माँ-बेटी को चोदने की इच्छा-5
फिर हम सबने मिलकर खाना खाया और तभी मेरी नज़र घड़ी पर पड़ी तो मेरे चेहरे पर भी 12 बज गए.. मुझे पता ही न चला कि कब 12 बज गए।
फिर मैंने घर जाने की इजाजत ली, तो माया आंटी ने मुझे ‘थैंक्स’ बोला और मैंने उन्हें बोला- आज पार्टी में बहुत मज़ा आया।
तो विनोद भी बोला- हाँ.. आज वाकयी बहुत दिनों बाद ऐसी पार्टी हुई।
फिर सबको ‘बॉय’ बोला और घर की ओर चल दिया।
पर मेरा दिल बिल्कुल भी नहीं था कि मैं अपने घर जाऊँ.. लेकिन क्या करता.. जाना तो था ही।
जैसे-तैसे मैं अपने घर की ओर चल दिया लेकिन अभी भी मेरी आँखों से माया के गुलाबी चूचे और उस पर चैरी की तरह सुशोभित घुन्डियाँ.. हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
खैर जैसे-तैसे मैं अपने घर पहुँचा.. घन्टी बजाई तो मेरे पापा ने गेट खोला और मुझे डाँटते हुए बोले- आ गए नवाब.. वक्त देखा.. 12:30 हो रहा है.. कहाँ रहे इतनी देर?
तो मैंने माँ की ओर देखते हुए उनसे बोला- क्या आपने बताया नहीं?
तो पापा बोले- ये बता कि इतनी देर कौन सा डिनर चलता है?
तो मैंने आंटी जी के ‘बर्थडे पार्टी’ वाली बात बता दी..
तब जा कर पापा शान्त और सामान्य हुए और मेरे भी जान में जान आई।
मैं सच बोलूँ तो मेरी मेरे पिता से बहुत फटती है।
फिर मैं अपने कमरे में गया और कपड़े बदलने लगा।
और जैसे ही मैंने अपने आप को वाल मिरर पर देखा.. तो मेरे सामने फिर से माया के चूचे याद आने लगे.. जिसके कारण पता ही नहीं लगा..
कब मेरा सुस्त लौड़ा फिर से ऊँचाइयों को छूने लगा और मेरा हाथ अपने आप ही मेरे खड़े लौड़े को सहलाने लगा.. कभी-कभार दबाने लगा।
जैसे आज माया ने किया था ठीक उसी अंदाज़ में मेरे हाथ भी लौड़े की मालिश करने लगे और देखते ही देखते मेरा सामान झड़ गया।
लेकिन यह क्या आज पहली बार इतना माल निकला था जो कि शायद आंटी की मालिश का कमाल था।
फिर मैंने साफ़-सफाई की और सो गया।
सुबह देर से उठा तो कॉलेज नहीं गया।
विनोद का फ़ोन आया.. तब शायद दिन का एक बजा था तो उसने मुझसे पूछा- आज कॉलेज क्यों नहीं आया बे?
तो मैंने उससे बोला- यार कल रात को काफी देर से सोया था.. तो नींद ही नहीं खुली।
फिर वो खुद ही बताने लगा मेरे जाने के बाद उसकी माँ और बहन दोनों ने तेरी तारीफ की और मेरी माँ ने तेरा नम्बर भी ले लिया है.. ताकि कोई काम कभी पड़े तो वो तुमसे बात कर सकें।
फिर मैंने भी बोल दिया- ठीक किया.. इमरजेंसी कभी भी पड़ सकती है.. ये तो अच्छी बात है उन्होंने मुझ पराये पर इतना भरोसा किया।
तो वो बोला- साले दो दिन में तूने क्या कर दिया.. जो अब मेरे घर में सिर्फ तुम्हारी ही बातें होती हैं?
तो मैंने मन में बोला- अभी तो लोहा गर्म किया है.. समय पर पीटूँगा.. तब होगा कुछ..
फिर उससे मैंने बोला- बेटा जलने की महक आ रही है..
तो वो बोला- यार ऐसा नहीं है मेरे दोस्त.. यह तो मेरी खुशनसीबी है कि मुझे तुझ जैसा दोस्त मिला..