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पड़ोस की दीदी की चुदाई करके हवस मिटाई

Story Hindi 2 pages 14 years ago

पड़ोस की दीदी की चुदाई करके हवस मिटाई
मेरा नाम किंशुक है, मेरी हाइट 5’10 है, मैं 2 साल से जिम क़र रहा हूँ इसलिए मेरी बॉडी भी काफी अच्छी है।
बात उन दिनों की है जब मेरी कॉलेज की छुट्टियाँ हुई तो मैं अपने घर गया हुआ था। वहाँ हमारे पड़ोस में रीमा दीदी रहती थी जो उस समय अपने घर पर आई हुई थी।
मैं उन्हें बचपन से जानता था और दीदी बुलाता था। बाद मैं उनकी शादी हो गई तो वो अपने ससुराल चली गई।
वो शाम को रोज हमारे घर पर आती थी क्योंकि अपने घर पर उनका मन नहीं लगता था। मेरे मन में उनको लेकर कोई गलत ख़्याल नहीं था। हम आपस मे काफी खुले हुए थे जबकि वो उम्र में मुझसे 5-6 साल बड़ी थी।
एक दिन की बात है, उनके मम्मी पापा को किसी काम से 3 दिन के लिए बाहर जाना था तो उनकी मम्मी हमारे घर आई और मुझसे बोली- बेटे, तुम आज से हमारे घर पर सो जाना क्योंकि रीमा अकेली है।
मैंने कहा- ठीक है आंटी जी!
रात को मैं खाना खाकर रीमा दीदी के घर पर सोने के लिये चला गया। मैंने जैसे ही गेट खटखटाया तो उन्होंने दरवाज़ा खोला तो मैं उन्हें देखता ही रह गया। वो पिंक गाऊन पहने हुए थी जिसमें से उनकी चूचियां बाहर को आ रही थी।
अब मेरी नीयत ख़राब होने लगी थी।
उन्होंने मुझे अंदर लिया और दरवाज़े को भीतर से लॉक कर दिया।
रात के करीब 10 बज चुके थे और हम टीवी देख रहे थे। मैं उन्हें काफी देर से घूरे जा रहा था तो उन्होंने मुझे पकड़ लिया और बोली- किंशुक, क्या देख रहे हो?
मेरी चोरी पकड़ी गई तो मैंने भी सीधा बोल दिया- दीदी, आप बहुत खूबसूरत हो।
तो दीदी बोली- अच्छा, कहाँ से खूबसूरत हूँ मैं?
मैंने शरमाते हुए कहा- दीदी, आपके बूब्स और कूल्हे बहुत अच्छे हैं।
तो वो बोली- चल बदमाश!
और ऐसा कहते हुए वो मेरे बिल्कुल करीब आ गई और मेरे सोये हुए लंड महाराज को पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी। थोड़ी ही देर में मेरा लंड तन क़र पैंट को फाड़ने के लिए बेताब हो गया. उन्होंने मेरी पैंट की चैन खोल दी जिससे मेरा लंड बाहर लटकने लगा।
मेरे हथियार को देख कर दीदी बोली- हे राम… इतना बड़ा लंड?
मैंने कहा- दीदी, इसको अपने मुँह में तो लो।
तो उन्होंने मेरी बात मानते हुए लंड को अपने मुंह में ले लिया और बड़े प्यार से चूसने लगी।
मैंने भी अब उनके गाऊन को अलग कर दिया। उन्होंने नीचे ब्लू ब्रा और ब्लू कलर की ही पेंटी पहनी हुई थी जिसमें उनका बदन बिल्कुल दूध की तरह लग रहा था।

मैंने देर न करते हुए उनकी ब्रा को उतार फेंका और उनके 34डी के बड़े बड़े चूचों को दबाने लगा। वो अब तक मेरे लंड से ही खेल रही थी।
थोड़ी देर उनके बूब्स मसलने के बाद मैंने उनकी चड्डी भी उतार दी और उन्हें बेड पर लिटा दिया। उनकी चूत एकदम मस्त थी जिस पर की हल्की हल्की झांटें थी. उन्होंने शायद 4-5 दिन पहले ही अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे।

