दोस्त और उसकी बीवी ने लगाया ग्रुप सेक्स का चस्का-2
रात 11 बजे पत्नी का फ़ोन आया, वो रोते हुए बोली कि अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा, उसकी चूत को लंड रोज चाहिए।
वो बोली कि या तो मैं उसे अपने पास ले आऊँ या वो मायके चली जायेगी।
अगले दिन मंगलवार था, दुकान की छुट्टी थी, मैंने मोटरसाइकिल उठाई और घर के लिए चल दिया।
घर पहुँचा तो घर वाले मुझे देख कर घबरा गए क्योंकि मैं बिना बताये पहुँचा था।
पत्नी तो खिल गई मुझे देख कर…
माँ ने पूछा- क्या खायेगा?
मैंने कहा- मुझे आप लोगों से पहले बात करनी है।
सब बैठक में इकट्ठे हुए, मैंने हाथ जोड़ कर कहा कि मैं अपनी पत्नी को साथ ले जाना चाहता हूँ।
पता नहीं क्या हुआ, मेरे बाबा बोले- ठीक है, अगले महीने श्राद्ध हैं, उसके बाद ले जाना।
मैं और मेरी पत्नी बहुत खुश हुए। हमने सबके पैर छुए और उन्हें धन्यवाद दिया।
फिर मैं चाय पीकर अपने कमरे मैं गया। पत्नी को भींचकर उसकी साड़ी उठानी चाही, तभी माँ ने मेरी बीवी को आवाज दी, वो भुनभुनाते हुए बहार चली गई।
वक़्त की बात थी, तभी दूकान के मुनीम का फ़ोन आ गया कि पास में आग लग गई है, हालाँकि अब आग बुझ चुकी है पर फायर ब्रिगेड वाले एक बार हमारा गोदाम चेक करना चाहते हैं।
चाभी मेरे पास थी, मैं तुरंत वापस लौट पड़ा।
दूकान पर और मित्र और राजीव भी थे, गोदाम का ताला तोड़कर फायर वालों ने चेकिंग कर ली थी, सब ठीक था, सब लोग चले गए।
राजीव और मैं दूकान पर अकेले रह गए, मैंने दोनों के लिए खाने को मंगाया और राजीव से कल के लिए संकोच के साथ माफ़ी मांगी।
राजीव ने हँसते हुए कहा- जो कुछ हुआ, वो कामिनी की मर्जी से हुआ! और हम दोनों ने उसे एन्जॉय किया।
राजीव ने मुझसे कहा- आज उनके घर पर कोई नहीं है, इसलिए आज शाम को मैं सीधे दूकान से उनके घर आ जाऊँ, खाना वहीं खाना है।
मैंने कहा- ठीक है, मैं शाम को नहा कर आ जाऊँगा।
इस पर राजीव बोला- नहीं, तुम सीधे घर आना।
मैं कुछ समझा नहीं पर मैंने कहा- ठीक है।
शाम को आठ बजे मैं राजीव के घर पहुँचा, कामिनी ने ही दरवाजा खोला।
उस दिन लिए ऑरेंज सूट में वो परी सी लग रही थी, नेलपेंट भी उसने ऑरेंज ही लगाया था।
दरवाजा बंद करते हुए उसने मुझे धीरे से किस कर लिया, उसके होठों की गर्मी कल से भी ज्यादा थी। लगता था उसकी प्यास और बढ़ गई है।
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मैं अन्दर घुसा, राजीव बेड पर बैठा था, बोला- बहुत देर कर दी, कब से तेरा इंतजार कर रहे हैं। नहाने भी नहीं गए तेरे इंतजार में!
मैंने हंस कर कहा- क्यों, क्या मेरे साथ नहाना है?
राजीव बोला- चलो आज सब साथ नहायेंगे।
कामिनी बोली- मुझे नहीं नहाना सबके साथ, आप दोनों नहा लो, मैं बाद मैं नहाऊँगी।
राजीव ने मुझे आँख मार कर कहा- चल हम दोनों नहाते हैं।
मुझे भी क्या मस्ती सूझी मैं भी कपड़े कर चड्डी में चल दिया।