मीटर बदलने का इनाम चूत चुदाई
Meter Badalne Ka Inam Choot Chudai
अन्तर्वासना के पाठकों को मनु शर्मा का नमस्कार।
मैं कोटा सिटी में रहता हूँ और बिजली विभाग में जॉब करता हूँ।
बात कुछ समय पहले की है, जब मैं विभाग के एक उपभोक्ता का बिजली का मीटर लगाने गया था।
कनेक्शन किसी सुनीता जैन महिला के नाम से इश्यू हुआ था।
मैं मीटर ले कर अपनी बाइक से उनके घर पहुँचा तो वो घर के बाहर ही कुर्सी पर बैठी थीं।
मुझे देखते ही वो खड़ी हो गईं और मैं उनसे बोला- आपका बिजली कनेक्शन इश्यू हो गया ओर मैं आपके घर मीटर लगाने आया हूँ।
अब इधर पहले मैं आप लोगों को सुनीता जी के बारे में बता दूँ।
मेरे अनुमान से उनकी उम्र 30-32 साल की होगी.. उनका रंग बिल्कुल साफ़ था और चूचे तो उनके बड़े ही मस्त थे।
उनके जिस्म का साइज़ शायद 34-30-36 के आस-पास था।
जिस वक्त मैं उनके घर गया था उस वक्त ब्लाउज तो उन्होंने बिल्कुल खुले गले का पहना हुआ था… जिसके कारण उनके चूचे मुझे साफ़ दिखाई दे रहे थे और उन चूचों की घाटी की गहराई तो देखने लायक थी।
कुल मिला कर ऊपर वाले ने उनको बड़ी फ़ुर्सत से बनाया था।
शायद उन्होंने मुझे पकड़ लिया था कि मेरी नज़र उनके चूचों पर थी।
फिर वे मुझे अपने घर में मीटर लगाने के लिए बोलीं।
मैं उनका मीटर लगा रहा था तो मेरी नज़र बार-बार उनके चूचों पर ही जा रही थी।
मेरी इस हरकत पर वो मुस्कुरा रही थीं। थोड़ी देर में मैंने उनका मीटर लगा दिया।
उसके बाद उन्होंने मुझे अन्दर बैठने के लिए बोला।
मैं जाकर एक सोफे पर बैठ गया।
थोड़ी देर बाद वो चाय लेकर आईं और झुक कर कप में चाय डालने लगीं।
इस कारण मुझे उनके बड़े-बड़े चूचों के सम्पूर्ण दर्शन हो रहे थे।
उनको मस्त चूचों को देखते ही मेरा लंड तो पैन्ट के अन्दर ही तंबू हो गया था और सुनीता जी ने भी इसे भाँप लिया था।
वो मेरे पास आकर बैठ गईं और मुझे चाय देते हुए बोलीं- आपको मेरे घर पर नया मीटर लगाने का इनाम तो देना ही पड़ेगा।
ऐसा कहते हुए उन्होंने मेरा लंड पैन्ट के ऊपर से ही पकड़ लिया और उसे सहलाने लगीं।
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मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वो ऐसा करेंगी।
फिर भी उनकी तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं तो उनके ऊपर टूट पड़ा।
मैं अपने होंठों से उनके होंठों का रसपान करने लगा।
क्या मुलायम होंठ थे मुझे उनके होंठों को चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
फिर धीरे-धीरे मेरे हाथ उनके चूचों पर रेंगने लगे ओर उन्हें ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा।
थोड़ी देर में मैंने उनके चूचों को उनके कपड़ों से आज़ाद कर दिया।
सुनीता जी ने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी.. जिसमें से उनके गोरे-गोरे चूचे चमक रहे थे। मैंने उसको भी निकाल फेंका और उनके एक मम्मे को पकड़ कर पागलों की तरह चूसने लगा।
मैं एक को चूसता और दूसरे को मसलता..