मेरी चालू बीवी-125
नलिनी भाभी- क्या अंकुर? खुद तो सोते रहते हो पर यह हमेशा जागता ही रहता है?
मैंने उठकर नलिनी भाभी को अपनी बाहों में दबोच लिया।
भाभी- क्या कर रहे हो? किशोरी यहाँ ही है… और उसे क्यों बड़े घूर घूर कर देख रहे थे?
मैं- हाँ भाभी, आपकी बेटी माल ही ऐसा है… बहुत मजेदार है किशोरी!
नलिनी भाभी- अच्छा तो अब उसके ऊपर भी नज़र है तेरी?
मैं- तो क्या हुआ… अगर उसे भी लौड़े की तलब है तो इसमें क्या बुराई है?
मैंने किशोरी की तरफ़ देखा, वो सीधी लेटी हुई थी, पता नहीं कि सो रही थी या हमारी बातें सुन रही होगी?
उसने अपनी जीन्स की बेल्ट का बटन खोल रखा था, जहाँ से अंदर पेट का गोरा हिस्सा दिखाई दे रहा था।
मैं- यार भाभी श्री, इसकी फ़ुद्दी के दर्शन करा दो.. देखो कैसे झांक रही है झरोखे से…
मैंने नलिनी भाभी को बाँहों में कसकर उनके लाल होंठों को चूमते हुए कहा।
और उन्होंने मुस्कुराकर मेरे कान पकड़ लिए- हर समय पिटाई वाला काम करना चाहता है। अगर जाग गई ना, तो हल्ला हो जायेगा…
चल अब सो जा वैसे ही.. सलोनी अभी बाहर आती होगी…
मैंने भाभी के चूतड़ों को कसकर दबाया..
वो मुझे वहीं छोड़कर कमरे से बाहर चली गई।
अपने बेड पर आते हुए मैंने फ़िर एक बार किशोरी की तरफ़ देखा तो वह मुझे गहन निद्रा में लगी।
अब मैं उसकी फ़ुद्दी देखने का लालच छोड़ नहीं सका।
मैं चुपचाप उसके समीप गया और उसकी जींस की बेल्ट के दोनों किनारे पकड़ खींच दिए विपरीत दिशा में…
और उसकी ज़िप ज़र्र से खुलती ही चली गई।
पहले तो मुझे लगा कि जैसे उसने नीचे कुछ पहना ही नहीं है, फिर मुझे उसकी डोरी वाली फैशनेबल कछिया दिखाई दे ही गई।
जो शायद उसकी चूत के हिस्से को ही ढके हुए थी।
उसकी गोरी झक्कास चिकनी चूत का ऊपरी हिस्सा मुझे दिखाई देने लगा था।
अब उससे आगे कुछ देखने के लिए बहुत मेहनत की जरूरत पड़नी थी, और फिर सलोनी के भी बाथरूम से बाहर आने की आवाज महसूस हुई।
मैं फ़्ट से अपने बिस्तर पर चढ़ कर लेट गया, सोने का नाटक करने लगा।
तभी सलोनी बाथरूम से बाहर आई।
उसने अपनी नाइटी उतार कर कोई ड्रेस पहनी, फिर उसने किशोरी को जगाया- उठ किशोरी, मैं जा रही हूँ… और अपने बदन को ऐसे हवा मत लगा… ले मेरी नाइटी पहनकर आराम से सो जाना…
किशोरी- ओह भाभी, क्या करती हो.. ठीक है… आप कहाँ जा रही हो?
सलोनी- नलिनी भाभी के साथ ऋतु और रिया को तैयार करने… तू यहाँ आराम कर… जब निबट जाएँगे तो तुझको बुला लेंगे।
किशोरी- ठीक है भाभी… आप जाइए, मैं सो रही हूँ यहाँ।
सलोनी- सो जाना पर अपने भैया का भी ध्यान रखना.. सब कुछ खोल कर सो रहे हैं… हा हा हा !
किशोरी- धत्त भाभी… आप भी ना? वो तो आप ही दिन में भैया को परेशान कर रही होंगी।
सलोनी- अच्छा तो बच्चू? तू जाग रही थी तब? अब तेरे लिए छोड़ कर जा रही हूँ… मेरी नाइटी पहन ले और मौका है, तू इनके सोने का फ़ायदा उठा..