स्वर्ग का अनुभव-३
प्रेषक : उमेश
सबसे पहले तो मैं गुरूजी का आभार मानता हूँ कि उन्होंने मेरी सही अनुभव वाली दो कहानियाँ ‘स्वर्ग का अनुभव-१’ और ‘स्वर्ग का अनुभव-२’ प्रस्तुत की ! इस कहानी में मेरी कोई कल्पना नहीं है इसलिए जिसको काल्पनिक कहानी में ही मजा आता हो वो यह कहानी नहीं पढ़े ! मेरी पहली दो कहानी के बाद मुझे बहुत सारे मेल मिले ! इसलिए आज मैं मेरी तीसरी सही अनुभव वाली कहानी आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ!
मैं अहमदाबाद में रहने वाला ३६ साल का लड़का हूँ! मैं एक लिमिटेड कंपनी में अकाउंट मेनेजर की जॉब करता हूँ! आज मैं जो कहानी प्रस्तुत करने जा रहा हूँ वो उन्हीं में से एक लड़की की है जिसने मुझे मेल किया था ! उसका नाम कविता हे ! उसी की इच्छा थी कि मैं हम दोनों की कहानी लिखूँ ! उसी की इच्छा को मान देते हुए मैं यह कहानी लिख रहा हूँ ! वो भी अहमदाबाद में रहती है! उसने मेरी कहानी पढ़कर मुझसे मिलने का प्रस्ताव रखा था ! तो लीजिये अब आप सुनिए उसी की कहानी !
मेरी एक फ़ैन थी कविता ! मुझे भी उसमे बहुत दिलचस्पी होने लगी थी ! मैं भी उसको मिलने के लिए बेकरार था ! उसका मेल आते ही मैंने अपना सेल नंबर उसको भेजा था ! और एक दिन उसका फ़ोन मेरे मोबाइल पर आया ! पहले उसने मेरे बारे में जानकारी ली और फिर उसने मुझसे मिलने के लिए बोला !
मैं भी एक दिन ऑफिस में से आधी छुट्टी लेकर उसको मिलने के लिए चला गया ! हम रास्ते में कहीं मिले फिर हमने होटल में जाने का तय किया ! हम दोनों होटल में चले गए ! मैंने पहले स्नान कर लिया ! फिर मैं कमरे में आ गया ! तो अचानक उसने बोला कि मैं तुमसे नहीं मिल पाऊँगी ! वो कुछ घबराई हुई मुझे लगी ! क्योंकि पहली ही मुलाकात में हम होटल में पहुँच गए थे ! मेरी इच्छा उसे मिलने की बहुत थी ! मैं सोचता था कि काश वो मेरी लाइफ में होती तो मजा आ जाता ! वो दिखने में भी काफी खूबसूरत थी ! उसने बोला कि मैं तुमको छू भी नहीं पाऊँगी !
हमने थोड़ी देर बातें की फिर मैंने उसकी इच्छा को मानते हुए उसे जाने दिया ! मैं उस दिन तड़पता ही रह गया !
उसकी याद मेरे दिल से नहीं गई थी ! इस लिए मैंने उसे एक दिन मेल कर दिया ! तो उसका भी साथ ही फ़ोन आया कि हम युगल-कमरे में मिलते हैं! मुझे लगा कि युगल-कमरे में भी वो मुझे छूने नहीं देगी !
उस दिन हम दोनों युगल-कमरे में पहुँच गए ! मैं सोच रहा था कि उसको छू लूं या नहीं !
उसने अचानक मेरे हाथ को अपने चूचियों पर रख दिए ! मुझे तो लग रहा था कि मैं कोई सपना देख रहा हूँ ! पर यह हकीकत थी ! फिर मैंने उसके चूचियाँ उसके शर्ट से बाहर निकाल दी ! उसकी चूचियाँ क़यामत थीं ! बिल्कुल तनी हुईं। उसके निप्पल बहुत ही ख़ूबसूरत थे।। मैंने उसकी चूचियों को हाथों से मसलना शुरु कर दिया और फिर दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा।