ऑनलाइन के बाद पलंग तोड़ चुदाई फिर से -2
अब तक आपने पढ़ा..
मीनू के साथ सेक्स चैट के मज़े लेने के बाद हमने मिलने का निर्णय किया और मीनू अपनी सहेली के साथ आगरा ट्रेन से रवाना हो गई।
अब आगे..
मीनू सुबह 10 बजे आगरा पहुँच गई, आते ही उसने मुझे कॉल किया और मैं उसे लेने स्टेशन पहुँच गया।
मैंने स्टेशन पहुँच कर देखा कि दो लड़कियाँ.. जिनमें मीनू ने गुलाबी रंग की टी-शर्ट और ब्लू जीन्स पहनी हुई थी और हाथ में गुलाब का फूल लिया हुआ था।
हम एक-दूसरे की फ़ोटो तो देख ही चुके थे.. सो हमें एक-दूसरे को पहचानने में समय नहीं लगा।
मैंने उनके पास पहुँचते ही दोनों से ‘हैलो’ किया और उसने मुझे ‘रेड रोज’ दिया, मैंने भी उसे सहर्ष स्वीकार किया।
इसके बाद मैंने ऑटो किया और उन दोनों को रिक्शे से मेरी एक जानकारी के होटल में ले गया, पहुँचते ही मैंने दो कमरे बुक करवाए। इसके बाद नहाने-धोने से निवृत होकर हमने साथ में लंच किया और फिर हम आगरा की सैर को निकल गए।
मैंने उन्हें ताजमहल.. आगरा का किला इत्यादि घुमाया और एक मूवी भी देखी।
किन्तु मुझे और मीनू को असली इंतज़ार था शाम का..
शाम 6 बजे हम होटल लौट आए।
उसकी सहेली अपने कमरे में चली गई और उसने जाने से पहले हमें ‘हैप्पी एन्जॉय मूमेंट’ विश किया और हम दोनों अपने कमरे में आ गए।
मीनू कमरे में आते ही बाथरूम चली गई.. दस मिनट बाद वो गुलाबी रंग की नाइटी पहन कर निकली।
मैं सोफे पर बेठा हुआ था.. वो आते ही मेरी गोद में बैठ गई।
फिर क्या था हमारा कार्यक्रम शुरू हो गया।
मैं पीछे से उसके बालों को उठा कर उसकी गर्दन पर चुम्बन करने लगा, फिर मैंने उसका चेहरा घुमा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, मैंने उसके होंठों का रसपान करना शुरू कर दिया।
फिर मैं उसकी नाइटी के ऊपर से उसके मम्मों को दबाने लगा।
कुछ ही पलों में चुदास बढ़ गई.. मैंने उसे खड़ा कर दिया और उसकी नाइटी को उतार फेंका, अन्दर उसने काले रंग की ब्रा और सफ़ेद पैंटी पहनी हुई थी जिसमें से उसका गोरा बदन चमक रहा था, मैं ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को दबाने लगा और उसको खड़ी मुद्रा में ही उसके पूरे बदन पर चुम्बन करने लगा।
इसके बाद मैंने उसकी ब्रा और पैंटी उतार दिए तो वो एकदम नंगी मेरे सामने खड़ी थी।
फिर मैंने उसके उसके बाएँ मम्मे को मुँह में ले लिया और चूसने लगा, साथ में दायें मम्मे को अपने हाथ से दबाने लगा।
कुछ देर बाद इसी तरह मैं उसके दायें मम्मे को मुँह में लेकर बाएं को हाथ से मसलने लगा।
फिर मैंने उसकी चूत की ओर गौर किया, उसकी चूत एकदम गोरी व चिकनी थी.. जिस पर बालों का कोई नामो निशान ही नहीं था। मेरे चुम्बन करने और मम्मों क दबाने से वो गीली हो चुकी थी।
मैंने उसे सोफे पर बैठा कर अपनी टाँगें फैलाने को कहा।
उसने अपनी दोनों टाँगें सोफे पर बैठा कर फैला दीं.. जिससे उसकी चूत का मुँह खुल गया।