स्वाति बनाम सिमरन
प्रेषक : रोशन झा
हाय दोस्तो, मेरा नाम रोशन है और मैं आपको लगभग दो साल पुरानी चूत चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ जिससे मेरी मुलाकात पहली बार इन्टरनेट पर हुई।
मैं अकसर इन्टरनेट पर काम किया करता और एक दिन मेरी मुलाकात एक स्वाति नाम की लड़की से हुई। मैं यह तो नहीं जानता कि उसने मेरे अंदर क्या खूबी देखी पर हमने अकसर इन्टरनेट पर खूब बातें करते।
जल्दी ही हमारी दोस्ती नया मोड़ ले रही थी।
एक दिन मैंने उससे उसकी तस्वीर दिखाने के लिए कहा तो उसने कुछ ही दिनों में अपनी कई तस्वीरें मुझे दिखाई।
उसे देखते ही मैं पगला गया, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मेरे हाथों कितनी बड़ी हूर की परी लग गयी हो !
उससे इतने मोटे चूचे और चिकनी टांगों से मेरी नज़र हटती ही नहीं थी।
मैंने जब उसकी तस्वीरों पर थोड़ा ध्यान दिया तो उसके घर के माहौल को देखकर पता चल रहा था कि वो किसी रईस की बेटी है।
अब मैंने पूरा ध्यान बस उसे अपने प्यार में फंसाने में लगा दिया।
मैं उससे हमेशा रोमांटिक बातें किया करता जिससे आखिरकार उसने मुझे अपनी तड़प जताते हुए मिलने के लिए कहा।
हमने अपने निहार नगर, दिल्ली के सामने वाले सुनसान पार्क में मिलने के लिए बात तय की।
अगले दिन मैं स्वाति से मिलने उस पार्क में पहुँचा।
वहाँ मैंने देखा की स्वाति ने छोटी से स्कर्ट पहनी हुई थी जिसमें उसकी नंगी टांगें दिखाई दे रही थी और उसके पतले से टॉप के ऊपर से उसके चूचों का गलियारा मेरा ध्यान खींच रहा था।
हम मिले और अपनी बातों में खो ही गए।
उसी दिन मैंने अपने प्यार का इज़हार स्वाति से कर दिया और करीब दो घंटे बात करते करते खूब मगजमारी की।
वहाँ जब स्वाति टॉयलेट गई तो उसके जाते ही मैंने स्वाति के पर्स को टटोला तो देखा कि उसमें कई लड़कों के नंबर लिखे हुए थे और उसकी एक नयी आई.डी भी लिखी हुई थी।
मैंने घर जाते ही उसके इन्टरनेट पर उसका अकाउंट खोल कर देखा तो पता चला कि उसका नाम एक और नाम सिमरन था और वो कई लड़कों से मिलने जाती थी और न जाने कितने से मिल कर उनके साथ घूम फिर कर खूब पैसे भी ऐंठ चुकी होगी।
तभी मुझे पता चला की स्वाति असल में रांड थी जोकि दूसरी आम रंडियों के मुकाबले दुगने रुपये वसूलती थी।
मुझे पूरी रात नींद नहीं आई और मैंने आराम से अपने साथ हुए धोखे का बदला लेने की योजना बनाई।
अगले दिन मैंने स्वाति को उसी पार्क में बुलाया और अपनी योजना के मुताबिक़ उससे खूब रोमांटिक बातें करता हुआ अपनी प्यास बुझाने की ओर चल पड़ा।
मैंने उससे एक चुम्बन मांगते हुए उससे हाथों को सहलाते हुए उसे गर्म करना शुरू कर दिया।
कुछ ही देर में अब हम एक दूसरे को बेसब्री से चूमते हुए एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे।
उसे काफ़ी मज़ा आ रहा था।
तभी मैंने कहा- जान. .