बेड पर वो मेरे ऊपर इस तरह से लेटी हुई थी कि उनकी चूत मेरे मुँह पर थी और वो मेरे लंड को चूसने में मगन थी। मैं भी दीदी की चूत को पागलों की तरह चाट रहा था, कभी अपनी जीभ पूरी की पूरी उनकी चूत मे अंदर तक घुसा देता जिससे वो कराह उठतीं।
दीदी की चूत में से सफ़ेद सा चिकना रस निकल रहा था जिसे मैं पी गया।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने कहा दीदी- कंडोम है?
तो दीदी बोली- है तो सही… पर तुम बिना कंडोम के ही मुझे चोदो, क्योंकि मैं तुम्हारा ये बड़ा लंड अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करना चाहती हूँ।
तो मैंने उनको घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड उनकी चूत पर टिका दिया और जोर से झटका मारा तो उनकी चीख़ निकल गई।
अभी तो आधा लंड ही उनकी चूत में गया था.
मैंने कहा- क्या हुआ दीदी?
वो कहने लगी- तुम्हारा लंड मेरे पति से दुगुना है, थोड़ा धीरे धीरे करो।
मैंने उनकी बात मानते हुए धीरे धीरे अपना लौड़ा उनकी चूत में घुसा दिया और झटके मारना शुरू कर दिया। वो भी अपनी गांड को उठाकर मेरा साथ दे रही थी और आवाजें निकाल रही थी- आआआ ईईईई ऊऊऊऊ किंशुक… और तेज़ औऔ औऔइइइ… फाड़ दो मेरी चूत… बना दो इसको भोसड़ा!
मैंने भी अपनी स्पीड तेज़ कर दी और उन्हें जोर जोर से चोदने लगा।
थोड़ी देर में हमने अपनी पोजीशन चेंज की, अब वो मेरे लंड के ऊपर आके बैठ गई और मैं बेड पर लेट गया।
वो मेरे लंड पर जोर जोर से उछल रही थी और मैं उनके कबूतरों को दबाये जा रहा था।
20 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
अब दीदी मेरी बगल में आकर लेट गई और मुझे किस करने लगी।
थोड़ी देर बाद वो बोली- मैं नहाना चाहती हूँ.
तो मैं बोला- दोनों साथ नहाते हैं.
तो वो मान गई। लेकिन दीदी से ठीक ढंग से चला भी नहीं जा रहा था तो मैं उन्हें गोदी में उठा क़र बाथरूम तक ले गया। वहाँ हम एक दूसरे को साबुन लगाने लगे।
मैं साबुन लगाते हुए उनकी गांड में उंगली करने लगा और वो मेरे लंड पर साबुन लगा रही थी।
मैंने कहा- दीदी, मुझे आपकी गांड मारनी है!
तो उन्होंने कहा- मैं अब से तेरी हूँ, तू जो चाहे कर!
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इतना सुनते ही मैंने अपना तना हुआ लंड दीदी की गांड में धकेल दिया। गांड चिकनी होने के कारण लंड आराम से दीदी की गांड में चला गया। मैं जोर जोर से धक्के पे धक्के लगाये जा रहा था और वो हर धक्के पर ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ सिसकारियों से मेरे जोश को बढ़ा रही थी। काफी देर तक उनकी गांड मारने के बाद मैंने अपने वीर्य को उनकी गांड में ही छोड़ दिया।
फिर हम बाद में एक साथ नहाये और कमरे में आकर सो गए।
उन तीन दिनों में मैंने उनकी चूत और गांड लगभग 20 दफा मारी और उन्हें वो सुख दिया जो उन्हें उनके पति से कभी नहीं मिला था.[email protected]

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