ट्रेन में मिली एक लड़की संग मस्ती-1
अभी दो दिन पहले सोमवार की बात है, मैं मुंबई से इलाहाबाद के लिए ट्रेन से आ रहा था।
तब कटनी से लगभग 27-28 साल की एक विवाहिता लड़की ट्रेन के 2AC कोच में आई।
तब मैं सो रहा था साइड की सीट में… उसकी आवाज़ से मेरी आँख खुल गई, देखा कि काफी मस्त बदन की लड़की थी वो… भरे भरे चूचे…
वो बातूनी बहुत थी और सामने के कूपे में सबके साथ खूब बातें करने लगी थी, एक बार तो ऐसा लगा कि उन सबके साथ है।
रात के 9 बज गए थे, अब हम भी उसके बात करने लग गए थे।
सारे लोग सो गए थे, करीब करीब सारा डिब्बा सो चुका था, लाइट भी बंद हो गईं थी मैंने उसको अपनी सीट ऑफर की, वो मान गई। अब हम दोनों एक सीट पर थे, बातें कर रहे थे, उसने पर्दा पूरी तरह से कर दिया था, अब हमको कोई भी नहीं देख सकता था।
मेरा हाथ उसके पैरों को सहला रहा था।
फिर मैंने उठ कर उसी की तरफ सर कर लिया और वो मेरे हाथों में सर रख कर लेट गई। अब ग्रीन सिग्नल था पर वो नखरे बहुत कर रही थी, फिर भी मैं उसको कभी माथे पर कभी गालों पर चुम्बन कर रहा था, लब चुम्बन करने नहीं दे रही थी।
कभी मैं उसकी चूची को छूता करता तो वो कहती- यह गलत है, आप तो आगे ही बढ़ते जा रहे हो?
खैर मेरे पास टाइम कम था और इलाहाबाद भी आने वाला था, मैंने अचानक हल्का से उठ कर उसके लबों को अपने लबों से जकड़ लिया।
वो छटपटाई और गुँ गुँ गुँ की आवाज़ करने लगी लेकिन मैंने भी नहीं छोड़ा उसको… और फिर वो भी साथ देने लगी, हमने चुम्बन को खत्म किया और हल्का सा उस पर लेट कर फिर से चूमा किया और दूसरे हाथ से चूची को मसल दिया पर वो नखरे इतना ज़्यादा कर रही थी, मैं समझ नहीं पा रहा था कि ऐसा क्यूँ कर रही है।
लेकिन मैं बेकाबू हो चुका था, इलाहाबाद भी आने वाला था, मैंने उसको फिर से लिप किस करना शुरू कर दिया, हाथों से उसकी टीशर्ट उठा दी और ब्रा के ऊपर से चूची दबाने लगा तो वो बहुत मचल रही थी पर मेरे शरीर का वज़न उसके ऊपर होने से वो ज्यादा कुछ नहीं कर पा रही थी।
मैंने ब्रा को ऊपर उठा कर चूची को मुँह में भर लिया। अब वो भी कम विरोध कर रही थी। मेरा हाथ अब फ्री था, मैंने उसके लोअर में हाथ डाल दिया और सीधे चूत पर ले गया।
‘आअह…’ साली पूरी गीली थी, सटाक से मेरी ऊँगली अंदर चली गई… आअह क्या गर्म चूत थी… क्लीन शेव चूत… अँधेरा था, देख तो नहीं पाया पर महसूस कर सकता था। मैं फिंगर फ़क कर रहा था, साथ में चूची चूस रहा था।
तभी इलाहाबाद आ गया था, ट्रेन प्लेटफार्म पर एंटर हो रही थी, हम दोनों के बिछड़ने का पल था। मैं जैसी ही पर्दे के बाहर आया, वो कुछ पल के बाद बाहर आई, उसकी आँखों में नशा था, खड़े लन्ड पर धोखा हो गया था क्योंकि मैंने अपने भाई को स्टेशन पर बुला रखा था नहीं तो मैं बनारस तक चला जाता।
चलते चलते उसने अपना फोन दिया और कहा कि वो अपने फोन से मेरा नम्बर मिलाए।