो उसने मुझसे कहा- मेरी एक सहेली है, उसकी शादी को २ साल हो गए हैं पर उनका कोई बच्चा नहीं हुआ। अब उसके पति का कहीं और चक्कर चल रहा है इसलिए उसका पति उसकी बिलकुल भी परवाह नहीं करता। क्या तुम उसकी थोडी मदद कर सकते हो?
मैं समझ गया कि मुझे एक और चूत मिलने वाली है, मैं तो ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो गया। मैंने ऋतू से उसका पता लिया और अगले दिन दोपहर को ११ बजे उनके घर पहुँच गया।
जब मैं उनके घर पहुंचा तो एक सुन्दर सी २५-२६ साल की लड़की ने दरवाज़ा खोला। ऋतू ने मुझे उसका नाम गीता बताया था, तो मैंने पूछा- क्या तुम गीता हो?
उसने कहा- हाँ !
मैंने कहा- मैं राहुल हूँ !
तो उसने कहा- आइये ना ! अन्दर आइये।
शायद ऋतू ने उसको पहले ही बता दिया था कि मैं कल आऊंगा, इसलिए घर में उसके अलावा कोई और नहीं था। फिर भी मैंने ऐसे ही पूछ लिया कि नौकर नहीं है घर पे?
तो उसने कहा- आज सबको छुट्टी दे रखी है।
मैंने कहा- शायद ऋतू ने आपको पहले ही सब कुछ बता दिया था?
गीता ने कहा- हाँ !
गीता ने लाल रंग का सूट डाला हुआ था जो कि एकदम पतला झीना था, जिसमें से उसकी ब्रा साफ़ नजर आ रही थी। उसके स्तन भी ३४ साइज़ के होंगे। मैं तो उनको देखता ही रह गया। अचानक गीता ने पूछा- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- जो चीज़ देखने की है, वही देख रहा हूँ !
तो वो कहने लगी- ऐसे ही देखनी है या फिर छू कर भी देखनी है?
मैंने कहा- यही नहीं सब कुछ छू कर देखना है !
तो उसने कहा- उसके लिए तो तुम्हें अन्दर बेडरूम तक आना पड़ेगा !
मैंने कहा- चलो फिर देर किस बात की है?
हम दोनों उठ कर अन्दर उसके बेडरूम में चले गए।
अन्दर जा कर मैंने उसे कस के पकड़ लिया और उसे चूमने लगा। गीता भी मुझे किस करने लगी। फिर मैंने धीरे धीरे उसके स्तन सहलाने शुरू कर दिए। वो इतनी गरम हो गई कि उसने अपने आप ही अपने कपड़े उतार दिए। शायद वो काफी दिनों से सेक्स के लिए प्यासी थी।
तभी अचानक मुझे कुछ सूझा और मैंने उसे कहा- पहले मैं तुम्हारी मालिश करता हूँ तेल से, फिर हम प्यार करेंगे !
फिर मैंने एक हाथ में तेल लिया और उसको पेट के बल लेटा दिया।
पहले मैंने उसकी पीठ पर मालिश करनी शुरू की। फिर धीरे धीरे मैं उसके चूतड़ों पर मालिश करने लगा और उसकी चूत पर भी हाथ फेरने लगा। फिर मैंने उसे सीधे होने को कहा।
अब उसके स्तन सीधे मेरे सामने थे। मैं धीरे धीरे उसके स्तनों पर गोल गोल हाथ फेरने लगा, वो सिसकियाँ भरने लगी। उसके बाद मैंने धीरे धीरे उसकी टाँगे चौड़ी करी और उसकी चूत पर मालिश करने लगा।