नौकरी के साथ सेठानी की चूत चुदाई
हाय दोस्तों, आज पहली बार मैं अंतर्वासना पर कहानी नहीं, सच्ची घटना लिखने जा रहा हूँ। मेरी उम्र २७ साल है, मैं कोइम्बटोर तमिलनाडु में नौकरी करता हूँ।
मेरे सेठ के परिवार में मेरे सेठजी, सेठानी और उनका एक लड़का जो ८ साल का तीसरी कक्षा में पड़ता है, रहते हैं।
कुल मिला कर ४ लोग थे, सेठजी की दुकान पर वैसे तो और भी ३-४ लोग काम करते थे लेकिन वे सब तमिल थे जो अपने-अपने घर चले जाते थे, सिर्फ मैं सेठजी के घर पर रहता था।
हमारा काम सुबह ९.३० बजे दुकान आना और रात को ८.०० बजे दुकान बंद करके घर पर चले जाना था।
मेरे सेठजी की उम्र ४० और सेठानी की ३२ थी। सेठजी पूरा दिन दुकान में लगे रहते थे, और अपनी सेहत का ख्याल न रखने की वजह से ४५-५० के लगते थे, वहीं हमारी सेठानी ब्यूटी पार्लर और योग से अपने फिगर को पूरा ख्याल रखती है। मेरी सेठानी का फिगर ३८-२६-३६ का है।
दोपहर को मैं घर जाकर सेठानी के हाथ का बढ़िया खाना खाकर सेठजी का खाना टिफिन में लेकर दुकान चला आता हूँ। एक दिन की बात है, दोपहर को जब मैं घर गया तो सेठानी स्नान कर रही थी। स्नान करते समय उसका पाँव फिसल गया तो वो ज़ोरों से दर्द से चिल्लाई… उ इ माँ, मर गई। मैंने पूछा क्या हुआ, तो बोली पाँव में मोच आ गई है आयोडेक्स लाओ। फिर मैंने सहारा देकर उसे हॉल तक पहुँचाया। उसने मेरे कन्धों पे हाथ डाल दिया और मैंने उसकी कमर में।
वाह क्या जन्नत थी मेरे लिए, उस क्षण मेरा लंड एकदम से खड़ा होकर खम्भा हो गया था। उसे सोफे पर बिठा कर मैं उसके पाँव पर आयोडेक्स लेकर मालिश करने लगा। उसके गोरे-गोरे पाँव इतने हसीन थे कि मन क़ाबू में करना मुश्किल हो रहा था। मेरे हाथ काँप रहे थे मालिश करते हुए। सेठानी ने प्यार से कहा: “मालिश ढंग से, जोर से करो, तो ही मोच जाएगी।” और उसने अपना गाउन घुटनों तक ऊपर उठा दिया।
वाह क्या नज़ारा था, उसकी गोरी-गोरी पिंडलियाँ मेरी आँखों के सामने थीं। मालिश मैं कर रहा था, मज़ा दोनों को आ रहा था। अब मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी और मेरा हाथ घुटनों तक पहुँच रहा था। सेठानी आँख बंद करके सोफे पर लेटी हुई थी। धीरे-धीरे मेरा हाथ घुटनों से ऊपर जाने लगा तो सेठानी ने पूछा क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि सेठानी जी आज मैं आपकी खूबसूरती का दीवाना हो गया हूँ, प्लीज़ आज मुझे मत रोकिए।
सेठानी बोली: “कोई देख लेगा तो?”
उसके इतना कहते ही मैं समझ गया कि आग दोनों ओर बराबर की लगी है। फिर मैंने दरवाजा बंद किया और सेठानी को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। सेठानी जान चुकी थी कि आज उसकी चुदाई होकर रहेगी।
मैंने हिम्मत करके पूछा- सेठजी चोदते हैं क्या?
“कभी-कभार करते भी हैं तो उनका लंड अन्दर जाते ही झड़ जाता है, फिर मैं ऊँगली डाल कर अपनी प्यास बुझाती हूँ, वो तो आराम से खर्राटे मारते हैं।