डलहौजी का सुहाना सफ़र
जिम्मी
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को और खास तौर पर सभी सुन्दर लड़कियों को मेरा प्यारा सा नमस्कार।
मेरा नाम जिम्मी है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 27 साल है और मैं शादीशुदा हूँ, मैं एक बिजनेसमेन हूँ!
वैसे तो मेरी ज़िन्दगी में बहुत सी लड़कियाँ आईं उनमें से आपको एक अपनी ज़िन्दगी की सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।
कहानी तब की है, जब मेरी शादी नहीं हुई थी, मैंने अपना नया-नया कारोबार चालू किया था और मैंने तीन नए दफ़्तर चालू किए थे और मैंने अपने हर एक नए दफ़्तर में तीन-चार लड़कियाँ रखी थीं और सब की सब एक से बढ़ कर एक सुन्दर थीं।
उनमें से कुछ लड़कियाँ मुझे पसन्द करने लग गई थीं। इस बात का मुझे तब पता चला जब मैं उनको दफ़्तर का काम समझाता था और वो समझती कम और मेरी तरफ़ ज्यादा देखती थीं।
मैं भी इस बात का फ़ायदा उठाता था और मैं एक-एक लड़की को अलग-अलग ‘समझाता’ था।
मैंने एक बात सोची और मैंने सभी को बोल दिया- हर महीने काम के सिलसिले में एक टूर रहा करेगा!
तो सभी ने ‘हाँ’ बोल दी और अपने-अपने घर पर भी बोल दिया।
मैं और मेरा बिजनेस पार्टनर बहुत खुश थे। तो हम दोनों ने पन्द्रह दिन के बाद डलहौजी का टूर फ़िक्स कर लिया और हम दोनों ने चार में से दो लड़कियाँ जाने के लिए पसन्द कर लीं और उनको अपने केबिन में बुलाकर बता दिया।
वो दोनों बहुत खुश थीं। हमने जाने का प्रोग्राम शनिवार और रविवार का फ़िक्स कर लिया और उन्होंने अपने घर पर भी बता दिया।
मेरी वाली का नाम खुशी और दूसरी का नाम नेहा था।
जल्दी ही वो दिन भी आ गया और हम दोनों शनिवार सुबह उन दोनों को लेकर अपनी कार से डलहौजी के लिए निकल पड़े। रास्ते में से मैंने एक बोतल व्हिस्की और चार बोतल बियर की ले लीं।
मैंने नेहा को आगे वाली सीट पर भेज दिया और मैं पीछे खुशी के पास बैठ गया।
अब हमारा सफ़र तीन घंटे का था, इसलिए मैंने एक बियर की बोतल अपने दोस्त को दी और मैंने जब नेहा और खुशी को दी, तो उन्होंने पहले तो मना कर दिया, पर मेरे ज़ोर देने पर उन्होंने भी ले ली और मैंने व्हिस्की का एक बड़ा पैग लगाया।
थोड़ी देर में ही हम सब सुरुर में आ गए थे नेहा और खुशी ने एक-एक बियर और खत्म कर दी थी।
मैंने जल्दी-जल्दी से बड़े दो पैग लगाए। नेहा और खुशी तो जैसे बेहोश ही हो गई थी।
मैं भी पूरा टल्ली हो चुका था, मैंने धीरे से खुशी को अपनी बांहों में लिया और मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। उसमें तो जैसे जान वापस आ गई, वो भी मेरे होंठ चूस रही थी।
मैं होंठ चूसते-चूसते उसके मम्मों को उसकी कमीज के ऊपर से ही चूसने लगा। उसकी सिसकारियां बढ़ने लगीं। उसने मुझे अपनी बांहों में जोर से दबा लिया…
मेरे से रहा नहीं गया और मैंने उसकी कमीज में हाथ डालकर उसके मम्मों को पकड़ लिया। उसकी सिस्कारी निकल गई- आह्ह्ह ह… …आह… सर्…आह सर…!
वाह..