ट्रेन में चोदना सीखा-2
ट्रेन के डिब्बे में माहॉल शांत होता जा रहा था क्योंकि रात काफ़ी हो चली थी और अधिकतर लोग सोने लगे था या सोने की तैयारी कर रहे थे। मैं भी सोने की कोशिश करने लगा पर नींद थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही उधर लॅंड कुछ देर पहले के सीन को याद कर के टनटनाता जा रहा था। फिर धीरे धीरे मेरी भी पलकें भारी होने लगी। जैसे ही नींद का झोंका आया तभी लगा कि किसी ने मुझे उठा दिया है। आँखे खोली तो आंटी सामने खड़ी थी और फिर वो बाथरूम की तरफ चली गयी। मैं उसे देखता ही रहा, समझ मैं नही आ रहा था कि क्या करना चाहिए। तभी उसने पलट कर देखा और मुझे पीछे आने का इशारा किया। मैं उसके पीछे पीछे टाय्लेट में जा घुसा। शुक्र था किसी ने देखा नहीं। उसने मेरे अंदर घुसते ही दरवाज़ा बंद कर दिया और झट से मेरा लंड पकड़ लिया। लंड तो पहले से टनटनाया हुआ था। उसने मेरी पैंट खोल कर नीचे खिसका दिया और गीला अंडरवेयर भी नीचे कर दिया। फिर उसे कसके पकड़ के उपर नीचे करने लगी पर मुझे कभी कभी दर्द भी होता क्योंकि लौड्ा तो खड़ा होने के बाद बिल्कुल पेट से जा लगता था। और किसी ने उसकी इस तरह मालिश नहीं की थी। आंटी ने अब अपना चेहरा मेरे लंड पर झुकाया तो मैं बोला कि ये गंदा हो रहा है मैने अभी इससे नही धोया है।वो कहने लगी –अरे इसको गंदा नहीं कहते। इसमें ही तो सारा मज़ा है। कितनी प्यारी गंध आ रही है इसमें से। ऐसा कहते हुए उसने मेरे लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं बड़ी तेज़ी से झड़ने की ओर बढ़ने लगा। मैने कहा- आंटी रुक जाओ नहीं तो मेरा माल फिर से निकल जाएगा। आंटी ने लोड्ा चूसने की रफ़्तार तो कम कर दी पर चूसना जारी रखा। वो इस तरह चूस रही थी कि मुझे लगा कि मैं ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाऊंगा। जब मेरा स्खलन नज़दीक आ गया तो मैंने चाहा कि उसके मुँह से लंड निकाल लूं पर उसने दाँत से हल्के से काट कर इशारा किया कि ऐसे ही रहो। इससे पहले कि मैं कहता कि निकलने वाला है उसे पहले ही लंड ने रस की बौछार करनी शुरू कर दी।आंटी तो एक नम्बर की लंड चूसक्कर थी। एक भी बूँद नीचे नहीं गिरने दी। मैं लंबी लंबी साँसें ले रहा था और उसने अपना मुँह खोल कर मेरा रस मुझे दिखाया फिर उसने गले के नीचे उतार लिया। कैसा टेस्ट था- मैंने कहा। कहने लगी बहुत अच्छा तुम भी चाखोगे क्या। अपना नहीं पर आपका। मैंने कह दिया कि जो होगा देख जाएगा पर अगर इसने चूत दिखा दी तो जिंदगी की पहली चूत के दर्शन हो जाएँगे। फिर उसने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा कि यहाँ जगह नहीं है और वक़्त भी। फिर कभी देखेंगे, मन वहाँ से जाने का बिल्कुल ही नहीं हो रहा था। लंड ने इस बार खड़ा होने में थोड़ी देर लगाई पर फिर पहले की तरह टनटना गया।