आंटी का प्यार
आज मैं आपको एक सच्ची और अनोखी कहानी सुनाता हूँ। मैं जब स्कूल में पढ़ता था तो मेरे पड़ोस में एक युगल रहने आया, उन्हें हम सभी भाई-बहन अंकल-आंटी कहते थे। आंटी की उम्र करीब 28 साल थी, उनका फिगर 36-24-42 था। अकसर उनकी ब्रा का पीछे का हुक खुला रहता था। यही वह बात थी जिससे मेरा मन सेक्स की ओर गया।
उस समय मेरी उम्र 18 साल की थी। आंटी, जिनका नाम सरला था, अकसर मुझे किसी न किसी काम से बुलाती रहती थी, कभी कोई क्रीम लाने, कभी चाय की पत्ती लाने के लिए कहती। मैं भी उनके वक्ष का दीदार करने के लालच में उनका काम कर देता था। वो कई बार मेरे से बचे पैसे नहीं लेती थी। मेरा भी काम चल जाता था।
अंकल के दफ़्तर का चपड़ासी जिसका नाम मुरली था, अकसर घरेलू काम जैसे कपड़े प्रेस करने, बागवानी करने आता था। जब अंकल बाहर टूर पर जाते तब मुरली की बीबी लीला जिसकी उम्र 24 साल की थी, उनके यहाँ रात को सोती थी। बाकी समय भी कई बार लीला घर आती थी।
एक दिन मैं आंटी को कुछ सामान देने उनके घर गया, मैंने दरवाज़ा खटखटाया लेकिन दरवाज़ा खुला ही था, मैं अन्दर चला गया। उनके बेडरूम से लड़ने की आवाज़ आ रही थी। फ़िर कुछ देर बाद मारपीट की आवाज़ आई, थोड़ी देर में आंटी बाहर आई, वो बहुत गुस्से में थी, मुझे देख कर सामान्य होने की कोशिश की, फिर बोली- अरे, तुम कब आये ?
मैंने कहा- आँटी, मम्मी ने किसी रेसीपी की कटिंग भेजी है, जो अपने माँगी थी।
उसके बाद वह बोली- ठीक है, मेज़ पर रख दो !
फिर पैर पटकते हुए बाहर निकल गई। फिर मै अंदर गया तो देखा सुरेश अंकल अन्दर रो रहे थे।
मैंने पूछा तो कुछ छुपाते हुए बोले- कुछ नहीं ! पैर फिसल गया था, इसलिए पैर में मोच आ गई है और दर्द हो रहा है, इसीलिए आँखों में आँसू आ गए।
बाद में मुरली से मालूम हुआ क़ि साहब की नौकरी मेमसाब के पापा ने लगवाई है, साहब थोड़े गरीब घर के हैं इसलिए कभी-कभी ऐसी घटना हो जाती है।कुछ दिन बाद सरला आंटी ने मुझे घर बुलाया, घर में कोई नहीं था, आंटी ने मुझे बाम लाने को कहा, मैंने कहा- आंटी, आज बुधवार है, सभी दुकानें बंद रहती हैं।
आंटी ने कहा- ठीक है, कल ले आना !
मेरा दिमाग ख़राब हुआ, मैंने सोच लिया आर नहीं तो पार !
आज जो भी हो चाहे मेरी मम्मी को बताये या नहीं आज तो मैदान मारना है।
मैंने कहा- आंटी, क्या सर में दर्द है?
आंटी- हाँ !
मैंने कहा- आंटी, मैं थोड़ा एक्युप्रेशर जानता हूँ, यदि आप कहें तो मैं कोशिश करूँ?
आंटी- ठीक है !
फिर मैंऩे उनके माथे और गालों पर उंगली घुमाना शुरू किया, गाल को धीरे-धीरे सहलाने लगा, मेरा 7″ लम्बा औज़ार खड़ा हो गया लेकिन आंटी को कोई फर्क नहीं पड़ा।
मैंने उस दिन जब सुरेश अंकल रो रहे थे, का जिक्र किया, आंटी चौंक गई।
मैंने उंगली गले में सरकाया, फ़िर आंटी ऩे गहरी साँस लिया, उनके दोनों स्तन अन्दर-बाहर होने लगे।