पैसों के लिए शादी कर बैठी-4
सबको प्यार भरी नमस्ते, इस नाचीज़ सीमा की खूबसूरत अदा से प्रणाम!
मैं पच्चीस साल की एक हसीन लड़की हूँ और बाकी सब आपने मेरी पिछली चुदाई की दास्तान में पढ़ ही लिया होगा किस तरह मैंने पैसों के लालच में आकर फुद्दू बन्दे से शादी कर ली।
अपने पति के गाँव के एक बाकें जवान से चुदकर मेरी वासना कुछ दिन शांत रही, उसके बाद गली के एक लड़के से तृप्ति हासिल करने के बाद मेरी नज़र अपने नये ड्राईवर पर थी।
जब मैं उसके साथ बाहर जाती तो पीछे बैठने के बजाये उसके बराबर बैठती और मन में उसको बिस्तर पर ले जाने के सपने देखती!
और मुझे मालूम था किस तरह मर्द को लुभाया जाता है, मैं इस खेल की मंझी हुई खिलाड़िन बन चुकी थी, कभी उसके सामने अपनी चुन्नी सरका के अपने विशाल वक्ष के दर्शन करवा देती तो कभी छोटे कपड़े पहन घर में उसके कमरे तक किसी बहाने पहुँच जाती!
मुझे ऐसे कपड़ों में देख शाम का लंड ज़रूर खड़ा होता होगा।
मैंने एक दिन अपनी धोई हुई पैंटी सूखने के लिए पीछे तार पर डाल दी और अपने कमरे से खिड़की के ज़रिये उधर देखने लगी।
उसने सोचा मैडम सो गई है, वो धीरे धीरे आया और मेरी पैंटी उठा कमरे में लेकर गया। हैरानी तब हुई जब उसके साथ मैंने नौकर दीपक को निकलते देखा। उन्होंने पैंटी वापस वहीं टांग दी।
मैं थोड़ी देर बाद में उठी और पैंटी उतार लाई तो देखा कि चूत वाली जगह उनके माल से भीगी हुई थी। दो लौड़ों का पानी निकला था उस में! मैं जुबान निकाल कर उस पर लगे माल को चाटने लगी, मेरे बदन में वासना की आग जलने लगी, उनकी ऐसी हरकत से तन बदन जलने लगा था।
रात हुई, दीपक खाना लगाकर वापस अपने कमरे में गया और मैं खाना खाकर अपने कमरे में गई और परदे सरका दिए। लाइट जलने दी।
मैंने एक एक कर के अपने सारे कपड़े उतारे, एकदम नंगी होकर बिस्तर पर तकिया बाँहों में भरकर हाथ चूत के दाने को मसलते हुए ‘शाम मुझे चोदो! दीपक, मेरे राजा, मुझे चोदो!’ कहने लगी।
मुझे मालूम था कि कोई मुझे बाहर से देख रहा है। मैंने टी.वी का रिमोट उठाया और डीवीडी पर ब्लू मूवी लगाईं और बिस्तर पर लौटने से पहले फुर्ती से पिछला दरवाज़ा खोल दिया।
वो दोनों भाग नहीं पाए, उनके हाथों में उनके विकराल लौड़े तने देख मेरा बदन आहें भरने लगा।
मैंने बाहरी गुस्सा दिखाया उनको उकसाने के लिए- हरामजादो, मादरचोदो, शर्म नहीं आती, अपनी मालकिन को नंगी देखते हो? और उसकी पैंटी पर मुठ मारते हो? भागो, वरना जूती से मारूँगी कमीनो!
‘साली रण्डी, छिनाल!’ दीपक बोला- कुतिया न जाने कितनों से भोसड़ा मरवाती है!
मैंने करारा थप्पड़ उसके गाल पर मार दिया।