अच्छा, चल चूस दे..
कुछ साल पहले की बात है, मैं दिल्ली में बस से महिपालपुर से कनाट प्लेस जा रहा था, समय लगभग शाम के सात बजे रहा होगा, सर्दी होने की वजह से अँधेरा जल्दी हो गया था।
धौला कुआँ में मेरे बगल एक लड़का आकर बैठ गया- लगभग 25 साल का रहा होगा, हट्टा कट्टा शरीर, बाल फौजी स्टाईल में कटे हुए, औसत लम्बाई। तभी साथ ही हमारी बस में बहुत भीड़ हो गई। कुछ देर तक हम दोनों यूँ ही बैठे रहे, बस के हिचकोले और झटकों से हमारे शरीर आपस कभी कभी छू जाते थे। मैंने गौर किया की जब भी हमारे शरीर आपस में टकराते, वो अपने आप को पीछे नहीं हटाता था, मुझे भी उसका स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था।
मेरा एक हाथ मेरी जांघ पर रखा हुआ था, थोड़ी देर बाद उसका हाथ, जो उसने अपनी जांघ पर रखा हुआ था, मेरे हाथ से छूने लगा। कुछ देर मैंने कुछ देर तक मैंने कुछ नहीं महसूस किया। फिर थोड़ी देर बाद उसकी छोटी उंगली मेरी छोटी उंगली पर चढ़ गई। मैं समझ गया, धीरे धीरे उसका पूरा हाथ मेरे हाथ पर चढ़ गया।
अब मैं आगे बढ़ा, मैंने उसका चढ़ा हुआ हाथ पकड़ लिया। हाथ पकड़ने के देर थी कि उसने मेरा हाथ भींच लिया। हम दोनों की नज़रें मिली।
“कहाँ तक जा रहे हो?” उसने पूछा।
“सी पी !” मैंने जवाब दिया।
“चलो, रेलवे स्टेशन तक चलते हैं।”
उसके प्रस्ताव पर मैं राज़ी हो गया। अब तक मेरा लंड पूरा तन चुका था।
उसने मेरा हाथ उठा कर अपने लंड पर रख दिया, बस में इतनी भीड़ थी की तिल रखने की जगह नहीं थी। इसी वजह से कोई हमें देख नहीं पा रहा था। मुझे उसका लंड सहलाने में बहुत मज़ा आ रहा था, सामान्य साइज़ का रहा होगा लेकिन था बहुत मस्त !
वैसे भी, हवस में सारे लौड़े मस्त ही लगते हैं, चाहे बड़े हो या छोटे !
उसने अपने हाथ सामने वाली सीट के हैंडिल पर रखा और उस पर अपना सर रख कर झुक गया, ताकि मुझे उसका लंड सहलाते हुए कोइ देख ना ले। हम दोनों थोड़ी देर बाद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुँच गए।
मैंने पूछा- हम दोनों जायेंगे कहाँ?
उसने बताया कि वहाँ पर एक सार्वजनिक शौचालय है, वहाँ पर आराम से कर सकते हैं। हम दोनों कुछ देर तक वहाँ भटकते रहे, हमें पता चला कि वहाँ से शौचालय हटा दिया गया था क्यूँकि रेलवे स्टशन की नई बिल्डिंग बन रही थी।
हम दोनों वहाँ से चले आये।
मुझे उसका लंड चूसने का बहुत मन कर रहा था,”अब क्या करें?” मैंने निराश होकर पूछा।
“कोइ बात नहीं, हम दोनों डब्लू ए सी चलते हैं।”
“डब्लू ए सी मतलब?”
“वेस्टर्न एयर कमांड।” तो जनाब वायुसेना में थे। तभी उसके बाल फौजी तरीके से कटे हुए थे।
हम दोनों फिर से बस पकड़ कर धौला कुआँ से आगे, डब्लू ए सी पर उतर गए। थोड़ा आगे चलने पर वायुसेना कर्मचारियों के आवास थे और जैसे कि छावनी में होता है, आसपास जंगल था।
मेन गेट पर उससे संतरियों ने पूछताछ की, जिसका उसने जवाब दिया और हम दोनों को अन्दर जाने दिया गया।