मेरी चालू बीवी-33
इमरान
मगर मधु की चूत बिलकुल अनछुई थी, उस पर अभी बालों ने आना शुरू ही किया था…
जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी उसका तो कहना ही क्या…
इतनी प्यारी कोमल मधु की चूत इस समय मेरी नाक के नीचे थी… उसकी चूत से निकल रहे कामरस की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी…
मैंने अपनी नाक उसकी चूत के ऊपर रख दी…
मधु- अह्ह्हा… आआआ… स्श…
वो जोर से तड़फी… उसने अपनी कमर उठा बेकरारी का सबूत दिया…
मैं उस खुशबू से बैचेन हो गया और मैंने अपनी जीभ उसके चूत के मुँह पर रख दी…
बहुत मजेदार स्वाद था… मैं पूरी जीभ निकाल चाटने लगा… मुझे चूत चाटने में वैसे भी बहुत मजा आता था…
और मधु जैसी कमसिन चूत तो मक्खन से भी ज्यादा मजेदार थी…
मैं उसकी दोनों टाँगें पकड़ पूरी तरह से खोलकर उसकी चूत को चाट रहा था… मेरी जीभ मधु के चूत के छेद को कुरेदती हुई अब अंदर भी जा रही थी…
उसकी चूत के पानी का नमकीन स्वाद मुझे मदहोश किये जा रहा था… मैं इतना मदहोश हो गया कि मैंने मधु की टाँगें ऊपर को उठाकर उसके चूतड़ तक चाटने लगा…
कई बार मेरी जीभ ने उसके चूतड़ के छेद को भी चाटा…
मधु बार बार सिसकारियाँ लिए जा रही थी…
हम दोनों को ही अब सलोनी की कोई परवाह नहीं थी…
मैंने चाट चाट कर उसका निचला हिस्सा पूरा गीला कर दिया था… मधु की चूत और गांड दोनों ही मेरे थूक से सने थे…
मेरा लण्ड बुरी तरह फुफकार रहा था…
मैंने एक कोशिश करने की सोची… मैंने मधु को ठीक पोजीशन में कर उसके पैरों को फैला लिया… और अपना लण्ड का अग्रमुण्ड उसकी लपलपाती चूत के मुख पर टिका दिया…
यह मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीं पल था…
एक अनछुई कली… पूरी नग्न… मेरे नीचे दबी थी…
उसके चिकने कोमल बदन पर एक चिंदी वस्त्र नहीं था…
मैंने उसके दोनों पैरों को मोड़कर फैलाकर चौड़ा कर दिया… उसकी छोटी सी चूत एकदम से खिलकर सामने आ गई…
मैंने अपनी कमर को आगे कर अपना तनतनाते लण्ड को उन कलियों से चिपका दिया…
मेरे गर्म सुपारे का स्पर्श अपने चूत के महाने पर होते ही मधु सिसकार उठी…
मैं धीरे धीरे उसी अवस्था में लण्ड को घिसने लगा..
दिल कर रहा था कि एक ही झटके में पूरा लण्ड अंदर डाल दूँ…
मगर यही एक शादीशुदा मर्द का अनुभव होता है कि वो जल्दबाजी नहीं करता…
मैंने बाएं हाथ को नीचे ले जाकर लण्ड को पकड़ लिया, फिर कुछ पीछे को होकर लण्ड को चूत के मुख को खोलते हुए अंदर सरकाने की कोशिश करने लगा।
मधु बार-बार कमर उचकाकर अपनी बेचैनी जाहिर कर रही थी…
शायद दस मिनट तक मैं लण्ड को चोदने वाले स्टाइल में ही चूत के ऊपर घिसता रहा…
1-2 बार सुपारा जरा जरा… सा ही चूत को खोल अंदर जाने का प्रयास भी कर रहा था..
मगर मधु का जिस्म अभी बिल्कुल दर्द सहने का आदि नहीं था… वो खुद उसे हटा देती थी…
शायद उसको हल्के सी भी दर्द का अंदाजा नहीं था… उसको केवल आनन्द चाहिए था ..